الممتحنة
Al-Mumtahana
A Fine Paragon in Ibrahim
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। हे विश्वास करने वालो! मेरे शत्रु और अपने शत्रु को हिमायती न बनाओ,
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَتَّخِذُواْ عَدُوِّي وَعَدُوَّكُمُۥ أَوۡلِيَآءَ
उन्हें स्नेह देते हुए, जबकि उन्होंने उस सत्य को नकार दिया जो तुम्हारे पास आया है,
تُلۡقُونَ إِلَيۡهِمُۥ بِٱلۡمَوَدَّةِ وَقَدۡ كَفَرُواْ بِمَا جَآءَكُمُۥ مِنَ ٱلۡحَقِّ
संदेशवाहक को और स्वयं तुम्हें निकालते हुए, इसलिए कि तुम ईश्वर पर विश्वास करते हो, जो तुम्हारा अभिभावक है।
يُخۡرِجُونَ ٱلرَّسُولَ وَإِيَّاكُمُۥ أَن تُؤۡمِنُواْ بِٱللَّهِ رَبِّكُمُۥ
यदि तुम मेरी राह में संघर्ष करने और मेरी प्रसन्नता खोजने के लिए निकले हो, तो तुम गुप्त रूप से उन्हें अपना स्नेह सौंपते हो, जबकि मैं उसे सबसे अच्छी तरह जानता हूँ जो तुमने छिपाया और जो तुमने उजागर किया।
إِن كُنتُمُۥ خَرَجۡتُمُۥ جِهَٰدٗا فِي سَبِيلِي وَٱبۡتِغَآءَ مَرۡضَاتِيۚ تُسِرُّونَ إِلَيۡهِمُۥ بِٱلۡمَوَدَّةِ وَأَنَا۠ أَعۡلَمُ بِمَا أَخۡفَيۡتُمُۥ وَمَا أَعۡلَنتُمُۥۚ
और तुममें से जो ऐसा करे, वह ठीक राह से भटक गया है।
وَمَن يَفۡعَلۡهُۥ مِنكُمُۥ فَقَدۡ ضَلَّ سَوَآءَ ٱلسَّبِيلِ
यदि वे तुम पर क़ाबू पा लें, तो वे तुम्हारे शत्रु होंगे, और बुराई के साथ अपने हाथ और अपनी ज़बानें तुम्हारी ओर बढ़ाएँगे,
إِن يَثۡقَفُوكُمُۥ يَكُونُواْ لَكُمُۥ أَعۡدَآءٗ وَيَبۡسُطُواْ إِلَيۡكُمُۥ أَيۡدِيَهُمُۥ وَأَلۡسِنَتَهُمُۥ بِٱلسُّوٓءِ
और वे चाहेंगे कि तुम नकार दो।
وَوَدُّواْ لَوۡ تَكۡفُرُونَ
न तुम्हारे रक्त-संबंध और न तुम्हारे बच्चे तुम्हारे काम आएँगे,
لَن تَنفَعَكُمُۥ أَرۡحَامُكُمُۥ وَلَا أَوۡلَٰدُكُمُۥۚ
पेशी के दिन वह तुम्हारे बीच अलगाव कर देगा।
يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ يُفۡصَلُ بَيۡنَكُمُۥۚ
और ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।
وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٞ
तुम्हारे लिए इब्राहीम में और उनमें जो उसके साथ थे एक सुंदर नमूना रहा, जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: “हम निश्चय ही तुमसे बरी हैं और उससे जिसकी तुम ईश्वर के अतिरिक्त आज्ञा का पालन करते हो; हम तुम्हें नकारते हैं, और हमारे और तुम्हारे बीच शत्रुता और घृणा सामने आ गई, सदा के लिए, जब तक कि तुम अकेले ईश्वर पर विश्वास न करो” — सिवा इब्राहीम के अपने पिता से कहे कथन के: “मैं अवश्य तुम्हारे लिए क्षमा माँगूँगा, और मैं ईश्वर के सामने तुम्हारे लिए किसी चीज़ का मालिक नहीं हूँ।”
قَدۡ كَانَتۡ لَكُمُۥ إِسۡوَةٌ حَسَنَةٞ فِي إِبۡرَٰهِيمَ وَٱلَّذِينَ مَعَهُۥ إِذۡ قَالُواْ لِقَوۡمِهِمُۥ إِنَّا بُرَءَٰٓؤُاْ مِنكُمُۥ وَمِمَّا تَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ كَفَرۡنَا بِكُمُۥ وَبَدَا بَيۡنَنَا وَبَيۡنَكُمُ ٱلۡعَدَٰوَةُ وَٱلۡبَغۡضَآءُ اَ۬بَدًا حَتَّىٰ تُؤۡمِنُواْ بِٱللَّهِ وَحۡدَهُۥ إِلَّا قَوۡلَ إِبۡرَٰهِيمَ لِأَبِيهِۦ لَأَسۡتَغۡفِرَنَّ لَكَ وَمَا أَمۡلِكُ لَكَ مِنَ ٱللَّهِ مِن شَيۡءٖۖ
“हमारे अभिभावक, हम आप ही को मुख़्तार बनाते हैं, आपका ही आसरा हम लेते हैं, और आपकी ओर ही गंतव्य है।
رَّبَّنَا عَلَيۡكَ تَوَكَّلۡنَا وَإِلَيۡكَ أَنَبۡنَا وَإِلَيۡكَ ٱلۡمَصِيرُ
हमारे अभिभावक, हमें नकारने वालों के लिए परीक्षा न बनाइए,
رَبَّنَا لَا تَجۡعَلۡنَا فِتۡنَةٗ لِّلَّذِينَ كَفَرُواْ
और हमें क्षमा कीजिए, हमारे अभिभावक,
وَٱغۡفِرۡ لَنَا رَبَّنَاۖ
क्योंकि आप ही सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान हैं।”
إِنَّكَ أَنتَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ
तुम्हारे लिए उनमें निश्चय ही एक सुंदर नमूना रहा, उसके लिए जो ईश्वर और अंतिम दिन की आशा रखता है।
لَقَدۡ كَانَ لَكُمُۥ فِيهِمُۥ إِسۡوَةٌ حَسَنَةٞ لِّمَن كَانَ يَرۡجُواْ ٱللَّهَ وَٱلۡيَوۡمَ ٱلۡأٓخِرَۚ
और जो कोई पीठ फेरे — ईश्वर निश्चय ही धनी, प्रशंसनीय है।
وَمَن يَتَوَلَّ فَإِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡغَنِيُّ ٱلۡحَمِيدُ
संभव है कि ईश्वर तुम्हारे और उनमें से उनके बीच, जिन्हें तुमने शत्रु माना, स्नेह रख दे,
۞ عَسَى ٱللَّهُ أَن يَجۡعَلَ بَيۡنَكُمُۥ وَبَيۡنَ ٱلَّذِينَ عَادَيۡتُمُۥ مِنۡهُمُۥ مَوَدَّةٗۚ
और ईश्वर सामर्थ्यवान है।
وَٱللَّهُ قَدِيرٞۚ
और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
وَٱللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ
ईश्वर तुम्हें उनके प्रति सद्गुणी और निष्पक्ष होने से मना नहीं करता जो विधान के विषय में तुमसे नहीं लड़े और जिन्होंने तुम्हें तुम्हारे ठिकानों से नहीं निकाला,
لَّا يَنۡهَىٰكُمُ ٱللَّهُ عَنِ ٱلَّذِينَ لَمۡ يُقَٰتِلُوكُمُۥ فِي ٱلدِّينِ وَلَمۡ يُخۡرِجُوكُمُۥ مِن دِيَٰرِكُمُۥ أَن تَبَرُّوهُمُۥ وَتُقۡسِطُواْ إِلَيۡهِمُۥۚ
क्योंकि ईश्वर निष्पक्षों से प्रेम करता है।
إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلۡمُقۡسِطِينَ
ईश्वर तुम्हें केवल उन्हें हिमायती बनाने से मना करता है जो विधान के विषय में तुमसे लड़े, जिन्होंने तुम्हें तुम्हारे ठिकानों से निकाला, और तुम्हारे निकाले जाने का समर्थन किया।
إِنَّمَا يَنۡهَىٰكُمُ ٱللَّهُ عَنِ ٱلَّذِينَ قَٰتَلُوكُمُۥ فِي ٱلدِّينِ وَأَخۡرَجُوكُمُۥ مِن دِيَٰرِكُمُۥ وَظَٰهَرُواْ عَلَىٰ إِخۡرَاجِكُمُۥ أَن تَوَلَّوۡهُمُۥۚ
और जो उन्हें हिमायती बनाए, वही अन्यायी हैं।
وَمَن يَتَوَلَّهُمُۥ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّٰلِمُونَ
हे विश्वास करने वालो! जब विश्वास करने वाली स्त्रियाँ प्रवास करके तुम्हारे पास आएँ, तो उनकी जाँच करो।
يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ إِذَا جَآءَكُمُ ٱلۡمُؤۡمِنَٰتُ مُهَٰجِرَٰتٖ فَٱمۡتَحِنُوهُنَّۖ
ईश्वर उनके विश्वास को सबसे अच्छी तरह जानता है।
ٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِإِيمَٰنِهِنَّۖ
यदि तुम जान लो कि वे विश्वास करने वाली हैं, तो उन्हें नकारने वालों की ओर न लौटाओ।
فَإِنۡ عَلِمۡتُمُوهُنَّ مُؤۡمِنَٰتٖ فَلَا تَرۡجِعُوهُنَّ إِلَى ٱلۡكُفَّارِۖ
वे उनके लिए वैध नहीं, और वे उनके लिए वैध नहीं।
لَا هُنَّ حِلّٞ لَّهُمُۥ وَلَا هُمُۥ يَحِلُّونَ لَهُنَّۖ
और उन्हें दे दो जो उन्होंने ख़र्च किया।
وَءَاتُوهُمُۥ مَا أَنفَقُواْۚ
और तुम पर कोई आक्षेप नहीं कि तुम उनसे विवाह करो, जब तुम उन्हें उनके पुरस्कार दे दो।
وَلَا جُنَاحَ عَلَيۡكُمُۥ أَن تَنكِحُوهُنَّ إِذَا ءَاتَيۡتُمُوهُنَّ أُجُورَهُنَّۚ
और नकारने वाली स्त्रियों के बंधन थामे न रखो।
وَلَا تُمۡسِكُواْ بِعِصَمِ ٱلۡكَوَافِرِ
और जो तुमने ख़र्च किया उसे माँगो, और वे माँगें जो उन्होंने ख़र्च किया।
وَسَلُواْ مَا أَنفَقۡتُمُۥ وَلۡيَسۡـَٔلُواْ مَا أَنفَقُواْۚ
यह ईश्वर का निर्णय है: वह तुम्हारे बीच निर्णय करता है।
ذَٰلِكُمُۥ حُكۡمُ ٱللَّهِ يَحۡكُمُ بَيۡنَكُمُۥۖ
और ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ
और यदि तुम्हारी जोड़ीदारों में से कोई तुम्हें छोड़कर नकारने वालों के पास चली जाए, फिर तुम बराबरी का बदला चुकाओ, तो जिनकी जोड़ीदार चली गई उन्हें उतना दो जितना उन्होंने ख़र्च किया था।
وَإِن فَاتَكُمُۥ شَيۡءٞ مِّنۡ أَزۡوَٰجِكُمُۥ إِلَى ٱلۡكُفَّارِ فَعَاقَبۡتُمُۥ فَـَٔاتُواْ ٱلَّذِينَ ذَهَبَتۡ أَزۡوَٰجُهُمُۥ مِثۡلَ مَا أَنفَقُواْۚ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, जिस पर तुम विश्वास करते हो।
وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ ٱلَّذِي أَنتُمُۥ بِهِۦ مُؤۡمِنُونَ
हे सूचनादाता! जब विश्वास करने वाली स्त्रियाँ तुमसे निष्ठा की प्रतिज्ञा करने तुम्हारे पास आएँ, इस शर्त पर कि वे ईश्वर के साथ किसी को साझी नहीं ठहराएँगी, चोरी नहीं करेंगी, व्यभिचार नहीं करेंगी, अपने बच्चों की हत्या नहीं करेंगी, अपने हाथों और पैरों के बीच गढ़ा हुआ कोई लांछन नहीं लाएँगी, और जो मान्य है उसमें तुम्हारी अवज्ञा नहीं करेंगी, तो उनकी निष्ठा की प्रतिज्ञा स्वीकार करो और उनके लिए ईश्वर से क्षमा माँगो,
يَٰأَيُّهَا ٱلنَّبِيُّ إِذَا جَآءَكَ ٱلۡمُؤۡمِنَٰتُ يُبَايِعۡنَكَ عَلَىٰ أَن لَّا يُشۡرِكۡنَ بِٱللَّهِ شَيۡـٔٗا وَلَا يَسۡرِقۡنَ وَلَا يَزۡنِينَ وَلَا يَقۡتُلۡنَ أَوۡلَٰدَهُنَّ وَلَا يَأۡتِينَ بِبُهۡتَٰنٖ يَفۡتَرِينَهُۥ بَيۡنَ أَيۡدِيهِنَّ وَأَرۡجُلِهِنَّ وَلَا يَعۡصِينَكَ فِي مَعۡرُوفٖ فَبَايِعۡهُنَّ وَٱسۡتَغۡفِرۡ لَهُنَّ ٱللَّهَۚ
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ
हे विश्वास करने वालो! ऐसी क़ौम को हिमायती न बनाओ जिस पर ईश्वर क्रोधित हुआ, जिसने अंतिम जीवन से आशा छोड़ दी, जैसे नकारने वालों ने क़ब्रों वालों के विषय में आशा छोड़ दी है।
يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَتَوَلَّوۡاْ قَوۡمًا غَضِبَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِمُۥ قَدۡ يَئِسُواْ مِنَ ٱلۡأٓخِرَةِ كَمَا يَئِسَ ٱلۡكُفَّارُ مِنۡ أَصۡحَٰبِ ٱلۡقُبُورِ