الواقعة
Al-Waqi'a
When the Event Occurs
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। जब घटना घटित होगी, तब उसके घटित होने को कोई झुठला नहीं सकेगा।
بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ إِذَا وَقَعَتِ اِ۬لْوَاقِعَةُ لَيْسَ لِوَقْعَتِهَا كَٰذِبَةٌۖ
नीचा करने वाली, ऊँचा करने वाली — जब धरती एक प्रचंड हलचल से हिलाई जाएगी, और पहाड़ पूर्ण चूर्ण से चूर्ण कर दिए जाएँगे, बिखरी हुई धूल बन जाएँगे, और तुम तीन वर्ग हो जाओगे।
خَافِضَةٞ رَّافِعَةٌ اِذَا رُجَّتِ اِ۬لَارْضُ رَجّاٗ وَبُسَّتِ اِ۬لْجِبَالُ بَسّاٗ فَكَانَتْ هَبَآءٗ مُّنۢبَثّاٗ وَكُنتُمُۥٓ أَزْوَٰجاٗ ثَلَٰثَةٗۖ
दाएँ पक्ष वाले — दाएँ पक्ष वाले क्या हैं?
فَأَصْحَٰبُ اُ۬لْمَيْمَنَةِ مَآ أَصْحَٰبُ اُ۬لْمَيْمَنَةِۖ
और बाएँ पक्ष वाले — बाएँ पक्ष वाले क्या हैं?
وَأَصْحَٰبُ اُ۬لْمَشْـَٔمَةِ مَآ أَصْحَٰبُ اُ۬لْمَشْـَٔمَةِۖ
और आगे निकलने वाले, आगे निकलने वाले…
وَالسَّٰبِقُونَ اَ۬لسَّٰبِقُونَۖ
वही निकटवर्ती हैं, उपकार के उद्यानों में।
أُوْلَٰٓئِكَ اَ۬لْمُقَرَّبُونَ فِے جَنَّٰتِ اِ۬لنَّعِيمِۖ
पहलों में से एक वाहिनी, और पिछलों में से थोड़े, बुने हुए दीवानों पर, उन पर टेक लगाए हुए, आमने-सामने।
ثُلَّةٞ مِّنَ اَ۬لَاوَّلِينَ وَقَلِيلٞ مِّنَ اَ۬لَاخِرِينَ عَلَىٰ سُرُرٖ مَّوْضُونَةٖ مُّتَّكِـِٕينَ عَلَيْهَا مُتَقَٰبِلِينَۖ
उनके आसपास सदा के लिए बनाए गए बच्चे चक्कर लगाएँगे, गिलासों, सुराहियों और सोते के जल के एक प्याले के साथ — जिससे न उन्हें सिरदर्द होगा और न वे नशे में चूर होंगे — और स्वादों के साथ जिन्हें वे चुनेंगे, और पक्षी के मांस के साथ जिसकी वे कामना करेंगे।
يَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَٰنٞ مُّخَلَّدُونَ بِأَكْوَابٖ وَأَبَارِيقَ وَكَأْسٖ مِّن مَّعِينٖ لَّا يُصَدَّعُونَ عَنْهَا وَلَا يُنزَفُونَ وَفَٰكِهَةٖ مِّمَّا يَتَخَيَّرُونَ وَلَحْمِ طَيْرٖ مِّمَّا يَشْتَهُونَۖ
और सहारा देने वाले वार्ताकार, भलीभाँति सुरक्षित मोती जैसे, उसके प्रतिफल के रूप में जो वे करते थे।
وَحُورٌ عِينٞ كَأَمْثَٰلِ اِ۬للُّؤْلُوِٕ اِ۬لْمَكْنُونِ جَزَآءَۢ بِمَا كَانُواْ يَعْمَلُونَۖ
वहाँ वे न व्यर्थता सुनेंगे और न अपराध के लिए उकसावा।
لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْواٗ وَلَا تَاثِيماًۖ
केवल एक कथन: “शांति, शांति”।
اِلَّا قِيلاٗ سَلَٰماٗ سَلَٰماٗۖ
और दाएँ वाले — दाएँ वाले क्या हैं?
وَأَصْحَٰبُ اُ۬لْيَمِينِ مَآ أَصْحَٰبُ اُ۬لْيَمِينِۖ
बिना काँटों के बेरों के बीच, तह पर तह लदे गुच्छों वाले केलों के बीच, फैली हुई छाया, बिना रुके बहता पानी, प्रचुर स्वाद, बिना व्यवधान और बिना रोक के, और ऊँचे बिछौने।
فِے سِدْرٖ مَّخْضُودٖ وَطَلْحٖ مَّنضُودٖ وَظِلّٖ مَّمْدُودٖ وَمَآءٖ مَّسْكُوبٖ وَفَٰكِهَةٖ كَثِيرَةٖ لَّا مَقْطُوعَةٖ وَلَا مَمْنُوعَةٖ وَفُرُشٖ مَّرْفُوعَةٍۖ
हमने उन्हें एक जन्म से उत्पन्न किया, और उन्हें आरंभिक, स्नेही, उर्वर और एक ही वंश के प्राणी बनाया, दाएँ वालों के लिए।
اِنَّآ أَنشَأْنَٰهُنَّ إِنشَآءٗ فَجَعَلْنَٰهُنَّ أَبْكَاراً عُرُباً اَتْرَاباٗ لِّأَصْحَٰبِ اِ۬لْيَمِينِۖ
पहलों में से एक वाहिनी और पिछलों में से एक वाहिनी।
ثُلَّةٞ مِّنَ اَ۬لَاوَّلِينَ وَثُلَّةٞ مِّنَ اَ۬لَاخِرِينَۖ
और बाएँ वाले — बाएँ वाले क्या हैं?
وَأَصْحَٰبُ اُ۬لشِّمَالِ مَآ أَصْحَٰبُ اُ۬لشِّمَالِۖ
झुलसाती लू में, खौलते पानी में, और काले धुएँ की छाया में — जो न शीतल है और न उदार।
فِے سَمُومٖ وَحَمِيمٖ وَظِلّٖ مِّنْ يَّحْمُومٖ لَّا بَارِدٖ وَلَا كَرِيمٍۖ
वे इससे पहले संपन्न थे।
اِنَّهُمْ كَانُواْ قَبْلَ ذَٰلِكَ مُتْرَفِينَۖ
और वे विशाल शपथ-भंग पर अड़े रहते थे।
وَكَانُواْ يُصِرُّونَ عَلَى اَ۬لْحِنثِ اِ۬لْعَظِيمِۖ
और वे कहते थे: “क्या जब हम मर जाएँगे, और मिट्टी और हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या हम सचमुच उठाए जाएँगे? और हमारे पहले पूर्वज भी?”
وَكَانُواْ يَقُولُونَ أَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَاباٗ وَعِظَٰماً اِنَّا لَمَبْعُوثُونَ أَوَءَابَآؤُنَا اَ۬لَاوَّلُونَۖ
कहो: “पहले वाले और पिछले वाले अवश्य एक ज्ञात दिन के निर्धारित वादे के समय पर एकत्र किए जाएँगे।”
۞ قُلِ اِنَّ اَ۬لَاوَّلِينَ وَالَاخِرِينَ لَمَجْمُوعُونَ إِلَىٰ مِيقَٰتِ يَوْمٖ مَّعْلُومٖۖ
फिर तुम, हे भटके हुए झुठलाने वालो, ज़क़्क़ूम के वृक्ष से अवश्य खाओगे, उससे अपने पेट भर लोगे, फिर उसके ऊपर खौलता पानी पियोगे, प्यासे ऊँटों के पीने की तरह पीते हुए।
ثُمَّ إِنَّكُمُۥٓ أَيُّهَا اَ۬لضَّآلُّونَ اَ۬لْمُكَذِّبُونَ لَأٓكِلُونَ مِن شَجَرٖ مِّن زَقُّومٖ فَمَالِـُٔونَ مِنْهَا اَ۬لْبُطُونَ فَشَٰرِبُونَ عَلَيْهِ مِنَ اَ۬لْحَمِيمِ فَشَٰرِبُونَ شُرْبَ اَ۬لْهِيمِۖ
यही चुकौती के दिन उनका आतिथ्य है।
هَٰذَا نُزُلُهُمْ يَوْمَ اَ۬لدِّينِۖ
हमने ही तुम्हें रचा है।
نَحْنُ خَلَقْنَٰكُمْۖ
तो तुम सच्चा क्यों नहीं ठहराते?
فَلَوْلَا تُصَدِّقُونَۖ
तो क्या तुम देखते हो जो तुम उँड़ेलते हो? क्या तुम उसे रचते हो, या हम रचयिता हैं?
أَفَرَٰٓيْتُم مَّا تُمْنُونَ ءَآنتُمْ تَخْلُقُونَهُۥٓ أَمْ نَحْنُ اُ۬لْخَٰلِقُونَۖ
हमने ही तुम्हारे बीच मृत्यु निर्धारित की है, और हमसे आगे निकला नहीं जा सकता: हम तुम्हारे जैसों से तुम्हें बदल सकते हैं और तुम्हें उस रूप में उत्पन्न कर सकते हैं जिसे तुम नहीं जानते।
نَحْنُ قَدَّرْنَا بَيْنَكُمُ اُ۬لْمَوْتَ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ أَمْثَٰلَكُمْ وَنُنشِئَكُمْ فِے مَا لَا تَعْلَمُونَۖ
और तुमने पहली उत्पत्ति को निश्चय ही जान लिया है।
وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ اُ۬لنَّشْأَةَ اَ۬لُاول۪ىٰۖ
तो तुम स्मरण क्यों नहीं करते?
فَلَوْلَا تَذَّكَّرُونَۖ
तो क्या तुम देखते हो जो तुम जोतते हो? क्या तुम उसे बोते हो, या हम बोने वाले हैं?
أَفَرَٰٓيْتُم مَّا تَحْرُثُونَ ءَآنتُمْ تَزْرَعُونَهُۥٓ أَمْ نَحْنُ اُ۬لزَّٰرِعُونَۖ
यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो उसे टुकड़े कर देते, और तुम विलाप करते रह जाते: “हम तो अवश्य क़र्ज़दार हो गए! बल्कि हम वंचित हो गए।”
لَوْ نَشَآءُ لَجَعَلْنَٰهُ حُطَٰماٗ فَظَلْتُمْ تَفَكَّهُونَ إِنَّا لَمُغْرَمُونَ بَلْ نَحْنُ مَحْرُومُونَۖ
तो क्या तुम देखते हो उस पानी को जो तुम पीते हो? क्या तुमने उसे बादलों से उतारा है, या हम उतारने वाले हैं?
أَفَرَٰٓيْتُمُ اُ۬لْمَآءَ اَ۬لذِے تَشْرَبُونَ ءَآنتُمُۥٓ أَنزَلْتُمُوهُ مِنَ اَ۬لْمُزْنِ أَمْ نَحْنُ اُ۬لْمُنزِلُونَۖ
यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो उसे कड़वा कर देते।
لَوْ نَشَآءُ جَعَلْنَٰهُ أُجَاجاٗۖ
तो तुम कृतज्ञ क्यों नहीं हो?
فَلَوْلَا تَشْكُرُونَۖ
तो क्या तुम उस आग को देखते हो जिसे तुम जलाते हो? क्या तुमने उसका वृक्ष उत्पन्न किया है, या हम उत्पन्न करने वाले हैं?
أَفَرَٰٓيْتُمُ اُ۬لنَّارَ اَ۬لتِے تُورُونَ ءَآنتُمُۥٓ أَنشَأْتُمْ شَجَرَتَهَآ أَمْ نَحْنُ اُ۬لْمُنشِـُٔونَۖ
हमने उसे एक स्मरण और एक उपयोग बनाया, उनके लिए जो स्वयं को सबल बनाते हैं।
نَحْنُ جَعَلْنَٰهَا تَذْكِرَةٗ وَمَتَٰعاٗ لِّلْمُقْوِينَۖ
तो अपने अभिभावक, उस विशाल के नाम से महिमा गाओ।
فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ اَ۬لْعَظِيمِۖ
नहीं! मैं तारों की स्थितियों की शपथ लेता हूँ — और यह अवश्य एक विशाल शपथ है, यदि तुम जानते — कि यह अवश्य एक सम्मानित पाठ है, एक भलीभाँति सुरक्षित लेख में, जिसे केवल शुद्ध किए गए ही छूते हैं।
۞ فَلَآ أُقْسِمُ بِمَوَٰقِعِ اِ۬لنُّجُومِ وَإِنَّهُۥ لَقَسَمٞ لَّوْ تَعْلَمُونَ عَظِيمٌ اِنَّهُۥ لَقُرْءَانٞ كَرِيمٞ فِے كِتَٰبٖ مَّكْنُونٖ لَّا يَمَسُّهُۥٓ إِلَّا اَ۬لْمُطَهَّرُونَۖ
सभी प्राणियों के अभिभावक की ओर से एक अवतरण।
تَنزِيلٞ مِّن رَّبِّ اِ۬لْعَٰلَمِينَۖ
तो क्या तुम इस वार्ता को लचीलेपन से लेते हो, और झुठलाने को ही अपनी जीविका बनाते हो?
أَفَبِهَٰذَا اَ۬لْحَدِيثِ أَنتُم مُّدْهِنُونَ وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمُۥٓ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَۖ
तो क्यों नहीं, जब वह गले तक पहुँचती है, और उस क्षण तुम नज़र डालते रहते हो, और हम उसके तुमसे अधिक निकट होते हैं, परंतु तुम स्पष्ट नहीं देखते — तो क्यों नहीं, यदि तुम ऋणी नहीं थे, तुम उसे लौटा लाते, यदि तुम सच्चे हो?
فَلَوْلَآ إِذَا بَلَغَتِ اِ۬لْحُلْقُومَ وَأَنتُمْ حِينَئِذٖ تَنظُرُونَ وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنكُمْ وَلَٰكِن لَّا تُبْصِرُونَ فَلَوْلَآ إِن كُنتُمْ غَيْرَ مَدِينِينَ تَرْجِعُونَهَآ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَۖ
रहा वह जो निकटवर्तियों में से है: एक विश्राम, एक सुगंध, और उपकार का एक उद्यान।
فَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ اَ۬لْمُقَرَّبِينَ فَرَوْحٞ وَرَيْحَانٞ وَجَنَّتُ نَعِيمٖۖ
और रहा वह जो दाएँ वालों में से है: “तुम पर शांति हो”, दाएँ वालों की ओर से।
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ اَصْحَٰبِ اِ۬لْيَمِينِ فَسَلَٰمٞ لَّكَ مِنَ اَصْحَٰبِ اِ۬لْيَمِينِۖ
और रहा वह जो झुठलाने वालों में से है, भटके हुओं में से: खौलते पानी का आतिथ्य और भट्ठी में जलना।
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ اَ۬لْمُكَذِّبِينَ اَ۬لضَّآلِّينَ فَنُزُلٞ مِّنْ حَمِيمٖ وَتَصْلِيَةُ جَحِيمٍۖ
यह अवश्य यक़ीन का सत्य है।
اِنَّ هَٰذَا لَهُوَ حَقُّ اُ۬لْيَقِينِۖ
तो अपने अभिभावक, उस विशाल के नाम से महिमा गाओ।
فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ اَ۬لْعَظِيمِۖ