الاعراف
Al-A'raf
Am I Not Your Guardian?
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। अलिफ़. लाम. मीम. साद.
بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ أَلَٓمِّٓصَٓۖ
तुम पर एक ग्रंथ उतारा गया है — उसके विषय में तुम्हारे सीने में कोई तंगी न हो — ताकि तुम उसके द्वारा चेतावनी दो, और विश्वास करने वालों के लिए एक स्मरण।
كِتَٰبٌ أُنزِلَ إِلَيْكَ فَلَا يَكُن فِے صَدْرِكَ حَرَجٞ مِّنْهُ لِتُنذِرَ بِهِۦ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَۖ
जो तुम पर तुम्हारे अभिभावक की ओर से उतारा गया है उसका अनुसरण करो,
اَ۪تَّبِعُواْ مَا أُنزِلَ إِلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْۖ
और उसके अतिरिक्त हिमायतियों का अनुसरण न करो।
وَلَا تَتَّبِعُواْ مِن دُونِهِۦ أَوْلِيَآءَۖ
तुम कितना कम स्मरण करते हो!
قَلِيلاٗ مَّا تَذَّكَّرُونَۖ
हमने कितनी ही बस्तियाँ नष्ट कर दीं! हमारी कठोरता उन पर रात में आई, या जब वे दोपहर का विश्राम कर रही थीं।
وَكَم مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَٰهَا فَجَآءَهَا بَأْسُنَا بَيَٰتاً أَوْ هُمْ قَآئِلُونَۖ
जब हमारी कठोरता उन पर आई, तो उनकी पुकार केवल यही थी कि उन्होंने कहा: “हम निश्चय ही अन्यायी रहे।”
۞ فَمَا كَانَ دَعْوَيٰهُمْ إِذْ جَآءَهُم بَأْسُنَا إِلَّا أَن قَالُواْ إِنَّا كُنَّا ظَٰلِمِينَۖ
हम उनसे अवश्य पूछेंगे जिनकी ओर भेजा गया, और हम भेजे गए जनों से अवश्य पूछेंगे,
فَلَنَسْـَٔلَنَّ اَ۬لذِينَ أُرْسِلَ إِلَيْهِمْ وَلَنَسْـَٔلَنَّ اَ۬لْمُرْسَلِينَۖ
और हम उनके सामने पूरे ज्ञान के साथ अवश्य वर्णन करेंगे,
فَلَنَقُصَّنَّ عَلَيْهِم بِعِلْمٖۖ
क्योंकि हम अनुपस्थित नहीं थे।
وَمَا كُنَّا غَآئِبِينَۖ
और उस दिन तौल सत्य होगी।
وَالْوَزْنُ يَوْمَئِذٍ اِ۬لْحَقُّۖ
जिनके तराज़ू भारी होंगे — वही सफल होने वाले हैं।
فَمَن ثَقُلَتْ مَوَٰزِينُهُۥ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْمُفْلِحُونَۖ
और जिनके तराज़ू हल्के होंगे — वही हैं जिन्होंने हमारे संकेतों पर अन्याय करने के कारण अपने स्व को घाटे में डाल दिया।
وَمَنْ خَفَّتْ مَوَٰزِينُهُۥ فَأُوْلَٰٓئِكَ اَ۬لذِينَ خَسِرُواْ أَنفُسَهُم بِمَا كَانُواْ بِـَٔايَٰتِنَا يَظْلِمُونَۖ
हमने तुम्हें धरती पर निश्चय ही स्थापित किया, और उसमें तुम्हारे लिए जीवन-साधन बनाए।
وَلَقَدْ مَكَّنَّٰكُمْ فِے اِ۬لْأَرْضِ وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَٰيِشَۖ
तुम कितने कम कृतज्ञ हो!
قَلِيلاٗ مَّا تَشْكُرُونَۖ
हमने तुम्हें निश्चय ही रचा, फिर तुम्हें रूप दिया, फिर हमने अभिकर्ताओं से कहा: “आदम के सामने माथा टेको”, तो उन्होंने माथा टेका,
وَلَقَدْ خَلَقْنَٰكُمْ ثُمَّ صَوَّرْنَٰكُمْ ثُمَّ قُلْنَا لِلْمَلَٰٓئِكَةِ اِ۟سْجُدُواْ لِأٓدَمَ فَسَجَدُواْۖ
सिवा इब्लीस के: वह माथा टेकने वालों में से नहीं था।
إِلَّا إِبْلِيسَ لَمْ يَكُن مِّنَ اَ۬لسَّٰجِدِينَۖ
उसने कहा: “तुम्हें माथा टेकने से किस बात ने रोका, जब मैंने तुम्हें इसका आदेश दिया था?”
قَالَ مَا مَنَعَكَ أَلَّا تَسْجُدَ إِذْ أَمَرْتُكَۖ
उसने कहा: “मैं उससे बेहतर हूँ: आपने मुझे आग से रचा, और उसे मिट्टी से रचा।”
قَالَ أَنَا خَيْرٞ مِّنْهُ خَلَقْتَنِے مِن نَّارٖ وَخَلَقْتَهُۥ مِن طِينٖۖ
उसने कहा: “तो यहाँ से उतर जाओ: तुम्हारे लिए यह उचित नहीं कि तुम यहाँ घमंड दिखाओ; तो निकल जाओ, क्योंकि तुम नीचा किए गए जनों में से हो।”
قَالَ فَاهْبِطْ مِنْهَا فَمَا يَكُونُ لَكَ أَن تَتَكَبَّرَ فِيهَا فَاخْرُجْ إِنَّكَ مِنَ اَ۬لصَّٰغِرِينَۖ
उसने कहा: “मुझे उस दिन तक मोहलत दीजिए जब वे उठाए जाएँगे।”
قَالَ أَنظِرْنِے إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَۖ
उसने कहा: “तुम उनमें से हो जिन्हें मोहलत दी गई है।”
قَالَ إِنَّكَ مِنَ اَ۬لْمُنظَرِينَۖ
उसने कहा: “चूँकि आपने मुझे दिशाहीन होने दिया, मैं अवश्य आपके सीधे पथ पर उनकी घात में बैठूँगा, फिर मैं अवश्य उनके पास आऊँगा, उनके आगे से और उनके पीछे से, उनके दाएँ से और उनके बाएँ से,
قَالَ فَبِمَا أَغْوَيْتَنِے لَأَقْعُدَنَّ لَهُمْ صِرَٰطَكَ اَ۬لْمُسْتَقِيمَ ثُمَّ لَأٓتِيَنَّهُم مِّنۢ بَيْنِ أَيْدِيهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ وَعَنْ أَيْمَٰنِهِمْ وَعَن شَمَآئِلِهِمْۖ
और आप उनमें से अधिकतर को कृतज्ञ नहीं पाएँगे।”
وَلَا تَجِدُ أَكْثَرَهُمْ شَٰكِرِينَۖ
उसने कहा: “यहाँ से निकल जाओ, तिरस्कृत, खदेड़े गए।
قَالَ اَ۟خْرُجْ مِنْهَا مَذْءُوماٗ مَّدْحُوراٗۖ
उनमें से जो भी तुम्हारा अनुसरण करेगा — मैं जहन्नम को तुम सबसे अवश्य भर दूँगा।”
لَّمَن تَبِعَكَ مِنْهُمْ لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكُمْ أَجْمَعِينَۖ
“हे आदम! तुम और तुम्हारा जोड़ीदार उद्यान में रहो, और वहाँ से जहाँ तुम्हारी मर्ज़ी हो खाओ,
وَيَٰـَٔادَمُ اُ۟سْكُنْ أَنتَ وَزَوْجُكَ اَ۬لْجَنَّةَ فَكُلَا مِنْ حَيْثُ شِئْتُمَاۖ
परंतु इस वृक्ष के पास न जाओ, वरना तुम अन्यायियों में से हो जाओगे।”
وَلَا تَقْرَبَا هَٰذِهِ اِ۬لشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ اَ۬لظَّٰلِمِينَۖ
परंतु बहकाने वाले ने उन दोनों के कान में फुसफुसाया, ताकि उनकी नग्नता में से जो कुछ उनसे छिपा था उसे उनके सामने ला दे,
فَوَسْوَسَ لَهُمَا اَ۬لشَّيْطَٰنُ لِيُبْدِيَ لَهُمَا مَا وُۥرِيَ عَنْهُمَا مِن سَوْءَٰتِهِمَاۖ
और उसने कहा: “तुम्हारे अभिभावक ने तुम्हें इस वृक्ष से केवल इसलिए मना किया है कि तुम दो राजा न हो जाओ, या सदा रहने वालों में से न हो जाओ।”
وَقَالَ مَا نَهَيٰكُمَا رَبُّكُمَا عَنْ هَٰذِهِ اِ۬لشَّجَرَةِ إِلَّا أَن تَكُونَا مَلَكَيْنِ أَوْ تَكُونَا مِنَ اَ۬لْخَٰلِدِينَۖ
और उसने उन दोनों से शपथ खाई: “मैं तुम दोनों के लिए अवश्य सच्चे सलाहकारों में से हूँ” — इस प्रकार उसने उन्हें छल से गिरा दिया।
۞ وَقَاسَمَهُمَا إِنِّے لَكُمَا لَمِنَ اَ۬لنَّٰصِحِينَ فَدَلَّيٰهُمَا بِغُرُورٖۖ
जब उन्होंने वृक्ष को चखा, तो उनकी नग्नता उनके सामने आ गई, और वे दोनों अपने ऊपर उद्यान के पत्ते टाँकने लगे।
فَلَمَّا ذَاقَا اَ۬لشَّجَرَةَ بَدَتْ لَهُمَا سَوْءَٰتُهُمَا وَطَفِقَا يَخْصِفَٰنِ عَلَيْهِمَا مِنْ وَّرَقِ اِ۬لْجَنَّةِۖ
और उनके अभिभावक ने उन्हें पुकारा: “क्या मैंने तुम दोनों को उस वृक्ष से मना नहीं किया था, और क्या मैंने तुम दोनों से यह नहीं कहा था कि बहकाने वाला तुम दोनों का स्पष्ट शत्रु है?”
وَنَادَيٰهُمَا رَبُّهُمَا أَلَمْ أَنْهَكُمَا عَن تِلْكُمَا اَ۬لشَّجَرَةِ وَأَقُل لَّكُمَا إِنَّ اَ۬لشَّيْطَٰنَ لَكُمَا عَدُوّٞ مُّبِينٞۖ
उन दोनों ने कहा: “हमारे अभिभावक, हमने अपने ऊपर अन्याय किया; यदि आप हमें क्षमा नहीं करेंगे और हम पर दया नहीं करेंगे, तो हम अवश्य घाटा उठाने वालों में से होंगे।”
قَالَا رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ اَ۬لْخَٰسِرِينَۖ
उसने कहा: “उतरो,
قَالَ اَ۪هْبِطُواْ
एक-दूसरे के शत्रु बनकर।
بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوّٞۖ
और धरती पर तुम्हारे लिए एक ठौर और कुछ समय का उपभोग होगा।”
وَلَكُمْ فِے اِ۬لْأَرْضِ مُسْتَقَرّٞ وَمَتَٰعٌ إِلَىٰ حِينٖۖ
उसने कहा: “वहीं तुम जिओगे, वहीं तुम मरोगे, और वहीं से तुम निकाले जाओगे।”
قَالَ فِيهَا تَحْيَوْنَ وَفِيهَا تَمُوتُونَ وَمِنْهَا تُخْرَجُونَۖ
हे आदम की संतान! हमने तुम्हारे लिए एक वस्त्र उतारा है जो तुम्हारी नग्नता को ढँकता है, और पंख भी; और सावधानी का वस्त्र —
يَٰبَنِے ءَادَمَ قَدْ أَنزَلْنَا عَلَيْكُمْ لِبَاساٗ يُوَٰرِے سَوْءَٰتِكُمْ وَرِيشاٗ وَلِبَاسَ اَ۬لتَّقْوَىٰۖ
वही बेहतर है।
ذَٰلِكَ خَيْرٞۖ
यह ईश्वर के संकेतों में से है — शायद वे स्मरण करें।
ذَٰلِكَ مِنْ ءَايَٰتِ اِ۬للَّهِ لَعَلَّهُمْ يَذَّكَّرُونَۖ
हे आदम की संतान! बहकाने वाला तुम्हें परीक्षा में न डाले, जैसे उसने तुम्हारे दोनों पूर्वजों को उद्यान से निकाला, उनसे उनका वस्त्र छीनते हुए ताकि उन्हें उनकी नग्नता दिखाए,
يَٰبَنِے ءَادَمَ لَا يَفْتِنَنَّكُمُ اُ۬لشَّيْطَٰنُ كَمَا أَخْرَجَ أَبَوَيْكُم مِّنَ اَ۬لْجَنَّةِ يَنزِعُ عَنْهُمَا لِبَاسَهُمَا لِيُرِيَهُمَا سَوْءَٰتِهِمَاۖ
क्योंकि वह और उसका क़बीला तुम्हें वहाँ से देखते हैं जहाँ से तुम उन्हें नहीं देखते।
إِنَّهُۥ يَرَيٰكُمْ هُوَ وَقَبِيلُهُۥ مِنْ حَيْثُ لَا تَرَوْنَهُمْۖ
हमने बहकाने वालों को उनका हिमायती बनाया है जो विश्वास नहीं करते।
إِنَّا جَعَلْنَا اَ۬لشَّيَٰطِينَ أَوْلِيَآءَ لِلذِينَ لَا يُؤْمِنُونَۖ
और जब वे कोई निर्लज्जता करते हैं, तो कहते हैं: “हमने अपने पूर्वजों को ऐसा करते पाया, और ईश्वर ने हमें इसका आदेश दिया है।”
وَإِذَا فَعَلُواْ فَٰحِشَةٗ قَالُواْ وَجَدْنَا عَلَيْهَا ءَابَآءَنَا وَاللَّهُ أَمَرَنَا بِهَاۖ
कहो: “ईश्वर निश्चय ही निर्लज्जता का आदेश नहीं देता।
قُلْ إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يَأْمُرُ بِالْفَحْشَآءِۖ
क्या तुम ईश्वर के विषय में वह कहोगे जो तुम नहीं जानते?”
اَ۬تَقُولُونَ عَلَى اَ۬للَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَۖ
कहो: “मेरे अभिभावक ने निष्पक्षता का आदेश दिया है।
قُلْ أَمَرَ رَبِّے بِالْقِسْطِۖ
और हर माथा टेकने के क्षण पर अपनी दिशाएँ उसकी ओर बनाए रखो,
وَأَقِيمُواْ وُجُوهَكُمْ عِندَ كُلِّ مَسْجِدٖۖ
और उसे पुकारो, विधान को अनन्य रूप से उसी को समर्पित करते हुए।
وَادْعُوهُ مُخْلِصِينَ لَهُ اُ۬لدِّينَۖ
जैसे उसने तुम्हें आरंभ दिया, वैसे ही तुम दोहराए जाओगे।”
كَمَا بَدَأَكُمْ تَعُودُونَۖ
एक भाग को उसने मार्ग दिखाया है;
فَرِيقاً هَدَىٰۖ
और दूसरे भाग पर भटकाव सिद्ध हो गया है,
وَفَرِيقاً حَقَّ عَلَيْهِمُ اُ۬لضَّلَٰلَةُۖ
क्योंकि उन्होंने ईश्वर के अतिरिक्त बहकाने वालों को हिमायती बना लिया, और समझते रहे कि वे मार्गदर्शन पाने वालों में से हैं।
إِنَّهُمُ اُ۪تَّخَذُواْ اُ۬لشَّيَٰطِينَ أَوْلِيَآءَ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ وَيَحْسِبُونَ أَنَّهُم مُّهْتَدُونَۖ
हे आदम की संतान! हर माथा टेकने के क्षण पर अपना शृंगार धारण करो, और खाओ और पियो,
يَٰبَنِے ءَادَمَ خُذُواْ زِينَتَكُمْ عِندَ كُلِّ مَسْجِدٖ وَكُلُواْ وَاشْرَبُواْۖ
परंतु अपव्यय न करो,
وَلَا تُسْرِفُواْۖ
क्योंकि वह अपव्यय करने वालों से प्रेम नहीं करता।
إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ اُ۬لْمُسْرِفِينَۖ
कहो: “ईश्वर के उस शृंगार को, जिसे उसने अपने आज्ञाकारियों के लिए निकाला, और जीविका की अच्छी वस्तुओं को किसने वर्जित ठहराया?”
۞ قُلْ مَنْ حَرَّمَ زِينَةَ اَ۬للَّهِ اِ۬لتِے أَخْرَجَ لِعِبَادِهِۦ وَالطَّيِّبَٰتِ مِنَ اَ۬لرِّزْقِۖ
कहो: “वह निकट जीवन में उनके लिए है जिन्होंने विश्वास किया, और पेशी के दिन वह केवल उन्हीं की होगी।”
قُلْ هِيَ لِلذِينَ ءَامَنُواْ فِے اِ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْيَا خَالِصَةٞ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِۖ
इसी प्रकार हम उस क़ौम के लिए संकेतों का विवरण देते हैं जो जानती है।
كَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ اُ۬لْأٓيَٰتِ لِقَوْمٖ يَعْلَمُونَۖ
कहो: “मेरे अभिभावक ने केवल निर्लज्जताओं को वर्जित किया है, खुली हों या भीतरी, अपराध को, बिना हक़ के ज़्यादती को, और इसे कि तुम ईश्वर के साथ उसे साझी ठहराओ जिसके लिए उसने कोई अधिकार नहीं उतारा, और इसे कि तुम ईश्वर के विषय में वह कहो जो तुम नहीं जानते।”
قُلْ إِنَّمَا حَرَّمَ رَبِّيَ اَ۬لْفَوَٰحِشَ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ وَالْإِثْمَ وَالْبَغْيَ بِغَيْرِ اِ۬لْحَقِّ وَأَن تُشْرِكُواْ بِاللَّهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِهِۦ سُلْطَٰناٗ وَأَن تَقُولُواْ عَلَى اَ۬للَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَۖ
और हर समुदाय के लिए एक अवधि है।
وَلِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٞۖ
जब उनकी अवधि आ जाती है, तो वे उसे एक घड़ी भी पीछे नहीं कर सकते,
فَإِذَا جَا أَجَلُهُمْ لَا يَسْتَٰٔخِرُونَ سَاعَةٗۖ
और न आगे कर सकते हैं।
وَلَا يَسْتَقْدِمُونَۖ
हे आदम की संतान! यदि तुम्हीं में से संदेशवाहक तुम्हारे पास आएँ, जो तुम्हें मेरे संकेतों का वर्णन करें — जो भी सावधान रहे और स्वयं को सुधार ले, उन पर कोई डर नहीं, और न वे दुखी होंगे।
يَٰبَنِے ءَادَمَ إِمَّا يَأْتِيَنَّكُمْ رُسُلٞ مِّنكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ ءَايَٰتِے فَمَنِ اِ۪تَّقَىٰ وَأَصْلَحَ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَۖ
परंतु जिन्होंने हमारे संकेतों को झुठलाया और जो उनके कारण घमंड से फूल गए — वही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।
وَالذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَاسْتَكْبَرُواْ عَنْهَا أُوْلَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ اُ۬لنَّارِ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَۖ
तो उससे बढ़कर अन्यायी कौन है जो ईश्वर के विरुद्ध झूठ गढ़ता है, या उसके संकेतों को झुठलाता है?
فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ اِ۪فْتَرَىٰ عَلَى اَ۬للَّهِ كَذِباً أَوْ كَذَّبَ بِـَٔايَٰتِهِۦۖ
यही वे हैं जिन्हें उनकी बही का अंश पहुँचेगा,
أُوْلَٰٓئِكَ يَنَالُهُمْ نَصِيبُهُم مِّنَ اَ۬لْكِتَٰبِۖ
जब तक कि हमारे भेजे गए जन उन्हें निष्ठा से सँभालने न आ जाएँ, और कहें: “कहाँ हैं वे जिन्हें तुम ईश्वर के अतिरिक्त पुकारते थे?” वे कहेंगे: “वे हमसे दूर भटक गए”,
حَتَّىٰ إِذَا جَآءَتْهُمْ رُسُلُنَا يَتَوَفَّوْنَهُمْ قَالُواْ أَيْنَ مَا كُنتُمْ تَدْعُونَ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ قَالُواْ ضَلُّواْ عَنَّاۖ
और वे अपने ही विरुद्ध साक्ष्य देंगे कि वे नकारते थे।
وَشَهِدُواْ عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَنَّهُمْ كَانُواْ كَٰفِرِينَۖ
वह कहेगा: “प्रच्छन्नों और मनुष्यों में से तुमसे पहले बीत चुके समुदायों में शामिल होकर आग में प्रवेश करो।”
قَالَ اَ۟دْخُلُواْ فِے أُمَمٖ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِكُم مِّنَ اَ۬لْجِنِّ وَالْإِنسِ فِے اِ۬لنَّارِۖ
जब भी कोई समुदाय उसमें प्रवेश करता है, वह अपनी बहन को धिक्कारता है,
كُلَّمَا دَخَلَتْ أُمَّةٞ لَّعَنَتْ أُخْتَهَاۖ
यहाँ तक कि जब वे सब उसमें एक-दूसरे से मिल जाते हैं, तो उनमें से अंतिम, पहले के विषय में कहता है: “हमारे अभिभावक, इन्हीं ने हमें भटकाया; अतः इन्हें आग से दोहरा दंड दीजिए।”
حَتَّىٰ إِذَا اَ۪دَّارَكُواْ فِيهَا جَمِيعاٗ قَالَتْ أُخْرَيٰهُمْ لِأُولَيٰهُمْ رَبَّنَا هَٰؤُلَآءِ اَ۬ضَلُّونَا فَـَٔاتِهِمْ عَذَاباٗ ضِعْفاٗ مِّنَ اَ۬لنَّارِۖ
वह कहेगा: “हर एक के लिए दोहरा है,
قَالَ لِكُلّٖ ضِعْفٞۖ
परंतु तुम नहीं जानते।”
وَلَٰكِن لَّا تَعْلَمُونَۖ
और उनमें से पहला अंतिम से कहेगा: “तो तुम्हें हम पर कोई बढ़त नहीं; अतः दंड चखो, उसके बदले जो तुम कमाते थे।”
۞ وَقَالَتْ أُولَيٰهُمْ لِأُخْرَيٰهُمْ فَمَا كَانَ لَكُمْ عَلَيْنَا مِن فَضْلٖ فَذُوقُواْ اُ۬لْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَۖ
निश्चय ही, जिन्होंने हमारे संकेतों को झुठलाया और जो उनके कारण घमंड से फूल गए, उनके लिए आकाश के द्वार नहीं खोले जाएँगे, और वे उद्यान में प्रवेश नहीं करेंगे, जब तक ऊँट सुई के छेद से न निकल जाए।
إِنَّ اَ۬لذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَاسْتَكْبَرُواْ عَنْهَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمْ أَبْوَٰبُ اُ۬لسَّمَآءِ وَلَا يَدْخُلُونَ اَ۬لْجَنَّةَ حَتَّىٰ يَلِجَ اَ۬لْجَمَلُ فِے سَمِّ اِ۬لْخِيَاطِۖ
इसी प्रकार हम बहिष्कृतों को प्रतिफल देते हैं।
وَكَذَٰلِكَ نَجْزِے اِ۬لْمُجْرِمِينَۖ
उनके लिए जहन्नम का एक बिछौना होगा,
لَهُم مِّن جَهَنَّمَ مِهَادٞۖ
और उनके ऊपर वह होगा जो उन पर छा जाएगा।
وَمِن فَوْقِهِمْ غَوَاشٖۖ
इसी प्रकार हम अन्यायियों को प्रतिफल देते हैं।
وَكَذَٰلِكَ نَجْزِے اِ۬لظَّٰلِمِينَۖ
और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए — हम किसी स्व पर उसकी क्षमता के सिवा कुछ नहीं डालते —
وَالذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ لَا نُكَلِّفُ نَفْساً إِلَّا وُسْعَهَاۖ
वही उद्यान वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।
أُوْلَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ اُ۬لْجَنَّةِ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَۖ
और हम उनके सीनों से हर द्वेष निकाल चुके होंगे; उनके नीचे नदियाँ बहेंगी,
وَنَزَعْنَا مَا فِے صُدُورِهِم مِّنْ غِلّٖ تَجْرِے مِن تَحْتِهِمُ اُ۬لْأَنْهَٰرُۖ
और वे कहेंगे: “प्रशंसा ईश्वर के लिए है, जिसने हमें इसकी ओर मार्ग दिखाया;
وَقَالُواْ اُ۬لْحَمْدُ لِلهِ اِ۬لذِے هَدَيٰنَا لِهَٰذَاۖ
हम मार्गदर्शन न पाते, यदि ईश्वर ने हमें मार्ग न दिखाया होता।
وَمَا كُنَّا لِنَهْتَدِيَ لَوْلَا أَنْ هَدَيٰنَا اَ۬للَّهُۖ
हमारे अभिभावक के संदेशवाहक निश्चय ही सत्य के साथ आए थे।”
لَقَدْ جَآءَتْ رُسُلُ رَبِّنَا بِالْحَقِّۖ
और उन्हें आवाज़ दी जाएगी: “यह वह उद्यान है जिसकी विरासत तुमने पाई, उसके बदले जो तुम करते थे।”
وَنُودُواْ أَن تِلْكُمُ اُ۬لْجَنَّةُ أُورِثْتُمُوهَا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَۖ
और उद्यान वाले आग वालों को आवाज़ देंगे: “हमने उसे सच पाया जो हमारे अभिभावक ने हमसे वादा किया था; क्या तुमने भी उसे सच पाया जो तुम्हारे अभिभावक ने तुमसे वादा किया था?”
وَنَادَىٰ أَصْحَٰبُ اُ۬لْجَنَّةِ أَصْحَٰبَ اَ۬لنَّارِ أَن قَدْ وَجَدْنَا مَا وَعَدَنَا رَبُّنَا حَقّاٗ فَهَلْ وَجَدتُّم مَّا وَعَدَ رَبُّكُمْ حَقّاٗۖ
वे कहेंगे: “हाँ।”
قَالُواْ نَعَمْۖ
तब उनके बीच एक उद्घोषक घोषणा करेगा: “ईश्वर का धिक्कार अन्यायियों पर है, जो ईश्वर की राह रोकते हैं, उसे टेढ़ी करने की खोज में रहते हैं, और अंतिम जीवन को नकारते हैं।”
فَأَذَّنَ مُؤَذِّنُۢ بَيْنَهُمْ أَن لَّعْنَةُ اُ۬للَّهِ عَلَى اَ۬لظَّٰلِمِينَ اَ۬لذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اِ۬للَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجاٗ وَهُم بِالْأٓخِرَةِ كَٰفِرُونَۖ
और दोनों के बीच एक पर्दा है।
وَبَيْنَهُمَا حِجَابٞۖ
और ऊँचाइयों पर कुछ पुरुष हैं जो हर एक को उसके निशानों से पहचानते हैं,
وَعَلَى اَ۬لْأَعْرَافِ رِجَالٞ يَعْرِفُونَ كُلّاَۢ بِسِيمَيٰهُمْۖ
और वे उद्यान वालों को आवाज़ देंगे: “तुम पर शांति हो” —
وَنَادَوْاْ أَصْحَٰبَ اَ۬لْجَنَّةِ أَن سَلَٰمٌ عَلَيْكُمْۖ
उन्होंने स्वयं उसमें प्रवेश नहीं किया है, जबकि वे उसकी लालसा रखते हैं।
لَمْ يَدْخُلُوهَا وَهُمْ يَطْمَعُونَۖ
और जब उनकी दृष्टियाँ आग वालों की ओर फेरी जाएँगी, तो वे कहेंगे: “हमारे अभिभावक, हमें अन्यायी क़ौम के साथ न रखिए।”
۞ وَإِذَا صُرِفَتْ أَبْصَٰرُهُمْ تِلْقَا أَصْحَٰبِ اِ۬لنَّارِ قَالُواْ رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا مَعَ اَ۬لْقَوْمِ اِ۬لظَّٰلِمِينَۖ
और ऊँचाइयों वाले कुछ पुरुषों को आवाज़ देंगे जिन्हें वे उनके निशानों से पहचानते हैं: “तुम्हारा जत्था तुम्हारे किसी काम नहीं आया, और न वह घमंड जिस पर तुम फूलते थे।”
وَنَادَىٰ أَصْحَٰبُ اُ۬لْأَعْرَافِ رِجَالاٗ يَعْرِفُونَهُم بِسِيمَيٰهُمْ قَالُواْ مَا أَغْنَىٰ عَنكُمْ جَمْعُكُمْ وَمَا كُنتُمْ تَسْتَكْبِرُونَۖ
“क्या ये वही हैं जिनके विषय में तुम शपथ खाते थे कि ईश्वर उन्हें कोई दया नहीं पहुँचाएगा?”
أَهَٰؤُلَآءِ اِ۬لذِينَ أَقْسَمْتُمْ لَا يَنَالُهُمُ اُ۬للَّهُ بِرَحْمَةٍۖ
“उद्यान में प्रवेश करो; तुम पर कोई डर नहीं, और न तुम दुखी होगे।”
اُ۟دْخُلُواْ اُ۬لْجَنَّةَ لَا خَوْفٌ عَلَيْكُمْ وَلَا أَنتُمْ تَحْزَنُونَۖ
और आग वाले उद्यान वालों को आवाज़ देंगे: “हम पर पानी उड़ेल दो, या उसमें से जो ईश्वर ने तुम्हें जीविका के रूप में दिया है।”
وَنَادَىٰ أَصْحَٰبُ اُ۬لنَّارِ أَصْحَٰبَ اَ۬لْجَنَّةِ أَنْ أَفِيضُواْ عَلَيْنَا مِنَ اَ۬لْمَآءِ اَ۬وْ مِمَّا رَزَقَكُمُ اُ۬للَّهُۖ
वे कहेंगे: “ईश्वर ने इन दोनों को निश्चय ही नकारने वालों पर वर्जित किया है, जिन्होंने अपने विधान को मनबहलाव और खेल बना लिया, और जिन्हें निकट जीवन ने छल लिया।”
قَالُواْ إِنَّ اَ۬للَّهَ حَرَّمَهُمَا عَلَى اَ۬لْكَٰفِرِينَ اَ۬لذِينَ اَ۪تَّخَذُواْ دِينَهُمْ لَهْواٗ وَلَعِباٗ وَغَرَّتْهُمُ اُ۬لْحَيَوٰةُ اُ۬لدُّنْيَاۖ
तो आज हम उन्हें भुला देते हैं, जैसे उन्होंने अपने इस दिन के मिलन को भुला दिया, और इसलिए कि वे हमारे संकेतों को हठ से अस्वीकार करते थे।
فَالْيَوْمَ نَنسَيٰهُمْ كَمَا نَسُواْ لِقَآءَ يَوْمِهِمْ هَٰذَا وَمَا كَانُواْ بِـَٔايَٰتِنَا يَجْحَدُونَۖ
हम उनके पास निश्चय ही एक ग्रंथ लाए, जिसका हमने पूरे ज्ञान के साथ विवरण दिया, विश्वास करने वाली क़ौम के लिए मार्गदर्शन और दया।
وَلَقَدْ جِئْنَٰهُم بِكِتَٰبٖ فَصَّلْنَٰهُ عَلَىٰ عِلْمٍ هُدىٗ وَرَحْمَةٗ لِّقَوْمٖ يُؤْمِنُونَۖ
क्या वे केवल उसके पूर्वकथन की प्रतीक्षा कर रहे हैं?
هَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا تَأْوِيلَهُۥۖ
जिस दिन उसका पूर्वकथन आ जाएगा, जो पहले उसे भुला चुके थे वे कहेंगे: “हमारे अभिभावक के संदेशवाहक सचमुच सत्य के साथ आए थे; क्या हमारे कोई मध्यस्थ हैं जो हमारे लिए मध्यस्थता करें, या हमें वापस लाया जा सकता है, ताकि हम उससे भिन्न करें जो हम करते थे?”
يَوْمَ يَأْتِے تَأْوِيلُهُۥ يَقُولُ اُ۬لذِينَ نَسُوهُ مِن قَبْلُ قَدْ جَآءَتْ رُسُلُ رَبِّنَا بِالْحَقِّ فَهَل لَّنَا مِن شُفَعَآءَ فَيَشْفَعُواْ لَنَا أَوْ نُرَدُّ فَنَعْمَلَ غَيْرَ اَ۬لذِے كُنَّا نَعْمَلُۖ
उन्होंने अपने स्व को घाटे में डाल दिया, और जो वे गढ़ते थे वह उनसे दूर भटक गया।
قَدْ خَسِرُواْ أَنفُسَهُمْ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُواْ يَفْتَرُونَۖ
तुम्हारा अभिभावक निश्चय ही ईश्वर है, जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में रचा, फिर वह भवन पर स्थित हुआ।
إِنَّ رَبَّكُمُ اُ۬للَّهُ اُ۬لذِے خَلَقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالْأَرْضَ فِے سِتَّةِ أَيَّامٖ ثُمَّ اَ۪سْتَوَىٰ عَلَى اَ۬لْعَرْشِۖ
वह रात से दिन को ढँकता है, जो उसका निरंतर पीछा करती है — और सूर्य, चंद्रमा और तारे, उसके आदेश के वशीभूत।
يُغْشِے اِ۬ليْلَ اَ۬لنَّهَارَ يَطْلُبُهُۥ حَثِيثاٗ وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ وَالنُّجُومَ مُسَخَّرَٰتِۢ بِأَمْرِهِۦۖ
क्या रचना और आदेश उसी के नहीं हैं?
أَلَا لَهُ اُ۬لْخَلْقُ وَالْأَمْرُۖ
आशीषमय है ईश्वर, जो सभी प्राणियों का अभिभावक है।
تَبَٰرَكَ اَ۬للَّهُ رَبُّ اُ۬لْعَٰلَمِينَۖ
अपने अभिभावक को पुकारो, गिड़गिड़ाते हुए और चुपके से,
اَ۟دْعُواْ رَبَّكُمْ تَضَرُّعاٗ وَخُفْيَةًۖ
क्योंकि वह सीमाएँ पार करने वालों से प्रेम नहीं करता।
إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ اُ۬لْمُعْتَدِينَۖ
और धरती पर उसके सुधार के बाद बिगाड़ न फैलाओ,
وَلَا تُفْسِدُواْ فِے اِ۬لْأَرْضِ بَعْدَ إِصْلَٰحِهَاۖ
और डर और आशा के साथ उसे पुकारो,
وَادْعُوهُ خَوْفاٗ وَطَمَعاًۖ
क्योंकि ईश्वर की दया भलाई करने वालों के निकट है।
إِنَّ رَحْمَتَ اَ۬للَّهِ قَرِيبٞ مِّنَ اَ۬لْمُحْسِنِينَۖ
वही है जो हवाओं को अपनी दया के आगे फैली हुई भेजता है,
۞ وَهْوَ اَ۬لذِے يُرْسِلُ اُ۬لرِّيَٰحَ نُشُراَۢ بَيْنَ يَدَےْ رَحْمَتِهِۦۖ
यहाँ तक कि जब वे भारी बादलों से लद जाती हैं, तो हम उन्हें किसी मृत भूभाग की ओर हाँकते हैं; फिर हम उससे पानी उतारते हैं, और उससे हर प्रकार के फल निकालते हैं।
حَتَّىٰ إِذَا أَقَلَّتْ سَحَاباٗ ثِقَالاٗ سُقْنَٰهُ لِبَلَدٖ مَّيِّتٖ فَأَنزَلْنَا بِهِ اِ۬لْمَآءَ فَأَخْرَجْنَا بِهِۦ مِن كُلِّ اِ۬لثَّمَرَٰتِۖ
इसी प्रकार हम मृतकों को निकालेंगे — शायद तुम स्मरण करो।
كَذَٰلِكَ نُخْرِجُ اُ۬لْمَوْتَىٰ لَعَلَّكُمْ تَذَّكَّرُونَۖ
और अच्छा भूभाग, उसकी वनस्पति उसके अभिभावक की अनुमति से निकलती है,
وَالْبَلَدُ اُ۬لطَّيِّبُ يَخْرُجُ نَبَاتُهُۥ بِإِذْنِ رَبِّهِۦۖ
जबकि जो निकृष्ट है, उससे वह केवल कंजूसी से ही निकलती है।
وَالذِے خَبُثَ لَا يَخْرُجُ إِلَّا نَكِداٗۖ
इसी प्रकार हम कृतज्ञ क़ौम के लिए संकेतों को विविध रूप देते हैं।
كَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ اُ۬لْأٓيَٰتِ لِقَوْمٖ يَشْكُرُونَۖ
हमने निश्चय ही नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा, और उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो: तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई दूसरा देवता नहीं;
لَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحاً إِلَىٰ قَوْمِهِۦ فَقَالَ يَٰقَوْمِ اِ۟عْبُدُواْ اُ۬للَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُۥۖ
क्योंकि मैं तुम्हारे लिए एक विशाल दिन के दंड से डरता हूँ।”
إِنِّيَ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٖۖ
उसकी क़ौम के दरबार ने कहा: “हम तुम्हें अवश्य स्पष्ट भटकाव में देखते हैं।”
قَالَ اَ۬لْمَلَأُ مِن قَوْمِهِۦ إِنَّا لَنَرَيٰكَ فِے ضَلَٰلٖ مُّبِينٖۖ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! मुझमें कोई भटकाव नहीं, परंतु मैं सभी प्राणियों के अभिभावक का संदेशवाहक हूँ।
قَالَ يَٰقَوْمِ لَيْسَ بِے ضَلَٰلَةٞ وَلَٰكِنِّے رَسُولٞ مِّن رَّبِّ اِ۬لْعَٰلَمِينَۖ
मैं तुम्हें अपने अभिभावक के संदेश पहुँचाता हूँ, तुम्हें सच्चाई से सलाह देता हूँ, और मैं ईश्वर की ओर से वह जानता हूँ जो तुम नहीं जानते।
أُبَلِّغُكُمْ رِسَٰلَٰتِ رَبِّے وَأَنصَحُ لَكُمْ وَأَعْلَمُ مِنَ اَ۬للَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَۖ
क्या तुम्हें आश्चर्य है कि तुम्हारे अभिभावक की ओर से एक स्मरण तुम्हीं में से एक पुरुष के द्वारा तुम्हारे पास आए, ताकि वह तुम्हें चेतावनी दे, तुम सावधान रहो, और शायद तुम पर दया की जाए?”
أَوَعَجِبْتُمْ أَن جَآءَكُمْ ذِكْرٞ مِّن رَّبِّكُمْ عَلَىٰ رَجُلٖ مِّنكُمْ لِيُنذِرَكُمْ وَلِتَتَّقُواْ وَلَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَۖ
उन्होंने उसे झुठलाया; हमने उसे और उन्हें जो उसके साथ जलयान में थे उबार लिया,
فَكَذَّبُوهُ فَأَنجَيْنَٰهُ وَالذِينَ مَعَهُۥ فِے اِ۬لْفُلْكِۖ
और जिन्होंने हमारे संकेतों को झुठलाया था उन्हें हमने डुबो दिया,
وَأَغْرَقْنَا اَ۬لذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَاۖ
क्योंकि वह एक अंधी क़ौम थी।
إِنَّهُمْ كَانُواْ قَوْماً عَمِينَۖ
और आद की ओर उनके भाई हूद —
وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمْ هُوداٗۖ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो: तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई दूसरा देवता नहीं।
قَالَ يَٰقَوْمِ اِ۟عْبُدُواْ اُ۬للَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُۥۖ
तो क्या तुम सावधान नहीं रहते?”
أَفَلَا تَتَّقُونَۖ
उसकी क़ौम के दरबार ने, जिन्होंने नकारा था, कहा: “हम तुम्हें अवश्य पूर्ण मूर्खता में देखते हैं, और हम अनुमान लगाते हैं कि तुम अवश्य झूठों में से हो।”
قَالَ اَ۬لْمَلَأُ اُ۬لذِينَ كَفَرُواْ مِن قَوْمِهِۦ إِنَّا لَنَرَيٰكَ فِے سَفَاهَةٖ وَإِنَّا لَنَظُنُّكَ مِنَ اَ۬لْكَٰذِبِينَۖ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! मुझमें कोई मूर्खता नहीं, परंतु मैं सभी प्राणियों के अभिभावक का संदेशवाहक हूँ।
قَالَ يَٰقَوْمِ لَيْسَ بِے سَفَاهَةٞ وَلَٰكِنِّے رَسُولٞ مِّن رَّبِّ اِ۬لْعَٰلَمِينَۖ
मैं तुम्हें अपने अभिभावक के संदेश पहुँचाता हूँ, और मैं तुम्हारे लिए एक भरोसेमंद सलाहकार हूँ।
أُبَلِّغُكُمْ رِسَٰلَٰتِ رَبِّے وَأَنَا لَكُمْ نَاصِحٌ أَمِينٌۖ
क्या तुम्हें आश्चर्य है कि तुम्हारे अभिभावक की ओर से एक स्मरण तुम्हीं में से एक पुरुष के द्वारा तुम्हारे पास आए, ताकि वह तुम्हें चेतावनी दे?
۞ أَوَعَجِبْتُمْ أَن جَآءَكُمْ ذِكْرٞ مِّن رَّبِّكُمْ عَلَىٰ رَجُلٖ مِّنكُمْ لِيُنذِرَكُمْۖ
और स्मरण करो कि उसने तुम्हें नूह की क़ौम के बाद उत्तराधिकारी बनाया, और रचना में तुम्हें विस्तार में बढ़ा दिया।
وَاذْكُرُواْ إِذْ جَعَلَكُمْ خُلَفَآءَ مِنۢ بَعْدِ قَوْمِ نُوحٖ وَزَادَكُمْ فِے اِ۬لْخَلْقِ بَصْطَةٗۖ
अतः ईश्वर के उपकारों का स्मरण करो, शायद तुम सफल हो जाओ।”
فَاذْكُرُواْ ءَالَآءَ اَ۬للَّهِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَۖ
उन्होंने कहा: “क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि हम केवल ईश्वर की आज्ञा का पालन करें, और जिसकी आज्ञा का पालन हमारे पूर्वज करते थे उसे छोड़ दें? तो हमारे पास वह ले आओ जिसका तुम हमसे वादा करते हो, यदि तुम सच्चों में से हो।”
قَالُواْ أَجِئْتَنَا لِنَعْبُدَ اَ۬للَّهَ وَحْدَهُۥ وَنَذَرَ مَا كَانَ يَعْبُدُ ءَابَآؤُنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ اَ۬لصَّٰدِقِينَۖ
उसने कहा: “तुम्हारे अभिभावक की ओर से एक गंदगी और एक क्रोध तुम पर पहले ही आ पड़े हैं।
قَالَ قَدْ وَقَعَ عَلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْ رِجْسٞ وَغَضَبٌۖ
क्या तुम मुझसे उन गुणों के विषय में बहस करते हो जिनके नाम तुमने और तुम्हारे पूर्वजों ने रख लिए, जबकि ईश्वर ने उनके विषय में कोई अधिकार नहीं उतारा?
أَتُجَٰدِلُونَنِے فِے أَسْمَآءٖ سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَءَابَآؤُكُم مَّا نَزَّلَ اَ۬للَّهُ بِهَا مِن سُلْطَٰنٖۖ
तो प्रतीक्षा करो, क्योंकि मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वालों में से हूँ।”
فَانتَظِرُواْۖ إِنِّے مَعَكُم مِّنَ اَ۬لْمُنتَظِرِينَۖ
तब हमने उसे और उन्हें जो उसके साथ थे अपनी ओर की दया से उबार लिया, और जिन्होंने हमारे संकेतों को झुठलाया था उनके अंतिम अवशेष तक को काट दिया: वे विश्वास करने वाले नहीं थे।
فَأَنجَيْنَٰهُ وَالذِينَ مَعَهُۥ بِرَحْمَةٖ مِّنَّا وَقَطَعْنَا دَابِرَ اَ۬لذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَمَا كَانُواْ مُؤْمِنِينَۖ
और समूद की ओर उनके भाई सालेह —
وَإِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمْ صَٰلِحاٗۖ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो: तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई दूसरा देवता नहीं।
قَالَ يَٰقَوْمِ اِ۟عْبُدُواْ اُ۬للَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُۥۖ
तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम्हारे पास एक स्पष्ट प्रमाण आ चुका है:
قَدْ جَآءَتْكُم بَيِّنَةٞ مِّن رَّبِّكُمْۖ
यह ईश्वर की ऊँटनी है, तुम्हारे लिए एक संकेत।
هَٰذِهِۦ نَاقَةُ اُ۬للَّهِ لَكُمْ ءَايَةٗۖ
तो उसे छोड़ दो: वह ईश्वर की धरती पर खाए,
فَذَرُوهَا تَأْكُلْ فِے أَرْضِ اِ۬للَّهِۖ
और उसे किसी बुराई से न छुओ, वरना एक पीड़ादायक दंड तुम्हें पकड़ लेगा।”
وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوٓءٖ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابٌ أَلِيمٞۖ
और स्मरण करो कि उसने तुम्हें आद के बाद उत्तराधिकारी बनाया, और धरती पर तुम्हें टिकाया: उसके मैदानों में तुम महल बना लेते हो, और पहाड़ों को तराशकर घर बनाते हो।
وَاذْكُرُواْ إِذْ جَعَلَكُمْ خُلَفَآءَ مِنۢ بَعْدِ عَادٖ وَبَوَّأَكُمْ فِے اِ۬لْأَرْضِ تَتَّخِذُونَ مِن سُهُولِهَا قُصُوراٗ وَتَنْحِتُونَ اَ۬لْجِبَالَ بِيُوتاٗۖ
अतः ईश्वर के उपकारों का स्मरण करो,
فَاذْكُرُواْ ءَالَآءَ اَ۬للَّهِۖ
और धरती पर बिगाड़ने वाले बनकर उपद्रव न फैलाओ।
وَلَا تَعْثَوْاْ فِے اِ۬لْأَرْضِ مُفْسِدِينَۖ
उसकी क़ौम के दरबार ने, जो घमंड से फूल गए थे, उनसे कहा जिन्हें कमज़ोर कर दिया गया था, उनमें से जिन्होंने विश्वास किया था: “क्या तुम जानते हो कि सालेह अपने अभिभावक की ओर से भेजा गया है?”
قَالَ اَ۬لْمَلَأُ اُ۬لذِينَ اَ۪سْتَكْبَرُواْ مِن قَوْمِهِۦ لِلذِينَ اَ۟سْتُضْعِفُواْ لِمَنْ ءَامَنَ مِنْهُمْ أَتَعْلَمُونَ أَنَّ صَٰلِحاٗ مُّرْسَلٞ مِّن رَّبِّهِۦۖ
उन्होंने कहा: “जिसके साथ वह भेजा गया है, उस पर हम निश्चय ही विश्वास करते हैं।”
قَالُواْ إِنَّا بِمَا أُرْسِلَ بِهِۦ مُؤْمِنُونَۖ
जो घमंड से फूल गए थे उन्होंने कहा: “जिस पर तुम विश्वास करते हो, उसे हम तो निश्चय ही नकारते हैं।”
قَالَ اَ۬لذِينَ اَ۪سْتَكْبَرُواْ إِنَّا بِالذِے ءَامَنتُم بِهِۦ كَٰفِرُونَۖ
फिर उन्होंने ऊँटनी का अंग-भंग कर दिया, अपने अभिभावक के आदेश की उद्दंडता से अवहेलना की,
۞ فَعَقَرُواْ اُ۬لنَّاقَةَ وَعَتَوْاْ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْۖ
और कहा: “हे सालेह! हमारे पास वह ले आओ जिसका तुम हमसे वादा करते हो, यदि तुम भेजे गए जनों में से हो।”
وَقَالُواْ يَٰصَٰلِحُ اُ۪ئْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ اَ۬لْمُرْسَلِينَۖ
तब झटके ने उन्हें पकड़ लिया, और वे अपने ठिकाने में पड़े हुए, निश्चल रह गए।
فَأَخَذَتْهُمُ اُ۬لرَّجْفَةُ فَأَصْبَحُواْ فِے دَارِهِمْ جَٰثِمِينَۖ
उसने उनसे पीठ फेर ली और कहा: “हे मेरी क़ौम! मैंने तुम्हें अपने अभिभावक का संदेश निश्चय ही पहुँचा दिया, और तुम्हें सलाह दी,
فَتَوَلَّىٰ عَنْهُمْ وَقَالَ يَٰقَوْمِ لَقَدْ أَبْلَغْتُكُمْ رِسَالَةَ رَبِّے وَنَصَحْتُ لَكُمْۖ
परंतु तुम सच्चे सलाहकारों से प्रेम नहीं करते।”
وَلَٰكِن لَّا تُحِبُّونَ اَ۬لنَّٰصِحِينَۖ
और लूत — जब उसने अपनी क़ौम से कहा: “क्या तुम वह निर्लज्जता करते हो जिसमें सभी प्राणियों में से किसी ने तुमसे पहल नहीं की?
وَلُوطاً إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِۦ أَتَأْتُونَ اَ۬لْفَٰحِشَةَ مَا سَبَقَكُم بِهَا مِنْ أَحَدٖ مِّنَ اَ۬لْعَٰلَمِينَۖ
तुम अवश्य कामना से स्त्रियों के अतिरिक्त पुरुषों के पास जाते हो।
إِنَّكُمْ لَتَأْتُونَ اَ۬لرِّجَالَ شَهْوَةٗ مِّن دُونِ اِ۬لنِّسَآءِۖ
तुम तो बल्कि अतिवादियों की क़ौम हो।”
بَلْ أَنتُمْ قَوْمٞ مُّسْرِفُونَۖ
और उसकी क़ौम का उत्तर केवल यही था कि उन्होंने कहा: “इन्हें अपनी बस्ती से बाहर निकाल दो;
وَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِۦ إِلَّا أَن قَالُواْ أَخْرِجُوهُم مِّن قَرْيَتِكُمْۖ
ये ऐसे लोग हैं जो स्वयं को स्वच्छ करना चाहते हैं।”
إِنَّهُمْ أُنَاسٞ يَتَطَهَّرُونَۖ
तब हमने उसे और उसके परिवार को उबार लिया, सिवा उसकी पत्नी के, जो पीछे ठहरने वालों में थी।
فَأَنجَيْنَٰهُ وَأَهْلَهُۥ إِلَّا اَ۪مْرَأَتَهُۥ كَانَتْ مِنَ اَ۬لْغَٰبِرِينَۖ
और हमने उन पर एक वर्षा बरसाई।
وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَراٗۖ
तो नज़र डालो कि बहिष्कृतों का परिणाम कैसा रहा।
فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ اُ۬لْمُجْرِمِينَۖ
और मदयन की ओर उनके भाई शुऐब —
وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْباٗۖ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम! ईश्वर की आज्ञा का पालन करो: तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई दूसरा देवता नहीं।
قَالَ يَٰقَوْمِ اِ۟عْبُدُواْ اُ۬للَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُۥۖ
तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम्हारे पास एक स्पष्ट प्रमाण आ चुका है।
قَدْ جَآءَتْكُم بَيِّنَةٞ مِّن رَّبِّكُمْۖ
तो माप और तराज़ू निष्ठापूर्वक दो,
فَأَوْفُواْ اُ۬لْكَيْلَ وَالْمِيزَانَۖ
और लोगों को उनकी वस्तुओं में हानि न पहुँचाओ,
وَلَا تَبْخَسُواْ اُ۬لنَّاسَ أَشْيَآءَهُمْۖ
और धरती पर उसके सुधार के बाद बिगाड़ न फैलाओ।
وَلَا تُفْسِدُواْ فِے اِ۬لْأَرْضِ بَعْدَ إِصْلَٰحِهَاۖ
यह तुम्हारे लिए बेहतर है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो।
ذَٰلِكُمْ خَيْرٞ لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَۖ
और हर पथ पर घात लगाकर न बैठो, धमकाते हुए और जो भी उस पर विश्वास करता है उसके लिए ईश्वर की राह रोकते हुए, और उसे टेढ़ी करने की खोज में।
وَلَا تَقْعُدُواْ بِكُلِّ صِرَٰطٖ تُوعِدُونَ وَتَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اِ۬للَّهِ مَنْ ءَامَنَ بِهِۦ وَتَبْغُونَهَا عِوَجاٗۖ
और स्मरण करो कि तुम संख्या में कम थे, और उसने तुम्हें संख्या में अधिक कर दिया।
وَاذْكُرُواْ إِذْ كُنتُمْ قَلِيلاٗ فَكَثَّرَكُمْۖ
और नज़र डालो कि बिगाड़ने वालों का परिणाम कैसा रहा।
وَانظُرُواْ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ اُ۬لْمُفْسِدِينَۖ
और यदि तुममें से एक समूह ने उस पर विश्वास किया है जिसके साथ मैं भेजा गया हूँ, और दूसरे समूह ने विश्वास नहीं किया, तो धैर्य रखो जब तक कि ईश्वर हमारे बीच निर्णय न कर दे:
وَإِن كَانَ طَآئِفَةٞ مِّنكُمْ ءَامَنُواْ بِالذِے أُرْسِلْتُ بِهِۦ وَطَآئِفَةٞ لَّمْ يُؤْمِنُواْ فَاصْبِرُواْ حَتَّىٰ يَحْكُمَ اَ۬للَّهُ بَيْنَنَاۖ
वह निर्णय करने वालों में सबसे बेहतर है।”
وَهْوَ خَيْرُ اُ۬لْحَٰكِمِينَۖ
उसकी क़ौम के दरबार ने, जो घमंड से फूल गए थे, कहा: “हे शुऐब, हम तुम्हें और उन्हें जिन्होंने तुम्हारे साथ विश्वास किया, अपनी बस्ती से अवश्य बाहर निकाल देंगे, जब तक कि तुम हमारे मत में पुनः प्रवेश न कर लो।”
۞ قَالَ اَ۬لْمَلَأُ اُ۬لذِينَ اَ۪سْتَكْبَرُواْ مِن قَوْمِهِۦ لَنُخْرِجَنَّكَ يَٰشُعَيْبُ وَالذِينَ ءَامَنُواْ مَعَكَ مِن قَرْيَتِنَا أَوْ لَتَعُودُنَّ فِے مِلَّتِنَاۖ
उसने कहा: “भले ही हमें उससे अरुचि हो?
قَالَ أَوَلَوْ كُنَّا كَٰرِهِينَۖ
हमने ईश्वर पर झूठ गढ़ा होगा, यदि हम तुम्हारे मत में पुनः प्रवेश करें जबकि ईश्वर हमें उससे उबार चुका है।
قَدِ اِ۪فْتَرَيْنَا عَلَى اَ۬للَّهِ كَذِباً إِنْ عُدْنَا فِے مِلَّتِكُم بَعْدَ إِذْ نَجَّيٰنَا اَ۬للَّهُ مِنْهَاۖ
हमारे लिए यह उचित नहीं कि हम उसमें पुनः प्रवेश करें, जब तक कि ईश्वर की, हमारे अभिभावक की, मर्ज़ी न हो।
وَمَا يَكُونُ لَنَا أَن نَّعُودَ فِيهَا إِلَّا أَنْ يَّشَآءَ اَ۬للَّهُ رَبُّنَاۖ
हमारा अभिभावक अपने ज्ञान से हर चीज़ को समेटे हुए है।
وَسِعَ رَبُّنَا كُلَّ شَےْءٍ عِلْماًۖ
हम ईश्वर को ही मुख़्तार बनाते हैं।
عَلَى اَ۬للَّهِ تَوَكَّلْنَاۖ
हमारे अभिभावक, हमारे और हमारी क़ौम के बीच पूर्ण सत्य के साथ खोल दीजिए:
رَبَّنَا اَ۪فْتَحْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ قَوْمِنَا بِالْحَقِّۖ
आप खोलने वालों में सबसे बेहतर हैं।”
وَأَنتَ خَيْرُ اُ۬لْفَٰتِحِينَۖ
और उसकी क़ौम के दरबार ने, जो नकारते थे, कहा: “यदि तुम शुऐब का अनुसरण करोगे, तो तुम तब अवश्य घाटा उठाने वाले होगे।”
وَقَالَ اَ۬لْمَلَأُ اُ۬لذِينَ كَفَرُواْ مِن قَوْمِهِۦ لَئِنِ اِ۪تَّبَعْتُمْ شُعَيْباً إِنَّكُمْ إِذاٗ لَّخَٰسِرُونَۖ
तब झटके ने उन्हें पकड़ लिया, और वे अपने ठिकाने में पड़े हुए, निश्चल रह गए।
فَأَخَذَتْهُمُ اُ۬لرَّجْفَةُ فَأَصْبَحُواْ فِے دَارِهِمْ جَٰثِمِينَۖ
जिन्होंने शुऐब को झुठलाया, ऐसा हुआ मानो वे वहाँ कभी रहे ही नहीं।
اَ۬لذِينَ كَذَّبُواْ شُعَيْباٗ كَأَن لَّمْ يَغْنَوْاْ فِيهَاۖ
जिन्होंने शुऐब को झुठलाया, वही घाटा उठाने वाले थे।
اَ۬لذِينَ كَذَّبُواْ شُعَيْباٗ كَانُواْ هُمُ اُ۬لْخَٰسِرِينَۖ
उसने उनसे पीठ फेर ली और कहा: “हे मेरी क़ौम! मैंने तुम्हें अपने अभिभावक के संदेश निश्चय ही पहुँचा दिए, और तुम्हें सलाह दी।
فَتَوَلَّىٰ عَنْهُمْ وَقَالَ يَٰقَوْمِ لَقَدْ أَبْلَغْتُكُمْ رِسَٰلَٰتِ رَبِّے وَنَصَحْتُ لَكُمْۖ
तो मैं नकारने वाली क़ौम के लिए कैसे शोक करूँ?”
فَكَيْفَ ءَاسَىٰ عَلَىٰ قَوْمٖ كَٰفِرِينَۖ
हमने किसी बस्ती में कोई सूचनादाता नहीं भेजा, बिना इसके कि हमने उस बस्ती वालों को विपत्ति और हानि से पकड़ा हो, शायद वे गिड़गिड़ाएँ।
وَمَا أَرْسَلْنَا فِے قَرْيَةٖ مِّن نَّبِےٓءٍ إِلَّا أَخَذْنَا أَهْلَهَا بِالْبَأْسَآءِ وَالضَّرَّآءِ لَعَلَّهُمْ يَضَّرَّعُونَۖ
फिर हमने बुराई को भलाई से बदल दिया, यहाँ तक कि वे फले-फूले
ثُمَّ بَدَّلْنَا مَكَانَ اَ۬لسَّيِّئَةِ اِ۬لْحَسَنَةَ حَتَّىٰ عَفَواْۖ
और कहने लगे: “हानि और ख़ुशहाली हमारे पूर्वजों को भी छू चुकी है”; तब हमने उन्हें अचानक पकड़ लिया, जबकि उन्हें आभास तक न हुआ।
وَّقَالُواْ قَدْ مَسَّ ءَابَآءَنَا اَ۬لضَّرَّآءُ وَالسَّرَّآءُ فَأَخَذْنَٰهُم بَغْتَةٗ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَۖ
और यदि बस्तियों वालों ने विश्वास किया होता और सावधानी बरती होती, तो हम उन पर आकाश और धरती की आशीषें निश्चय ही खोल देते;
وَلَوْ أَنَّ أَهْلَ اَ۬لْقُرَىٰ ءَامَنُواْ وَاتَّقَوْاْ لَفَتَحْنَا عَلَيْهِم بَرَكَٰتٖ مِّنَ اَ۬لسَّمَآءِ وَالْأَرْضِۖ
परंतु उन्होंने झुठलाया, तब हमने उन्हें उसके कारण पकड़ लिया जो वे कमाते थे।
وَلَٰكِن كَذَّبُواْ فَأَخَذْنَٰهُم بِمَا كَانُواْ يَكْسِبُونَۖ
क्या बस्तियों वाले इस बात से निश्चिंत हैं कि हमारी कठोरता रात में उन पर नहीं आएगी, जब वे सो रहे हों? या क्या बस्तियों वाले निश्चिंत हैं कि हमारी कठोरता दिन चढ़े उन पर नहीं आएगी, जब वे खेल रहे हों?
أَفَأَمِنَ أَهْلُ اُ۬لْقُرَىٰ أَنْ يَّأْتِيَهُم بَأْسُنَا بَيَٰتاٗ وَهُمْ نَآئِمُونَ أَوْ أَمِنَ أَهْلُ اُ۬لْقُرَىٰ أَنْ يَّأْتِيَهُم بَأْسُنَا ضُحىٗ وَهُمْ يَلْعَبُونَۖ
क्या वे ईश्वर के षड्यंत्र से स्वयं को सुरक्षित मानते हैं?
أَفَأَمِنُواْ مَكْرَ اَ۬للَّهِۖ
ईश्वर के षड्यंत्र से स्वयं को सुरक्षित केवल घाटा उठाने वाली क़ौम ही मानती है।
فَلَا يَأْمَنُ مَكْرَ اَ۬للَّهِ إِلَّا اَ۬لْقَوْمُ اُ۬لْخَٰسِرُونَۖ
क्या उन्हें, जो वहाँ के रहने वालों के बाद धरती की विरासत पाते हैं, इससे मार्ग नहीं दिखाया जाता कि यदि हमारी मर्ज़ी हो तो हम उन पर उनके दोषों का मूल्य ला दें,
۞ أَوَلَمْ يَهْدِ لِلذِينَ يَرِثُونَ اَ۬لْأَرْضَ مِنۢ بَعْدِ أَهْلِهَا أَن لَّوْ نَشَآءُ اَ۬صَبْنَٰهُم بِذُنُوبِهِمْۖ
और हम उनके मर्मों पर छाप लगा देते हैं, जिससे वे सुनते नहीं?
وَنَطْبَعُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ فَهُمْ لَا يَسْمَعُونَۖ
ये वे बस्तियाँ हैं जिनकी कुछ सूचनाएँ हम तुम्हें बताते हैं।
تِلْكَ اَ۬لْقُرَىٰ نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنۢبَآئِهَاۖ
उनके संदेशवाहक उनके पास निश्चय ही स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए थे, परंतु वे उस पर विश्वास करने को तैयार न थे जिसे उन्होंने पहले झुठला दिया था।
وَلَقَدْ جَآءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَٰتِ فَمَا كَانُواْ لِيُؤْمِنُواْ بِمَا كَذَّبُواْ مِن قَبْلُۖ
इसी प्रकार ईश्वर नकारने वालों के मर्मों पर छाप लगाता है।
كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اُ۬للَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ اِ۬لْكَٰفِرِينَۖ
और हमने उनमें से अधिकतर में कोई निभाई गई संधि नहीं पाई;
وَمَا وَجَدْنَا لِأَكْثَرِهِم مِّنْ عَهْدٖۖ
और हमने अवश्य पाया कि उनमें से अधिकतर अतिक्रमणकारी थे।
وَإِنْ وَّجَدْنَا أَكْثَرَهُمْ لَفَٰسِقِينَۖ
फिर उनके बाद हमने मूसा को अपने संकेतों के साथ फ़िरऔन और उसके दरबार की ओर उठाया, परंतु उन्होंने उन पर अन्याय किया।
ثُمَّ بَعَثْنَا مِنۢ بَعْدِهِم مُّوسَىٰ بِـَٔايَٰتِنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَإِيْهِۦ فَظَلَمُواْ بِهَاۖ
तो नज़र डालो कि बिगाड़ने वालों का परिणाम कैसा रहा।
فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ اُ۬لْمُفْسِدِينَۖ
और मूसा ने कहा: “हे फ़िरऔन! मैं निश्चय ही सभी प्राणियों के अभिभावक का संदेशवाहक हूँ, पूर्ण सत्य के साथ,
وَقَالَ مُوسَىٰ يَٰفِرْعَوْنُ إِنِّے رَسُولٞ مِّن رَّبِّ اِ۬لْعَٰلَمِينَ حَقِيقٌۖ
ईश्वर के विषय में सत्य के सिवा कुछ न कहने को बँधा हुआ।
عَلَيَّ أَن لَّا أَقُولَ عَلَى اَ۬للَّهِ إِلَّا اَ۬لْحَقَّۖ
मैं तुम्हारे पास तुम्हारे अभिभावक की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण लेकर आया हूँ;
قَدْ جِئْتُكُم بِبَيِّنَةٖ مِّن رَّبِّكُمْۖ
अतः इसराईल की संतान को मेरे साथ जाने दो।”
فَأَرْسِلْ مَعِے بَنِے إِسْرَآءِيلَۖ
उसने कहा: “यदि तुम कोई संकेत लेकर आए हो, तो उसे ले आओ, यदि तुम सच्चों में से हो।”
قَالَ إِن كُنتَ جِئْتَ بِـَٔايَةٖ فَأْتِ بِهَا إِن كُنتَ مِنَ اَ۬لصَّٰدِقِينَۖ
तब उसने अपनी लाठी फेंकी, और देखो वह एक स्पष्ट सर्प हो गई; और उसने अपना हाथ निकाला, और देखो वह नज़र डालने वालों के लिए श्वेत था।
فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعْبَانٞ مُّبِينٞ وَنَزَعَ يَدَهُۥ فَإِذَا هِيَ بَيْضَآءُ لِلنَّٰظِرِينَۖ
फ़िरऔन की क़ौम के दरबार ने कहा: “यह अवश्य एक ज्ञानी भ्रमकार है, जो तुम्हें तुम्हारी धरती से निकालना चाहता है।”
قَالَ اَ۬لْمَلَأُ مِن قَوْمِ فِرْعَوْنَ إِنَّ هَٰذَا لَسَٰحِرٌ عَلِيمٞ يُرِيدُ أَنْ يُّخْرِجَكُم مِّنْ أَرْضِكُمْۖ
“तो तुम क्या सलाह देते हो?”
فَمَاذَا تَأْمُرُونَۖ
उन्होंने कहा: “उसे और उसके भाई को लंबित रखो, और राजधानियों में इकट्ठा करने वालों को भेजो, जो तुम्हारे पास हर ज्ञानी भ्रमकार को ले आएँ।”
قَالُواْ أَرْجِهِ وَأَخَاهُ وَأَرْسِلْ فِے اِ۬لْمَدَآئِنِ حَٰشِرِينَ يَأْتُوكَ بِكُلِّ سَٰحِرٍ عَلِيمٖۖ
और भ्रमकार फ़िरऔन के पास आए; उन्होंने कहा: “क्या हमें अवश्य कोई पुरस्कार मिलेगा, यदि हम विजेता हुए?”
وَجَآءَ اَ۬لسَّحَرَةُ فِرْعَوْنَ قَالُواْ إِنَّ لَنَا لَأَجْراً إِن كُنَّا نَحْنُ اُ۬لْغَٰلِبِينَۖ
उसने कहा: “हाँ, और तुम अवश्य निकटस्थों में से होगे।”
قَالَ نَعَمْ وَإِنَّكُمْ لَمِنَ اَ۬لْمُقَرَّبِينَۖ
उन्होंने कहा: “हे मूसा! या तो तुम डालो, या हम स्वयं डालने वाले हों।”
قَالُواْ يَٰمُوسَىٰ إِمَّا أَن تُلْقِيَ وَإِمَّا أَن نَّكُونَ نَحْنُ اُ۬لْمُلْقِينَۖ
उसने कहा: “डालो।”
قَالَ أَلْقُواْۖ
जब उन्होंने डाला, तो उन्होंने लोगों की आँखों को भ्रम से ठग लिया, और उन्हें आदर से भर दिया,
فَلَمَّا أَلْقَوْاْ سَحَرُواْ أَعْيُنَ اَ۬لنَّاسِ وَاسْتَرْهَبُوهُمْۖ
और वे एक विशाल भ्रम ले आए।
وَجَآءُو بِسِحْرٍ عَظِيمٖۖ
और हमने मूसा पर प्रकट किया: “अपनी लाठी डालो”;
۞ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَلْقِ عَصَاكَۖ
और तभी वह उसे निगलने लगी जिसका वे स्वांग भरते थे।
فَإِذَا هِيَ تَلَقَّفُ مَا يَأْفِكُونَۖ
तब सत्य साकार हो गया, और जो वे करते थे वह व्यर्थ हो गया।
فَوَقَعَ اَ۬لْحَقُّ وَبَطَلَ مَا كَانُواْ يَعْمَلُونَۖ
वे वहीं पराजित हुए, और नीचा किए जाकर चले गए।
فَغُلِبُواْ هُنَالِكَ وَانقَلَبُواْ صَٰغِرِينَۖ
और भ्रमकार माथा टेके हुए डाल दिए गए।
وَأُلْقِيَ اَ۬لسَّحَرَةُ سَٰجِدِينَۖ
उन्होंने कहा: “हम सभी प्राणियों के अभिभावक पर विश्वास करते हैं, मूसा और हारून के अभिभावक पर।”
قَالُواْ ءَامَنَّا بِرَبِّ اِ۬لْعَٰلَمِينَ رَبِّ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَۖ
फ़िरऔन ने कहा: “तुमने उस पर विश्वास कर लिया इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति देता! यह अवश्य एक षड्यंत्र है जो तुमने राजधानी में किया, ताकि उसके निवासियों को उससे निकाल दो; तुम शीघ्र जान जाओगे।
قَالَ فِرْعَوْنُ ءَاٰ۬مَنتُم بِهِۦ قَبْلَ أَنْ ءَاذَنَ لَكُمْ إِنَّ هَٰذَا لَمَكْرٞ مَّكَرْتُمُوهُ فِے اِ۬لْمَدِينَةِ لِتُخْرِجُواْ مِنْهَا أَهْلَهَاۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَۖ
मैं तुम्हारे हाथ और पैर विपरीत ओर से अवश्य विच्छेदित करूँगा, फिर मैं तुम सबको एक साथ अवश्य खंभे पर जड़ूँगा।”
لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَٰفٖ ثُمَّ لَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَۖ
उन्होंने कहा: “हम अपने अभिभावक की ओर ही पलटते हैं।
قَالُواْ إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَۖ
और तुम्हें हमसे केवल इसी बात का बैर है कि हमने अपने अभिभावक के संकेतों पर विश्वास किया, जब वे हमारे पास आ गए।
وَمَا تَنقِمُ مِنَّا إِلَّا أَنْ ءَامَنَّا بِـَٔايَٰتِ رَبِّنَا لَمَّا جَآءَتْنَاۖ
हमारे अभिभावक, हमें धैर्य से सराबोर कर दीजिए, और हमें ईश्वर के प्रति खरे रहने वालों के रूप में निष्ठा से सँभालिए।”
رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْراٗ وَتَوَفَّنَا مُسْلِمِينَۖ
और फ़िरऔन की क़ौम के दरबार ने कहा: “क्या तुम मूसा और उसकी क़ौम को छोड़ दोगे, कि वे धरती पर बिगाड़ फैलाएँ और तुम्हें तथा अपनी उस आज्ञाकारिता को छोड़ दें जो वे तुम्हारे प्रति रखते हैं?”
وَقَالَ اَ۬لْمَلَأُ مِن قَوْمِ فِرْعَوْنَ أَتَذَرُ مُوسَىٰ وَقَوْمَهُۥ لِيُفْسِدُواْ فِے اِ۬لْأَرْضِ وَيَذَرَكَ وَءَالِهَتَكَۖ
उसने कहा: “हम उनके बेटों का संहार करेंगे और उनकी स्त्रियों की लज्जा पर आघात करेंगे; हम उनसे निश्चय ही ऊपर हैं, प्रबल स्थिति में।”
قَالَ سَنَقْتُلُ أَبْنَآءَهُمْ وَنَسْتَحْيِۦ نِسَآءَهُمْ وَإِنَّا فَوْقَهُمْ قَٰهِرُونَۖ
मूसा ने अपनी क़ौम से कहा: “ईश्वर से मदद माँगो, और धैर्यवान रहो;
قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ اِ۪سْتَعِينُواْ بِاللَّهِ وَاصْبِرُواْۖ
क्योंकि धरती ईश्वर की है; वह अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे उसकी विरासत देता है,
إِنَّ اَ۬لْأَرْضَ لِلهِ يُورِثُهَا مَنْ يَّشَآءُ مِنْ عِبَادِهِۦۖ
और परिणाम सावधानी बरतने वालों के लिए है।”
وَالْعَٰقِبَةُ لِلْمُتَّقِينَۖ
उन्होंने कहा: “तुम्हारे हमारे पास आने से पहले भी हमें सताया गया, और तुम्हारे हमारे पास आने के बाद भी।”
قَالُواْ أُوذِينَا مِن قَبْلِ أَن تَأْتِيَنَا وَمِنۢ بَعْدِ مَا جِئْتَنَاۖ
उसने कहा: “संभव है तुम्हारा अभिभावक तुम्हारे शत्रु को नष्ट कर दे और तुम्हें धरती पर उत्तराधिकारी बना दे, ताकि वह नज़र डाले कि तुम कैसा कर्म करोगे।”
قَالَ عَسَىٰ رَبُّكُمْ أَنْ يُّهْلِكَ عَدُوَّكُمْ وَيَسْتَخْلِفَكُمْ فِے اِ۬لْأَرْضِ فَيَنظُرَ كَيْفَ تَعْمَلُونَۖ
और हमने निश्चय ही फ़िरऔन के कुल को वर्षों और फलों की कमी से पकड़ा, शायद वे स्मरण करें।
وَلَقَدْ أَخَذْنَا ءَالَ فِرْعَوْنَ بِالسِّنِينَ وَنَقْصٖ مِّنَ اَ۬لثَّمَرَٰتِ لَعَلَّهُمْ يَذَّكَّرُونَۖ
जब उन्हें भलाई मिलती है, वे कहते हैं: “यह हमारे हिस्से का है”;
فَإِذَا جَآءَتْهُمُ اُ۬لْحَسَنَةُ قَالُواْ لَنَا هَٰذِهِۦۖ
और यदि उन पर कोई बुराई आ पड़ती है, तो उसे मूसा और उसके साथ वालों के अपशकुन पर डालते हैं।
وَإِن تُصِبْهُمْ سَيِّئَةٞ يَطَّيَّرُواْ بِمُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُۥۖ
क्या ऐसा नहीं कि वास्तव में उनका शकुन ईश्वर के पास है?
أَلَا إِنَّمَا طَٰٓئِرُهُمْ عِندَ اَ۬للَّهِۖ
परंतु उनमें से अधिकतर नहीं जानते।
وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَۖ
और उन्होंने कहा: “तुम हमारे पास जो भी संकेत लाओ, उससे हमें भ्रम में डालने के लिए, हम तुम पर भरोसा नहीं करेंगे।”
۞ وَقَالُواْ مَهْمَا تَأْتِنَا بِهِۦ مِنْ ءَايَةٖ لِّتَسْحَرَنَا بِهَا فَمَا نَحْنُ لَكَ بِمُؤْمِنِينَۖ
तब हमने उन पर बाढ़, टिड्डियाँ, जूँएँ, मेंढक और रक्त भेजे — विवरण सहित संकेत; परंतु वे घमंड से फूल गए और बहिष्कृतों की क़ौम थे।
فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ اُ۬لطُّوفَانَ وَالْجَرَادَ وَالْقُمَّلَ وَالضَّفَادِعَ وَالدَّمَ ءَايَٰتٖ مُّفَصَّلَٰتٖ فَاسْتَكْبَرُواْ وَكَانُواْ قَوْماٗ مُّجْرِمِينَۖ
और जब उन पर मलिनता आ पड़ी, तो उन्होंने कहा: “हे मूसा! हमारे लिए अपने अभिभावक को पुकारो, उस संधि के अनुसार जो उसने तुमसे की है; यदि तुम हमें मलिनता से राहत दोगे, तो हम तुम पर अवश्य भरोसा करेंगे, और इसराईल की संतान को अवश्य तुम्हारे साथ जाने देंगे।”
وَلَمَّا وَقَعَ عَلَيْهِمُ اُ۬لرِّجْزُ قَالُواْ يَٰمُوسَى اَ۟دْعُ لَنَا رَبَّكَ بِمَا عَهِدَ عِندَكَ لَئِن كَشَفْتَ عَنَّا اَ۬لرِّجْزَ لَنُؤْمِنَنَّ لَكَ وَلَنُرْسِلَنَّ مَعَكَ بَنِے إِسْرَآءِيلَۖ
परंतु जब हमने उन्हें मलिनता से एक अवधि तक राहत दे दी, जिस तक उन्हें पहुँचना था, तभी वे मुकर गए।
فَلَمَّا كَشَفْنَا عَنْهُمُ اُ۬لرِّجْزَ إِلَىٰ أَجَلٍ هُم بَٰلِغُوهُ إِذَا هُمْ يَنكُثُونَۖ
तब हमने उनसे प्रतिशोध लिया, और उन्हें लहर में डुबो दिया, इसलिए कि उन्होंने हमारे संकेतों को झुठलाया और वे उनसे लापरवाह रहे।
فَانتَقَمْنَا مِنْهُمْ فَأَغْرَقْنَٰهُمْ فِے اِ۬لْيَمِّ بِأَنَّهُمْ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَكَانُواْ عَنْهَا غَٰفِلِينَۖ
और जिस क़ौम को कमज़ोर कर दिया गया था, उसे हमने धरती के उन उदय-स्थलों और अस्त-स्थलों की विरासत दी जिन्हें हमने आशीष दी थी।
وَأَوْرَثْنَا اَ۬لْقَوْمَ اَ۬لذِينَ كَانُواْ يُسْتَضْعَفُونَ مَشَٰرِقَ اَ۬لْأَرْضِ وَمَغَٰرِبَهَا اَ۬لتِے بَٰرَكْنَا فِيهَاۖ
और तुम्हारे अभिभावक का सुंदर बोल इसराईल की संतान पर पूरा हो गया, इसलिए कि उन्होंने धैर्य रखा;
وَتَمَّتْ كَلِمَةُ رَبِّكَ اَ۬لْحُسْنَىٰ عَلَىٰ بَنِے إِسْرَآءِيلَ بِمَا صَبَرُواْۖ
और हमने वह ध्वस्त कर दिया जो फ़िरऔन और उसकी क़ौम करते थे, और जो वे खड़ा करते थे।
وَدَمَّرْنَا مَا كَانَ يَصْنَعُ فِرْعَوْنُ وَقَوْمُهُۥ وَمَا كَانُواْ يَعْرِشُونَۖ
और हमने इसराईल की संतान को समुद्र पार कराया; वे एक ऐसी क़ौम के पास पहुँचे जो अपनी मूर्तियों के आगे डटी हुई थी।
وَجَٰوَزْنَا بِبَنِے إِسْرَآءِيلَ اَ۬لْبَحْرَ فَأَتَوْاْ عَلَىٰ قَوْمٖ يَعْكُفُونَ عَلَىٰ أَصْنَامٖ لَّهُمْۖ
उन्होंने कहा: “हे मूसा! हमारे लिए एक देवता बना दो, जैसे उनके देवता हैं।”
قَالُواْ يَٰمُوسَى اَ۪جْعَل لَّنَا إِلَٰهاٗ كَمَا لَهُمْ ءَالِهَةٞۖ
उसने कहा: “तुम निश्चय ही एक अज्ञानी क़ौम हो।
قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٞ تَجْهَلُونَۖ
जिसका ये अभ्यास करते हैं वह विनाश के लिए नियत है,
إِنَّ هَٰؤُلَآءِ مُتَبَّرٞ مَّا هُمْ فِيهِۖ
और व्यर्थ है जो वे करते थे।”
وَبَٰطِلٞ مَّا كَانُواْ يَعْمَلُونَۖ
उसने कहा: “क्या मैं तुम्हारे लिए ईश्वर के अतिरिक्त कोई देवता खोजूँ, जबकि उसने तुम्हें सभी प्राणियों पर वरीयता दी है?”
قَالَ أَغَيْرَ اَ۬للَّهِ أَبْغِيكُمْ إِلَٰهاٗ وَهْوَ فَضَّلَكُمْ عَلَى اَ۬لْعَٰلَمِينَۖ
और जब हमने तुम्हें फ़िरऔन के कुल से उबारा, जो तुम्हें बुरा दंड देता था, तुम्हारे बेटों का संहार करता और तुम्हारी स्त्रियों की लज्जा पर आघात करता —
وَإِذْ أَنجَيْنَٰكُم مِّنْ ءَالِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوٓءَ اَ۬لْعَذَابِ يَقْتُلُونَ أَبْنَآءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَآءَكُمْۖ
और उसमें तुम्हारे अभिभावक की ओर से वह था जो विशाल रूप से परखता है।
وَفِے ذَٰلِكُم بَلَآءٞ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٞۖ
और हमने मूसा के लिए तीस रातों का वादे का समय तय किया, जिसे हमने दस से पूरा किया: इस प्रकार उसके अभिभावक का तय किया हुआ वादे का समय चालीस रातों में पूरा हुआ।
۞ وَوَٰعَدْنَا مُوسَىٰ ثَلَٰثِينَ لَيْلَةٗ وَأَتْمَمْنَٰهَا بِعَشْرٖ فَتَمَّ مِيقَٰتُ رَبِّهِۦ أَرْبَعِينَ لَيْلَةٗۖ
और मूसा ने अपने भाई हारून से कहा: “मेरी क़ौम में मेरे उत्तराधिकारी बनो, सुधार करो, और बिगाड़ने वालों की राह का अनुसरण न करो।”
وَقَالَ مُوسَىٰ لِأَخِيهِ هَٰرُونَ اَ۟خْلُفْنِے فِے قَوْمِے وَأَصْلِحْ وَلَا تَتَّبِعْ سَبِيلَ اَ۬لْمُفْسِدِينَۖ
और जब मूसा हमारे निर्धारित वादे के समय पर आया, और उसका अभिभावक उससे बोला, तो उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मुझे अपने को दिखाइए, कि मैं आप पर नज़र डालूँ।”
وَلَمَّا جَآءَ مُوسَىٰ لِمِيقَٰتِنَا وَكَلَّمَهُۥ رَبُّهُۥ قَالَ رَبِّ أَرِنِے أَنظُرْ إِلَيْكَۖ
उसने कहा: “तुम मुझे नहीं देखोगे, परंतु पहाड़ पर नज़र डालो: यदि वह अपने स्थान पर टिका रहे, तो तुम मुझे देखोगे।”
قَالَ لَن تَرَيٰنِے وَلَٰكِنُ اُ۟نظُرْ إِلَى اَ۬لْجَبَلِ فَإِنِ اِ۪سْتَقَرَّ مَكَانَهُۥ فَسَوْفَ تَرَيٰنِےۖ
जब उसके अभिभावक ने पहाड़ के सामने स्वयं को अनावृत किया, तो उसने उसे समतल कर दिया, और मूसा वज्राहत होकर गिर पड़ा।
فَلَمَّا تَجَلَّىٰ رَبُّهُۥ لِلْجَبَلِ جَعَلَهُۥ دَكّاٗ وَخَرَّ مُوسَىٰ صَعِقاٗۖ
जब उसे होश आया, तो उसने कहा: “आपकी महिमा हो! मैं आपकी ओर पलट आता हूँ, और मैं विश्वास करने वालों में पहला हूँ।”
فَلَمَّا أَفَاقَ قَالَ سُبْحَٰنَكَ تُبْتُ إِلَيْكَ وَأَنَا أَوَّلُ اُ۬لْمُؤْمِنِينَۖ
उसने कहा: “हे मूसा! मैंने तुम्हें अपने संदेशों और अपने बोल के लिए लोगों में से चुना है; अतः जो मैंने तुम्हें दिया है उसे लो, और कृतज्ञों में से हो जाओ।”
قَالَ يَٰمُوسَىٰ إِنِّے اِ۪صْطَفَيْتُكَ عَلَى اَ۬لنَّاسِ بِرِسَالَتِے وَبِكَلَٰمِے فَخُذْ مَا ءَاتَيْتُكَ وَكُن مِّنَ اَ۬لشَّٰكِرِينَۖ
और हमने उसके लिए तख़्तियों पर हर चीज़ के विषय में एक उपदेश और हर चीज़ का विवरण लिखा।
وَكَتَبْنَا لَهُۥ فِے اِ۬لْأَلْوَاحِ مِن كُلِّ شَےْءٖ مَّوْعِظَةٗ وَتَفْصِيلاٗ لِّكُلِّ شَےْءٖۖ
अतः उन्हें बल के साथ लो, और अपनी क़ौम को आदेश दो कि वह उनमें से जो सबसे सुंदर है उसे ले।
فَخُذْهَا بِقُوَّةٖ وَأْمُرْ قَوْمَكَ يَأْخُذُواْ بِأَحْسَنِهَاۖ
मैं तुम्हें अतिक्रमणकारियों का ठिकाना दिखाऊँगा।
سَأُوْرِيكُمْ دَارَ اَ۬لْفَٰسِقِينَۖ
मैं अपने संकेतों से उन्हें दूर कर दूँगा जो धरती पर बिना हक़ के घमंड करते हैं; यदि वे हर संकेत देख लें, तब भी उस पर विश्वास नहीं करेंगे; और यदि वे सुबुद्धि की राह देख लें, तो उसे राह नहीं बनाएँगे, जबकि यदि वे दिशाहीनता की राह देख लें, तो उसे राह बना लेंगे।
سَأَصْرِفُ عَنْ ءَايَٰتِيَ اَ۬لذِينَ يَتَكَبَّرُونَ فِے اِ۬لْأَرْضِ بِغَيْرِ اِ۬لْحَقِّ وَإِنْ يَّرَوْاْ كُلَّ ءَايَةٖ لَّا يُؤْمِنُواْ بِهَا وَإِنْ يَّرَوْاْ سَبِيلَ اَ۬لرُّشْدِ لَا يَتَّخِذُوهُ سَبِيلاٗ وَإِنْ يَّرَوْاْ سَبِيلَ اَ۬لْغَيِّ يَتَّخِذُوهُ سَبِيلاٗۖ
यह इसलिए कि उन्होंने हमारे संकेतों को झुठलाया और वे उनसे लापरवाह रहे।
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَكَانُواْ عَنْهَا غَٰفِلِينَۖ
और जिन्होंने हमारे संकेतों और अंतिम जीवन के मिलन को झुठलाया, उनके कर्म ढह गए; क्या उन्हें उसके अलावा किसी और आधार पर प्रतिफल दिया जाएगा जो वे करते थे?
وَالذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَلِقَآءِ اِ۬لْأٓخِرَةِ حَبِطَتْ أَعْمَٰلُهُمْۖ هَلْ يُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كَانُواْ يَعْمَلُونَۖ
और मूसा की क़ौम ने उसके बाद अपने आभूषणों से एक बछड़ा बना लिया, एक देह जो रँभाती थी।
وَاتَّخَذَ قَوْمُ مُوسَىٰ مِنۢ بَعْدِهِۦ مِنْ حُلِيِّهِمْ عِجْلاٗ جَسَداٗ لَّهُۥ خُوَارٌۖ
क्या उन्होंने नहीं देखा कि वह न उनसे बोलता था, न उन्हें किसी राह की ओर मार्ग दिखाता था?
أَلَمْ يَرَوْاْ أَنَّهُۥ لَا يُكَلِّمُهُمْ وَلَا يَهْدِيهِمْ سَبِيلاًۖ
उन्होंने उसे बना लिया, और वे अन्यायी हुए।
اِ۪تَّخَذُوهُ وَكَانُواْ ظَٰلِمِينَۖ
और जब वे पछतावे में पड़ गए, यह देखकर कि वे भटक गए हैं, तो उन्होंने कहा: “यदि हमारा अभिभावक हम पर दया नहीं करेगा और हमें क्षमा नहीं करेगा, तो हम अवश्य घाटा उठाने वालों में से होंगे।”
۞ وَلَمَّا سُقِطَ فِے أَيْدِيهِمْ وَرَأَوْاْ أَنَّهُمْ قَدْ ضَلُّواْ قَالُواْ لَئِن لَّمْ يَرْحَمْنَا رَبُّنَا وَيَغْفِرْ لَنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ اَ۬لْخَٰسِرِينَۖ
जब मूसा क्रोधित, कटु होकर अपनी क़ौम की ओर लौटा, तो उसने कहा: “कितना भयानक है वह जो तुमने मेरे बाद मेरे स्थान पर किया!
وَلَمَّا رَجَعَ مُوسَىٰ إِلَىٰ قَوْمِهِۦ غَضْبَٰنَ أَسِفاٗ قَالَ بِئْسَمَا خَلَفْتُمُونِے مِنۢ بَعْدِيَۖ
क्या तुमने अपने अभिभावक के आदेश को शीघ्र करना चाहा?”
أَعَجِلْتُمْ أَمْرَ رَبِّكُمْۖ
और उसने तख़्तियाँ डाल दीं, और अपने भाई को सिर से पकड़ लिया, उसे अपनी ओर खींचते हुए।
وَأَلْقَى اَ۬لْأَلْوَاحَ وَأَخَذَ بِرَأْسِ أَخِيهِ يَجُرُّهُۥ إِلَيْهِۖ
उसने कहा: “मेरी माता के पुत्र! क़ौम ने मुझे निश्चय ही कमज़ोर कर दिया, और वह मुझे मार डालने के निकट पहुँच गई; अतः शत्रुओं को मेरे विषय में हर्षित न करो, और मुझे अन्यायी क़ौम के साथ न रखो।”
قَالَ اَ۪بْنَ أُمَّ إِنَّ اَ۬لْقَوْمَ اَ۪سْتَضْعَفُونِے وَكَادُواْ يَقْتُلُونَنِے فَلَا تُشْمِتْ بِيَ اَ۬لْأَعْدَآءَ وَلَا تَجْعَلْنِے مَعَ اَ۬لْقَوْمِ اِ۬لظَّٰلِمِينَۖ
उसने कहा: “मेरे अभिभावक, मुझे और मेरे भाई को क्षमा कीजिए, और हमें अपनी दया में प्रवेश कराइए;
قَالَ رَبِّ اِ۪غْفِرْ لِے وَلِأَخِے وَأَدْخِلْنَا فِے رَحْمَتِكَۖ
आप दयालुओं में सबसे दयालु हैं।”
وَأَنتَ أَرْحَمُ اُ۬لرَّٰحِمِينَۖ
जिन्होंने बछड़ा बना लिया, उन्हें उनके अभिभावक का क्रोध निश्चय ही पहुँचेगा, और निकट जीवन में अपमान भी।
إِنَّ اَ۬لذِينَ اَ۪تَّخَذُواْ اُ۬لْعِجْلَ سَيَنَالُهُمْ غَضَبٞ مِّن رَّبِّهِمْ وَذِلَّةٞ فِے اِ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْيَاۖ
इसी प्रकार हम झूठ गढ़ने वालों को प्रतिफल देते हैं।
وَكَذَٰلِكَ نَجْزِے اِ۬لْمُفْتَرِينَۖ
और जिन्होंने बुरे कर्म किए, फिर उसके बाद पश्चात्ताप किया और विश्वास किया — तुम्हारा अभिभावक उसके बाद अवश्य अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَالذِينَ عَمِلُواْ اُ۬لسَّيِّـَٔاتِ ثُمَّ تَابُواْ مِنۢ بَعْدِهَا وَءَامَنُواْ إِنَّ رَبَّكَ مِنۢ بَعْدِهَا لَغَفُورٞ رَّحِيمٞۖ
और जब मूसा का क्रोध थम गया, तो उसने तख़्तियाँ लीं; उनके लेख में उनके लिए मार्गदर्शन और दया थी जो अपने अभिभावक के प्रति आदर रखते हैं।
وَلَمَّا سَكَتَ عَن مُّوسَى اَ۬لْغَضَبُ أَخَذَ اَ۬لْأَلْوَاحَ وَفِے نُسْخَتِهَا هُدىٗ وَرَحْمَةٞ لِّلذِينَ هُمْ لِرَبِّهِمْ يَرْهَبُونَۖ
और मूसा ने हमारे निर्धारित वादे के समय के लिए अपनी क़ौम में से सत्तर पुरुषों को वरण किया।
وَاخْتَارَ مُوسَىٰ قَوْمَهُۥ سَبْعِينَ رَجُلاٗ لِّمِيقَٰتِنَاۖ
जब झटके ने उन्हें पकड़ लिया, तो उसने कहा: “मेरे अभिभावक, यदि आपकी मर्ज़ी होती, तो आप उन्हें पहले ही नष्ट कर देते, और मुझे भी।
فَلَمَّا أَخَذَتْهُمُ اُ۬لرَّجْفَةُ قَالَ رَبِّ لَوْ شِئْتَ أَهْلَكْتَهُم مِّن قَبْلُ وَإِيَّٰيَۖ
क्या आप हमें उसके कारण नष्ट करेंगे जो हममें के मूर्खों ने किया?
أَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ اَ۬لسُّفَهَآءُ مِنَّاۖ
यह आपकी परीक्षा ही तो है, जिससे आप जिस पर आपकी मर्ज़ी हो, उसे भटकाते हैं, और जिस पर आपकी मर्ज़ी हो, उसे मार्ग दिखाते हैं।
إِنْ هِيَ إِلَّا فِتْنَتُكَ تُضِلُّ بِهَا مَن تَشَآءُ وَتَهْدِے مَن تَشَآءُۖ
आप हमारे हिमायती हैं; अतः हमें क्षमा कीजिए, और हम पर दया कीजिए; आप क्षमा करने वालों में सबसे बेहतर हैं।
اَ۬نتَ وَلِيُّنَا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَاۖ وَأَنتَ خَيْرُ اُ۬لْغَٰفِرِينَۖ
और हमारे लिए इस निकट जीवन में एक उपकार दर्ज कीजिए, और अंतिम जीवन में भी;
۞ وَاكْتُبْ لَنَا فِے هَٰذِهِ اِ۬لدُّنْيَا حَسَنَةٗ وَفِے اِ۬لْأٓخِرَةِۖ
क्योंकि हम आपकी ओर पुनरुन्मुख होते हैं।”
إِنَّا هُدْنَا إِلَيْكَۖ
उसने कहा: “मेरा दंड, मैं उसे जिस पर मेरी मर्ज़ी हो, उस पर ला देता हूँ,
قَالَ عَذَابِيَ أُصِيبُ بِهِۦ مَنْ أَشَآءُۖ
और मेरी दया हर चीज़ को समेटे हुए है।
وَرَحْمَتِے وَسِعَتْ كُلَّ شَےْءٖۖ
मैं उसे उनके लिए दर्ज करूँगा जो सावधानी बरतते हैं, शुद्ध उदारता देते हैं, और जो हमारे संकेतों पर विश्वास करते हैं, जो उस संदेशवाहक का अनुसरण करते हैं, पूर्ववर्ती ग्रंथ से रहित सूचनादाता का, जिसे वे अपने यहाँ तौरात और इंजील में दर्ज पाते हैं, जो उन्हें मान्य का आदेश देता है और उन्हें अमान्य से मना करता है, उनके लिए अच्छी वस्तुओं को वैध ठहराता है और उन पर दूषित वस्तुओं को वर्जित करता है, और उनसे उनका जुआ और वे तौक़ हटाता है जो उन पर थे।
فَسَأَكْتُبُهَا لِلذِينَ يَتَّقُونَ وَيُؤْتُونَ اَ۬لزَّكَوٰةَ وَالذِينَ هُم بِـَٔايَٰتِنَا يُؤْمِنُونَ اَ۬لذِينَ يَتَّبِعُونَ اَ۬لرَّسُولَ اَ۬لنَّبِےٓءَ اَ۬لْأُمِّيَّ اَ۬لذِے يَجِدُونَهُۥ مَكْتُوباً عِندَهُمْ فِے اِ۬لتَّوْرَيٰةِ وَالْإِنجِيلِ يَأْمُرُهُم بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَيٰهُمْ عَنِ اِ۬لْمُنكَرِ وَيُحِلُّ لَهُمُ اُ۬لطَّيِّبَٰتِ وَيُحَرِّمُ عَلَيْهِمُ اُ۬لْخَبَٰٓئِثَ وَيَضَعُ عَنْهُمْ إِصْرَهُمْ وَالْأَغْلَٰلَ اَ۬لتِے كَانَتْ عَلَيْهِمْۖ
जो उस पर विश्वास करते हैं, उसका समर्थन करते हैं, उसकी सहायता करते हैं, और उस प्रकाश का अनुसरण करते हैं जो उसके साथ उतारा गया — वही सफल होने वाले हैं।”
فَالذِينَ ءَامَنُواْ بِهِۦ وَعَزَّرُوهُ وَنَصَرُوهُ وَاتَّبَعُواْ اُ۬لنُّورَ اَ۬لذِے أُنزِلَ مَعَهُۥ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْمُفْلِحُونَۖ
कहो: “हे लोगो! मैं तुम सबकी ओर निश्चय ही ईश्वर का संदेशवाहक हूँ, उसका जिसके लिए आकाशों और धरती का राजत्व है।
قُلْ يَٰأَيُّهَا اَ۬لنَّاسُ إِنِّے رَسُولُ اُ۬للَّهِ إِلَيْكُمْ جَمِيعاً اِ۬لذِے لَهُۥ مُلْكُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالْأَرْضِۖ
उसके सिवा कोई देवता नहीं।
لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ
वह जीवन देता है और मृत्यु देता है।
يُحْيِۦ وَيُمِيتُۖ
अतः ईश्वर और उसके संदेशवाहक पर विश्वास करो, पूर्ववर्ती ग्रंथ से रहित सूचनादाता पर, जो ईश्वर और उसके बोलों पर विश्वास करता है,
فَـَٔامِنُواْ بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ اِ۬لنَّبِےٓءِ اِ۬لْأُمِّيِّ اِ۬لذِے يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَكَلِمَٰتِهِۦۖ
और उसका अनुसरण करो, शायद तुम मार्गदर्शन पाओ।”
وَاتَّبِعُوهُ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَۖ
और मूसा की क़ौम में एक समुदाय है जो सत्य के अनुसार मार्ग दिखाता है और उसके द्वारा न्याय करता है।
وَمِن قَوْمِ مُوسَىٰ أُمَّةٞ يَهْدُونَ بِالْحَقِّ وَبِهِۦ يَعْدِلُونَۖ
और हमने उन्हें बारह वंशों में, समुदायों में बाँट दिया,
وَقَطَّعْنَٰهُمُ اُ۪ثْنَتَےْ عَشْرَةَ أَسْبَاطاً أُمَماٗۖ
और जब उसकी क़ौम ने उससे पीने के लिए पानी माँगा, तब हमने मूसा पर प्रकट किया: “अपनी लाठी से चट्टान को मारो”;
وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ إِذِ اِ۪سْتَسْقَيٰهُ قَوْمُهُۥ أَنِ اِ۪ضْرِب بِّعَصَاكَ اَ۬لْحَجَرَۖ
और देखो, उससे बारह सोते फूट निकले:
فَانۢبَجَسَتْ مِنْهُ اُ۪ثْنَتَا عَشْرَةَ عَيْناٗۖ
लोगों के हर समूह ने अपने पानी पीने का स्थान जान लिया।
قَدْ عَلِمَ كُلُّ أُنَاسٖ مَّشْرَبَهُمْۖ
और हमने उन पर बादल की छाया फैलाई, और उन पर मन्ना और बटेरें उतारीं:
وَظَلَّلْنَا عَلَيْهِمُ اُ۬لْغَمَٰمَ وَأَنزَلْنَا عَلَيْهِمُ اُ۬لْمَنَّ وَالسَّلْوَىٰۖ
“जो अच्छी चीज़ें हमने तुम्हें जीविका के रूप में दी हैं, उनमें से खाओ।”
كُلُواْ مِن طَيِّبَٰتِ مَا رَزَقْنَٰكُمْۖ
उन्होंने हम पर अन्याय नहीं किया,
وَمَا ظَلَمُونَاۖ
बल्कि वे स्वयं अपने ऊपर अन्याय करते थे।
وَلَٰكِن كَانُواْ أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَۖ
और जब उनसे कहा गया: “इस बस्ती में रहो, जहाँ तुम्हारी मर्ज़ी हो वहाँ से खाओ, कहो: हमें बोझमुक्त कीजिए, और द्वार से माथा टेके हुए प्रवेश करो: हम तुम्हारी भूलें क्षमा कर देंगे।
وَإِذْ قِيلَ لَهُمُ اُ۟سْكُنُواْ هَٰذِهِ اِ۬لْقَرْيَةَ وَكُلُواْ مِنْهَا حَيْثُ شِئْتُمْ وَقُولُواْ حِطَّةٞ وَادْخُلُواْ اُ۬لْبَابَ سُجَّداٗ تُغْفَرْ لَكُمْ خَطِيٓـَٰٔتُكُمْۖ
हम भलाई करने वालों को और अधिक देंगे।”
سَنَزِيدُ اُ۬لْمُحْسِنِينَۖ
परंतु उनमें से जो अन्यायी थे, उन्होंने जो कथन उनसे कहा गया था उसके स्थान पर दूसरा कथन रख दिया; तब हमने उन पर आकाश से एक मलिनता भेजी, अन्याय करने के कारण।
فَبَدَّلَ اَ۬لذِينَ ظَلَمُواْ مِنْهُمْ قَوْلاً غَيْرَ اَ۬لذِے قِيلَ لَهُمْ فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ رِجْزاٗ مِّنَ اَ۬لسَّمَآءِ بِمَا كَانُواْ يَظْلِمُونَۖ
और उनसे उस बस्ती के विषय में पूछो जो समुद्र के निकट थी: जब वे विराम के विषय में सीमाएँ पार करते थे, उनकी मछलियाँ उनके विराम के दिन पानी की सतह पर उनके पास आती थीं; और जिस दिन वे विराम नहीं रखते थे, वे उनके पास नहीं आती थीं।
۞ وَسْـَٔلْهُمْ عَنِ اِ۬لْقَرْيَةِ اِ۬لتِے كَانَتْ حَاضِرَةَ اَ۬لْبَحْرِ إِذْ يَعْدُونَ فِے اِ۬لسَّبْتِ إِذْ تَأْتِيهِمْ حِيتَانُهُمْ يَوْمَ سَبْتِهِمْ شُرَّعاٗ وَيَوْمَ لَا يَسْبِتُونَ لَا تَأْتِيهِمْۖ
इस प्रकार हम उन्हें परखते थे, अतिक्रमण करने के कारण।
كَذَٰلِكَ نَبْلُوهُم بِمَا كَانُواْ يَفْسُقُونَۖ
और जब उनमें से एक समुदाय ने कहा: “तुम ऐसी क़ौम को क्यों उपदेश देते हो जिसे ईश्वर नष्ट करने वाला है, या कठोर दंड देने वाला है?”
وَإِذْ قَالَتْ أُمَّةٞ مِّنْهُمْ لِمَ تَعِظُونَ قَوْماً اِ۬للَّهُ مُهْلِكُهُمْ أَوْ مُعَذِّبُهُمْ عَذَاباٗ شَدِيداٗۖ
उन्होंने कहा: “तुम्हारे अभिभावक के सामने एक सफ़ाई के लिए, और शायद वे सावधान रहें।”
قَالُواْ مَعْذِرَةٌ إِلَىٰ رَبِّكُمْ وَلَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَۖ
जब वे उसे भूल गए जो उन्हें स्मरण कराया गया था, तब हमने बुराई से रोकने वालों को उबार लिया, और अन्यायियों को कड़े दंड से पकड़ा, अतिक्रमण करने के कारण।
فَلَمَّا نَسُواْ مَا ذُكِّرُواْ بِهِۦ أَنجَيْنَا اَ۬لذِينَ يَنْهَوْنَ عَنِ اِ۬لسُّوٓءِ وَأَخَذْنَا اَ۬لذِينَ ظَلَمُواْ بِعَذَابِۢ بِيسِۢ بِمَا كَانُواْ يَفْسُقُونَۖ
फिर जब उन्होंने उद्दंडता से वह सब किया जिससे उन्हें रोका गया था, तब हमने उनसे कहा: “दुत्कारे हुए बंदर बन जाओ।”
فَلَمَّا عَتَوْاْ عَن مَّا نُهُواْ عَنْهُ قُلْنَا لَهُمْ كُونُواْ قِرَدَةً خَٰسِـِٕينَۖ
और जब तुम्हारे अभिभावक ने घोषणा की कि वह पेशी के दिन तक उन पर अवश्य ऐसे को उठाएगा जो उन्हें बुरा दंड देगा।
وَإِذْ تَأَذَّنَ رَبُّكَ لَيَبْعَثَنَّ عَلَيْهِمْ إِلَىٰ يَوْمِ اِ۬لْقِيَٰمَةِ مَنْ يَّسُومُهُمْ سُوٓءَ اَ۬لْعَذَابِۖ
तुम्हारा अभिभावक अवश्य सज़ा देने में शीघ्र है,
إِنَّ رَبَّكَ لَسَرِيعُ اُ۬لْعِقَابِۖ
और वह अवश्य अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَإِنَّهُۥ لَغَفُورٞ رَّحِيمٞۖ
और हमने उन्हें धरती पर समुदायों में बाँट दिया:
وَقَطَّعْنَٰهُمْ فِے اِ۬لْأَرْضِ أُمَماٗۖ
उनमें वे हैं जो भले हैं, और उनमें वे हैं जो उतने भले नहीं।
مِّنْهُمُ اُ۬لصَّٰلِحُونَ وَمِنْهُمْ دُونَ ذَٰلِكَۖ
और हमने उन्हें भलाइयों और बुराइयों से परखा, शायद वे लौटें।
وَبَلَوْنَٰهُم بِالْحَسَنَٰتِ وَالسَّيِّـَٔاتِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَۖ
फिर उनके बाद एक पीढ़ी उनकी उत्तराधिकारी बनी, जो ग्रंथ की वारिस हुई, इस निचले लोक की क्षणभंगुर वस्तुएँ लेती हुई, और कहती हुई: “हमें क्षमा कर दिया जाएगा”; और यदि वैसी ही कोई वस्तु उन्हें फिर मिले, तो वे उसे ले लेते हैं।
فَخَلَفَ مِنۢ بَعْدِهِمْ خَلْفٞ وَرِثُواْ اُ۬لْكِتَٰبَ يَأْخُذُونَ عَرَضَ هَٰذَا اَ۬لْأَدْنَىٰ وَيَقُولُونَ سَيُغْفَرُ لَنَا وَإِنْ يَّأْتِهِمْ عَرَضٞ مِّثْلُهُۥ يَأْخُذُوهُۖ
क्या ग्रंथ की गंभीर प्रतिज्ञा उनसे नहीं ली गई थी कि वे ईश्वर के विषय में सत्य के सिवा कुछ नहीं कहेंगे?
أَلَمْ يُؤْخَذْ عَلَيْهِم مِّيثَٰقُ اُ۬لْكِتَٰبِ أَن لَّا يَقُولُواْ عَلَى اَ۬للَّهِ إِلَّا اَ۬لْحَقَّۖ
और उन्होंने उसमें जो कुछ है उसका अध्ययन किया।
وَدَرَسُواْ مَا فِيهِۖ
जबकि अंतिम ठिकाना उनके लिए बेहतर है जो सावधान रहते हैं।
وَالدَّارُ اُ۬لْأٓخِرَةُ خَيْرٞ لِّلذِينَ يَتَّقُونَۖ
तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?
أَفَلَا تَعْقِلُونَۖ
और जो ग्रंथ को दृढ़ता से थामते हैं और संपर्क बनाए रखते हैं — हम सुधार करने वालों का पुरस्कार निश्चय ही बिखरने नहीं देते।
وَالذِينَ يُمَسِّكُونَ بِالْكِتَٰبِ وَأَقَامُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ إِنَّا لَا نُضِيعُ أَجْرَ اَ۬لْمُصْلِحِينَۖ
और जब हमने पहाड़ को उनके ऊपर उखाड़ लिया, मानो वह एक चँदोवा हो, और उन्होंने अनुमान लगाया कि वह उन पर गिर पड़ेगा:
۞ وَإِذْ نَتَقْنَا اَ۬لْجَبَلَ فَوْقَهُمْ كَأَنَّهُۥ ظُلَّةٞ وَظَنُّواْ أَنَّهُۥ وَاقِعُۢ بِهِمْ
“जो हमने तुम्हें दिया है उसे मज़बूती से पकड़ो, और जो उसमें है उसे स्मरण रखो, शायद तुम सावधान रहो।”
خُذُواْ مَا ءَاتَيْنَٰكُم بِقُوَّةٖ وَاذْكُرُواْ مَا فِيهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَۖ
और जब तुम्हारे अभिभावक ने आदम की संतान से, वह संतति ली जो वे अपने पीछे छोड़ते थे, और उन्हें स्वयं उन्हीं पर साक्षी बनाया: “क्या मैं तुम्हारा अभिभावक नहीं हूँ?” उन्होंने कहा: “हाँ, हम इसके साक्षी हैं!”
وَإِذْ أَخَذَ رَبُّكَ مِنۢ بَنِے ءَادَمَ مِن ظُهُورِهِمْ ذُرِّيَّٰتِهِمْ وَأَشْهَدَهُمْ عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَلَسْتُ بِرَبِّكُمْ قَالُواْ بَلَىٰۖ
ताकि वे पेशी के दिन यह न कहें: “हम तो निश्चय ही इससे लापरवाह थे”, या यह न कहें: “हमारे पूर्वजों ने ही पहले साझी ठहराया था, और हम तो उनके बाद केवल एक संतति थे।
شَهِدْنَا أَن تَقُولُواْ يَوْمَ اَ۬لْقِيَٰمَةِ إِنَّا كُنَّا عَنْ هَٰذَا غَٰفِلِينَ أَوْ تَقُولُواْ إِنَّمَا أَشْرَكَ ءَابَآؤُنَا مِن قَبْلُ وَكُنَّا ذُرِّيَّةٗ مِّنۢ بَعْدِهِمْۖ
क्या आप हमें उसके लिए नष्ट करेंगे जो असत्य के कारीगरों ने किया?”
أَفَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ اَ۬لْمُبْطِلُونَۖ
इस प्रकार हम संकेतों का विवरण देते हैं, और शायद वे लौटें।
وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ اُ۬لْأٓيَٰتِ وَلَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَۖ
और उन्हें उसकी सूचना सुनाओ जिसे हमने अपने संकेत दिए, और उसने उन्हें उतार फेंका, तब बहकाने वाले ने उसका पीछा किया, और वह दिशाहीनों में से हो गया।
وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ اَ۬لذِے ءَاتَيْنَٰهُ ءَايَٰتِنَا فَانسَلَخَ مِنْهَا فَأَتْبَعَهُ اُ۬لشَّيْطَٰنُ فَكَانَ مِنَ اَ۬لْغَاوِينَۖ
और यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो इनके द्वारा उसे ऊँचा करते; परंतु वह धरती से जा लगा और उसने अपनी भावना का अनुसरण किया।
وَلَوْ شِئْنَا لَرَفَعْنَٰهُ بِهَا وَلَٰكِنَّهُۥ أَخْلَدَ إِلَى اَ۬لْأَرْضِ وَاتَّبَعَ هَوَيٰهُۖ
उसका उदाहरण कुत्ते का है: यदि तुम उस पर लादो तो वह हाँफता है, और यदि उसे छोड़ दो तो भी हाँफता है।
فَمَثَلُهُۥ كَمَثَلِ اِ۬لْكَلْبِ إِن تَحْمِلْ عَلَيْهِ يَلْهَثْ أَوْ تَتْرُكْهُ يَلْهَثۖ
यही उस क़ौम का उदाहरण है जिसने हमारे संकेतों को झुठलाया।
ذَّٰلِكَ مَثَلُ اُ۬لْقَوْمِ اِ۬لذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَاۖ
तो यह वृत्तांत बताओ, शायद वे सोच-विचार करें।
فَاقْصُصِ اِ۬لْقَصَصَ لَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَۖ
बुरा है उस क़ौम का उदाहरण जिसने हमारे संकेतों को झुठलाया, और जो अपने ही ऊपर अन्याय करती थी।
سَآءَ مَثَلاً اِ۬لْقَوْمُ اُ۬لذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَأَنفُسَهُمْ كَانُواْ يَظْلِمُونَۖ
ईश्वर जिसे मार्ग दिखाता है, वही मार्गदर्शन पाता है;
مَنْ يَّهْدِ اِ۬للَّهُ فَهْوَ اَ۬لْمُهْتَدِےۖ
और जिसे वह भटकाता है, वही घाटा उठाने वाले हैं।
وَمَنْ يُّضْلِلْ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْخَٰسِرُونَۖ
और हमने निश्चय ही जहन्नम के लिए प्रच्छन्नों और मनुष्यों में से बहुतों को बिखेर दिया है;
۞ وَلَقَدْ ذَرَأْنَا لِجَهَنَّمَ كَثِيراٗ مِّنَ اَ۬لْجِنِّ وَالْإِنسِۖ
उनके पास मर्म हैं जिनसे वे समझते नहीं,
لَهُمْ قُلُوبٞ لَّا يَفْقَهُونَ بِهَاۖ
उनके पास आँखें हैं जिनसे वे साफ़ नहीं देखते,
وَلَهُمْ أَعْيُنٞ لَّا يُبْصِرُونَ بِهَاۖ
और उनके पास कान हैं जिनसे वे सुनते नहीं।
وَلَهُمْ ءَاذَانٞ لَّا يَسْمَعُونَ بِهَاۖ
वही पशुधन के समान हैं — नहीं, वे उनसे भी अधिक भटके हुए हैं।
أُوْلَٰٓئِكَ كَالْأَنْعَٰمِ بَلْ هُمْ أَضَلُّۖ
वही लापरवाह हैं।
أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْغَٰفِلُونَۖ
और ईश्वर के लिए सबसे सुंदर गुण हैं; तो उन्हीं के द्वारा उसे पुकारो,
وَلِلهِ اِ۬لْأَسْمَآءُ اُ۬لْحُسْنَىٰ فَادْعُوهُ بِهَاۖ
और उन्हें छोड़ दो जो उसके गुणों को विकृत करते हैं।
وَذَرُواْ اُ۬لذِينَ يُلْحِدُونَ فِے أَسْمَٰٓئِهِۦۖ
उन्हें उसका प्रतिफल दिया जाएगा जो वे करते थे।
سَيُجْزَوْنَ مَا كَانُواْ يَعْمَلُونَۖ
और जिन्हें हमने रचा है, उनमें एक समुदाय है जो सत्य के अनुसार मार्ग दिखाता है और उसके द्वारा न्याय करता है।
وَمِمَّنْ خَلَقْنَا أُمَّةٞ يَهْدُونَ بِالْحَقِّ وَبِهِۦ يَعْدِلُونَۖ
और जो हमारे संकेतों को झुठलाते हैं, हम उन्हें धीरे-धीरे वहाँ से ले जाएँगे जहाँ से वे नहीं जानते, और मैं उन्हें ढील देता हूँ,
وَالذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا سَنَسْتَدْرِجُهُم مِّنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ وَأُمْلِے لَهُمْۖ
क्योंकि मेरी चाल पक्की है।
إِنَّ كَيْدِے مَتِينٌۖ
तो क्या वे सोच-विचार नहीं करते?
أَوَلَمْ يَتَفَكَّرُواْۖ
उनके साथी में कोई विक्षिप्तता नहीं है।
مَا بِصَٰحِبِهِم مِّن جِنَّةٍۖ
वह तो केवल एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला है।
إِنْ هُوَ إِلَّا نَذِيرٞ مُّبِينٌۖ
क्या उन्होंने आकाशों और धरती के सर्वोच्च राजत्व पर, और हर उस चीज़ पर जो ईश्वर ने रची है, नज़र नहीं डाली, और इस पर कि संभव है उनकी अवधि निकट आ चुकी हो?
أَوَلَمْ يَنظُرُواْ فِے مَلَكُوتِ اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالْأَرْضِ وَمَا خَلَقَ اَ۬للَّهُ مِن شَےْءٖ وَأَنْ عَسَىٰ أَنْ يَّكُونَ قَدِ اِ۪قْتَرَبَ أَجَلُهُمْۖ
तो इसके बाद वे किस वार्ता पर विश्वास करेंगे?
فَبِأَيِّ حَدِيثِۢ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَۖ
ईश्वर जिसे भटकाता है, उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं,
مَنْ يُّضْلِلِ اِ۬للَّهُ فَلَا هَادِيَ لَهُۥۖ
और वह उन्हें उनकी मर्यादाहीनता में छोड़ देता है, जहाँ वे टटोलते फिरते हैं।
وَنَذَرُهُمْ فِے طُغْيَٰنِهِمْ يَعْمَهُونَۖ
वे तुमसे उस घड़ी के विषय में पूछते हैं: वह कब लंगर डालेगी?
يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ اِ۬لسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَيٰهَاۖ
कहो: “उसका ज्ञान तो केवल मेरे अभिभावक के पास है;
قُلْ إِنَّمَا عِلْمُهَا عِندَ رَبِّےۖ
उसके सिवा कोई उसे उसके समय पर उजागर नहीं करेगा।
لَا يُجَلِّيهَا لِوَقْتِهَا إِلَّا هُوَۖ
वह आकाशों में और धरती पर भारी है;
ثَقُلَتْ فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالْأَرْضِۖ
वह तुम पर अचानक ही आएगी।”
لَا تَأْتِيكُمْ إِلَّا بَغْتَةٗۖ
वे तुमसे ऐसे पूछते हैं मानो तुमने उसकी तह तक छानबीन कर ली हो।
يَسْـَٔلُونَكَ كَأَنَّكَ حَفِيٌّ عَنْهَاۖ
कहो: “उसका ज्ञान तो केवल ईश्वर के पास है,
قُلْ إِنَّمَا عِلْمُهَا عِندَ اَ۬للَّهِۖ
परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।”
وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ اَ۬لنَّاسِ لَا يَعْلَمُونَۖ
कहो: “मैं अपने लिए न किसी लाभ का मालिक हूँ, न किसी हानि का, सिवा उसके जो ईश्वर की मर्ज़ी हो।
۞ قُل لَّا أَمْلِكُ لِنَفْسِے نَفْعاٗ وَلَا ضَرّاً إِلَّا مَا شَآءَ اَ۬للَّهُۖ
और यदि मैं उसे जानता जो इंद्रियों से परे है, तो मैं निश्चय ही बहुत अच्छाई बटोर लेता,
وَلَوْ كُنتُ أَعْلَمُ اُ۬لْغَيْبَ لَاسْتَكْثَرْتُ مِنَ اَ۬لْخَيْرِۖ
और बुराई मुझे न छूती।
وَمَا مَسَّنِيَ اَ۬لسُّوٓءُۖ
मैं तो केवल एक चेतावनी देने वाला हूँ,
اِ۪نْ أَنَا إِلَّا نَذِيرٞۖ
और विश्वास करने वाली क़ौम के लिए एक शुभ समाचार देने वाला।”
وَبَشِيرٞ لِّقَوْمٖ يُؤْمِنُونَۖ
वही है जिसने तुम्हें एक ही स्व से रचा, और उससे उसका जोड़ीदार निकाला, ताकि वह उसके पास चैन पाए।
هُوَ اَ۬لذِے خَلَقَكُم مِّن نَّفْسٖ وَٰحِدَةٖ وَجَعَلَ مِنْهَا زَوْجَهَا لِيَسْكُنَ إِلَيْهَاۖ
और जब उसने उसे ढक लिया, तो उसने एक हल्का भार वहन किया, जिसके साथ वह चलती रही;
فَلَمَّا تَغَشَّيٰهَا حَمَلَتْ حَمْلاً خَفِيفاٗ فَمَرَّتْ بِهِۦۖ
और जब वह बोझिल हो गई, तो दोनों ने अपने अभिभावक ईश्वर को पुकारा: “यदि आप हमें एक भली संतान देंगे, तो हम अवश्य कृतज्ञों में से होंगे।”
فَلَمَّا أَثْقَلَت دَّعَوَا اَ۬للَّهَ رَبَّهُمَا لَئِنْ ءَاتَيْتَنَا صَٰلِحاٗ لَّنَكُونَنَّ مِنَ اَ۬لشَّٰكِرِينَۖ
परंतु जब उसने उन्हें भली संतान दे दी, तब उन्होंने उसके दिए हुए में उसके लिए साझी ठहराए।
فَلَمَّا ءَاتَيٰهُمَا صَٰلِحاٗ جَعَلَا لَهُۥ شِرْكاٗ فِيمَا ءَاتَيٰهُمَاۖ
जबकि ईश्वर उससे बहुत ऊपर है जो वे उसके साथ साझी ठहराते हैं।
فَتَعَٰلَى اَ۬للَّهُ عَمَّا يُشْرِكُونَۖ
क्या वे उसे साझी ठहराते हैं जो कुछ रचता नहीं, और स्वयं रचा गया है,
أَيُشْرِكُونَ مَا لَا يَخْلُقُ شَئْاٗ وَهُمْ يُخْلَقُونَۖ
और जो न उनकी सहायता कर सकता है, न अपनी सहायता कर सकता है?
وَلَا يَسْتَطِيعُونَ لَهُمْ نَصْراٗ وَلَا أَنفُسَهُمْ يَنصُرُونَۖ
और यदि तुम उन्हें मार्गदर्शन की ओर बुलाओ, तो वे तुम्हारे पीछे नहीं चलते।
وَإِن تَدْعُوهُمْ إِلَى اَ۬لْهُدَىٰ لَا يَتْبَعُوكُمْۖ
तुम्हारे लिए बराबर है कि तुम उन्हें बुलाओ, या चुप रहो।
سَوَآءٌ عَلَيْكُمْ أَدَعَوْتُمُوهُمْ أَمْ أَنتُمْ صَٰمِتُونَۖ
जिन्हें तुम ईश्वर के अतिरिक्त पुकारते हो, वे निश्चय ही तुम्हारे जैसे आज्ञाकारी हैं;
إِنَّ اَ۬لذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ عِبَادٌ أَمْثَالُكُمْۖ
तो उन्हें पुकारो, और वे तुम्हें उत्तर दें, यदि तुम सच्चे हो।
فَادْعُوهُمْ فَلْيَسْتَجِيبُواْ لَكُمْ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَۖ
क्या उनके पास पाँव हैं जिनसे वे चलते हैं?
أَلَهُمْ أَرْجُلٞ يَمْشُونَ بِهَاۖ
या उनके पास हाथ हैं जिनसे वे पकड़ते हैं?
أَمْ لَهُمْ أَيْدٖ يَبْطِشُونَ بِهَاۖ
या उनके पास आँखें हैं जिनसे वे साफ़ देखते हैं?
أَمْ لَهُمْ أَعْيُنٞ يُبْصِرُونَ بِهَاۖ
या उनके पास कान हैं जिनसे वे सुनते हैं?
أَمْ لَهُمْ ءَاذَانٞ يَسْمَعُونَ بِهَاۖ
कहो: “अपने साझीदारों को पुकारो, फिर मेरे विरुद्ध चाल चलो, और मुझे कोई मोहलत न दो,
قُلُ اُ۟دْعُواْ شُرَكَآءَكُمْ ثُمَّ كِيدُونِ فَلَا تُنظِرُونِۖ
क्योंकि मेरा हिमायती ईश्वर है, जिसने ग्रंथ उतारा,
إِنَّ وَلِـِّۧيَ اَ۬للَّهُ اُ۬لذِے نَزَّلَ اَ۬لْكِتَٰبَۖ
और वही भलों का आश्रयदाता है।
وَهْوَ يَتَوَلَّى اَ۬لصَّٰلِحِينَۖ
और उसके अतिरिक्त जिन्हें तुम पुकारते हो, वे न तुम्हारी सहायता कर सकते हैं, न स्वयं अपनी सहायता कर सकते हैं।”
وَالذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَسْتَطِيعُونَ نَصْرَكُمْ وَلَا أَنفُسَهُمْ يَنصُرُونَۖ
और यदि तुम उन्हें मार्गदर्शन की ओर बुलाओ, तो वे सुनते नहीं;
وَإِن تَدْعُوهُمْ إِلَى اَ۬لْهُدَىٰ لَا يَسْمَعُواْۖ
और तुम उन्हें अपनी ओर नज़र डालते हुए देखते हो, जबकि वे साफ़ नहीं देखते।
وَتَرَيٰهُمْ يَنظُرُونَ إِلَيْكَ وَهُمْ لَا يُبْصِرُونَۖ
जो बच जाए वही लो,
خُذِ اِ۬لْعَفْوَۖ
जो मान्य है उसका आदेश दो,
وَأْمُرْ بِالْعُرْفِۖ
और अज्ञानियों से कतराओ।
وَأَعْرِضْ عَنِ اِ۬لْجَٰهِلِينَۖ
और यदि बहकाने वाले की कोई चुभन तुम्हें चुभे, तो ईश्वर की छत्रछाया चाहो,
۞ وَإِمَّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ اَ۬لشَّيْطَٰنِ نَزْغٞ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِۖ
क्योंकि वह सुनने वाला, सर्वज्ञ है।
إِنَّهُۥ سَمِيعٌ عَلِيمٌۖ
निश्चय ही, जो सावधान रहते हैं, जब बहकाने वाले की ओर से कोई दल उन्हें छूता है, तो स्मरण करते हैं, और तब देखो, वे दृष्टिवान हो जाते हैं;
إِنَّ اَ۬لذِينَ اَ۪تَّقَوْاْ إِذَا مَسَّهُمْ طَٰٓئِفٞ مِّنَ اَ۬لشَّيْطَٰنِ تَذَكَّرُواْ فَإِذَا هُم مُّبْصِرُونَۖ
जबकि उनके भाई उन्हें दिशाहीनता में और आगे खींचते ही रहते हैं,
وَإِخْوَٰنُهُمْ يُمِدُّونَهُمْ فِے اِ۬لْغَيِّۖ
फिर वे रुकते नहीं।
ثُمَّ لَا يُقْصِرُونَۖ
और जब तुम उनके पास कोई संकेत नहीं लाते, तो वे कहते हैं: “तुमने उसे स्वयं क्यों नहीं चुन लिया?”
وَإِذَا لَمْ تَأْتِهِم بِـَٔايَةٖ قَالُواْ لَوْلَا اَ۪جْتَبَيْتَهَاۖ
कहो: “मैं तो केवल उसी का अनुसरण करता हूँ जो मेरे अभिभावक की ओर से मुझ पर प्रकट किया जाता है;
قُلْ إِنَّمَا أَتَّبِعُ مَا يُوحَىٰ إِلَيَّ مِن رَّبِّےۖ
ये तुम्हारे अभिभावक की ओर से आई दूरदृष्टियाँ हैं, एक मार्गदर्शन और एक दया, विश्वास करने वाली क़ौम के लिए।”
هَٰذَا بَصَآئِرُ مِن رَّبِّكُمْ وَهُدىٗ وَرَحْمَةٞ لِّقَوْمٖ يُؤْمِنُونَۖ
और जब यह पाठ पढ़ा जाए, तो उसे सुनो और चुप रहो, शायद तुम पर दया की जाए।
وَإِذَا قُرِۓَ اَ۬لْقُرْءَانُ فَاسْتَمِعُواْ لَهُۥ وَأَنصِتُواْ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَۖ
और अपने अभिभावक का स्मरण करो, अपने भीतर ही, गिड़गिड़ाते हुए और डर के साथ, ऊँचे स्वर में बोले बिना, सुबह और शाम, और लापरवाहों में से न हो।
وَاذْكُر رَّبَّكَ فِے نَفْسِكَ تَضَرُّعاٗ وَخِيفَةٗ وَدُونَ اَ۬لْجَهْرِ مِنَ اَ۬لْقَوْلِ بِالْغُدُوِّ وَالْأٓصَالِ وَلَا تَكُن مِّنَ اَ۬لْغَٰفِلِينَۖ
जो तुम्हारे अभिभावक के पास हैं, वे घमंड से फूलकर उसकी आज्ञा का पालन करने से इनकार नहीं करते, वे उसकी महिमा गाते हैं, और उसी के सामने माथा टेकते हैं।
إِنَّ اَ۬لذِينَ عِندَ رَبِّكَ لَا يَسْتَكْبِرُونَ عَنْ عِبَادَتِهِۦ وَيُسَبِّحُونَهُۥ وَلَهُۥ يَسْجُدُونَۖ۩