المائدة
Al-Ma'ida
Faithful to Contracts
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। हे विश्वास करने वालो! अनुबंधों के प्रति निष्ठावान रहो।
بِسۡمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحۡمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَوۡفُواْ بِالۡعُقُودِ
तुम्हारे लिए झुंड के पशु वैध किए गए हैं, सिवा उसके जो तुम्हें सुनाया जाता है — शिकार को वैध माने बिना, जबकि तुम अलंघनीयता की अवस्था में हो;
أُحِلَّتۡ لَكُم بَهِيمَةُ اُ۬لۡأَنۡعَٰمِ إِلَّا مَا يُتۡلَىٰ عَلَيۡكُمۡ غَيۡرَ مُحِلِّي اِ۬لصَّيۡدِ وَأَنتُمۡ حُرُمٌۗ
क्योंकि ईश्वर जो चाहता है उसके अनुसार निर्णय करता है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ يَحۡكُمُ مَا يُرِيدُ
हे विश्वास करने वालो! ईश्वर के प्रत्यक्ष चिह्नों को वैध मत मानो, न अलंघनीय महीने को, न स्वैच्छिक उपहारों को, न मन्नत के अर्पणों को, न उन्हें जो अलंघनीय घर की ओर जा रहे हैं, अपने अभिभावक का अनुग्रह और प्रसन्नता खोजते हुए।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تُحِلُّواْ شَعَٰٓئِرَ اَ۬للَّهِ وَلَا اَ۬لشَّهۡرَ اَ۬لۡحَرَامَ وَلَا اَ۬لۡهَدۡيَ وَلَا اَ۬لۡقَلَٰٓئِدَ وَلَآ ءَآمِّينَ اَ۬لۡبَيۡتَ اَ۬لۡحَرَامَ يَبۡتَغُونَ فَضۡلٗا مِّن رَّبِّهِمۡ وَرِضۡوَٰنٗاۚ
और जब उस अवस्था से निकल आओ, तो शिकार करो।
وَإِذَا حَلَلۡتُمۡ فَاَصۡطَادُواْۚ
और किसी क़ौम का बैर, कि उसने माथा टेकने के अलंघनीय स्थान तक तुम्हारी पहुँच रोक दी, तुम्हें आक्रमण करने पर न उतारे।
وَلَا يَجۡرِمَنَّكُمۡ شَنَـَٔانُ قَوۡمٍ إِن صَدُّوكُمۡ عَنِ اِ۬لۡمَسۡجِدِ اِ۬لۡحَرَامِ أَن تَعۡتَدُواْۘ
सद्गुण और सावधानी में एक-दूसरे का साथ दो,
وَتَعَاوَنُواْ عَلَى اَ۬لۡبِرِّ وَاَلتَّقۡوۭيٰۖ
और अपराध और शत्रुता में एक-दूसरे का साथ मत दो।
وَلَا تَعَاوَنُواْ عَلَى اَ۬لۡإِثۡمِ وَاَلۡعُدۡوَٰنِۚ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,
وَاَتَّقُواْ اُ۬للَّهَۚ
क्योंकि ईश्वर सज़ा देने में कठोर है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ شَدِيدُ اُ۬لۡعِقَابِ
तुम पर वर्जित किए गए हैं: मरा हुआ पशु, रक्त, सूअर का मांस, जो ईश्वर के अतिरिक्त किसी और के लिए समर्पित किया गया, गला घोंटा हुआ पशु, मरणासन्न पशु, बीमारी से क्षीण पशु, सींग की चोट से मरा पशु, और वह जिसे किसी हिंसक पशु ने खा लिया — सिवा उसके जिसे तुमने आग से तपाया हो — तथा साझे में काटा गया पशु, जिसके हिस्से चिट्ठी डालकर बाँटे गए।
۞ حُرِّمَتۡ عَلَيۡكُمُ اُ۬لۡمَيۡتَةُ وَاَلدَّمُ وَلَحۡمُ اُ۬لۡخِنزِيرِ وَمَآ أُهِلَّ لِغَيۡرِ اِ۬للَّهِ بِهِۦ وَاَلۡمُنۡخَنِقَةُ وَاَلۡمَوۡقُوذَةُ وَاَلۡمُتَرَدِّيَةُ وَاَلنَّطِيحَةُ وَمَآ أَكَلَ اَ۬لسَّبُعُ إِلَّا مَا ذَكَّيۡتُمۡ وَمَا ذُبِحَ عَلَى اَ۬لنُّصُبِ وَأَن تَسۡتَقۡسِمُواْ بِالۡأَزۡلَٰمِۚ
यह एक अतिक्रमण है।
ذَٰلِكُمۡ فِسۡقٌۗ
आज, नकारने वाले तुम्हारे विधान से आशा खो चुके हैं;
اِ۬لۡيَوۡمَ يَئِسَ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ مِن دِينِكُمۡ
अतः उनसे भय मत खाओ, बल्कि मुझसे भय खाओ।
فَلَا تَخۡشَوۡهُمۡ وَاَخۡشَوۡنِۚ
आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा विधान परिपूर्ण कर दिया, तुम पर अपना उपकार पूरा कर दिया, और तुम्हारे लिए ईश्वर के प्रति खरेपन को विधान के रूप में स्वीकार कर लिया।
اِ۬لۡيَوۡمَ أَكۡمَلۡتُ لَكُمۡ دِينَكُمۡ وَأَتۡمَمۡتُ عَلَيۡكُمۡ نِعۡمَتِي وَرَضِيتُ لَكُمُ اُ۬لۡإِسۡلَٰمَ دِينٗاۚ
परंतु जो कोई भुखमरी से विवश हो जाए, अपराध की ओर झुकाव के बिना — ईश्वर निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
فَمَنِ اِ۟ضۡطُرَّ فِي مَخۡمَصَةٍ غَيۡرَ مُتَجَانِفٖ لِّإِثۡمٖ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ
वे तुमसे पूछते हैं: उनके लिए क्या वैध किया गया है?
يَسۡـَٔلُونَكَ مَاذَآ أُحِلَّ لَهُمۡۖ
कहो: “तुम्हारे लिए अच्छी चीज़ें वैध की गई हैं, तथा शिकारी पशु जिन्हें तुमने प्रशिक्षक के रूप में सधाया है, उन्हें उसमें से सिखाते हुए जो ईश्वर ने तुम्हें सिखाया है।
قُلۡ أُحِلَّ لَكُمُ اُ۬لطَّيِّبَٰتُ وَمَا عَلَّمۡتُم مِّنَ اَ۬لۡجَوَارِحِ مُكَلِّبِينَ تُعَلِّمُونَهُنَّ مِمَّا عَلَّمَكُمُ اُ۬للَّهُۖ
अतः जो वे तुम्हारे लिए पकड़ें उसमें से खाओ, और उस पर ईश्वर के नाम का स्मरण करो।
فَكُلُواْ مِمَّآ أَمۡسَكۡنَ عَلَيۡكُمۡ وَاَذۡكُرُواْ اُ۪سۡمَ اَ۬للَّهِ عَلَيۡهِۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,
وَاَتَّقُواْ اُ۬للَّهَۚ
क्योंकि ईश्वर हिसाब में शीघ्र है।”
إِنَّ اَ۬للَّهَ سَرِيعُ اُ۬لۡحِسَابِ
आज तुम्हारे लिए अच्छी चीज़ें वैध की गई हैं। जिन्हें ग्रंथ दिया गया उनका भोजन तुम्हारे लिए वैध है, और तुम्हारा भोजन उनके लिए वैध है। और विश्वास करने वाली स्त्रियों में से वैवाहिक बंधन से सुरक्षित स्त्रियाँ, और तुमसे पहले जिन्हें ग्रंथ दिया गया उनमें से वैवाहिक बंधन से सुरक्षित स्त्रियाँ, जब तुम उन्हें उनके पुरस्कार दो, वैवाहिक बंधन में बँधने वाले पुरुषों के रूप में, न कि लंपटों के रूप में और न छिपी प्रेमिकाएँ रखने वालों के रूप में।
اِ۬لۡيَوۡمَ أُحِلَّ لَكُمُ اُ۬لطَّيِّبَٰتُۖ وَطَعَامُ اُ۬لَّذِينَ أُوتُواْ اُ۬لۡكِتَٰبَ حِلّٞ لَّكُمۡ وَطَعَامُكُمۡ حِلّٞ لَّهُمۡۖ وَاَلۡمُحۡصَنَٰتُ مِنَ اَ۬لۡمُؤۡمِنَٰتِ وَاَلۡمُحۡصَنَٰتُ مِنَ اَ۬لَّذِينَ أُوتُواْ اُ۬لۡكِتَٰبَ مِن قَبۡلِكُمۡ إِذَآ ءَاتَيۡتُمُوهُنَّ أُجُورَهُنَّ مُحۡصِنِينَ غَيۡرَ مُسَٰفِحِينَ وَلَا مُتَّخِذِيٓ أَخۡدَانٖۗ
और जो कोई विश्वास को नकारता है, उसका कर्म ढह जाता है, और वह अंतिम जीवन में घाटा उठाने वालों में होगा।
وَمَن يَكۡفُرۡ بِالۡإِيمَٰنِ فَقَدۡ حَبِطَ عَمَلُهُۥ وَهۡوَ فِي اِ۬لۡأٓخِرَةِ مِنَ اَ۬لۡخَٰسِرِينَ
हे विश्वास करने वालो! जब तुम संपर्क के लिए उठो, तो अपने चेहरे और अपने हाथ कोहनियों तक धो लो, और अपने सिरों पर हाथ फेरो,
۞ يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِذَا قُمۡتُمۡ إِلَى اَ۬لصَّلَوٰةِ فَاَغۡسِلُواْ وُجُوهَكُمۡ وَأَيۡدِيَكُمۡ إِلَى اَ۬لۡمَرَافِقِ وَاَمۡسَحُواْ بِرُءُوسِكُمۡ
और अपने पैर घुटनों तक धो लो।
وَأَرۡجُلِكُمۡ إِلَى اَ۬لۡكَعۡبَيۡنِۚ
और यदि तुम मलिन अवस्था में हो, तो स्वयं को धो लो।
وَإِن كُنتُمۡ جُنُبٗا فَاَطَّهَّرُواْۚ
और यदि तुम बीमार हो, या यात्रा में हो, या तुममें से कोई प्राकृतिक आवश्यकता पूरी करके आया हो, या तुमने किसी स्त्री को अंतरंगता में जाना हो, और तुम्हें पानी न मिले, तो किसी अच्छे भू-उभार को लक्ष्य करो, और उससे अपने चेहरों और हाथों पर फेर लो।
وَإِن كُنتُم مَّرۡضۭيٰٓ أَوۡ عَلَىٰ سَفَرٍ أَوۡ جَآ أَحَدٞ مِّنكُم مِّنَ اَ۬لۡغَآئِطِ أَوۡ لَٰمَسۡتُمُ اُ۬لنِّسَآءَ فَلَمۡ تَجِدُواْ مَآءٗ فَتَيَمَّمُواْ صَعِيدٗا طَيِّبٗا فَاَمۡسَحُواْ بِوُجُوهِكُمۡ وَأَيۡدِيكُم مِّنۡهُۚ
ईश्वर तुम पर कोई तंगी डालना नहीं चाहता,
مَا يُرِيدُ اُ۬للَّهُ لِيَجۡعَلَ عَلَيۡكُم مِّنۡ حَرَجٖ
बल्कि वह तुम्हें स्वच्छ करना चाहता है, और तुम पर अपना उपकार पूरा करना चाहता है, शायद तुम कृतज्ञ हो जाओ।
وَلَٰكِن يُرِيدُ لِيُطَهِّرَكُمۡ وَلِيُتِمَّ نِعۡمَتَهُۥ عَلَيۡكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ
और अपने ऊपर ईश्वर के उपकार का स्मरण करो, और उसकी गंभीर प्रतिज्ञा, जिससे उसने तुम्हें बाँधा, जब तुमने कहा: “हमने सुना और हमने बात मानी।”
وَاَذۡكُرُواْ نِعۡمَةَ اَ۬للَّهِ عَلَيۡكُمۡ وَمِيثَٰقَهُ اُ۬لَّذِي وَاثَقَكُم بِهِۦٓ إِذۡ قُلۡتُمۡ سَمِعۡنَا وَأَطَعۡنَاۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,
وَاَتَّقُواْ اُ۬للَّهَۚ
क्योंकि ईश्वर सीनों के भीतर जो है उसके विषय में सर्वज्ञ है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ عَلِيمُۢ بِذَاتِ اِ۬لصُّدُورِ
हे विश्वास करने वालो! ईश्वर के लिए दृढ़ता से बने रहने वालों में से हो जाओ, निष्पक्षता के साथ साक्ष्य देते हुए,
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ كُونُواْ قَوَّٰمِينَ لِلَّهِ شُهَدَآءَ بِالۡقِسۡطِۖ
और किसी क़ौम का बैर तुम्हें न्याय न करने की ओर न धकेले।
وَلَا يَجۡرِمَنَّكُمۡ شَنَـَٔانُ قَوۡمٍ عَلَىٰٓ أَلَّا تَعۡدِلُواْۚ
न्यायी बनो: यह सावधानी के अधिक निकट है।
اُ۪عۡدِلُواْ هُوَ أَقۡرَبُ لِلتَّقۡوۭيٰۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,
وَاَتَّقُواْ اُ۬للَّهَۚ
क्योंकि ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ خَبِيرُۢ بِمَا تَعۡمَلُونَ
ईश्वर ने उनसे वादा किया है जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए: उनके लिए क्षमा है और विशाल पुरस्कार।
وَعَدَ اَ۬للَّهُ اُ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ لَهُم مَّغۡفِرَةٞ وَأَجۡرٌ عَظِيمٞ
और जिन्होंने नकारा और हमारे संकेतों को झुठलाया — वही भट्ठी वाले हैं।
وَاَلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَآ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ اُ۬لۡجَحِيمِ
हे विश्वास करने वालो! अपने ऊपर ईश्वर के उपकार का स्मरण करो, जब एक क़ौम ने तुम्हारी ओर हाथ बढ़ाने का इरादा किया था, और उसने उनके हाथ तुमसे दूर रोक दिए।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ اُ۟ذۡكُرُواْ نِعۡمَتَ اَ۬للَّهِ عَلَيۡكُمۡ إِذۡ هَمَّ قَوۡمٌ أَن يَبۡسُطُوٓاْ إِلَيۡكُمۡ أَيۡدِيَهُمۡ فَكَفَّ أَيۡدِيَهُمۡ عَنكُمۡۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो:
وَاَتَّقُواْ اُ۬للَّهَۚ
और विश्वास करने वालों को ईश्वर ही को मुख़्तार बनाना चाहिए।
وَعَلَى اَ۬للَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ اِ۬لۡمُؤۡمِنُونَ
ईश्वर ने निश्चय ही इसराईल की संतान की गंभीर प्रतिज्ञा ली थी, और हमने उनमें से बारह प्रतिनिधि उठाए।
۞ وَلَقَدۡ أَخَذَ اَ۬للَّهُ مِيثَٰقَ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ وَبَعَثۡنَا مِنۡهُمُ اُ۪ثۡنَيۡ عَشَرَ نَقِيبٗاۖ
और ईश्वर ने कहा: “मैं निश्चय ही तुम्हारे साथ हूँ।
وَقَالَ اَ۬للَّهُ إِنِّي مَعَكُمۡۖ
यदि तुम संपर्क बनाए रखो, शुद्ध उदारता दो, मेरे संदेशवाहकों पर विश्वास करो, उन्हें सहारा दो, और ईश्वर को सुंदर उधार दो, तो मैं अवश्य तुम्हारे बुरे कर्म ढक दूँगा, और अवश्य तुम्हें ऐसे उद्यानों में प्रवेश कराऊँगा जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं।
لَئِنۡ أَقَمۡتُمُ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَءَاتَيۡتُمُ اُ۬لزَّكَوٰةَ وَءَامَنتُم بِرُسُلِي وَعَزَّرۡتُمُوهُمۡ وَأَقۡرَضۡتُمُ اُ۬للَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗا لَّأُكَفِّرَنَّ عَنكُمۡ سَيِّـَٔاتِكُمۡ وَلَأُدۡخِلَنَّكُمۡ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا اَ۬لۡأَنۡهَٰرُۚ
परंतु तुममें से जो इसके बाद नकारे, वह ठीक राह से भटक गया।”
فَمَن كَفَرَ بَعۡدَ ذَٰلِكَ مِنكُمۡ فَقَد ضَّلَّ سَوَآءَ اَ۬لسَّبِيلِ
अपनी गंभीर प्रतिज्ञा तोड़ने के कारण हमने उन्हें धिक्कारा और उनके मर्म कठोर कर दिए: वे बोलों को उनके संदर्भ से हटाकर तोड़-मरोड़ते हैं, और जिसका उन्हें स्मरण कराया गया था उसका एक अंश भूल गए।
فَبِمَا نَقۡضِهِم مِّيثَٰقَهُمۡ لَعَنَّٰهُمۡ وَجَعَلۡنَا قُلُوبَهُمۡ قَٰسِيَةٗۖ يُحَرِّفُونَ اَ۬لۡكَلِمَ عَن مَّوَاضِعِهِۦ وَنَسُواْ حَظّٗا مِّمَّا ذُكِّرُواْ بِهِۦۚ
और तुम उनमें से थोड़े-से को छोड़कर, उनमें किसी न किसी विश्वासघात का भेद खोलते रहोगे।
وَلَا تَزَالُ تَطَّلِعُ عَلَىٰ خَآئِنَةٖ مِّنۡهُمۡ إِلَّا قَلِيلٗا مِّنۡهُمۡۖ
अतः उनके प्रति दरगुज़र करो, और पन्ना पलट दो,
فَاَعۡفُ عَنۡهُمۡ وَاَصۡفَحۡۚ
क्योंकि ईश्वर भलाई करने वालों से प्रेम करता है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ يُحِبُّ اُ۬لۡمُحۡسِنِينَ
और जिन्होंने कहा: “हम निश्चय ही सहायक हैं,” उनमें से भी हमने उनकी गंभीर प्रतिज्ञा ली, परंतु जिसका उन्हें स्मरण कराया गया था उसका एक अंश वे भूल गए; तब हमने पेशी के दिन तक उनके बीच शत्रुता और घृणा डाल दी;
وَمِنَ اَ۬لَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّا نَصَٰر۪يٰٓ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَهُمۡ فَنَسُواْ حَظّٗا مِّمَّا ذُكِّرُواْ بِهِۦ فَأَغۡرَيۡنَا بَيۡنَهُمُ اُ۬لۡعَدَاوَةَ وَاَلۡبَغۡضَآءَ ا۪لَىٰ يَوۡمِ اِ۬لۡقِيَٰمَةِۚ
और ईश्वर शीघ्र ही उन्हें सूचित करेगा कि वे क्या करते थे।
وَسَوۡفَ يُنَبِّئُهُمُ اُ۬للَّهُ بِمَا كَانُواْ يَصۡنَعُونَ
हे ग्रंथ वालो! हमारा संदेशवाहक तुम्हारे पास आया है, जो ग्रंथ में से तुम्हारी छिपाई हुई बहुत-सी बातें तुम्हारे सामने स्पष्ट करता है, और बहुत-सी बातों पर दरगुज़र करता है।
يَٰٓأَهۡلَ اَ۬لۡكِتَٰبِ قَد جَّآءَكُمۡ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمۡ كَثِيرٗا مِّمَّا كُنتُمۡ تُخۡفُونَ مِنَ اَ۬لۡكِتَٰبِ وَيَعۡفُواْ عَن كَثِيرٖ
तुम्हारे पास ईश्वर की ओर से एक प्रकाश आया है, और एक स्पष्ट ग्रंथ भी, जिसके द्वारा ईश्वर हर उस व्यक्ति को जो उसकी प्रसन्नता का अनुसरण करता है शांति की राहों की ओर मार्ग दिखाता है,
قَد جَّآءَكُم مِّنَ اَ۬للَّهِ نُورٞ وَكِتَٰبٞ مُّبِينٞ يَهۡدِي بِهِ اِ۬للَّهُ مَنِ اِ۪تَّبَعَ رِضۡوَٰنَهُۥ سُبُلَ اَ۬لسَّلَٰمِ
और उन्हें अपनी अनुमति से अँधेरों से प्रकाश की ओर निकालता है,
وَيُخۡرِجُهُم مِّنَ اَ۬لظُّلُمَٰتِ إِلَى اَ۬لنُّورِ بِإِذۡنِهِۦ
और उन्हें सीधे पथ की ओर मार्ग दिखाता है।
وَيَهۡدِيهِمۡ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ
निश्चय ही उन्होंने नकारा, जिन्होंने कहा: “ईश्वर ही अल-मसीह है, मरयम का पुत्र।”
لَّقَدۡ كَفَرَ اَ۬لَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّ اَ۬للَّهَ هُوَ اَ۬لۡمَسِيحُ اُ۪بۡنُ مَرۡيَمَۚ
कहो: “फिर ईश्वर के विरुद्ध कौन कोई अधिकार रखता, यदि वह मरयम के पुत्र अल-मसीह को, उसकी माँ को, और धरती पर जो भी हैं उन सबको नष्ट करना चाहे?”
قُلۡ فَمَن يَمۡلِكُ مِنَ اَ۬للَّهِ شَيۡـًٔا إِنۡ أَرَادَ أَن يُهۡلِكَ اَ۬لۡمَسِيحَ اَ۪بۡنَ مَرۡيَمَ وَأُمَّهُۥ وَمَن فِي اِ۬لۡأَرۡضِ جَمِيعٗاۗ
और ईश्वर ही का है आकाशों और धरती का राजत्व, और जो उनके बीच है उसका भी।
وَلِلَّهِ مُلۡكُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَاۚ
वह जो उसकी मर्ज़ी हो, रचता है।
يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۚ
और ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
وَاَللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ
और पुनरुन्मुखों और सहायकों ने कहा: “हम ईश्वर की संतान हैं और उसके प्रिय हैं।”
۞ وَقَالَتِ اِ۬لۡيَهُودُ وَاَلنَّصَٰر۪يٰ نَحۡنُ أَبۡنَٰٓؤُاْ اُ۬للَّهِ وَأَحِبَّٰٓؤُهُۥۚ
कहो: “फिर वह तुम्हारे दोषों के लिए तुम्हें दंड क्यों देता है?
قُلۡ فَلِمَ يُعَذِّبُكُم بِذُنُوبِكُمۖ
बल्कि तुम मानव हो, उनमें से जिन्हें उसने रचा है।
بَلۡ أَنتُم بَشَرٞ مِّمَّنۡ خَلَقَۚ
वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे क्षमा करता है, और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे दंड देता है।”
يَغۡفِرُ لِمَن يَشَآءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشَآءُۚ
और ईश्वर ही का है आकाशों और धरती का राजत्व, और जो उनके बीच है उसका भी,
وَلِلَّهِ مُلۡكُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَاۖ
और उसी की ओर गंतव्य है।
وَإِلَيۡهِ اِ۬لۡمَصِيرُ
हे ग्रंथ वालो! संदेशवाहकों के क्रम में एक अंतराल के बाद हमारा संदेशवाहक निश्चय ही तुम्हारे पास आया है, तुम्हारे लिए प्रकाश डालता हुआ, कि कहीं तुम यह न कहो: “हमारे पास कोई शुभ समाचार देने वाला या चेतावनी देने वाला नहीं आया” — सो एक शुभ समाचार देने वाला और चेतावनी देने वाला तुम्हारे पास आ चुका है।
يَٰٓأَهۡلَ اَ۬لۡكِتَٰبِ قَد جَّآءَكُمۡ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمۡ عَلَىٰ فَتۡرَةٖ مِّنَ اَ۬لرُّسُلِ أَن تَقُولُواْ مَا جَآءَنَا مِنۢ بَشِيرٖ وَلَا نَذِيرٖۖ فَقَد جَّآءَكُم بَشِيرٞ وَنَذِيرٞۗ
और ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
وَاَللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ
और जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा: “हे मेरी क़ौम! अपने ऊपर ईश्वर के उपकार का स्मरण करो, जब उसने तुम्हारे बीच सूचनादाता खड़े किए, और तुम्हें राजा बनाया,
وَإِذۡ قَالَ مُوسۭيٰ لِقَوۡمِهِۦ يَٰقَوۡمِ اِ۟ذۡكُرُواْ نِعۡمَةَ اَ۬للَّهِ عَلَيۡكُمۡ إِذ جَّعَلَ فِيكُمۡ أَنۢبِيَآءَ وَجَعَلَكُم مُّلُوكٗا
और तुम्हें वह दिया जो उसने सभी प्राणियों में किसी और को नहीं दिया।
وَءَاتَىٰكُم مَّا لَمۡ يُؤۡتِ أَحَدٗا مِّنَ اَ۬لۡعَٰلَمِينَ
हे मेरी क़ौम! उस पवित्र की गई धरती में प्रवेश करो जो ईश्वर ने तुम्हारे लिए विहित की है,
يَٰقَوۡمِ اِ۟دۡخُلُواْ اُ۬لۡأَرۡضَ اَ۬لۡمُقَدَّسَةَ اَ۬لَّتِي كَتَبَ اَ۬للَّهُ لَكُمۡ
और पीछे न हटो, नहीं तो तुम घाटा उठाने वाले बनकर चले जाओगे।”
وَلَا تَرۡتَدُّواْ عَلَىٰٓ أَدۡب۪ارِكُمۡ فَتَنقَلِبُواْ خَٰسِرِينَ
उन्होंने कहा: “हे मूसा! वहाँ निश्चय ही अत्याचारियों की एक क़ौम है,
قَالُواْ يَٰمُوسۭيٰٓ إِنَّ فِيهَا قَوۡمٗا جَبَّارِينَ
और हम निश्चय ही वहाँ प्रवेश नहीं करेंगे जब तक वे वहाँ से निकल नहीं जाते;
وَإِنَّا لَن نَّدۡخُلَهَا حَتَّىٰ يَخۡرُجُواْ مِنۡهَا
यदि वे वहाँ से निकल जाएँ, तब हम वहाँ प्रवेश करेंगे।”
فَإِن يَخۡرُجُواْ مِنۡهَا فَإِنَّا دَٰخِلُونَ
डरने वालों में से दो पुरुषों ने, जिन पर ईश्वर ने अपना उपकार किया था, कहा: “उनके पास द्वार से प्रवेश करो;
قَالَ رَجُلَانِ مِنَ اَ۬لَّذِينَ يَخَافُونَ أَنۡعَمَ اَ۬للَّهُ عَلَيۡهِمَا اَ۟دۡخُلُواْ عَلَيۡهِمِ اِ۬لۡبَابَ
जब तुम उसमें प्रवेश कर जाओगे, तो निश्चय ही तुम विजेता होगे।
فَإِذَا دَخَلۡتُمُوهُ فَإِنَّكُمۡ غَٰلِبُونَۚ
और ईश्वर ही को मुख़्तार बनाना चाहिए, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।”
وَعَلَى اَ۬للَّهِ فَتَوَكَّلُوٓاْ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ
उन्होंने कहा: “हे मूसा! हम निश्चय ही वहाँ कभी प्रवेश नहीं करेंगे, जब तक वे वहाँ हैं; इसलिए तुम और तुम्हारा अभिभावक जाओ, दोनों लड़ो; हम तो यहीं बैठे रहेंगे।”
قَالُواْ يَٰمُوسۭيٰٓ إِنَّا لَن نَّدۡخُلَهَآ أَبَدٗا مَّا دَامُواْ فِيهَاۖ فَاَذۡهَبۡ أَنتَ وَرَبُّكَ فَقَٰتِلَآ إِنَّا هَٰهُنَا قَٰعِدُونَ
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मैं निश्चय ही अपने स्व के सिवा किसी पर अधिकार नहीं रखता,
قَالَ رَبِّ إِنِّي لَآ أَمۡلِكُ إِلَّا نَفۡسِي
और अपने भाई के सिवा;
وَأَخِيۖ
इसलिए आप हमें अतिक्रमणकारियों की क़ौम से अलग कर दीजिए।”
فَاَفۡرُقۡ بَيۡنَنَا وَبَيۡنَ اَ۬لۡقَوۡمِ اِ۬لۡفَٰسِقِينَ
उसने कहा: “तब वह उनके लिए हमेशा के लिए वर्जित है,
قَالَ فَإِنَّهَا مُحَرَّمَةٌ عَلَيۡهِمۡۛ
चालीस वर्ष तक वे धरती पर खोए रहेंगे।
أَرۡبَعِينَ سَنَةٗۛ يَتِيهُونَ فِي اِ۬لۡأَرۡضِۚ
इसलिए अतिक्रमणकारियों की क़ौम के लिए खेद न करो।”
فَلَا تَأۡسَ عَلَى اَ۬لۡقَوۡمِ اِ۬لۡفَٰسِقِينَ
और उन्हें पूर्ण सत्य के साथ आदम के दो पुत्रों की सूचना सुनाओ, जब उन दोनों ने एक-एक भेंट प्रस्तुत की: एक की स्वीकार हुई, और दूसरे की स्वीकार नहीं हुई।
۞ وَاَتۡلُ عَلَيۡهِمۡ نَبَأَ اَ۪بۡنَيۡ ءَادَمَ بِالۡحَقِّ إِذۡ قَرَّبَا قُرۡبَانٗا فَتُقُبِّلَ مِنۡ أَحَدِهِمَا وَلَمۡ يُتَقَبَّلۡ مِنَ اَ۬لۡأٓخَرِ
उसने कहा: “मैं तुम्हें अवश्य मार डालूँगा।”
قَالَ لَأَقۡتُلَنَّكَۖ
उसने कहा: “ईश्वर केवल सावधानी बरतने वालों से ही स्वीकार करता है।
قَالَ إِنَّمَا يَتَقَبَّلُ اُ۬للَّهُ مِنَ اَ۬لۡمُتَّقِينَ
यदि तुम मुझे मारने के लिए मेरी ओर हाथ बढ़ाओगे, तो मैं तुम्हें मारने के लिए तुम्हारी ओर हाथ नहीं बढ़ाऊँगा;
لَئِنۢ بَسَطتَ إِلَيَّ يَدَكَ لِتَقۡتُلَنِي مَآ أَنَا۠ بِبَاسِطٖ يَدِيَ إِلَيۡكَ لِأَقۡتُلَكَۖ
क्योंकि मैं ईश्वर से डरता हूँ, जो सभी प्राणियों का अभिभावक है।
إِنِّيَ أَخَافُ اُ۬للَّهَ رَبَّ اَ۬لۡعَٰلَمِينَ
मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे अपराध और अपने अपराध का बोझ लेकर जाओ, और आग वालों में से हो जाओ:
إِنِّيٓ أُرِيدُ أَن تَبُوٓأَ بِإِثۡمِي وَإِثۡمِكَ فَتَكُونَ مِنۡ أَصۡحَٰبِ اِ۬لنّ۪ارِۚ
यही अन्यायियों का प्रतिफल है।”
وَذَٰلِكَ جَزَٰٓؤُاْ اُ۬لظَّٰلِمِينَ
परंतु उसके स्व ने उसे अपने भाई की हत्या के लिए तैयार कर दिया; उसने उसे मार डाला, और इस प्रकार वह घाटा उठाने वालों में से हो गया।
فَطَوَّعَتۡ لَهُۥ نَفۡسُهُۥ قَتۡلَ أَخِيهِ فَقَتَلَهُۥ فَأَصۡبَحَ مِنَ اَ۬لۡخَٰسِرِينَ
तब ईश्वर ने एक कौआ उठाया, जो धरती कुरेद रहा था, ताकि उसे दिखाए कि अपने भाई की बुराई कैसे ढके।
فَبَعَثَ اَ۬للَّهُ غُرَابٗا يَبۡحَثُ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ لِيُرِيَهُۥ كَيۡفَ يُوَٰرِي سَوۡءَةَ أَخِيهِۚ
उसने कहा: “हाय मुझ पर! क्या मैं इस कौए जैसा भी न हो सका कि अपने भाई की बुराई ढक देता?” और वह तब पछताने वालों में से हो गया। इसी कारण:
قَالَ يَٰوَيۡلَتۭيٰٓ أَعَجَزۡتُ أَنۡ أَكُونَ مِثۡلَ هَٰذَا اَ۬لۡغُرَابِ فَأُوَٰرِيَ سَوۡءَةَ أَخِيۖ فَأَصۡبَحَ مِنَ اَ۬لنَّٰدِمِينَ مِنۡ أَجۡلِ ذَٰلِكَ
हमने इसराईल की संतान के लिए विहित किया कि जो कोई किसी स्व को मारे, बिना इसके कि वह किसी दूसरे स्व के बदले हो, या धरती पर बिगाड़ के कारण, तो मानो उसने सब लोगों को एक साथ मार डाला,
كَتَبۡنَا عَلَىٰ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ أَنَّهُۥ مَن قَتَلَ نَفۡسَۢا بِغَيۡرِ نَفۡسٍ أَوۡ فَسَادٖ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ فَكَأَنَّمَا قَتَلَ اَ۬لنَّاسَ جَمِيعٗا
और जो कोई एक को जीवन दे, तो मानो उसने सब लोगों को एक साथ जीवन दिया।
وَمَنۡ أَحۡيَاهَا فَكَأَنَّمَآ أَحۡيَا اَ۬لنَّاسَ جَمِيعٗاۚ
हमारे संदेशवाहक निश्चय ही उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए; फिर उनमें से बहुतेरे, इसके बाद भी, धरती पर अवश्य अतिवादी हैं।
وَلَقَد جَّآءَتۡهُمۡ رُسۡلُنَا بِالۡبَيِّنَٰتِ ثُمَّ إِنَّ كَثِيرٗا مِّنۡهُم بَعۡدَ ذَٰلِكَ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ لَمُسۡرِفُونَ
जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक से युद्ध करते हैं, और धरती पर बिगाड़ फैलाने में लगे रहते हैं, उनका प्रतिफल यह है कि वे मार डाले जाएँ, या खंभे पर जड़े जाएँ, या उनके हाथ और पैर विपरीत ओर से विच्छेदित किए जाएँ, या वे धरती से निर्वासित कर दिए जाएँ।
۞ إِنَّمَا جَزَٰٓؤُاْ اُ۬لَّذِينَ يُحَارِبُونَ اَ۬للَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَيَسۡعَوۡنَ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ فَسَادًا أَن يُقَتَّلُوٓاْ أَوۡ يُصَلَّبُوٓاْ أَوۡ تُقَطَّعَ أَيۡدِيهِمۡ وَأَرۡجُلُهُم مِّنۡ خِلَٰفٍ أَوۡ يُنفَوۡاْ مِنَ اَ۬لۡأَرۡضِۚ
यह उनके लिए निकट जीवन में अपमान है,
ذَٰلِكَ لَهُمۡ خِزۡيٞ فِي اِ۬لدُّنۡيۭاۖ
और अंतिम जीवन में उनके लिए विशाल दंड है — सिवा उनके जो इससे पहले पलट आएँ कि तुम उन पर सामर्थ्य पाओ; तब जान लो कि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَلَهُمۡ فِي اِ۬لۡأٓخِرَةِ عَذَابٌ عَظِيمٌ إِلَّا اَ۬لَّذِينَ تَابُواْ مِن قَبۡلِ أَن تَقۡدِرُواْ عَلَيۡهِمۡۖ فَاَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ
हे विश्वास करने वालो! ईश्वर के प्रति सावधान रहो, उसकी ओर निकटता का साधन खोजो, और उसकी राह में संघर्ष करो, शायद तुम सफल हो जाओ।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ اُ۪تَّقُواْ اُ۬للَّهَ وَاَبۡتَغُوٓاْ إِلَيۡهِ اِ۬لۡوَسِيلَةَ وَجَٰهِدُواْ فِي سَبِيلِهِۦ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ
निश्चय ही, जो नकारते हैं, यदि उनके पास वह सब हो जो धरती पर है, और उसके साथ उतना ही और, ताकि वे पेशी के दिन के दंड से स्वयं को छुड़ा सकें, तो उनसे यह स्वीकार नहीं किया जाएगा,
إِنَّ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ لَوۡ أَنَّ لَهُم مَّا فِي اِ۬لۡأَرۡضِ جَمِيعٗا وَمِثۡلَهُۥ مَعَهُۥ لِيَفۡتَدُواْ بِهِۦ مِنۡ عَذَابِ يَوۡمِ اِ۬لۡقِيَٰمَةِ مَا تُقُبِّلَ مِنۡهُمۡۖ
और उनके लिए पीड़ादायक दंड है।
وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ
वे आग से निकलना चाहेंगे, परंतु वे उससे नहीं निकलेंगे,
يُرِيدُونَ أَن يَخۡرُجُواْ مِنَ اَ۬لنّ۪ارِ وَمَا هُم بِخَٰرِجِينَ مِنۡهَاۖ
और उनके लिए बना रहने वाला दंड है।
وَلَهُمۡ عَذَابٞ مُّقِيمٞ
और चोर पुरुष और चोर स्त्री के विषय में, उनके आधार विच्छिन्न करो, उनकी कमाई के प्रतिफल में, ईश्वर की ओर से एक निवारक उदाहरण के रूप में।
وَاَلسَّارِقُ وَاَلسَّارِقَةُ فَاَقۡطَعُوٓاْ أَيۡدِيَهُمَا جَزَآءَۢ بِمَا كَسَبَا نَكَٰلٗا مِّنَ اَ۬للَّهِۗ
ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।
وَاَللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٞ
परंतु जो अपने अन्याय के बाद पलट आए, और स्वयं को सुधार ले, तो ईश्वर अनुकंपा के साथ उसकी ओर पलटता है,
فَمَن تَابَ مِنۢ بَعۡدِ ظُلۡمِهِۦ وَأَصۡلَحَ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ يَتُوبُ عَلَيۡهِۗ
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٌ
क्या तुम नहीं जानते कि ईश्वर ही का है आकाशों और धरती का राजत्व?
أَلَمۡ تَعۡلَمۡ أَنَّ اَ۬للَّهَ لَهُۥ مُلۡكُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِ
वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे दंड देता है, और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे क्षमा करता है।
يُعَذِّبُ مَن يَشَآءُ وَيَغۡفِرُ لِمَن يَشَآءُۗ
और ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
وَاَللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ
हे संदेशवाहक! तुम्हें वे दुखी न करें जो नकार में शीघ्रता करते हैं, उनमें से जो अपने मुँह से कहते हैं: “हमने विश्वास किया,” जबकि उनके मर्मों ने विश्वास नहीं किया,
۞ يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لرَّسُولُ لَا يَحۡزُنكَ اَ۬لَّذِينَ يُسَٰرِعُونَ فِي اِ۬لۡكُفۡرِ مِنَ اَ۬لَّذِينَ قَالُوٓاْ ءَامَنَّا بِأَفۡوَٰهِهِمۡ وَلَمۡ تُؤۡمِن قُلُوبُهُمۡۛ
और न पुनरुन्मुखों में से वे जो झूठ पर कान लगाए रहते हैं, उस दूसरी क़ौम के लिए कान लगाए रहते हैं जो तुम्हारे पास नहीं आई।
وَمِنَ اَ۬لَّذِينَ هَادُواْۛ سَمَّٰعُونَ لِلۡكَذِبِ سَمَّٰعُونَ لِقَوۡمٍ ءَاخَرِينَ لَمۡ يَأۡتُوكَۖ
वे बोलों को उनके स्थान पर रखे जाने के बाद तोड़-मरोड़ते हैं, यह कहते हुए: “यदि तुम्हें यह दिया जाए, तो इसे ले लो; और यदि यह न दिया जाए, तो सतर्क रहो।”
يُحَرِّفُونَ اَ۬لۡكَلِمَ مِنۢ بَعۡدِ مَوَاضِعِهِۦۖ يَقُولُونَ إِنۡ أُوتِيتُمۡ هَٰذَا فَخُذُوهُ وَإِن لَّمۡ تُؤۡتَوۡهُ فَاَحۡذَرُواْۚ
और जिसे ईश्वर परीक्षा में डालना चाहे, तुम ईश्वर के सामने उसके लिए कुछ भी अधिकार नहीं रखते।
وَمَن يُرِدِ اِ۬للَّهُ فِتۡنَتَهُۥ فَلَن تَمۡلِكَ لَهُۥ مِنَ اَ۬للَّهِ شَيۡـًٔاۚ
ये वे हैं जिनके मर्मों को ईश्वर ने स्वच्छ करना नहीं चाहा।
أُوْلَٰٓئِكَ اَ۬لَّذِينَ لَمۡ يُرِدِ اِ۬للَّهُ أَن يُطَهِّرَ قُلُوبَهُمۡۚ
उनके लिए निकट जीवन में अपमान है,
لَهُمۡ فِي اِ۬لدُّنۡيۭا خِزۡيٞۖ
और अंतिम जीवन में उनके लिए विशाल दंड होगा।
وَلَهُمۡ فِي اِ۬لۡأٓخِرَةِ عَذَابٌ عَظِيمٞ
झूठ पर कान लगाने वाले, वर्जित कमाई खाने वाले —
سَمَّٰعُونَ لِلۡكَذِبِ أَكَّٰلُونَ لِلسُّحُتِۚ
यदि वे तुम्हारे पास आएँ, तो उनके बीच निर्णय करो, या उनसे कतराओ;
فَإِن جَآءُوكَ فَاَحۡكُم بَيۡنَهُمۡ أَوۡ أَعۡرِضۡ عَنۡهُمۡۖ
और यदि तुम उनसे कतराओ, तो वे तुम्हें किसी भी प्रकार हानि नहीं पहुँचा सकेंगे।
وَإِن تُعۡرِضۡ عَنۡهُمۡ فَلَن يَضُرُّوكَ شَيۡـٔٗاۖ
और यदि तुम निर्णय करो, तो उनके बीच निष्पक्षता से निर्णय करो,
وَإِنۡ حَكَمۡتَ فَاَحۡكُم بَيۡنَهُم بِالۡقِسۡطِۚ
क्योंकि ईश्वर निष्पक्षों से प्रेम करता है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ يُحِبُّ اُ۬لۡمُقۡسِطِينَ
और वे तुम्हें निर्णायक कैसे बनाएँगे, जबकि उनके पास तौरात है, जिसमें ईश्वर का निर्णय है, फिर इसके बाद वे पीठ फेर लेते हैं?
وَكَيۡفَ يُحَكِّمُونَكَ وَعِندَهُمُ اُ۬لتَّوۡر۪ىٰةُ فِيهَا حُكۡمُ اُ۬للَّهِ ثُمَّ يَتَوَلَّوۡنَ مِنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَۚ
ये विश्वास करने वाले नहीं हैं।
وَمَآ أُوْلَٰٓئِكَ بِالۡمُؤۡمِنِينَ
हमने तौरात उतारी, जिसमें मार्गदर्शन और प्रकाश है; सूचनादाता, जो ईश्वर के प्रति खरे थे, उसके अनुसार पुनरुन्मुखों के बीच निर्णय करते थे, और आध्यात्मिक स्वामी और लेखज्ञ भी, उसके अनुसार जो उन्हें ईश्वर के ग्रंथ में से सुरक्षित रखना था, और वे उसके साक्षी थे।
إِنَّآ أَنزَلۡنَا اَ۬لتَّوۡر۪ىٰةَ فِيهَا هُدٗى وَنُورٞۚ يَحۡكُمُ بِهَا اَ۬لنَّبِيُّونَ اَ۬لَّذِينَ أَسۡلَمُواْ لِلَّذِينَ هَادُواْ وَاَلرَّبَّٰنِيُّونَ وَاَلۡأَحۡبَارُ بِمَا اَ۟سۡتُحۡفِظُواْ مِن كِتَٰبِ اِ۬للَّهِ وَكَانُواْ عَلَيۡهِ شُهَدَآءَۚ
इसलिए लोगों से भय न रखो, बल्कि मुझसे भय रखो,
فَلَا تَخۡشَوُاْ اُ۬لنَّاسَ وَاَخۡشَوۡنِۦ
और मेरे संकेतों के बदले तुच्छ मूल्य न ख़रीदो।
وَلَا تَشۡتَرُواْ بِـَٔايَٰتِي ثَمَنٗا قَلِيلٗاۚ
और जो उसके अनुसार निर्णय नहीं करते जो ईश्वर ने उतारा — वही नकारने वाले हैं।
وَمَن لَّمۡ يَحۡكُم بِمَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لۡكَٰفِرُونَ
और हमने उनके लिए उसमें विहित किया: स्व के बदले स्व, आँख के बदले आँख, नाक के बदले नाक, कान के बदले कान, दाँत के बदले दाँत, और घावों के लिए एक जाँच।
۞ وَكَتَبۡنَا عَلَيۡهِمۡ فِيهَآ أَنَّ اَ۬لنَّفۡسَ بِالنَّفۡسِ وَاَلۡعَيۡنَ بِالۡعَيۡنِ وَاَلۡأَنفَ بِالۡأَنفِ وَاَلۡأُذُنَ بِالۡأُذُنِ وَاَلسِّنَّ بِالسِّنِّۚ وَاَلۡجُرُوحُ قِصَاصٞۚ
परंतु जो कोई दान के रूप में उसे छोड़ दे, तो वह उसके लिए प्रायश्चित है।
فَمَن تَصَدَّقَ بِهِۦ فَهۡوَ كَفَّارَةٞ لَّهُۥۚ
और जो उसके अनुसार निर्णय नहीं करते जो ईश्वर ने उतारा — वही अन्यायी हैं।
وَمَن لَّمۡ يَحۡكُم بِمَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لظَّٰلِمُونَ
और हमने उनके पदचिह्नों पर मरयम के पुत्र ईसा को पीछे भेजा, उसकी पुष्टि करते हुए जो तौरात में से उससे पहले था,
وَقَفَّيۡنَا عَلَىٰٓ ءَاثٰ۪رِهِم بِعِيسَى اَ۪بۡنِ مَرۡيَمَ مُصَدِّقٗا لِّمَا بَيۡنَ يَدَيۡهِ مِنَ اَ۬لتَّوۡر۪ىٰةِۖ
और हमने उसे इंजील दी, जिसमें मार्गदर्शन और प्रकाश है, उसकी पुष्टि करते हुए जो तौरात में से उससे पहले था, और सावधानी बरतने वालों के लिए मार्गदर्शन और उपदेश।
وَءَاتَيۡنَٰهُ اُ۬لۡإِنجِيلَ فِيهِ هُدٗى وَنُورٞ وَمُصَدِّقٗا لِّمَا بَيۡنَ يَدَيۡهِ مِنَ اَ۬لتَّوۡر۪ىٰةِ وَهُدٗى وَمَوۡعِظَةٗ لِّلۡمُتَّقِينَ
और इसलिए कि इंजील वाले उसके अनुसार निर्णय करें जो ईश्वर ने उसमें उतारा।
وَلۡيَحۡكُمۡ أَهۡلُ اُ۬لۡإِنجِيلِ بِمَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ فِيهِۚ
और जो उसके अनुसार निर्णय नहीं करते जो ईश्वर ने उतारा — वही अतिक्रमणकारी हैं।
وَمَن لَّمۡ يَحۡكُم بِمَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لۡفَٰسِقُونَ
और हमने तुम्हारी ओर ग्रंथ उतारा, पूर्ण सत्य के साथ, उसकी पुष्टि करते हुए जो ग्रंथ में से उससे पहले था, और उस पर प्रधान।
وَأَنزَلۡنَآ إِلَيۡكَ اَ۬لۡكِتَٰبَ بِالۡحَقِّ مُصَدِّقٗا لِّمَا بَيۡنَ يَدَيۡهِ مِنَ اَ۬لۡكِتَٰبِ وَمُهَيۡمِنًا عَلَيۡهِۖ
इसलिए उनके बीच उसके अनुसार निर्णय करो जो ईश्वर ने उतारा,
فَاَحۡكُم بَيۡنَهُم بِمَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُۖ
और उस सत्य से हटकर जो तुम्हारे पास आया है, उनकी भावनाओं का अनुसरण न करो।
وَلَا تَتَّبِعۡ أَهۡوَآءَهُمۡ عَمَّا جَآءَكَ مِنَ اَ۬لۡحَقِّۚ
तुममें से प्रत्येक के लिए हमने एक नियम और एक पद्धति निर्धारित की।
لِكُلّٖ جَعَلۡنَا مِنكُمۡ شِرۡعَةٗ وَمِنۡهَاجٗاۚ
और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह तुम्हें एक ही समुदाय बना देता;
وَلَوۡ شَآءَ اَ۬للَّهُ لَجَعَلَكُمۡ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗ
परंतु इसलिए कि वह उसमें तुम्हें परखे जो उसने तुम्हें दिया है।
وَلَٰكِن لِّيَبۡلُوَكُمۡ فِي مَآ ءَاتَىٰكُمۡۖ
इसलिए जो सबसे बेहतर है उसमें एक-दूसरे से आगे निकलो।
فَاَسۡتَبِقُواْ اُ۬لۡخَيۡرَٰتِۚ
तुम सबका लौटना ईश्वर ही की ओर है, और वह तुम्हें सूचित करेगा कि तुम किस बात में मतभेद करते थे।
إِلَى اَ۬للَّهِ مَرۡجِعُكُمۡ جَمِيعٗا فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ فِيهِ تَخۡتَلِفُونَ
और: उनके बीच उसके अनुसार निर्णय करो जो ईश्वर ने उतारा,
وَأَنِ اِ۟حۡكُم بَيۡنَهُم بِمَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ
और उनकी भावनाओं का अनुसरण न करो,
وَلَا تَتَّبِعۡ أَهۡوَآءَهُمۡ
और उनके प्रति सतर्क रहो, कि कहीं वे तुम्हें परीक्षा में डालकर उसके एक अंश से डिगा न दें जो ईश्वर ने तुम्हारी ओर उतारा।
وَاَحۡذَرۡهُمۡ أَن يَفۡتِنُوكَ عَنۢ بَعۡضِ مَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ إِلَيۡكَۖ
और यदि वे पीठ फेर लें, तो जान लो कि ईश्वर उन पर केवल उनके कुछ दोषों का प्रभाव ही लाना चाहता है।
فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَاَعۡلَمۡ أَنَّمَا يُرِيدُ اُ۬للَّهُ أَن يُصِيبَهُم بِبَعۡضِ ذُنُوبِهِمۡۗ
और बहुत-से लोग अवश्य अतिक्रमणकारी हैं।
وَإِنَّ كَثِيرٗا مِّنَ اَ۬لنّ۪اسِ لَفَٰسِقُونَ
तो क्या वे अज्ञान के युग का निर्णय खोजते हैं?
أَفَحُكۡمَ اَ۬لۡجَٰهِلِيَّةِ يَبۡغُونَۚ
और यक़ीन रखने वाली क़ौम के लिए ईश्वर से बढ़कर निर्णय करने वाला कौन है?
وَمَنۡ أَحۡسَنُ مِنَ اَ۬للَّهِ حُكۡمٗا لِّقَوۡمٖ يُوقِنُونَ
हे विश्वास करने वालो! पुनरुन्मुखों और सहायकों को हिमायती न बनाओ:
۞ يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَتَّخِذُواْ اُ۬لۡيَهُودَ وَاَلنَّصَٰر۪يٰٓ أَوۡلِيَآءَۘ
वे एक-दूसरे के हिमायती हैं।
بَعۡضُهُمۡ أَوۡلِيَآءُ بَعۡضٖۚ
और तुममें से जो उन्हें हिमायती बनाता है, वह तब उन्हीं में से है,
وَمَن يَتَوَلَّهُم مِّنكُمۡ فَإِنَّهُۥ مِنۡهُمۡۗ
क्योंकि ईश्वर अन्यायी क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يَهۡدِي اِ۬لۡقَوۡمَ اَ۬لظَّٰلِمِينَ
तुम उन्हें देखते हो जिनके मर्मों में रोग है, कि वे उनके बीच दौड़ पड़ते हैं, यह कहते हुए: “हमें भय है कि कोई उलटफेर हम पर आ पड़े”;
فَتَرَى اَ۬لَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٞ يُسَٰرِعُونَ فِيهِمۡ يَقُولُونَ نَخۡشَىٰٓ أَن تُصِيبَنَا دَآئِرَةٞۚ
तब संभव है कि ईश्वर खुलाव ले आए, या अपनी ओर से कोई आदेश, और वे उस बात पर जो वे अपने भीतर गुप्त रखते थे, पछतावे से भर जाएँ।
فَعَسَى اَ۬للَّهُ أَن يَأۡتِيَ بِالۡفَتۡحِ أَوۡ أَمۡرٖ مِّنۡ عِندِهِۦ فَيُصۡبِحُواْ عَلَىٰ مَآ أَسَرُّواْ فِيٓ أَنفُسِهِمۡ نَٰدِمِينَ
और जिन्होंने विश्वास किया वे कहेंगे: “क्या ये वही हैं जो ईश्वर की शपथ खाते थे, अपनी शपथों की पूरी शक्ति से, कि वे अवश्य तुम्हारे साथ हैं?” उनके कर्म ढह गए, और वे घाटा उठाने वाले हो गए।
وَيَقُولَ اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَهَٰٓؤُلَآءِ اِ۬لَّذِينَ أَقۡسَمُواْ بِاللَّهِ جَهۡدَ أَيۡمَٰنِهِمۡ إِنَّهُمۡ لَمَعَكُمۡۚ حَبِطَتۡ أَعۡمَٰلُهُمۡ فَأَصۡبَحُواْ خَٰسِرِينَ
हे विश्वास करने वालो! तुममें से जो अपने विधान से फिर जाए — ईश्वर एक ऐसी क़ौम ले आएगा जिससे वह प्रेम करता है और जो उससे प्रेम करती है, विश्वास करने वालों के सामने विनम्र, नकारने वालों के सामने शक्तिशाली, ईश्वर की राह में संघर्ष करती हुई, और किसी दोषारोपण करने वाले के दोषारोपण से न डरती हुई।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ مَن يَرۡتَدَّ مِنكُمۡ عَن دِينِهِۦ فَسَوۡفَ يَأۡتِي اِ۬للَّهُ بِقَوۡمٖ يُحِبُّهُمۡ وَيُحِبُّونَهُۥٓ أَذِلَّةٍ عَلَى اَ۬لۡمُؤۡمِنِينَ أَعِزَّةٍ عَلَى اَ۬لۡكٰ۪فِرِينَ يُجَٰهِدُونَ فِي سَبِيلِ اِ۬للَّهِ وَلَا يَخَافُونَ لَوۡمَةَ لَآئِمٖۚ
यह ईश्वर का अनुग्रह है, जो वह उसे देता है जिस पर उसकी मर्ज़ी हो।
ذَٰلِكَ فَضۡلُ اُ۬للَّهِ يُؤۡتِيهِ مَن يَشَآءُۚ
ईश्वर विस्तृत, सर्वज्ञ है।
وَاَللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٌ
तुम्हारा हिमायती केवल ईश्वर है, और उसका संदेशवाहक, और वे जिन्होंने विश्वास किया, जो संपर्क बनाए रखते हैं और शुद्ध उदारता देते हैं, घुटने टेकते हुए।
إِنَّمَا وَلِيُّكُمُ اُ۬للَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَاَلَّذِينَ ءَامَنُواْ اُ۬لَّذِينَ يُقِيمُونَ اَ۬لصَّلَوٰةَ وَيُؤۡتُونَ اَ۬لزَّكَوٰةَ وَهُمۡ رَٰكِعُونَ
और जो ईश्वर, उसके संदेशवाहक और विश्वास करने वालों को हिमायती बनाता है — ईश्वर का दल ही विजेता है।
وَمَن يَتَوَلَّ اَ۬للَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَاَلَّذِينَ ءَامَنُواْ فَإِنَّ حِزۡبَ اَ۬للَّهِ هُمُ اُ۬لۡغَٰلِبُونَ
हे विश्वास करने वालो! उन्हें हिमायती न बनाओ जिन्होंने तुम्हारे विधान को मज़ाक़ और खेल बना लिया, उनमें से जिन्हें तुमसे पहले ग्रंथ दिया गया, और उन्हें भी जो नकारते हैं।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَتَّخِذُواْ اُ۬لَّذِينَ اَ۪تَّخَذُواْ دِينَكُمۡ هُزُؤٗا وَلَعِبٗا مِّنَ اَ۬لَّذِينَ أُوتُواْ اُ۬لۡكِتَٰبَ مِن قَبۡلِكُمۡ وَاَلۡكُفّ۪ارِ أَوۡلِيَآءَۚ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।
وَاَتَّقُواْ اُ۬للَّهَ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ
और जब तुम संपर्क के लिए पुकारते हो, तो वे उसे मज़ाक़ और खेल बना लेते हैं:
وَإِذَا نَادَيۡتُمۡ إِلَى اَ۬لصَّلَوٰةِ اِ۪تَّخَذُوهَا هُزُؤٗا وَلَعِبٗاۚ
यह इसलिए कि वे ऐसी क़ौम हैं जो बुद्धि से काम नहीं लेती।
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمۡ قَوۡمٞ لَّا يَعۡقِلُونَ
कहो: “हे ग्रंथ वालो! क्या तुम हमसे इसके सिवा किसी और बात पर नाराज़ हो कि हमने ईश्वर पर विश्वास किया, उस पर जो हमारी ओर उतारा गया और उस पर जो पहले उतारा गया, और यह कि तुममें से अधिकतर अतिक्रमणकारी हैं?”
۞ قُلۡ يَٰٓأَهۡلَ اَ۬لۡكِتَٰبِ هَلۡ تَنقِمُونَ مِنَّآ إِلَّآ أَنۡ ءَامَنَّا بِاللَّهِ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡنَا وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبۡلُ وَأَنَّ أَكۡثَرَكُمۡ فَٰسِقُونَ
कहो: “क्या मैं तुम्हें ईश्वर के यहाँ इससे बुरे प्रतिदान की सूचना दूँ? वह जिसे ईश्वर ने धिक्कारा, जिस पर वह क्रोधित हुआ, और जिनमें से उसने बंदर और सूअर बना दिए, और जिसने मर्यादाहीन की आज्ञा का पालन किया —
قُلۡ هَلۡ أُنَبِّئُكُم بِشَرّٖ مِّن ذَٰلِكَ مَثُوبَةً عِندَ اَ۬للَّهِۚ مَن لَّعَنَهُ اُ۬للَّهُ وَغَضِبَ عَلَيۡهِ وَجَعَلَ مِنۡهُمُ اُ۬لۡقِرَدَةَ وَاَلۡخَنَازِيرَ وَعَبَدَ اَ۬لطَّٰغُوتَۚ
वही सबसे बुरे स्थान में हैं, और ठीक राह से सबसे अधिक भटके हुए हैं।”
أُوْلَٰٓئِكَ شَرّٞ مَّكَانٗا وَأَضَلُّ عَن سَوَآءِ اِ۬لسَّبِيلِ
और जब वे तुम्हारे पास आते हैं, तो कहते हैं: “हमने विश्वास किया” — जबकि वे नकार के साथ प्रवेश कर चुके हैं, और उसी के साथ निकल चुके हैं।
وَإِذَا جَآءُوكُمۡ قَالُوٓاْ ءَامَنَّا وَقَد دَّخَلُواْ بِالۡكُفۡرِ وَهُمۡ قَدۡ خَرَجُواْ بِهِۦۚ
ईश्वर सबसे अच्छी तरह जानता है जो वे दबा रखते थे।
وَاَللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا كَانُواْ يَكۡتُمُونَ
और तुम उनमें से बहुतों को अपराध, शत्रुता और वर्जित कमाई खाने में दौड़ते देखते हो।
وَتَر۪يٰ كَثِيرٗا مِّنۡهُمۡ يُسَٰرِعُونَ فِي اِ۬لۡإِثۡمِ وَاَلۡعُدۡوَٰنِ وَأَكۡلِهِمِ اِ۬لسُّحُتَۚ
कितना भयानक है जो वे करते थे!
لَبِئۡسَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
आध्यात्मिक स्वामी और लेखज्ञ उन्हें अपराधपूर्ण बातें कहने और वर्जित कमाई खाने से क्यों नहीं रोकते!
لَوۡلَا يَنۡهَىٰهُمُ اُ۬لرَّبَّٰنِيُّونَ وَاَلۡأَحۡبَارُ عَن قَوۡلِهِمِ اِ۬لۡإِثۡمَ وَأَكۡلِهِمِ اِ۬لسُّحُتَۚ
कितना भयानक है जो वे करते थे!
لَبِئۡسَ مَا كَانُواْ يَصۡنَعُونَ
और पुनरुन्मुखों ने कहा: “ईश्वर का हाथ बँधा हुआ है।”
وَقَالَتِ اِ۬لۡيَهُودُ يَدُ اُ۬للَّهِ مَغۡلُولَةٌۚ
उनके हाथ बाँध दिए जाएँ, और जो उन्होंने कहा उसके कारण वे धिक्कारे जाएँ!
غُلَّتۡ أَيۡدِيهِمۡ وَلُعِنُواْ بِمَا قَالُواْۘ
नहीं, उसके दोनों हाथ पूरे खुले हैं: वह जैसी उसकी मर्ज़ी हो, ख़र्च करता है।
بَلۡ يَدَاهُ مَبۡسُوطَتَانِ يُنفِقُ كَيۡفَ يَشَآءُۚ
और जो तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम पर उतारा गया, वह अवश्य उनमें से बहुतों में मर्यादाहीनता और नकार बढ़ाएगा।
وَلَيَزِيدَنَّ كَثِيرٗا مِّنۡهُم مَّآ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَ طُغۡيَٰنٗا وَكُفۡرٗاۚ
और हमने पेशी के दिन तक उनके बीच शत्रुता और घृणा डाल दी है।
وَأَلۡقَيۡنَا بَيۡنَهُمُ اُ۬لۡعَدَٰوَةَ وَاَلۡبَغۡضَآءَ ا۪لَىٰ يَوۡمِ اِ۬لۡقِيَٰمَةِۚ
जब-जब वे युद्ध के लिए आग जलाते हैं, ईश्वर उसे बुझा देता है,
كُلَّمَآ أَوۡقَدُواْ نَارٗا لِّلۡحَرۡبِ أَطۡفَأَهَا اَ۬للَّهُۚ
और वे धरती पर बिगाड़ फैलाने में लगे रहते हैं।
وَيَسۡعَوۡنَ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ فَسَادٗاۚ
ईश्वर बिगाड़ने वालों से प्रेम नहीं करता।
وَاَللَّهُ لَا يُحِبُّ اُ۬لۡمُفۡسِدِينَ
और यदि ग्रंथ वाले विश्वास करते और सावधान रहते, तो हम निश्चय ही उनके बुरे कर्म ढक देते, और निश्चय ही उन्हें उपकार के उद्यानों में प्रवेश कराते।
وَلَوۡ أَنَّ أَهۡلَ اَ۬لۡكِتَٰبِ ءَامَنُواْ وَاَتَّقَوۡاْ لَكَفَّرۡنَا عَنۡهُمۡ سَيِّـَٔاتِهِمۡ وَلَأَدۡخَلۡنَٰهُمۡ جَنَّٰتِ اِ۬لنَّعِيمِ
और यदि वे तौरात, इंजील और जो उनके अभिभावक की ओर से उनकी ओर उतारा गया उसे बनाए रखते, तो वे निश्चय ही अपने ऊपर से और अपने पैरों के नीचे से खाते।
وَلَوۡ أَنَّهُمۡ أَقَامُواْ اُ۬لتَّوۡر۪ىٰةَ وَاَلۡإِنجِيلَ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡهِم مِّن رَّبِّهِمۡ لَأَكَلُواْ مِن فَوۡقِهِمۡ وَمِن تَحۡتِ أَرۡجُلِهِمۚ
उनमें एक संतुलित समुदाय है,
مِّنۡهُمۡ أُمَّةٞ مُّقۡتَصِدَةٞۖ
परंतु उनमें से बहुतों का, कितना बुरा है जो वे करते हैं!
وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ سَآءَ مَا يَعۡمَلُونَ
हे संदेशवाहक! जो तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम पर उतारा गया, उसे पहुँचा दो,
۞ يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لرَّسُولُ بَلِّغۡ مَآ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَۖ
और यदि तुमने ऐसा नहीं किया, तो तुमने उसका संदेश नहीं पहुँचाया।
وَإِن لَّمۡ تَفۡعَلۡ فَمَا بَلَّغۡتَ رِسَالَتَهُۥۚ
ईश्वर तुम्हें लोगों से सुरक्षित रखता है,
وَاَللَّهُ يَعۡصِمُكَ مِنَ اَ۬لنّ۪اسِۗ
क्योंकि ईश्वर नकारने वाली क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يَهۡدِي اِ۬لۡقَوۡمَ اَ۬لۡكٰ۪فِرِينَ
कहो: “हे ग्रंथ वालो! तुम किसी आधार पर नहीं हो, जब तक तुम तौरात, इंजील और जो तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम पर उतारा गया उसे बनाए नहीं रखते।”
قُلۡ يَٰٓأَهۡلَ اَ۬لۡكِتَٰبِ لَسۡتُمۡ عَلَىٰ شَيۡءٍ حَتَّىٰ تُقِيمُواْ اُ۬لتَّوۡر۪ىٰةَ وَاَلۡإِنجِيلَ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡكُم مِّن رَّبِّكُمۡۗ
और जो तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम पर उतारा गया, वह अवश्य उनमें से बहुतों में मर्यादाहीनता और नकार बढ़ाएगा।
وَلَيَزِيدَنَّ كَثِيرٗا مِّنۡهُم مَّآ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَ طُغۡيَٰنٗا وَكُفۡرٗاۖ
इसलिए नकारने वाली क़ौम के लिए खेद न करो।
فَلَا تَأۡسَ عَلَى اَ۬لۡقَوۡمِ اِ۬لۡكٰ۪فِرِينَ
निश्चय ही, जिन्होंने विश्वास किया, पुनरुन्मुख, आकांक्षी और सहायक — जिसने ईश्वर और अंतिम दिन पर विश्वास किया, और एक भला कर्म किया, उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।
إِنَّ اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ وَاَلَّذِينَ هَادُواْ وَاَلصَّٰبِـُٔونَ وَاَلنَّصَٰر۪يٰ مَنۡ ءَامَنَ بِاللَّهِ وَاَلۡيَوۡمِ اِ۬لۡأٓخِرِ وَعَمِلَ صَٰلِحٗا فَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ
हमने निश्चय ही इसराईल की संतान की गंभीर प्रतिज्ञा ली, और उनके पास संदेशवाहक भेजे।
لَقَدۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ وَأَرۡسَلۡنَآ إِلَيۡهِمۡ رُسُلٗاۖ
जब-जब कोई संदेशवाहक उनके पास वह लेकर आता जिसकी ओर उनका स्व नहीं झुकता था, तो वे एक भाग को झुठलाते, और दूसरे भाग को मार डालते।
كُلَّمَا جَآءَهُمۡ رَسُولُۢ بِمَا لَا تَهۡوَىٰٓ أَنفُسُهُمۡ فَرِيقٗا كَذَّبُواْ وَفَرِيقٗا يَقۡتُلُونَ
और उन्होंने सोचा कि कोई परीक्षा न होगी; तब वे अंधे और बहरे हो गए; फिर ईश्वर अनुकंपा के साथ उनकी ओर पलटा; फिर वे दोबारा अंधे और बहरे हो गए,
وَحَسِبُوٓاْ أَلَّا تَكُونُ فِتۡنَةٞ فَعَمُواْ وَصَمُّواْ ثُمَّ تَابَ اَ۬للَّهُ عَلَيۡهِمۡ ثُمَّ عَمُواْ وَصَمُّواْ
उनमें से बहुत-से।
كَثِيرٞ مِّنۡهُمۡۚ
ईश्वर उस पर दृष्टि रखता है जो वे करते हैं।
وَاَللَّهُ بَصِيرُۢ بِمَا يَعۡمَلُونَ
निश्चय ही उन्होंने नकारा, जिन्होंने कहा: “ईश्वर ही अल-मसीह है, मरयम का पुत्र।”
لَقَدۡ كَفَرَ اَ۬لَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّ اَ۬للَّهَ هُوَ اَ۬لۡمَسِيحُ اُ۪بۡنُ مَرۡيَمَۖ
और अल-मसीह ने कहा: “हे इसराईल की संतान! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो, जो मेरा अभिभावक और तुम्हारा अभिभावक है।
وَقَالَ اَ۬لۡمَسِيحُ يَٰبَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ اَ۟عۡبُدُواْ اُ۬للَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمۡۖ
जो ईश्वर के साथ साझी ठहराता है, ईश्वर उस पर निश्चय ही उद्यान वर्जित कर देता है, और उसकी शरण आग होगी।”
إِنَّهُۥ مَن يُشۡرِكۡ بِاللَّهِ فَقَدۡ حَرَّمَ اَ۬للَّهُ عَلَيۡهِ اِ۬لۡجَنَّةَ وَمَأۡوَىٰهُ اُ۬لنَّارُۖ
और अन्यायियों के लिए कोई सहायता नहीं।
وَمَا لِلظَّٰلِمِينَ مِنۡ أَنص۪ارٖ
निश्चय ही उन्होंने नकारा, जिन्होंने कहा: “ईश्वर तीन में से तीसरा है।”
لَّقَدۡ كَفَرَ اَ۬لَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّ اَ۬للَّهَ ثَالِثُ ثَلَٰثَةٖۘ
जबकि एक ही देवता के सिवा कोई देवता नहीं।
وَمَا مِنۡ إِلَٰهٍ إِلَّآ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۚ
और यदि वे जो कहते हैं उससे न रुकें, तो उनमें से जिन्होंने नकारा उन्हें पीड़ादायक दंड अवश्य पहुँचेगा।
وَإِن لَّمۡ يَنتَهُواْ عَمَّا يَقُولُونَ لَيَمَسَّنَّ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ مِنۡهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٌ
तो क्या वे ईश्वर की ओर पलट नहीं आएँगे, और उससे क्षमा नहीं माँगेंगे?
أَفَلَا يَتُوبُونَ إِلَى اَ۬للَّهِ وَيَسۡتَغۡفِرُونَهُۥۚ
और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَاَللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ
अल-मसीह, मरयम का पुत्र, केवल एक संदेशवाहक है; उससे पहले संदेशवाहक बीत चुके हैं,
۞ مَّا اَ۬لۡمَسِيحُ اُ۪بۡنُ مَرۡيَمَ إِلَّا رَسُولٞ قَدۡ خَلَتۡ مِن قَبۡلِهِ اِ۬لرُّسُلُ
और उसकी माँ एक सच्ची स्त्री थी;
وَأُمُّهُۥ صِدِّيقَةٞۖ
वे दोनों भोजन खाते थे।
كَانَا يَأۡكُلَانِ اِ۬لطَّعَامَۗ
नज़र डालो कि हम उनके लिए संकेतों को कैसे विस्तार से बताते हैं, फिर नज़र डालो कि वे कैसे उलटे फेरे जा रहे हैं!
اَ۟نظُرۡ كَيۡفَ نُبَيِّنُ لَهُمُ اُ۬لۡأٓيَٰتِ ثُمَّ اَ۟نظُرۡ أَنّۭيٰ يُؤۡفَكُونَ
कहो: “क्या तुम ईश्वर के अतिरिक्त उसकी आज्ञा का पालन करते हो जो तुम्हारे लिए न हानि का अधिकार रखता है न लाभ का?
قُلۡ أَتَعۡبُدُونَ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ مَا لَا يَمۡلِكُ لَكُمۡ ضَرّٗا وَلَا نَفۡعٗاۚ
जबकि ईश्वर ही सुनने वाला, सर्वज्ञ है।”
وَاَللَّهُ هُوَ اَ۬لسَّمِيعُ اُ۬لۡعَلِيمُ
कहो: “हे ग्रंथ वालो! अपने विधान में सत्य से परे अतिरंजना न करो,
قُلۡ يَٰٓأَهۡلَ اَ۬لۡكِتَٰبِ لَا تَغۡلُواْ فِي دِينِكُمۡ غَيۡرَ اَ۬لۡحَقِّ
और उस क़ौम की भावनाओं का अनुसरण न करो जो पहले भटक चुकी, बहुतों को भटका चुकी, और ठीक राह से भटक गई।”
وَلَا تَتَّبِعُوٓاْ أَهۡوَآءَ قَوۡمٖ قَد ضَّلُّواْ مِن قَبۡلُ وَأَضَلُّواْ كَثِيرٗا وَضَلُّواْ عَن سَوَآءِ اِ۬لسَّبِيلِ
इसराईल की संतान में से जिन्होंने नकारा, वे दाऊद और मरयम के पुत्र ईसा की ज़बान से धिक्कारे गए।
لُعِنَ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ مِنۢ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ عَلَىٰ لِسَانِ دَاوُۥدَ وَعِيسَى اَ۪بۡنِ مَرۡيَمَۚ
यह इसलिए कि उन्होंने अवज्ञा की और सीमाएँ पार कीं।
ذَٰلِكَ بِمَا عَصَواْ وَّكَانُواْ يَعۡتَدُونَ
वे एक-दूसरे को उस अमान्य कार्य से रोकते नहीं थे जो वे करते थे:
كَانُواْ لَا يَتَنَاهَوۡنَ عَن مُّنكَرٖ فَعَلُوهُۚ
कितना भयानक है जो वे करते थे!
لَبِئۡسَ مَا كَانُواْ يَفۡعَلُونَ
तुम उनमें से बहुतों को नकारने वालों को हिमायती बनाते देखते हो:
تَر۪يٰ كَثِيرٗا مِّنۡهُمۡ يَتَوَلَّوۡنَ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْۚ
कितना भयानक है जो उनके स्व ने उनके लिए आगे बढ़ाया! ईश्वर उन पर क्रुद्ध हुआ, और वे दंड में सदा रहने वाले हैं।
لَبِئۡسَ مَا قَدَّمَتۡ لَهُمۡ أَنفُسُهُمۡ أَن سَخِطَ اَ۬للَّهُ عَلَيۡهِمۡ وَفِي اِ۬لۡعَذَابِ هُمۡ خَٰلِدُونَ
और यदि वे ईश्वर, सूचनादाता, और जो उस पर उतारा गया उस पर विश्वास करते, तो उन्हें हिमायती न बनाते;
وَلَوۡ كَانُواْ يُؤۡمِنُونَ بِاللَّهِ وَاَلنَّبِيِّ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡهِ مَا اَ۪تَّخَذُوهُمۡ أَوۡلِيَآءَ
परंतु उनमें से बहुत-से अतिक्रमणकारी हैं।
وَلَٰكِنَّ كَثِيرٗا مِّنۡهُمۡ فَٰسِقُونَ
तुम अवश्य पाओगे कि लोगों में विश्वास करने वालों के प्रति सबसे अधिक शत्रुतापूर्ण पुनरुन्मुख हैं और वे जिन्होंने साझी ठहराया,
لَتَجِدَنَّ أَشَدَّ اَ۬لنّ۪اسِ عَدَٰوَةٗ لِّلَّذِينَ ءَامَنُواْ اُ۬لۡيَهُودَ وَاَلَّذِينَ أَشۡرَكُواْۖ
और तुम अवश्य पाओगे कि विश्वास करने वालों के प्रति स्नेह में सबसे निकट वे हैं जो कहते हैं: “हम निश्चय ही सहायक हैं।”
وَلَتَجِدَنَّ أَقۡرَبَهُم مَّوَدَّةٗ لِّلَّذِينَ ءَامَنُواْ اُ۬لَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّا نَصَٰر۪يٰۚ
यह इसलिए कि उनमें पुरोहित और आदरणीय हैं, और वे घमंड से नहीं फूलते।
ذَٰلِكَ بِأَنَّ مِنۡهُمۡ قِسِّيسِينَ وَرُهۡبَانٗا وَأَنَّهُمۡ لَا يَسۡتَكۡبِرُونَ
और जब वे सुनते हैं जो संदेशवाहक पर उतारा गया, तो तुम उनकी आँखों को आँसुओं से छलकते देखते हो, क्योंकि उन्होंने सत्य को पहचान लिया; वे कहते हैं: “हमारे अभिभावक, हमने विश्वास किया; इसलिए आप हमें साक्षियों में लिख लें।
۞ وَإِذَا سَمِعُواْ مَآ أُنزِلَ إِلَى اَ۬لرَّسُولِ تَر۪يٰٓ أَعۡيُنَهُمۡ تَفِيضُ مِنَ اَ۬لدَّمۡعِ مِمَّا عَرَفُواْ مِنَ اَ۬لۡحَقِّۖ يَقُولُونَ رَبَّنَآ ءَامَنَّا فَاَكۡتُبۡنَا مَعَ اَ۬لشَّٰهِدِينَ
और हमें क्या हुआ है कि हम ईश्वर पर और उस पर जो हमारे पास सत्य में से आया है विश्वास न करें, जबकि हम इसकी आकांक्षा रखते हैं कि हमारा अभिभावक हमें भली क़ौम के साथ प्रवेश कराए?”
وَمَا لَنَا لَا نُؤۡمِنُ بِاللَّهِ وَمَا جَآءَنَا مِنَ اَ۬لۡحَقِّ وَنَطۡمَعُ أَن يُدۡخِلَنَا رَبُّنَا مَعَ اَ۬لۡقَوۡمِ اِ۬لصَّٰلِحِينَ
तब ईश्वर ने उन्हें, उनके कहने के प्रतिदान में, ऐसे उद्यान दिए जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा रहेंगे।
فَأَثَٰبَهُمُ اُ۬للَّهُ بِمَا قَالُواْ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا اَ۬لۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ
और यही भलाई करने वालों का प्रतिफल है।
وَذَٰلِكَ جَزَآءُ اُ۬لۡمُحۡسِنِينَ
और जिन्होंने नकारा और हमारे संकेतों को झुठलाया — वही भट्ठी वाले हैं।
وَاَلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَآ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ اُ۬لۡجَحِيمِ
हे विश्वास करने वालो! उन अच्छी चीज़ों को वर्जित न ठहराओ जिन्हें ईश्वर ने तुम्हारे लिए वैध किया, और सीमाएँ पार न करो,
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تُحَرِّمُواْ طَيِّبَٰتِ مَآ أَحَلَّ اَ۬للَّهُ لَكُمۡ وَلَا تَعۡتَدُوٓاْۚ
क्योंकि ईश्वर सीमाएँ पार करने वालों से प्रेम नहीं करता।
إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يُحِبُّ اُ۬لۡمُعۡتَدِينَ
और उसमें से खाओ जो ईश्वर ने तुम्हें जीविका दी, जो वैध और अच्छा है,
وَكُلُواْ مِمَّا رَزَقَكُمُ اُ۬للَّهُ حَلَٰلٗا طَيِّبٗاۚ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, जिस पर तुम विश्वास करते हो।
وَاَتَّقُواْ اُ۬للَّهَ اَ۬لَّذِيٓ أَنتُم بِهِۦ مُؤۡمِنُونَ
ईश्वर तुम्हें तुम्हारी शपथों की निरर्थकता पर नहीं पकड़ेगा,
لَا يُؤَاخِذُكُمُ اُ۬للَّهُ بِاللَّغۡوِ فِيٓ أَيۡمَٰنِكُمۡ
परंतु वह तुम्हें उन शपथों पर पकड़ेगा जो तुमने पक्की की हैं।
وَلَٰكِن يُؤَاخِذُكُم بِمَا عَقَّدتُّمُ اُ۬لۡأَيۡمَٰنَۖ
उसका प्रायश्चित है दस दरिद्रों को भोजन कराना, उस सबसे अच्छे भोजन में से जो तुम अपने परिवारों को खिलाते हो, या उन्हें वस्त्र पहनाना, या ऋण में बँधे एक व्यक्ति को स्वतंत्र करना;
فَكَفَّٰرَتُهُۥٓ إِطۡعَامُ عَشَرَةِ مَسَٰكِينَ مِنۡ أَوۡسَطِ مَا تُطۡعِمُونَ أَهۡلِيكُمۡ أَوۡ كِسۡوَتُهُمۡ أَوۡ تَحۡرِيرُ رَقَبَةٖۖ
और जो इसके साधन न पाए, तो तीन दिन का संयम।
فَمَن لَّمۡ يَجِدۡ فَصِيَامُ ثَلَٰثَةِ أَيَّامٖۚ
यह तुम्हारी शपथों का प्रायश्चित है, जब तुम शपथ खाओ।
ذَٰلِكَ كَفَّٰرَةُ أَيۡمَٰنِكُمۡ إِذَا حَلَفۡتُمۡۚ
और अपनी शपथों को सुरक्षित रखो।
وَاَحۡفَظُوٓاْ أَيۡمَٰنَكُمۡۚ
इसी प्रकार ईश्वर तुम्हारे लिए अपने संकेत स्पष्ट करता है, शायद तुम कृतज्ञ हो जाओ।
كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اُ۬للَّهُ لَكُمۡ ءَايَٰتِهِۦ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ
हे विश्वास करने वालो! मदिरा और जुए का संयोजन, और साझी संपत्ति का चिट्ठी डालकर बँटवारा, केवल एक गंदगी हैं, बहकाने वाले का काम; इसलिए उनसे दूर रहो, शायद तुम सफल हो जाओ।
۞ يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِنَّمَا اَ۬لۡخَمۡرُ وَاَلۡمَيۡسِرُ وَاَلۡأَنصَابُ وَاَلۡأَزۡلَٰمُ رِجۡسٞ مِّنۡ عَمَلِ اِ۬لشَّيۡطَٰنِ فَاَجۡتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ
बहकाने वाला केवल यह चाहता है कि मदिरा और जुए के द्वारा तुम्हारे बीच शत्रुता और घृणा डाल दे, और ईश्वर के स्मरण और संपर्क तक तुम्हारी पहुँच रोक दे।
إِنَّمَا يُرِيدُ اُ۬لشَّيۡطَٰنُ أَن يُوقِعَ بَيۡنَكُمُ اُ۬لۡعَدَٰوَةَ وَاَلۡبَغۡضَآءَ فِي اِ۬لۡخَمۡرِ وَاَلۡمَيۡسِرِ وَيَصُدَّكُمۡ عَن ذِكۡرِ اِ۬للَّهِ وَعَنِ اِ۬لصَّلَوٰةِۖ
तो क्या तुम रुकोगे?
فَهَلۡ أَنتُم مُّنتَهُونَ
और ईश्वर की बात मानो, और संदेशवाहक की बात मानो, और सतर्क रहो।
وَأَطِيعُواْ اُ۬للَّهَ وَأَطِيعُواْ اُ۬لرَّسُولَ وَاَحۡذَرُواْۚ
परंतु यदि तुम पीठ फेर लो, तो जान लो कि हमारे संदेशवाहक पर केवल स्पष्ट संप्रेषण का दायित्व है।
فَإِن تَوَلَّيۡتُمۡ فَاَعۡلَمُوٓاْ أَنَّمَا عَلَىٰ رَسُولِنَا اَ۬لۡبَلَٰغُ اُ۬لۡمُبِينُ
उन पर कोई आक्षेप नहीं जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, उसके लिए जो उन्होंने खाया, जब वे सावधान रहे, विश्वास किया और भले कर्म किए, फिर सावधान रहे और विश्वास किया, फिर सावधान रहे और भलाई की।
لَيۡسَ عَلَى اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ جُنَاحٞ فِيمَا طَعِمُوٓاْ إِذَا مَا اَ۪تَّقَواْ وَّءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ ثُمَّ اَ۪تَّقَواْ وَّءَامَنُواْ ثُمَّ اَ۪تَّقَواْ وَّأَحۡسَنُواْۗ
ईश्वर भलाई करने वालों से प्रेम करता है।
وَاَللَّهُ يُحِبُّ اُ۬لۡمُحۡسِنِينَ
हे विश्वास करने वालो! ईश्वर अवश्य किसी ऐसे शिकार से तुम्हें परखेगा जो तुम्हारे हाथों और तुम्हारे भालों में आएगा, ताकि ईश्वर पहचान ले कि कौन उससे डरता है, भले ही वह उसकी इंद्रियों से परे है।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ لَيَبۡلُوَنَّكُمُ اُ۬للَّهُ بِشَيۡءٖ مِّنَ اَ۬لصَّيۡدِ تَنَالُهُۥٓ أَيۡدِيكُمۡ وَرِمَاحُكُمۡ لِيَعۡلَمَ اَ۬للَّهُ مَن يَخَافُهُۥ بِالۡغَيۡبِۚ
जो इसके बाद सीमाएँ पार करे, उसके लिए पीड़ादायक दंड है।
فَمَنِ اِ۪عۡتَدَىٰ بَعۡدَ ذَٰلِكَ فَلَهُۥ عَذَابٌ أَلِيمٞ
हे विश्वास करने वालो! अलंघनीयता की अवस्था में रहते हुए शिकार न मारो।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَقۡتُلُواْ اُ۬لصَّيۡدَ وَأَنتُمۡ حُرُمٞۚ
और तुममें से जो उसे जानबूझकर मारे, तो पशुधन में से उसके समान का प्रतिफल, जिसका निर्णय तुममें से दो न्यायी व्यक्ति करेंगे, एक उपहार के रूप में जो उच्चारण-स्थल तक पहुँचे, या दरिद्रों को भोजन कराने का प्रायश्चित, या उसके समान संयम, ताकि वह अपने आचरण के बुरे परिणाम चखे।
وَمَن قَتَلَهُۥ مِنكُم مُّتَعَمِّدٗا فَجَزَآءُ مِثۡلِ مَا قَتَلَ مِنَ اَ۬لنَّعَمِ يَحۡكُمُ بِهِۦ ذَوَا عَدۡلٖ مِّنكُمۡ هَدۡيَۢا بَٰلِغَ اَ۬لۡكَعۡبَةِ أَوۡ كَفَّٰرَةٞ طَعَامُ مَسَٰكِينَ أَوۡ عَدۡلُ ذَٰلِكَ صِيَامٗا لِّيَذُوقَ وَبَالَ أَمۡرِهِۦۗ
ईश्वर ने उस पर दरगुज़र किया जो बीत चुका;
عَفَا اَ۬للَّهُ عَمَّا سَلَفَۚ
परंतु जो फिर वही करे, ईश्वर उससे बदला लेगा।
وَمَنۡ عَادَ فَيَنتَقِمُ اُ۬للَّهُ مِنۡهُۗ
ईश्वर सर्वशक्तिमान, प्रतिशोध वाला है।
وَاَللَّهُ عَزِيزٞ ذُو اُ۪نتِقَامٍ
तुम्हारे लिए समुद्र का शिकार और उसका भोजन वैध किया गया है,
أُحِلَّ لَكُمۡ صَيۡدُ اُ۬لۡبَحۡرِ وَطَعَامُهُۥ
तुम्हारे और क़ाफ़िलों के उपभोग के लिए;
مَتَٰعٗا لَّكُمۡ وَلِلسَّيَّارَةِۖ
परंतु जब तक तुम अलंघनीयता की अवस्था में रहो, थल का शिकार तुम्हारे लिए वर्जित है।
وَحُرِّمَ عَلَيۡكُمۡ صَيۡدُ اُ۬لۡبَرِّ مَا دُمۡتُمۡ حُرُمٗاۗ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, जिसकी ओर तुम इकट्ठा किए जाओगे।
وَاَتَّقُواْ اُ۬للَّهَ اَ۬لَّذِيٓ إِلَيۡهِ تُحۡشَرُونَ
ईश्वर ने उच्चारण-स्थल, अलंघनीय घर, को लोगों के लिए बने रहने का आधार बनाया, साथ ही अलंघनीय महीने को, स्वैच्छिक उपहारों को, और मन्नत के अर्पणों को।
۞ جَعَلَ اَ۬للَّهُ اُ۬لۡكَعۡبَةَ اَ۬لۡبَيۡتَ اَ۬لۡحَرَامَ قِيَٰمٗا لِّلنّ۪اسِ وَاَلشَّهۡرَ اَ۬لۡحَرَامَ وَاَلۡهَدۡيَ وَاَلۡقَلَٰٓئِدَۚ
यह इसलिए कि तुम जान लो कि ईश्वर जानता है जो आकाशों में है और जो धरती पर है, और यह कि ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।
ذَٰلِكَ لِتَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ يَعۡلَمُ مَا فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي اِ۬لۡأَرۡضِ وَأَنَّ اَ۬للَّهَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٌ
जान लो कि ईश्वर सज़ा देने में कठोर है, और यह कि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
اِ۪عۡلَمُوٓاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ شَدِيدُ اُ۬لۡعِقَابِ وَأَنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ
संदेशवाहक पर केवल संप्रेषण का दायित्व है।
مَّا عَلَى اَ۬لرَّسُولِ إِلَّا اَ۬لۡبَلَٰغُۗ
ईश्वर जानता है जो तुम सामने लाते हो और जो तुम दबा रखते हो।
وَاَللَّهُ يَعۡلَمُ مَا تُبۡدُونَ وَمَا تَكۡتُمُونَ
कहो: “नीच और अच्छा समान नहीं हैं, भले ही नीच की बहुतायत तुम्हें चकित करे।”
قُل لَّا يَسۡتَوِي اِ۬لۡخَبِيثُ وَاَلطَّيِّبُ وَلَوۡ أَعۡجَبَكَ كَثۡرَةُ اُ۬لۡخَبِيثِۚ
इसलिए ईश्वर के प्रति सावधान रहो, हे मेधा रखने वालो, शायद तुम सफल हो जाओ।
فَاَتَّقُواْ اُ۬للَّهَ يَٰٓأُوْلِي اِ۬لۡأَلۡبَٰبِ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ
हे विश्वास करने वालो! उन चीज़ों के बारे में प्रश्न न पूछो जो, यदि तुम्हारे सामने आ जाएँ, तो तुम्हें बुरी लगें।
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَسۡـَٔلُواْ عَنۡ أَشۡيَآءَ ا۪ن تُبۡدَ لَكُمۡ تَسُؤۡكُمۡ
और यदि तुम उन्हें तब पूछो जब यह पाठ उतारा जा रहा हो, तो वे तुम्हारे सामने आ जाएँगी। ईश्वर ने उस पर दरगुज़र किया।
وَإِن تَسۡـَٔلُواْ عَنۡهَا حِينَ يُنزَلُ اُ۬لۡقُرۡءَانُ تُبۡدَ لَكُمۡ عَفَا اَ۬للَّهُ عَنۡهَاۗ
ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, सहनशील है।
وَاَللَّهُ غَفُورٌ حَلِيمٞ
तुमसे पहले एक क़ौम ने उन्हें पूछा, फिर वह उनके कारण नकारने वाली क़ौम बन गई।
قَد سَّأَلَهَا قَوۡمٞ مِّن قَبۡلِكُمۡ ثُمَّ أَصۡبَحُواْ بِهَا كٰ۪فِرِينَ
ईश्वर ने न बहीरा ठहराया, न साइबा, न वसीला, न हाम,
مَا جَعَلَ اَ۬للَّهُ مِنۢ بَحِيرَةٖ وَلَا سَآئِبَةٖ وَلَا وَصِيلَةٖ وَلَا حَامٖ
परंतु जो नकारते हैं वे ईश्वर पर झूठ गढ़ते हैं, और उनमें से अधिकतर बुद्धि से काम नहीं लेते।
وَلَٰكِنَّ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ يَفۡتَرُونَ عَلَى اَ۬للَّهِ اِ۬لۡكَذِبَۖ وَأَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡقِلُونَ
और जब उनसे कहा जाता है: “उसकी ओर आओ जो ईश्वर ने उतारा, और संदेशवाहक की ओर,” तो वे कहते हैं: “हमारे लिए वही पर्याप्त है जिस पर हमने अपने पूर्वजों को पाया।”
وَإِذَا قِيلَ لَهُمۡ تَعَالَوۡاْ إِلَىٰ مَآ أَنزَلَ اَ۬للَّهُ وَإِلَى اَ۬لرَّسُولِ قَالُواْ حَسۡبُنَا مَا وَجَدۡنَا عَلَيۡهِ ءَابَآءَنَآۚ
क्या! चाहे उनके पूर्वज कुछ न जानते हों और मार्गदर्शन न पाते हों?
أَوَلَوۡ كَانَ ءَابَآؤُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ شَيۡـٔٗا وَلَا يَهۡتَدُونَ
हे विश्वास करने वालो! अपना ध्यान रखो:
يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ عَلَيۡكُمۡ أَنفُسَكُمۡۖ
जो भटकता है वह तुम्हें हानि नहीं पहुँचा सकता, जब तक तुम मार्गदर्शन पाते रहो।
لَا يَضُرُّكُم مَّن ضَلَّ إِذَا اَ۪هۡتَدَيۡتُمۡۚ
तुम सबका लौटना ईश्वर ही की ओर है, और वह तुम्हें सूचित करेगा कि तुम क्या करते थे।
إِلَى اَ۬للَّهِ مَرۡجِعُكُمۡ جَمِيعٗا فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ
हे विश्वास करने वालो! तुम्हारे बीच साक्ष्य, जब तुममें से किसी के पास मृत्यु आए, वसीयत के समय: तुममें से दो न्यायी व्यक्ति, या तुमसे बाहर के दो अन्य, यदि तुम धरती पर घूम रहे हो और मृत्यु की विपत्ति तुम पर आ पड़े।
۞ يَٰٓأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ شَهَٰدَةُ بَيۡنِكُمۡ إِذَا حَضَرَ أَحَدَكُمُ اُ۬لۡمَوۡتُ حِينَ اَ۬لۡوَصِيَّةِ اِ۪ثۡنَانِ ذَوَا عَدۡلٖ مِّنكُمۡ أَوۡ ءَاخَرَانِ مِنۡ غَيۡرِكُمۡ إِنۡ أَنتُمۡ ضَرَبۡتُمۡ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ فَأَصَٰبَتۡكُم مُّصِيبَةُ اُ۬لۡمَوۡتِۚ
तुम उन दोनों को संपर्क के बाद रोके रखोगे, और वे दोनों ईश्वर की शपथ खाएँगे, यदि तुम्हें संदेह हो: “हम इसके बदले किसी भी मूल्य पर कुछ नहीं ख़रीदेंगे, चाहे वह निकट का संबंधी ही हो,
تَحۡبِسُونَهُمَا مِنۢ بَعۡدِ اِ۬لصَّلَوٰةِ فَيُقۡسِمَانِ بِاللَّهِ إِنِ اِ۪رۡتَبۡتُمۡ لَا نَشۡتَرِي بِهِۦ ثَمَنٗا وَلَوۡ كَانَ ذَا قُرۡبۭيٰ
और हम ईश्वर का साक्ष्य नहीं दबाएँगे; तब हम अवश्य अपराध करने वालों में से होंगे।”
وَلَا نَكۡتُمُ شَهَٰدَةَ اَ۬للَّهِ إِنَّآ إِذٗا لَّمِنَ اَ۬لۡأٓثِمِينَ
परंतु यदि पता चले कि उन दोनों ने अपराध किया है, तो उनकी जगह दो और खड़े होंगे, उनमें से जिनका अधिकार छीना गया, दो निकटतम, और वे दोनों शपथ खाएँगे
فَإِنۡ عُثِرَ عَلَىٰٓ أَنَّهُمَا اَ۪سۡتَحَقَّآ إِثۡمٗا فَـَٔاخَرَانِ يَقُومَانِ مَقَامَهُمَا مِنَ اَ۬لَّذِينَ اَ۟سۡتُحِقَّ عَلَيۡهِمِ اِ۬لۡأَوۡلَيَٰنِ فَيُقۡسِمَانِ
ईश्वर की: “हमारा साक्ष्य उनके साक्ष्य से निश्चय ही अधिक हक़ पर आधारित है, और हमने सीमाएँ पार नहीं कीं;
بِاللَّهِ لَشَهَٰدَتُنَآ أَحَقُّ مِن شَهَٰدَتِهِمَا وَمَا اَ۪عۡتَدَيۡنَآ
तब हम अवश्य अन्यायियों में से होंगे।”
إِنَّآ إِذٗا لَّمِنَ اَ۬لظَّٰلِمِينَ
यह साक्ष्य को उसके उचित रूप में देने के अधिक निकट है, या उनके इस डर के कि उनकी शपथों के बाद दूसरी शपथें वापस कर दी जाएँगी।
ذَٰلِكَ أَدۡنَىٰٓ أَن يَأۡتُواْ بِالشَّهَٰدَةِ عَلَىٰ وَجۡهِهَآ أَوۡ يَخَافُوٓاْ أَن تُرَدَّ أَيۡمَٰنُۢ بَعۡدَ أَيۡمَٰنِهِمۡۗ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो,
وَاَتَّقُواْ اُ۬للَّهَ
और सुनो।
وَاَسۡمَعُواْۗ
और ईश्वर अतिक्रमणकारियों की क़ौम को मार्ग नहीं दिखाता।
وَاَللَّهُ لَا يَهۡدِي اِ۬لۡقَوۡمَ اَ۬لۡفَٰسِقِينَ
जिस दिन ईश्वर संदेशवाहकों को एकत्र करेगा, और कहेगा: “तुम्हें क्या उत्तर दिया गया?”
يَوۡمَ يَجۡمَعُ اُ۬للَّهُ اُ۬لرُّسُلَ فَيَقُولُ مَاذَآ أُجِبۡتُمۡۖ
वे कहेंगे: “हमें इसका कोई ज्ञान नहीं; निश्चय ही आप ही जो इंद्रियों से परे है उसे पूरी तरह जानने वाले हैं।”
قَالُواْ لَا عِلۡمَ لَنَآۖ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ اُ۬لۡغُيُوبِ
जब ईश्वर कहेगा: “हे ईसा, मरयम के पुत्र! अपने ऊपर और अपनी माँ पर मेरे उपकार का स्मरण करो, जब मैंने तुम्हें पवित्र प्रवाह से सुदृढ़ किया, तुम पालने में और प्रौढ़ अवस्था में लोगों से बोलते थे,
إِذۡ قَالَ اَ۬للَّهُ يَٰعِيسَى اَ۪بۡنَ مَرۡيَمَ اَ۟ذۡكُرۡ نِعۡمَتِي عَلَيۡكَ وَعَلَىٰ وَٰلِدَتِكَ إِذۡ أَيَّدتُّكَ بِرُوحِ اِ۬لۡقُدُسِ تُكَلِّمُ اُ۬لنَّاسَ فِي اِ۬لۡمَهۡدِ وَكَهۡلٗاۖ
और जब मैंने तुम्हें संहिता, प्रज्ञा, तौरात और इंजील सिखाई;
وَإِذۡ عَلَّمۡتُكَ اَ۬لۡكِتَٰبَ وَاَلۡحِكۡمَةَ وَاَلتَّوۡر۪ىٰةَ وَاَلۡإِنجِيلَۖ
और जब तुम मेरी अनुमति से मिट्टी में पक्षी का रूप रचते थे, फिर उसमें फूँकते थे, और वह मेरी अनुमति से पक्षी बन जाता था;
وَإِذ تَّخۡلُقُ مِنَ اَ۬لطِّينِ كَهَيۡـَٔةِ اِ۬لطَّيۡرِ بِإِذۡنِي فَتَنفُخُ فِيهَا فَتَكُونُ طَيۡرَۢا بِإِذۡنِيۖ
और तुम जन्म से अंधे और कोढ़ी को मेरी अनुमति से स्वस्थ करते थे;
وَتُبۡرِئُ اُ۬لۡأَكۡمَهَ وَاَلۡأَبۡرَصَ بِإِذۡنِيۖ
और जब तुम मेरी अनुमति से मृतकों को निकालते थे;
وَإِذ تُّخۡرِجُ اُ۬لۡمَوۡتۭيٰ بِإِذۡنِيۖ
और जब मैंने इसराईल की संतान को तुमसे रोके रखा, जब तुम उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए, और उनमें से जिन्होंने नकारा उन्होंने कहा: ‘यह तो केवल स्पष्ट भ्रम है।’”
وَإِذۡ كَفَفۡتُ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ عَنكَ إِذ جِّئۡتَهُم بِالۡبَيِّنَٰتِ فَقَالَ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ مِنۡهُمۡ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا سِحۡرٞ مُّبِينٞ
और जब मैंने शिष्यों पर प्रकट किया: “मुझ पर और मेरे संदेशवाहक पर विश्वास करो”;
۞ وَإِذۡ أَوۡحَيۡتُ إِلَى اَ۬لۡحَوَارِيِّـۧنَ أَنۡ ءَامِنُواْ بِي وَبِرَسُولِي
उन्होंने कहा: “हम विश्वास करते हैं, और साक्षी रहो कि हम ईश्वर के प्रति खरे हैं।”
قَالُوٓاْ ءَامَنَّا وَاَشۡهَدۡ بِأَنَّنَا مُسۡلِمُونَ
जब शिष्यों ने कहा: “हे ईसा, मरयम के पुत्र! क्या तुम अपने अभिभावक से कह सकते हो कि वह हम पर आकाश से एक मेज़ उतारे?”
إِذۡ قَالَ اَ۬لۡحَوَارِيُّونَ يَٰعِيسَى اَ۪بۡنَ مَرۡيَمَ هَلۡ يَسۡتَطِيعُ رَبُّكَ أَن يُنزِلَ عَلَيۡنَا مَآئِدَةٗ مِّنَ اَ۬لسَّمَآءِۖ
उसने कहा: “ईश्वर के प्रति सावधान रहो, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।”
قَالَ اَ۪تَّقُواْ اُ۬للَّهَ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ
उन्होंने कहा: “हम उसमें से खाना चाहते हैं, ताकि हमारे मर्मों को चैन मिले, हम जान लें कि तुमने हमसे सच कहा, और हम उसके साक्षी बनें।”
قَالُواْ نُرِيدُ أَن نَّأۡكُلَ مِنۡهَا وَتَطۡمَئِنَّ قُلُوبُنَا وَنَعۡلَمَ أَن قَد صَّدَقۡتَنَا وَنَكُونَ عَلَيۡهَا مِنَ اَ۬لشَّٰهِدِينَ
मरयम के पुत्र ईसा ने कहा: “हे ईश्वर, हमारे अभिभावक! हम पर आकाश से एक मेज़ उतारिए, जो हमारे लिए पर्व हो, हममें से पहले के लिए भी और अंतिम के लिए भी, और आपकी ओर से एक संकेत;
قَالَ عِيسَى اَ۪بۡنُ مَرۡيَمَ اَ۬للَّهُمَّ رَبَّنَآ أَنزِلۡ عَلَيۡنَا مَآئِدَةٗ مِّنَ اَ۬لسَّمَآءِ تَكُونُ لَنَا عِيدٗا لِّأَوَّلِنَا وَءَاخِرِنَا وَءَايَةٗ مِّنكَۖ
और हमें जीविका दीजिए;
وَاَرۡزُقۡنَا
आप जीविका देने वालों में सबसे बेहतर हैं।”
وَأَنتَ خَيۡرُ اُ۬لرَّٰزِقِينَ
ईश्वर ने कहा: “मैं उसे तुम पर उतारता हूँ; परंतु तुममें से जो इसके बाद नकारे, मैं उसे निश्चय ही ऐसा दंड दूँगा जो मैं सभी प्राणियों में किसी और को नहीं दूँगा।”
قَالَ اَ۬للَّهُ إِنِّي مُنزِلُهَا عَلَيۡكُمۡۖ فَمَن يَكۡفُرۡ بَعۡدُ مِنكُمۡ فَإِنِّيٓ أُعَذِّبُهُۥ عَذَابٗا لَّآ أُعَذِّبُهُۥٓ أَحَدٗا مِّنَ اَ۬لۡعَٰلَمِينَ
और जब ईश्वर कहेगा: “हे ईसा, मरयम के पुत्र! क्या तुमने लोगों से कहा: मुझे और मेरी माँ को ईश्वर के अतिरिक्त दो देवता बना लो?”
وَإِذۡ قَالَ اَ۬للَّهُ يَٰعِيسَى اَ۪بۡنَ مَرۡيَمَ ءَٰا۬نتَ قُلۡتَ لِلنّ۪اسِ اِ۪تَّخِذُونِي وَأُمِّيَ إِلَٰهَيۡنِ مِن دُونِ اِ۬للَّهِۖ
वह कहेगा: “आपकी महिमा हो! मेरे लिए यह उचित नहीं था कि मैं वह कहूँ जिसका मुझे अधिकार नहीं।
قَالَ سُبۡحَٰنَكَ مَا يَكُونُ لِيَ أَنۡ أَقُولَ مَا لَيۡسَ لِي بِحَقٍّۚ
यदि मैंने उसे कहा होता, तो आपने उसे जान लिया होता।
إِن كُنتُ قُلۡتُهُۥ فَقَدۡ عَلِمۡتَهُۥۚ
जो मेरे स्व में है उसे आप जानते हैं, और जो आपके स्व में है उसे मैं नहीं जानता,
تَعۡلَمُ مَا فِي نَفۡسِي وَلَآ أَعۡلَمُ مَا فِي نَفۡسِكَۚ
क्योंकि आप ही जो इंद्रियों से परे है उसे पूरी तरह जानने वाले हैं।
إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ اُ۬لۡغُيُوبِ
मैंने उनसे केवल वही कहा जिसका आपने मुझे आदेश दिया: ईश्वर की आज्ञा का पालन करो, जो मेरा अभिभावक और तुम्हारा अभिभावक है;
مَا قُلۡتُ لَهُمۡ إِلَّا مَآ أَمَرۡتَنِي بِهِۦٓ أَنِ اِ۟عۡبُدُواْ اُ۬للَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمۡۚ
और जब तक मैं उनके बीच रहा, मैं उन पर साक्षी था;
وَكُنتُ عَلَيۡهِمۡ شَهِيدٗا مَّا دُمۡتُ فِيهِمۡۖ
फिर जब आपने मुझे निष्ठा से सँभाल लिया, तब आप ही उन पर निरीक्षक थे।
فَلَمَّا تَوَفَّيۡتَنِي كُنتَ أَنتَ اَ۬لرَّقِيبَ عَلَيۡهِمۡۚ
और आप हर चीज़ के साक्षी हैं।
وَأَنتَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ شَهِيدٌ
यदि आप उन्हें दंड दें, तो वे आपके आज्ञाकारी हैं;
إِن تُعَذِّبۡهُمۡ فَإِنَّهُمۡ عِبَادُكَۖ
और यदि आप उन्हें क्षमा करें, तो निश्चय ही आप ही सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान हैं।”
وَإِن تَغۡفِر لَّهُمۡ فَإِنَّكَ أَنتَ اَ۬لۡعَزِيزُ اُ۬لۡحَكِيمُ
ईश्वर कहेगा: “यह वह दिन है जिसमें सच्चाई सच्चों को लाभ देगी।
قَالَ اَ۬للَّهُ هَٰذَا يَوۡمُ يَنفَعُ اُ۬لصَّٰدِقِينَ صِدۡقُهُمۡۚ
उनके लिए ऐसे उद्यान हैं जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा, चिरकाल तक रहेंगे।”
لَهُمۡ جَنَّٰتٞ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا اَ۬لۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدٗاۖ
ईश्वर उनसे प्रसन्न है, और वे उससे प्रसन्न हैं।
رَّضِيَ اَ۬للَّهُ عَنۡهُمۡ وَرَضُواْ عَنۡهُۚ
यही विशाल विजय है।
ذَٰلِكَ اَ۬لۡفَوۡزُ اُ۬لۡعَظِيمُ
ईश्वर ही का है आकाशों और धरती का राजत्व, और जो उनमें है उसका भी।
لِلَّهِ مُلۡكُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِ وَمَا فِيهِنَّۚ
और वह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
وَهۡوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرُۢ