سبأ
Saba
Saba'
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
प्रशंसा ईश्वर के लिए है, जिसका वह सब है जो आकाशों में है और जो धरती पर है,
ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِى لَهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ
और अंतिम जीवन में प्रशंसा उसी की है।
وَلَهُ ٱلْحَمْدُ فِى ٱلْءَاخِرَةِ
वह प्रज्ञावान, पूरी ख़बर रखने वाला है।
وَهُوَ ٱلْحَكِيمُ ٱلْخَبِيرُ
वह जानता है जो धरती में प्रवेश करता है और जो उससे निकलता है, जो आकाश से उतरता है और जो उसमें चढ़ता है।
يَعْلَمُ مَا يَلِجُ فِى ٱلْأَرْضِ وَمَا يَخْرُجُ مِنْهَا وَمَا يَنزِلُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ وَمَا يَعْرُجُ فِيهَا
वह दयालु, अत्यंत क्षमाशील है।
وَهُوَ ٱلرَّحِيمُ ٱلْغَفُورُ
और नकारने वालों ने कहा: “वह घड़ी हमारे पास नहीं आएगी।”
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَا تَأْتِينَا ٱلسَّاعَةُ
कहो: “क्यों नहीं, मेरे अभिभावक की शपथ, वह तुम्हारे पास अवश्य आएगी,
قُلْ بَلَىٰ وَرَبِّى لَتَأْتِيَنَّكُمْ
जो इंद्रियों से परे है उसका जानने वाला — एक कण का भार भी उसकी पहुँच से बाहर नहीं, न आकाशों में और न धरती पर,
عَٰلِمِ ٱلْغَيْبِ لَا يَعْزُبُ عَنْهُ مِثْقَالُ ذَرَّةٍۢ فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَلَا فِى ٱلْأَرْضِ
और न उससे छोटा और न बड़ा कुछ, जो एक स्पष्ट बही में न हो — ताकि वह उन्हें प्रतिफल दे जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए।”
وَلَآ أَصْغَرُ مِن ذَٰلِكَ وَلَآ أَكْبَرُ إِلَّا فِى كِتَٰبٍۢ مُّبِينٍۢ لِّيَجْزِىَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ
उनके लिए क्षमा और उदार जीविका है।
أُو۟لَٰٓئِكَ لَهُم مَّغْفِرَةٌۭ وَرِزْقٌۭ كَرِيمٌۭ
और जो हमारे संकेतों के विरुद्ध हमें विफल करने के प्रयास में लगे, उनके लिए पीड़ादायक अशुद्धि से बना दंड है।
وَٱلَّذِينَ سَعَوْ فِىٓ ءَايَٰتِنَا مُعَٰجِزِينَ أُو۟لَٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌۭ مِّن رِّجْزٍ أَلِيمٌۭ
और जिन्हें ज्ञान दिया गया है वे देखते हैं कि जो तुम पर तुम्हारे अभिभावक की ओर से उतारा गया है वही सत्य है और सर्वशक्तिमान, प्रशंसनीय के पथ की ओर मार्ग दिखाता है।
وَيَرَى ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْعِلْمَ ٱلَّذِىٓ أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ هُوَ ٱلْحَقَّ وَيَهْدِىٓ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَمِيدِ
और नकारने वालों ने कहा: “क्या तुम चाहते हो कि हम तुम्हें एक ऐसा पुरुष बताएँ जो तुम्हें सूचित करेगा कि जब तुम चीथड़े-चीथड़े कर दिए जाओगे और पूरी तरह बिखर जाओगे, तब तुम अवश्य एक नई रचना में होगे?
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ هَلْ نَدُلُّكُمْ عَلَىٰ رَجُلٍۢ يُنَبِّئُكُمْ إِذَا مُزِّقْتُمْ كُلَّ مُمَزَّقٍ إِنَّكُمْ لَفِى خَلْقٍۢ جَدِيدٍ
क्या उसने ईश्वर पर झूठ गढ़ लिया है, या उसे विक्षिप्तता है?”
أَفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا أَم بِهِۦ جِنَّةٌۢ
नहीं: जो अंतिम जीवन में विश्वास नहीं करते वे दंड और दूर के भटकाव में हैं।
بَلِ ٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِٱلْءَاخِرَةِ فِى ٱلْعَذَابِ وَٱلضَّلَٰلِ ٱلْبَعِيدِ
क्या उन्होंने नहीं देखा कि उनके सामने और उनके पीछे क्या है, आकाश और धरती में से?
أَفَلَمْ يَرَوْا۟ إِلَىٰ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ
यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो हम धरती से उन्हें निगलवा देते, या उन पर आकाश का एक टुकड़ा गिरा देते।
إِن نَّشَأْ نَخْسِفْ بِهِمُ ٱلْأَرْضَ أَوْ نُسْقِطْ عَلَيْهِمْ كِسَفًۭا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ
इसमें अवश्य एक संकेत है हर उस आज्ञाकारी के लिए जो निरंतर उसका आसरा लेता है।
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَةًۭ لِّكُلِّ عَبْدٍۢ مُّنِيبٍۢ
और हमने निश्चय ही दाऊद को अपनी ओर से एक अनुग्रह दिया: “हे पहाड़ो, उसके साथ प्रतिध्वनि करो, और पक्षी भी।”
وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا دَاوُۥدَ مِنَّا فَضْلًۭا يَٰجِبَالُ أَوِّبِى مَعَهُۥ وَٱلطَّيْرَ
और हमने उसके लिए लोहे को नरम कर दिया: “चौड़े कवच बनाओ, और छल्लों के जोड़ का माप ठीक रखो,
وَأَلَنَّا لَهُ ٱلْحَدِيدَ أَنِ ٱعْمَلْ سَٰبِغَٰتٍۢ وَقَدِّرْ فِى ٱلسَّرْدِ
और भले कर्म करो,
وَٱعْمَلُوا۟ صَٰلِحًا
क्योंकि मैं तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता हूँ।”
إِنِّى بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌۭ
और सुलैमान के लिए हवा: उसका जाना एक महीने का था, और उसकी शाम की दौड़ एक महीने की।
وَلِسُلَيْمَٰنَ ٱلرِّيحَ غُدُوُّهَا شَهْرٌۭ وَرَوَاحُهَا شَهْرٌۭ
और हमने उसके लिए नेफ़्था का सोता बहा दिया।
وَأَسَلْنَا لَهُۥ عَيْنَ ٱلْقِطْرِ
और प्रच्छन्नों में से कुछ उसके सामने काम करते थे, उसके अभिभावक की अनुमति से;
وَمِنَ ٱلْجِنِّ مَن يَعْمَلُ بَيْنَ يَدَيْهِ بِإِذْنِ رَبِّهِۦ
और उनमें से जो कोई हमारे आदेश से हट जाता, हम उसे दहकते अंगारों के दंड का स्वाद चखाते थे।
وَمَن يَزِغْ مِنْهُمْ عَنْ أَمْرِنَا نُذِقْهُ مِنْ عَذَابِ ٱلسَّعِيرِ
वे उसके लिए वह बनाते थे जो उसकी मर्ज़ी होती: संपर्क-कक्ष, प्रतिमाएँ, बड़े जलाशयों जैसे हौज़, और जमी हुई देगें।
يَعْمَلُونَ لَهُۥ مَا يَشَآءُ مِن مَّحَٰرِيبَ وَتَمَٰثِيلَ وَجِفَانٍۢ كَٱلْجَوَابِ وَقُدُورٍۢ رَّاسِيَٰتٍ
“काम करो, दाऊद के कुल वालो,
ٱعْمَلُوٓا۟ ءَالَ دَاوُۥدَ
कृतज्ञता से” —
شُكْرًۭا
परंतु मेरे आज्ञाकारियों में से थोड़े ही कृतज्ञ हैं।
وَقَلِيلٌۭ مِّنْ عِبَادِىَ ٱلشَّكُورُ
फिर जब हमने उस पर मृत्यु तय कर दी, तो उन्हें उसकी मृत्यु का पता किसी ने नहीं दिया, सिवा धरती के एक चलने-फिरने वाले के, जो उसकी लाठी को कुतरता था;
فَلَمَّا قَضَيْنَا عَلَيْهِ ٱلْمَوْتَ مَا دَلَّهُمْ عَلَىٰ مَوْتِهِۦٓ إِلَّا دَآبَّةُ ٱلْأَرْضِ تَأْكُلُ مِنسَأَتَهُۥ
और जब वह गिर पड़ा, तो प्रच्छन्नों पर स्पष्ट हो गया कि यदि वे उसे जानते होते जो इंद्रियों से परे है, तो वे अपमानजनक दंड में अपना समय न बिताते।
فَلَمَّا خَرَّ تَبَيَّنَتِ ٱلْجِنُّ أَن لَّوْ كَانُوا۟ يَعْلَمُونَ ٱلْغَيْبَ مَا لَبِثُوا۟ فِى ٱلْعَذَابِ ٱلْمُهِينِ
सबा के लिए उनके आवास में निश्चय ही एक संकेत था:
لَقَدْ كَانَ لِسَبَإٍۢ فِى مَسْكَنِهِمْ ءَايَةٌۭ
दो उद्यान, दाएँ और बाएँ।
جَنَّتَانِ عَن يَمِينٍۢ وَشِمَالٍۢ
“अपने अभिभावक की जीविका में से खाओ, और उसके प्रति कृतज्ञ रहो:
كُلُوا۟ مِن رِّزْقِ رَبِّكُمْ وَٱشْكُرُوا۟ لَهُۥ
एक अच्छी भूमि, और एक अत्यंत क्षमाशील अभिभावक।”
بَلْدَةٌۭ طَيِّبَةٌۭ وَرَبٌّ غَفُورٌۭ
परंतु वे कतरा गए, और हमने उन पर बाँध की विनाशकारी बाढ़ भेजी,
فَأَعْرَضُوا۟ فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ سَيْلَ ٱلْعَرِمِ
और हमने उनके दो उद्यानों को कड़वे भोजन वाले, झाऊ और कुछ बेरियों वाले दो उद्यानों से बदल दिया।
وَبَدَّلْنَٰهُم بِجَنَّتَيْهِمْ جَنَّتَيْنِ ذَوَاتَىْ أُكُلٍ خَمْطٍۢ وَأَثْلٍۢ وَشَىْءٍۢ مِّن سِدْرٍۢ قَلِيلٍۢ
इस प्रकार हमने उन्हें प्रतिफल दिया उसका जो उन्होंने नकारा था:
ذَٰلِكَ جَزَيْنَٰهُم بِمَا كَفَرُوا۟
और क्या हम किसी को प्रतिफल देते हैं, सिवा बड़े नकारने वाले के?
وَهَلْ نُجَٰزِىٓ إِلَّا ٱلْكَفُورَ
और हमने उनके और उन बस्तियों के बीच जिन्हें हमने आशीष दी थी खुली बस्तियाँ रखी थीं, और उनमें यात्रा का माप तय किया था:
وَجَعَلْنَا بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ ٱلْقُرَى ٱلَّتِى بَٰرَكْنَا فِيهَا قُرًۭى ظَٰهِرَةًۭ وَقَدَّرْنَا فِيهَا ٱلسَّيْرَ
“उनमें रातों और दिनों तक चलो, सुरक्षित रहते हुए।”
سِيرُوا۟ فِيهَا لَيَالِىَ وَأَيَّامًا ءَامِنِينَ
परंतु उन्होंने कहा: “हमारे अभिभावक, हमारी यात्राओं के पड़ावों को दूर कर दीजिए” — और उन्होंने अपने ऊपर अन्याय किया; तब हमने उन्हें चर्चा के विषय बना दिया, और उन्हें पूरी तरह बिखेर दिया।
فَقَالُوا۟ رَبَّنَا بَٰعِدْ بَيْنَ أَسْفَارِنَا وَظَلَمُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ فَجَعَلْنَٰهُمْ أَحَادِيثَ وَمَزَّقْنَٰهُمْ كُلَّ مُمَزَّقٍ
इसमें अवश्य संकेत हैं हर उसके लिए जो अत्यंत धैर्यवान, अत्यंत कृतज्ञ है।
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَٰتٍۢ لِّكُلِّ صَبَّارٍۢ شَكُورٍۢ
और इब्लीस ने उन पर अपना अनुमान निश्चय ही सच कर दिखाया, और उन्होंने उसका अनुसरण किया, सिवा विश्वास करने वालों के एक भाग के।
وَلَقَدْ صَدَّقَ عَلَيْهِمْ إِبْلِيسُ ظَنَّهُۥ فَٱتَّبَعُوهُ إِلَّا فَرِيقًۭا مِّنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ
और उसका उन पर कोई अधिकार न था, सिवा इसके कि हम उसे अलग करें जो अंतिम जीवन में विश्वास करता है उससे जो उसके विषय में दुविधा में है।
وَمَا كَانَ لَهُۥ عَلَيْهِم مِّن سُلْطَٰنٍ إِلَّا لِنَعْلَمَ مَن يُؤْمِنُ بِٱلْءَاخِرَةِ مِمَّنْ هُوَ مِنْهَا فِى شَكٍّۢ
और तुम्हारा अभिभावक हर चीज़ की रक्षा करता है।
وَرَبُّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ حَفِيظٌۭ
कहो: “उन्हें पुकारो जिनका तुम दावा करते हो, ईश्वर के अतिरिक्त:
قُلِ ٱدْعُوا۟ ٱلَّذِينَ زَعَمْتُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ
वे एक कण का भार भी नहीं रखते, न आकाशों में और न धरती पर,
لَا يَمْلِكُونَ مِثْقَالَ ذَرَّةٍۢ فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَلَا فِى ٱلْأَرْضِ
और उनका उनमें कोई हिस्सा नहीं,
وَمَا لَهُمْ فِيهِمَا مِن شِرْكٍۢ
और उसका उनमें से कोई समर्थक नहीं।”
وَمَا لَهُۥ مِنْهُم مِّن ظَهِيرٍۢ
और सिफ़ारिश उसके पास केवल उसी को लाभ देती है जिसके लिए वह उसकी अनुमति दे,
وَلَا تَنفَعُ ٱلشَّفَٰعَةُ عِندَهُۥٓ إِلَّا لِمَنْ أَذِنَ لَهُۥ
यहाँ तक कि जब उनके मर्मों से घबराहट हटा दी जाएगी, वे कहेंगे: “तुम्हारे अभिभावक ने क्या कहा?” — वे कहेंगे: “सत्य।
حَتَّىٰٓ إِذَا فُزِّعَ عَن قُلُوبِهِمْ قَالُوا۟ مَاذَا قَالَ رَبُّكُمْ قَالُوا۟ ٱلْحَقَّ
और वह परम-उच्च, महान है।”
وَهُوَ ٱلْعَلِىُّ ٱلْكَبِيرُ
कहो: “तुम्हें आकाशों और धरती से जीविका कौन देता है?” कहो: “ईश्वर।
قُلْ مَن يَرْزُقُكُم مِّنَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ قُلِ ٱللَّهُ
और अवश्य, हम या तुम मार्गदर्शन पर हैं, या स्पष्ट भटकाव में।”
وَإِنَّآ أَوْ إِيَّاكُمْ لَعَلَىٰ هُدًى أَوْ فِى ضَلَٰلٍۢ مُّبِينٍۢ
कहो: “तुमसे हमारे बहिष्कार के विषय में नहीं पूछा जाएगा, और हमसे उसके विषय में नहीं पूछा जाएगा जो तुम करते हो।”
قُل لَّا تُسْـَٔلُونَ عَمَّآ أَجْرَمْنَا وَلَا نُسْـَٔلُ عَمَّا تَعْمَلُونَ
कहो: “हमारा अभिभावक हमें एकत्र करेगा, फिर हमारे बीच सत्य के द्वारा खोल देगा;
قُلْ يَجْمَعُ بَيْنَنَا رَبُّنَا ثُمَّ يَفْتَحُ بَيْنَنَا بِٱلْحَقِّ
और वही खोलने वाला, सर्वज्ञ है।”
وَهُوَ ٱلْفَتَّاحُ ٱلْعَلِيمُ
कहो: “मुझे उन्हें दिखाओ जिन्हें तुमने उसके साथ साझीदार जोड़ा है। कदापि नहीं! —
قُلْ أَرُونِىَ ٱلَّذِينَ أَلْحَقْتُم بِهِۦ شُرَكَآءَ كَلَّا
वह तो ईश्वर है, सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान।”
بَلْ هُوَ ٱللَّهُ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
और हमने तुम्हें केवल सभी लोगों के लिए भेजा है, शुभ समाचार देने वाला और चेतावनी देने वाला बनाकर,
وَمَآ أَرْسَلْنَٰكَ إِلَّا كَآفَّةًۭ لِّلنَّاسِ بَشِيرًۭا وَنَذِيرًۭا
परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।
وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
और वे कहते हैं: “यह वादा कब है, यदि तुम सच्चे हो?”
وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا ٱلْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ
कहो: “तुम्हारे लिए एक ऐसे दिन का वादे का समय है जिसे तुम एक घड़ी भर भी न पीछे कर सकोगे और न आगे।”
قُل لَّكُم مِّيعَادُ يَوْمٍۢ لَّا تَسْتَـْٔخِرُونَ عَنْهُ سَاعَةًۭ وَلَا تَسْتَقْدِمُونَ
और नकारने वालों ने कहा: “हम इस पाठ में कभी विश्वास नहीं करेंगे, और न उसमें जो इससे पहले था।”
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَن نُّؤْمِنَ بِهَٰذَا ٱلْقُرْءَانِ وَلَا بِٱلَّذِى بَيْنَ يَدَيْهِ
और यदि तुम देखते, जब अन्यायी अपने अभिभावक के सामने रोक लिए जाएँगे, कथन को एक-दूसरे की ओर लौटाते हुए:
وَلَوْ تَرَىٰٓ إِذِ ٱلظَّٰلِمُونَ مَوْقُوفُونَ عِندَ رَبِّهِمْ يَرْجِعُ بَعْضُهُمْ إِلَىٰ بَعْضٍ ٱلْقَوْلَ
जिन्हें दुर्बल समझा जाता था वे उनसे कहेंगे जो घमंड से फूलते थे: “तुम न होते, तो हम विश्वास करने वाले होते।”
يَقُولُ ٱلَّذِينَ ٱسْتُضْعِفُوا۟ لِلَّذِينَ ٱسْتَكْبَرُوا۟ لَوْلَآ أَنتُمْ لَكُنَّا مُؤْمِنِينَ
जो घमंड से फूलते थे वे उनसे कहेंगे जिन्हें दुर्बल समझा जाता था: “क्या हमने तुम्हारी मार्गदर्शन की राह रोकी, जब वह तुम्हारे पास आ चुकी थी? नहीं: तुम तो स्वयं बहिष्कृत थे।”
قَالَ ٱلَّذِينَ ٱسْتَكْبَرُوا۟ لِلَّذِينَ ٱسْتُضْعِفُوٓا۟ أَنَحْنُ صَدَدْنَٰكُمْ عَنِ ٱلْهُدَىٰ بَعْدَ إِذْ جَآءَكُم بَلْ كُنتُم مُّجْرِمِينَ
और जिन्हें दुर्बल समझा जाता था वे उनसे कहेंगे जो घमंड से फूलते थे: “बल्कि वह रात-दिन का षड्यंत्र था, जब तुम हमें आदेश देते थे कि हम ईश्वर को नकारें और उसके प्रतिद्वंद्वी ठहराएँ।”
وَقَالَ ٱلَّذِينَ ٱسْتُضْعِفُوا۟ لِلَّذِينَ ٱسْتَكْبَرُوا۟ بَلْ مَكْرُ ٱلَّيْلِ وَٱلنَّهَارِ إِذْ تَأْمُرُونَنَآ أَن نَّكْفُرَ بِٱللَّهِ وَنَجْعَلَ لَهُۥٓ أَندَادًۭا
और वे दंड को देखकर अपना पछतावा गुप्त रखेंगे।
وَأَسَرُّوا۟ ٱلنَّدَامَةَ لَمَّا رَأَوُا۟ ٱلْعَذَابَ
और हम नकारने वालों की गर्दनों में तौक़ डालेंगे:
وَجَعَلْنَا ٱلْأَغْلَٰلَ فِىٓ أَعْنَاقِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟
क्या उन्हें उसके सिवा प्रतिफल दिया जाएगा जो वे करते थे?
هَلْ يُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
और हमने किसी बस्ती में कभी कोई चेतावनी देने वाला नहीं भेजा, बिना इसके कि उसके संपन्न कहें: “हम उसे निश्चय ही नकारते हैं जिसके साथ तुम भेजे गए हो।”
وَمَآ أَرْسَلْنَا فِى قَرْيَةٍۢ مِّن نَّذِيرٍ إِلَّا قَالَ مُتْرَفُوهَآ إِنَّا بِمَآ أُرْسِلْتُم بِهِۦ كَٰفِرُونَ
और उन्होंने कहा: “हमारे पास संपत्ति और संतान अधिक है, और हमें दंड नहीं दिया जाएगा।”
وَقَالُوا۟ نَحْنُ أَكْثَرُ أَمْوَٰلًۭا وَأَوْلَٰدًۭا وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ
कहो: “मेरा अभिभावक निश्चय ही जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए जीविका फैला देता है, और नापकर देता है;
قُلْ إِنَّ رَبِّى يَبْسُطُ ٱلرِّزْقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقْدِرُ
परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।”
وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
और न तुम्हारी संपत्ति और न तुम्हारी संतान वह है जो तुम्हें हमारे निकट लाएगा, बहुत समीप — सिवा उसके जिसने विश्वास किया और भले कर्म किए: उनके लिए दुगुना प्रतिफल है उसका जो उन्होंने किया, और वे ऊँचे कक्षों में सुरक्षित होंगे।
وَمَآ أَمْوَٰلُكُمْ وَلَآ أَوْلَٰدُكُم بِٱلَّتِى تُقَرِّبُكُمْ عِندَنَا زُلْفَىٰٓ إِلَّا مَنْ ءَامَنَ وَعَمِلَ صَٰلِحًۭا فَأُو۟لَٰٓئِكَ لَهُمْ جَزَآءُ ٱلضِّعْفِ بِمَا عَمِلُوا۟ وَهُمْ فِى ٱلْغُرُفَٰتِ ءَامِنُونَ
और जो हमारे संकेतों के विरुद्ध हमें विफल करने के प्रयास में लगे, वे दंड में लाए जाएँगे।
وَٱلَّذِينَ يَسْعَوْنَ فِىٓ ءَايَٰتِنَا مُعَٰجِزِينَ أُو۟لَٰٓئِكَ فِى ٱلْعَذَابِ مُحْضَرُونَ
कहो: “मेरा अभिभावक निश्चय ही अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए जीविका फैला देता है, और उसके लिए नापकर देता है;
قُلْ إِنَّ رَبِّى يَبْسُطُ ٱلرِّزْقَ لِمَن يَشَآءُ مِنْ عِبَادِهِۦ وَيَقْدِرُ لَهُۥ
और तुम जो कुछ भी ख़र्च करते हो, वह उसकी जगह दे देता है,
وَمَآ أَنفَقْتُم مِّن شَىْءٍۢ فَهُوَ يُخْلِفُهُۥ
और वह जीविका देने वालों में सबसे बेहतर है।”
وَهُوَ خَيْرُ ٱلرَّٰزِقِينَ
और जिस दिन हम उन सबको इकट्ठा करेंगे, फिर अभिकर्ताओं से कहेंगे: “क्या ये तुम्हारी ही आज्ञा का पालन करते थे?”
وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَمِيعًۭا ثُمَّ يَقُولُ لِلْمَلَٰٓئِكَةِ أَهَٰٓؤُلَآءِ إِيَّاكُمْ كَانُوا۟ يَعْبُدُونَ
वे कहेंगे: “आपकी महिमा हो! आप हमारे आश्रयदाता हैं, वे नहीं:
قَالُوا۟ سُبْحَٰنَكَ أَنتَ وَلِيُّنَا مِن دُونِهِم
वे तो प्रच्छन्नों की आज्ञा का पालन करते थे;
بَلْ كَانُوا۟ يَعْبُدُونَ ٱلْجِنَّ
उनमें से अधिकतर उनमें विश्वास करते थे।”
أَكْثَرُهُم بِهِم مُّؤْمِنُونَ
आज तुममें से कोई दूसरे के लिए न लाभ का मालिक होगा न हानि का, और हम उनसे कहेंगे जिन्होंने अन्याय किया: “आग के उस दंड का स्वाद चखो जिसे तुम झुठलाते थे।”
فَٱلْيَوْمَ لَا يَمْلِكُ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍۢ نَّفْعًۭا وَلَا ضَرًّۭا وَنَقُولُ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ذُوقُوا۟ عَذَابَ ٱلنَّارِ ٱلَّتِى كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
और जब उन्हें हमारे संकेत सुनाए जाते हैं, स्पष्ट, तो वे कहते हैं: “यह तो बस एक पुरुष है जो तुम्हारी राह उससे रोकना चाहता है जिसकी आज्ञा का पालन तुम्हारे पूर्वज करते थे”; और वे कहते हैं: “यह तो बस एक गढ़ा हुआ स्वांग है।”
وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ ءَايَٰتُنَا بَيِّنَٰتٍۢ قَالُوا۟ مَا هَٰذَآ إِلَّا رَجُلٌۭ يُرِيدُ أَن يَصُدَّكُمْ عَمَّا كَانَ يَعْبُدُ ءَابَآؤُكُمْ وَقَالُوا۟ مَا هَٰذَآ إِلَّآ إِفْكٌۭ مُّفْتَرًۭى
और नकारने वाले सत्य के विषय में, जब वह उनके पास आता है, कहते हैं: “यह तो बस एक स्पष्ट भ्रम है।”
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِلْحَقِّ لَمَّا جَآءَهُمْ إِنْ هَٰذَآ إِلَّا سِحْرٌۭ مُّبِينٌۭ
और हमने उन्हें कोई ऐसा लेख नहीं दिया जिसका वे अध्ययन करते,
وَمَآ ءَاتَيْنَٰهُم مِّن كُتُبٍۢ يَدْرُسُونَهَا
और हमने तुमसे पहले उनकी ओर कोई चेतावनी देने वाला नहीं भेजा।
وَمَآ أَرْسَلْنَآ إِلَيْهِمْ قَبْلَكَ مِن نَّذِيرٍۢ
और जो उनसे पहले थे उन्होंने झुठलाया — वे उसके दसवें भाग तक भी नहीं पहुँचे जो हमने उन्हें दिया था —
وَكَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ وَمَا بَلَغُوا۟ مِعْشَارَ مَآ ءَاتَيْنَٰهُمْ
और उन्होंने मेरे संदेशवाहकों को झुठलाया।
فَكَذَّبُوا۟ رُسُلِى
और मेरा अमान्यकरण कैसा था!
فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ
कहो: “मैं तुम्हें केवल एक ही बात का उपदेश देता हूँ:
قُلْ إِنَّمَآ أَعِظُكُم بِوَٰحِدَةٍ
कि तुम ईश्वर के लिए खड़े हो, दो-दो या एक-एक करके, फिर सोच-विचार करो —
أَن تَقُومُوا۟ لِلَّهِ مَثْنَىٰ وَفُرَٰدَىٰ ثُمَّ تَتَفَكَّرُوا۟
तुम्हारे साथी को कोई विक्षिप्तता नहीं;
مَا بِصَاحِبِكُم مِّن جِنَّةٍ
वह तो तुम्हारे लिए बस एक चेतावनी देने वाला है, एक कठोर दंड के सामने।”
إِنْ هُوَ إِلَّا نَذِيرٌۭ لَّكُم بَيْنَ يَدَىْ عَذَابٍۢ شَدِيدٍۢ
कहो: “जो भी पुरस्कार मैंने तुमसे माँगा हो, वह तुम्हारे लिए है;
قُلْ مَا سَأَلْتُكُم مِّنْ أَجْرٍۢ فَهُوَ لَكُمْ
मेरा पुरस्कार केवल ईश्वर पर है,
إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَى ٱللَّهِ
और वह हर चीज़ का साक्षी है।”
وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ شَهِيدٌۭ
कहो: “मेरा अभिभावक निश्चय ही सत्य को फेंकता है,
قُلْ إِنَّ رَبِّى يَقْذِفُ بِٱلْحَقِّ
जो इंद्रियों से परे है उसे पूरी तरह जानने वाला वही है।”
عَلَّٰمُ ٱلْغُيُوبِ
कहो: “सत्य आ गया है, और मिथ्या न आरंभ करता है न दोहराता है।”
قُلْ جَآءَ ٱلْحَقُّ وَمَا يُبْدِئُ ٱلْبَٰطِلُ وَمَا يُعِيدُ
कहो: “यदि मैं भटकता हूँ, तो मैं केवल अपने स्व के विरुद्ध भटकता हूँ; और यदि मैं मार्गदर्शन पाता हूँ, तो उसके द्वारा जो मेरा अभिभावक मुझ पर प्रकट करता है —
قُلْ إِن ضَلَلْتُ فَإِنَّمَآ أَضِلُّ عَلَىٰ نَفْسِى وَإِنِ ٱهْتَدَيْتُ فَبِمَا يُوحِىٓ إِلَىَّ رَبِّىٓ
वह सुनता है, वह निकट है।”
إِنَّهُۥ سَمِيعٌۭ قَرِيبٌۭ
और यदि तुम देखते, जब वे घबरा उठेंगे, बिना किसी निकास के, और वे निकट स्थान से पकड़े जाएँगे —
وَلَوْ تَرَىٰٓ إِذْ فَزِعُوا۟ فَلَا فَوْتَ وَأُخِذُوا۟ مِن مَّكَانٍۢ قَرِيبٍۢ
और वे कहेंगे: “हम उसमें विश्वास करते हैं!”
وَقَالُوٓا۟ ءَامَنَّا بِهِۦ
परंतु इतने दूर स्थान से उन्हें वह कैसे सुलभ होगा जिसे वे पहले नकारते थे?
وَأَنَّىٰ لَهُمُ ٱلتَّنَاوُشُ مِن مَّكَانٍۭ بَعِيدٍۢ وَقَدْ كَفَرُوا۟ بِهِۦ مِن قَبْلُ
और जो इंद्रियों से परे है, उसके विषय में वे दूर स्थान से अटकलें फेंकते हैं।
وَيَقْذِفُونَ بِٱلْغَيْبِ مِن مَّكَانٍۭ بَعِيدٍۢ
और उनके और उसके बीच जिसकी वे कामना करते हैं रुकावट डाल दी जाएगी, जैसा उनके जैसों के साथ पहले किया गया: वे निश्चय ही एक व्याकुल कर देने वाली दुविधा में थे।
وَحِيلَ بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ مَا يَشْتَهُونَ كَمَا فُعِلَ بِأَشْيَاعِهِم مِّن قَبْلُ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ فِى شَكٍّۢ مُّرِيبٍۭ