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القرآن
Sura36

Ya-Sin يس

Who will bring the bones back to life من يحي العظام

يس

83 पदSection VIIThe example · exposition

  1. 36
  2. 37
“By the Recitation full of wisdom”
The section and its links

The envoy, then the gallery of envoys (36, then 37)

The section begins here

36:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। يسٓ (Ya Sin)।

بِسۡمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحۡمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ يسٓۚ

36:2–4

प्रज्ञा से भरे पाठ की शपथ, तुम अवश्य भेजे गए जनों में से हो, एक सीधे पथ पर,

وَاَلۡقُرۡءَانِ اِ۬لۡحَكِيمِ إِنَّكَ لَمِنَ اَ۬لۡمُرۡسَلِينَ عَلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ

36:5–6

सर्वशक्तिमान, दयालु की ओर से एक अवतरण, ताकि तुम एक ऐसी क़ौम को चेतावनी दो जिसके पूर्वजों को चेतावनी नहीं दी गई, और जो इसलिए लापरवाह हैं।

تَنزِيلُ اُ۬لۡعَزِيزِ اِ۬لرَّحِيمِ لِتُنذِرَ قَوۡمٗا مَّآ أُنذِرَ ءَابَآؤُهُمۡ فَهُمۡ غَٰفِلُونَ

कथन उनमें से अधिकतर पर निश्चय ही सिद्ध हो चुका है: वे विश्वास नहीं करते।

لَقَدۡ حَقَّ اَ۬لۡقَوۡلُ عَلَىٰٓ أَكۡثَرِهِمۡ فَهُمۡ لَا يُؤۡمِنُونَ

36:8

हमने निश्चय ही उनकी गर्दनों में तौक़ डाल दिए हैं, जो ठुड्डियों तक पहुँचते हैं, इसलिए उनके सिर पीछे की ओर तने हुए हैं।

إِنَّا جَعَلۡنَا فِيٓ أَعۡنَٰقِهِمۡ أَغۡلَٰلٗا فَهۡيَ إِلَى اَ۬لۡأَذۡقَانِ فَهُم مُّقۡمَحُونَ

36:9

और हमने उनके आगे एक अवरोध रखा और उनके पीछे एक अवरोध, फिर उन्हें ढक दिया: इसलिए वे साफ़ नहीं देखते।

وَجَعَلۡنَا مِنۢ بَيۡنِ أَيۡدِيهِمۡ سُدّٗا وَمِنۡ خَلۡفِهِمۡ سُدّٗا فَأَغۡشَيۡنَٰهُمۡ فَهُمۡ لَا يُبۡصِرُونَ

और उनके लिए समान है कि तुम उन्हें चेतावनी दो या चेतावनी न दो: वे विश्वास नहीं करते।

وَسَوَآءٌ عَلَيۡهِمۡ ءَٰا۬نذَرۡتَهُمۡ أَمۡ لَمۡ تُنذِرۡهُمۡ لَا يُؤۡمِنُونَ

36:11

तुम केवल उसे चेतावनी देते हो जो स्मरण का अनुसरण करता है और सर्वदयालु से भय रखता है भले ही वह उसकी इंद्रियों से परे है: उसे क्षमा और एक उदार पुरस्कार का शुभ समाचार दो।

إِنَّمَا تُنذِرُ مَنِ اِ۪تَّبَعَ اَ۬لذِّكۡرَ وَخَشِيَ اَ۬لرَّحۡمَٰنَ بِالۡغَيۡبِۖ فَبَشِّرۡهُ بِمَغۡفِرَةٖ وَأَجۡرٖ كَرِيمٍ

36:12

हम ही हैं, केवल हम, जो मृतकों को पुनः जीवन देते हैं, और हम दर्ज करते हैं जो उन्होंने आगे बढ़ाया और उनकी छोड़ी हुई छापें।

إِنَّا نَحۡنُ نُحۡيِ اِ۬لۡمَوۡتۭيٰ وَنَكۡتُبُ مَا قَدَّمُواْ وَءَاثَٰرَهُمۡۚ

36:12

और हर चीज़ को हमने एक स्पष्ट संदर्भ में गिन रखा है।

وَكُلَّ شَيۡءٍ أَحۡصَيۡنَٰهُ فِيٓ إِمَامٖ مُّبِينٖ

36:13–14

और उनके लिए उदाहरण के रूप में बस्ती वालों को जोड़ो, जब भेजे गए जन उसके पास आए: जब हमने उनके पास दो भेजे, तो उन्होंने उन्हें झुठलाया; तब हमने तीसरे के द्वारा उन्हें सुदृढ़ कर दिया, और उन्होंने कहा: “हम तुम्हारी ओर निश्चय ही भेजे गए हैं।”

۞ وَاَضۡرِبۡ لَهُم مَّثَلًا أَصۡحَٰبَ اَ۬لۡقَرۡيَةِ إِذ جَّآءَهَا اَ۬لۡمُرۡسَلُونَ إِذۡ أَرۡسَلۡنَآ إِلَيۡهِمِ اِ۪ثۡنَيۡنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزۡنَا بِثَالِثٖ فَقَالُوٓاْ إِنَّآ إِلَيۡكُم مُّرۡسَلُونَ

36:15

उन्होंने कहा: “तुम तो बस हमारे जैसे मानव हो; सर्वदयालु ने कुछ नहीं उतारा; तुम केवल झूठ बोलते हो।”

قَالُواْ مَآ أَنتُمۡ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُنَا وَمَآ أَنزَلَ اَ۬لرَّحۡمَٰنُ مِن شَيۡءٍ إِنۡ أَنتُمۡ إِلَّا تَكۡذِبُونَ

उन्होंने कहा: “हमारा अभिभावक जानता है कि हम तुम्हारी ओर अवश्य भेजे गए हैं; हम पर केवल स्पष्ट संप्रेषण का दायित्व है।”

قَالُواْ رَبُّنَا يَعۡلَمُ إِنَّآ إِلَيۡكُمۡ لَمُرۡسَلُونَ وَمَا عَلَيۡنَآ إِلَّا اَ۬لۡبَلَٰغُ اُ۬لۡمُبِينُ

36:18

उन्होंने कहा: “हम तुममें अपशकुन देखते हैं। यदि तुम बाज़ न आए, तो हम तुम्हें अवश्य निष्कासित करेंगे, और हमारी ओर से एक पीड़ादायक दंड तुम्हें अवश्य छुएगा।”

قَالُوٓاْ إِنَّا تَطَيَّرۡنَا بِكُمۡۖ لَئِن لَّمۡ تَنتَهُواْ لَنَرۡجُمَنَّكُمۡ وَلَيَمَسَّنَّكُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٞ

36:19

उन्होंने कहा: “तुम्हारा अपशकुन तुम्हारे ही साथ है। क्या इसलिए कि तुम्हें स्मरण कराया जाता है?

قَالُواْ طَٰٓئِرُكُم مَّعَكُمۡۚ أَٰى۪ن ذُكِّرۡتُمۚ

36:19

तुम तो बल्कि एक अतिवादी क़ौम हो।”

بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٞ مُّسۡرِفُونَ

36:20

और एक पुरुष राजधानी के छोर से जल्दी-जल्दी आया।

وَجَآءَ مِنۡ أَقۡصَا اَ۬لۡمَدِينَةِ رَجُلٞ يَسۡعَىٰ

36:21

उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, भेजे गए जनों का अनुसरण करो; उनका अनुसरण करो जो तुमसे कोई पुरस्कार नहीं माँगते, और जो मार्गदर्शन पा रहे हैं।

قَالَ يَٰقَوۡمِ اِ۪تَّبِعُواْ اُ۬لۡمُرۡسَلِينَ اَ۪تَّبِعُواْ مَن لَّا يَسۡـَٔلُكُمۡ أَجۡرٗا وَهُم مُّهۡتَدُونَ

36:22

और मेरे लिए क्या है कि मैं उसकी आज्ञा का पालन न करूँ जिसने मुझे मूलतः रचा, और जिसकी ओर तुम लौटाए जाओगे?

وَمَا لِيَ لَآ أَعۡبُدُ اُ۬لَّذِي فَطَرَنِي وَإِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ

36:23

क्या मैं उसके अतिरिक्त देवताओं को अपना लूँ? यदि सर्वदयालु मुझे हानि पहुँचाना चाहता, तो उनकी मध्यस्थता मेरे किसी काम न आती, और वे मुझे उबार न सकते।

ءَٰا۬تَّخِذُ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةً إِن يُرِدۡنِ اِ۬لرَّحۡمَٰنُ بِضُرّٖ لَّا تُغۡنِ عَنِّي شَفَٰعَتُهُمۡ شَيۡـٔٗا وَلَا يُنقِذُونِ

तब तो मैं अवश्य स्पष्ट भटकाव में होता।

إِنِّيَ إِذٗا لَّفِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٍ

मैंने तो तुम्हारे अभिभावक पर विश्वास किया है: इसलिए मेरी बात पर कान दो।”

إِنِّيَ ءَامَنتُ بِرَبِّكُمۡ فَاَسۡمَعُونِ

36:26

कहा गया: “उद्यान में प्रवेश करो।”

قِيلَ اَ۟دۡخُلِ اِ۬لۡجَنَّةَۖ

36:27

उसने कहा: “काश मेरी क़ौम जान लेती कि मेरे अभिभावक ने किस कारण मुझे क्षमा किया, और मुझे सम्मानित जनों में गिना!”

قَالَ يَٰلَيۡتَ قَوۡمِي يَعۡلَمُونَ بِمَا غَفَرَ لِي رَبِّي وَجَعَلَنِي مِنَ اَ۬لۡمُكۡرَمِينَ

और हमने उसके बाद उसकी क़ौम पर आकाश से कोई सेना नहीं उतारी; हमें उतारनी ही नहीं थी।

۞ وَمَآ أَنزَلۡنَا عَلَىٰ قَوۡمِهِۦ مِنۢ بَعۡدِهِۦ مِن جُندٖ مِّنَ اَ۬لسَّمَآءِ وَمَا كُنَّا مُنزِلِينَ

36:29

वह केवल एक ही चीख़ थी, और देखो, वे बुझ गए।

إِن كَانَتۡ إِلَّا صَيۡحَةٗ وَٰحِدَةٗ فَإِذَا هُمۡ خَٰمِدُونَ

आज्ञाकारियों पर कैसा संताप है!

يَٰحَسۡرَةً عَلَى اَ۬لۡعِبَادِۚ

उनके पास कोई संदेशवाहक नहीं आता था जिसका वे मज़ाक़ न उड़ाते हों।

مَا يَأۡتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ

क्या वे नहीं देखते कि हमने उनसे पहले कितनी ही पीढ़ियों को नष्ट कर दिया, और यह कि वे उनकी ओर नहीं लौटेंगी?

أَلَمۡ يَرَوۡاْ كَمۡ أَهۡلَكۡنَا قَبۡلَهُم مِّنَ اَ۬لۡقُرُونِ أَنَّهُمۡ إِلَيۡهِمۡ لَا يَرۡجِعُونَ

36:32

और सभी, सब के सब, एक साथ हमारे सामने लाए जाएँगे।

وَإِن كُلّٞ لَّمَا جَمِيعٞ لَّدَيۡنَا مُحۡضَرُونَ

36:33

और उनके लिए एक संकेत: मृत धरती, जिसे हमने पुनः जीवन दिया, और जिससे हमने दाना निकाला, और उसी से वे खाते हैं।

وَءَايَةٞ لَّهُمُ اُ۬لۡأَرۡضُ اُ۬لۡمَيۡتَةُ أَحۡيَيۡنَٰهَا وَأَخۡرَجۡنَا مِنۡهَا حَبّٗا فَمِنۡهُ يَأۡكُلُونَ

36:34–35

और हमने उसमें खजूर के पेड़ों और अंगूरों के उद्यान रखे, और उसमें सोते फूट निकलवाए, ताकि वे उसके फल में से खाएँ — और उसे उनके हाथों ने नहीं उपजाया।

وَجَعَلۡنَا فِيهَا جَنَّٰتٖ مِّن نَّخِيلٖ وَأَعۡنَٰبٖ وَفَجَّرۡنَا فِيهَا مِنَ اَ۬لۡعُيُونِ لِيَأۡكُلُواْ مِن ثَمَرِهِۦ وَمَا عَمِلَتۡهُ أَيۡدِيهِمۡۚ

36:34–35

तो क्या वे कृतज्ञ नहीं होंगे?

أَفَلَا يَشۡكُرُونَ

36:36

उसकी महिमा हो जिसने सभी जोड़े रचे, उसमें से जो धरती उगाती है, और स्वयं उनमें से, और उसमें से जो वे नहीं जानते।

سُبۡحَٰنَ اَ۬لَّذِي خَلَقَ اَ۬لۡأَزۡوَٰجَ كُلَّهَا مِمَّا تُنۢبِتُ اُ۬لۡأَرۡضُ وَمِنۡ أَنفُسِهِمۡ وَمِمَّا لَا يَعۡلَمُونَ

और उनके लिए एक संकेत: रात, जिससे हम दिन को छीन लेते हैं, और देखो, वे अंधकार में डूबे हैं।

وَءَايَةٞ لَّهُمُ اُ۬لَّيۡلُ نَسۡلَخُ مِنۡهُ اُ۬لنَّهَارَ فَإِذَا هُم مُّظۡلِمُونَ

और सूर्य अपने एक स्थिर स्थान की ओर दौड़ता है, जो उसका अपना है।

وَاَلشَّمۡسُ تَجۡرِي لِمُسۡتَقَرّٖ لَّهَاۚ

36:38

यह सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ द्वारा निर्धारित माप है।

ذَٰلِكَ تَقۡدِيرُ اُ۬لۡعَزِيزِ اِ۬لۡعَلِيمِ

36:39

और चंद्रमा के लिए हमने पड़ाव निर्धारित किए, यहाँ तक कि वह फिर खजूर की पुरानी मुड़ी हुई टहनी जैसा हो जाए।

وَاَلۡقَمَرُ قَدَّرۡنَٰهُ مَنَازِلَ حَتَّىٰ عَادَ كَاَلۡعُرۡجُونِ اِ۬لۡقَدِيمِ

36:40

सूर्य को शोभा नहीं देता कि वह चंद्रमा को जा पकड़े, और न रात को कि वह दिन से आगे निकल जाए।

لَا اَ۬لشَّمۡسُ يَنۢبَغِي لَهَآ أَن تُدۡرِكَ اَ۬لۡقَمَرَ وَلَا اَ۬لَّيۡلُ سَابِقُ اُ۬لنَّه۪ارِۚ

36:40

और प्रत्येक एक कक्षा में तैरता है।

وَكُلّٞ فِي فَلَكٖ يَسۡبَحُونَ

36:41–42

और उनके लिए एक संकेत: हमने उनकी संततियों को भरे हुए जलयान में सवार किया, और उनके लिए उसी जैसा रचा जिस पर वे सवार होते हैं।

وَءَايَةٞ لَّهُمۡ أَنَّا حَمَلۡنَا ذُرِّيَّتَهُمۡ فِي اِ۬لۡفُلۡكِ اِ۬لۡمَشۡحُونِ وَخَلَقۡنَا لَهُم مِّن مِّثۡلِهِۦ مَا يَرۡكَبُونَ

और यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो उन्हें डुबो देते; उनकी चीख़ का उत्तर देने वाला कोई न होता, और वे उबारे भी न जाते, सिवा हमारी ओर से किसी दया के, और एक समय तक के लिए उपभोग के।

وَإِن نَّشَأۡ نُغۡرِقۡهُمۡ فَلَا صَرِيخَ لَهُمۡ وَلَا هُمۡ يُنقَذُونَ إِلَّا رَحۡمَةٗ مِّنَّا وَمَتَٰعًا إِلَىٰ حِينٖ

36:45

और जब उनसे कहा जाता है: “जो तुम्हारे सामने है और जो तुम्हारे पीछे है, उसके प्रति सावधान रहो, शायद तुम पर दया की जाए”,

وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اُ۪تَّقُواْ مَا بَيۡنَ أَيۡدِيكُمۡ وَمَا خَلۡفَكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ

उनके अभिभावक के संकेतों में से कोई संकेत उनके पास नहीं आता जिससे वे कतराते न हों।

وَمَا تَأۡتِيهِم مِّنۡ ءَايَةٖ مِّنۡ ءَايَٰتِ رَبِّهِمۡ إِلَّا كَانُواْ عَنۡهَا مُعۡرِضِينَ

36:47

और जब उनसे कहा जाता है: “ईश्वर ने जो जीविका तुम्हें दी है उसमें से ख़र्च करो”, तो नकारने वाले उनसे जिन्होंने विश्वास किया कहते हैं: “क्या हम उसे खिलाएँगे जिसे ईश्वर, यदि उसकी मर्ज़ी होती, स्वयं खिला देता? तुम तो बस स्पष्ट भटकाव में ही हो।”

۞ وَإِذَا قِيلَ لَهُمۡ أَنفِقُواْ مِمَّا رَزَقَكُمُ اُ۬للَّهُ قَالَ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ لِلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَنُطۡعِمُ مَن لَّوۡ يَشَآءُ اُ۬للَّهُ أَطۡعَمَهُۥٓ إِنۡ أَنتُمۡ إِلَّا فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٖ

और वे कहते हैं: “यह वादा कब है, यदि तुम सच्चे हो?”

وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا اَ۬لۡوَعۡدُ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ

36:49

वे बस एक ही चीख़ की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो उन्हें आ पकड़ेगी जब वे झगड़े के बीच होंगे।

مَا يَنظُرُونَ إِلَّا صَيۡحَةٗ وَٰحِدَةٗ تَأۡخُذُهُمۡ وَهُمۡ يَخ۬صِّمُونَ

तब वे न वसीयत कर पाएँगे, न अपने परिवार की ओर लौट पाएँगे।

فَلَا يَسۡتَطِيعُونَ تَوۡصِيَةٗ وَلَآ إِلَىٰٓ أَهۡلِهِمۡ يَرۡجِعُونَ

36:51

और नरसिंगे में फूँका जाएगा, और देखो, वे अपनी क़ब्रों से अपने अभिभावक की ओर उमड़ पड़ते हैं।

وَنُفِخَ فِي اِ۬لصُّورِ فَإِذَا هُم مِّنَ اَ۬لۡأَجۡدَاثِ إِلَىٰ رَبِّهِمۡ يَنسِلُونَ

36:52

वे कहेंगे: “हाय हम पर! किसने हमें हमारी उस जगह से उठाया जहाँ हम सो रहे थे?

قَالُواْ يَٰوَيۡلَنَا مَنۢ بَعَثَنَا مِن مَّرۡقَدِنَاۗ

36:52

यही है जिसका वादा सर्वदयालु ने किया था, और भेजे गए जनों ने सच कहा था।”

هَٰذَا مَا وَعَدَ اَ۬لرَّحۡمَٰنُ وَصَدَقَ اَ۬لۡمُرۡسَلُونَ

36:53

वह केवल एक ही चीख़ होगी, और देखो, वे सब एक साथ हमारे सामने लाए गए हैं।

إِن كَانَتۡ إِلَّا صَيۡحَةٗ وَٰحِدَةٗ فَإِذَا هُمۡ جَمِيعٞ لَّدَيۡنَا مُحۡضَرُونَ

आज किसी भी स्व पर ज़रा भी अन्याय नहीं किया जाएगा, और तुम्हें केवल उसी के अनुसार प्रतिफल दिया जाएगा जो तुम करते थे।

فَاَلۡيَوۡمَ لَا تُظۡلَمُ نَفۡسٞ شَيۡـٔٗا وَلَا تُجۡزَوۡنَ إِلَّا مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

36:55–56

आज उद्यान वाले आनंद में व्यस्त होंगे, वे और उनके जोड़ीदार, छायाओं में, सजे हुए पलंगों पर टेक लगाए हुए।

إِنَّ أَصۡحَٰبَ اَ۬لۡجَنَّةِ اِ۬لۡيَوۡمَ فِي شُغۡلٖ فَٰكِهُونَ هُمۡ وَأَزۡوَٰجُهُمۡ فِي ظِلَٰلٍ عَلَى اَ۬لۡأَرَآئِكِ مُتَّكِـُٔونَ

वहाँ उनके लिए स्वाद होंगे।

لَهُمۡ فِيهَا فَٰكِهَةٞ

और उन्हें वह सब मिलेगा जो वे माँगेंगे। शांति!

وَلَهُم مَّا يَدَّعُونَ سَلَٰمٞ

एक दयालु अभिभावक की ओर से कथन।

قَوۡلٗا مِّن رَّبّٖ رَّحِيمٖ

“और आज अलग रहो, हे बहिष्कृतो!

وَاَمۡتَٰزُواْ اُ۬لۡيَوۡمَ أَيُّهَا اَ۬لۡمُجۡرِمُونَ

36:60–61

क्या मैंने तुम्हें संधि से नहीं बाँधा था, हे आदम की संतान: कि बहकाने वाले की आज्ञा का पालन न करना — क्योंकि वह तुम्हारा स्पष्ट शत्रु है — और मेरी आज्ञा का पालन करना?

۞ أَلَمۡ أَعۡهَدۡ إِلَيۡكُمۡ يَٰبَنِيٓ ءَادَمَ أَن لَّا تَعۡبُدُواْ اُ۬لشَّيۡطَٰنَۖ إِنَّهُۥ لَكُمۡ عَدُوّٞ مُّبِينٞ وَأَنِ اِ۟عۡبُدُونِيۚ

36:60–61

यह एक सीधा पथ है।

هَٰذَا صِرَٰطٞ مُّسۡتَقِيمٞ

36:62

उसने तो तुम में से एक बहुसंख्यक समूह को भटका दिया।

وَلَقَدۡ أَضَلَّ مِنكُمۡ جُبۡلٗا كَثِيرًاۖ

तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते थे?

أَفَلَمۡ تَكُونُواْ تَعۡقِلُونَ

36:63–64

यह जहन्नम है, जिसका तुमसे वादा किया जाता था। आज इसमें जलो, नकारने के कारण।”

هَٰذِهِۦ جَهَنَّمُ اُ۬لَّتِي كُنتُمۡ تُوعَدُونَ اَ۪صۡلَوۡهَا اَ۬لۡيَوۡمَ بِمَا كُنتُمۡ تَكۡفُرُونَ

36:65

आज हम उनके मुँहों पर मुहर लगाते हैं; उनके हाथ हमसे बोलेंगे, और उनके पैर साक्ष्य देंगे उसका जो वे कमाते थे।

اَ۬لۡيَوۡمَ نَخۡتِمُ عَلَىٰٓ أَفۡوَٰهِهِمۡ وَتُكَلِّمُنَآ أَيۡدِيهِمۡ وَتَشۡهَدُ أَرۡجُلُهُم بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ

और यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो उनकी आँखें मिटा देते; तब वे पथ की ओर एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ करते, परंतु वे स्पष्ट कैसे देख पाते?

وَلَوۡ نَشَآءُ لَطَمَسۡنَا عَلَىٰٓ أَعۡيُنِهِمۡ فَاَسۡتَبَقُواْ اُ۬لصِّرَٰطَ فَأَنّۭيٰ يُبۡصِرُونَ

36:67

और यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो उन्हें उनकी जगह पर जमा देते, और वे न जा सकते, न लौट सकते।

وَلَوۡ نَشَآءُ لَمَسَخۡنَٰهُمۡ عَلَىٰ مَكَانَتِهِمۡ فَمَا اَ۪سۡتَطَٰعُواْ مُضِيّٗا وَلَا يَرۡجِعُونَ

36:68

और जिसे हम आयु में बढ़ाते हैं, उसे हम रचना में उलटी दिशा में फेर देते हैं।

وَمَن نُّعَمِّرۡهُ نَنكُسۡهُ فِي اِ۬لۡخَلۡقِۚ

36:68

तो क्या वे बुद्धि से काम नहीं लेंगे?

أَفَلَا يَعۡقِلُونَ

36:69

हमने उसे लुभाने की कला नहीं सिखाई; और यह उसे शोभा नहीं देता।

وَمَا عَلَّمۡنَٰهُ اُ۬لشِّعۡرَ وَمَا يَنۢبَغِي لَهُۥٓۚ

36:70

यह केवल एक स्मरण और एक स्पष्ट पाठ है, ताकि तुम उसे चेतावनी दो जो जीवित है, और ताकि कथन नकारने वालों पर सिद्ध हो जाए।

إِنۡ هُوَ إِلَّا ذِكۡرٞ وَقُرۡءَانٞ مُّبِينٞ لِّيُنذِرَ مَن كَانَ حَيّٗا وَيَحِقَّ اَ۬لۡقَوۡلُ عَلَى اَ۬لۡكٰ۪فِرِينَ

36:71

क्या वे नहीं देखते कि हमने उनके लिए, उसमें से जो हमारे हाथों ने बनाया, पशुधन रचा, जिसके वे मालिक हैं?

أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا خَلَقۡنَا لَهُم مِّمَّا عَمِلَتۡ أَيۡدِينَآ أَنۡعَٰمٗا فَهُمۡ لَهَا مَٰلِكُونَ

36:72

और हमने उन्हें उनके लिए अनुकूल बना दिया: कुछ उनकी सवारी के काम आते हैं, और कुछ को वे खाते हैं।

وَذَلَّلۡنَٰهَا لَهُمۡ فَمِنۡهَا رَكُوبُهُمۡ وَمِنۡهَا يَأۡكُلُونَ

36:73

और वे उनसे उपयोगिताएँ और पेय पाते हैं।

وَلَهُمۡ فِيهَا مَنَٰفِعُ وَمَشَارِبُۚ

36:73

तो क्या वे कृतज्ञ नहीं होंगे?

أَفَلَا يَشۡكُرُونَ

और उन्होंने ईश्वर के अतिरिक्त देवता बना लिए, इस आशा में कि उनकी सहायता की जाएगी। वे उनकी सहायता नहीं कर सकते, और वे उनके लिए एक लाई हुई सेना होंगे।

وَاَتَّخَذُواْ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ ءَالِهَةٗ لَّعَلَّهُمۡ يُنصَرُونَ لَا يَسۡتَطِيعُونَ نَصۡرَهُمۡ وَهُمۡ لَهُمۡ جُندٞ مُّحۡضَرُونَ

36:76

अतः उनका कथन तुम्हें दुखी न करे।

فَلَا يَحۡزُنكَ قَوۡلُهُمۡۘ

हम निश्चय ही जानते हैं जो वे गुप्त रखते हैं और जो वे उजागर करते हैं।

إِنَّا نَعۡلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعۡلِنُونَ

36:77

क्या मनुष्य नहीं देखता कि हमने उसे एक बूँद से रचा, और देखो, वह खुला झगड़ालू है?

أَوَلَمۡ يَرَ اَ۬لۡإِنسَٰنُ أَنَّا خَلَقۡنَٰهُ مِن نُّطۡفَةٖ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٞ مُّبِينٞ

36:78

और वह हमारे लिए एक उदाहरण कई गुना करता है, अपनी ही रचना को भूलकर।

۞ وَضَرَبَ لَنَا مَثَلٗا وَنَسِيَ خَلۡقَهُۥۖ

36:78

वह कहता है: “जब वे धूल होंगी, तब हड्डियों को कौन पुनः जीवन देगा?”

قَالَ مَن يُحۡيِ اِ۬لۡعِظَٰمَ وَهۡيَ رَمِيمٞ

36:79

कहो: “जिसने उन्हें पहली बार उत्पन्न किया, वही उन्हें पुनः जीवन देगा; वह हर रचना के विषय में सर्वज्ञ है।”

قُلۡ يُحۡيِيهَا اَ۬لَّذِيٓ أَنشَأَهَآ أَوَّلَ مَرَّةٖۖ وَهۡوَ بِكُلِّ خَلۡقٍ عَلِيمٌ

36:80

जिसने तुम्हारे लिए हरे पेड़ से आग बनाई, और देखो, तुम उसी से जलाते हो।

اِ۬لَّذِي جَعَلَ لَكُم مِّنَ اَ۬لشَّجَرِ اِ۬لۡأَخۡضَرِ نَارٗا فَإِذَآ أَنتُم مِّنۡهُ تُوقِدُونَ

36:81

क्या जिसने आकाशों और धरती को रचा, वह उनके जैसा रचने का सामर्थ्य नहीं रखता?

أَوَلَيۡسَ اَ۬لَّذِي خَلَقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضَ بِقَٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يَخۡلُقَ مِثۡلَهُمۚ

36:81

क्यों नहीं! और वही रचयिता, सर्वज्ञ है।

بَلَىٰ وَهۡوَ اَ۬لۡخَلَّٰقُ اُ۬لۡعَلِيمُ

उसका आदेश, जब वह कोई चीज़ चाहता है, केवल यह है कि वह उससे कहे: “हो जा”,

إِنَّمَآ أَمۡرُهُۥٓ إِذَآ أَرَادَ شَيۡـًٔا أَن يَقُولَ لَهُۥ كُن

और वह हो जाती है।

فَيَكُونُ

36:83

अतः उसकी महिमा हो जिसके हाथ में हर चीज़ का सर्वोच्च राजत्व है, और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।

فَسُبۡحَٰنَ اَ۬لَّذِي بِيَدِهِۦ مَلَكُوتُ كُلِّ شَيۡءٖ وَإِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ

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