يس
Ya-Sin
Who Will Give Life to the Bones?
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। या. सीन.
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ يسٓۚ
प्रज्ञा से भरे पाठ की शपथ, तुम अवश्य भेजे गए जनों में से हो, एक सीधे पथ पर,
وَٱلۡقُرَانِ ٱلۡحَكِيمِ إِنَّكَ لَمِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ عَلَىٰ صِۜرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ
सर्वशक्तिमान, दयालु की ओर से एक अवतरण, ताकि तुम एक ऐसी क़ौम को चेतावनी दो जिसके पूर्वजों को चेतावनी नहीं दी गई, और जो इसलिए लापरवाह हैं।
تَنزِيلُ ٱلۡعَزِيزِ ٱلرَّحِيمِ لِتُنذِرَ قَوۡمٗا مَّا أُنذِرَ ءَابَآؤُهُمُۥ فَهُمُۥ غَٰفِلُونَ
कथन उनमें से अधिकतर पर निश्चय ही सिद्ध हो चुका है: वे विश्वास नहीं करते।
لَقَدۡ حَقَّ ٱلۡقَوۡلُ عَلَىٰ أَكۡثَرِهِمُۥ فَهُمُۥ لَا يُؤۡمِنُونَ
हमने निश्चय ही उनकी गर्दनों में तौक़ डाल दिए हैं, जो ठुड्डियों तक पहुँचते हैं, इसलिए उनके सिर पीछे की ओर तने हुए हैं।
إِنَّا جَعَلۡنَا فِي أَعۡنَٰقِهِمُۥ أَغۡلَٰلٗا فَهِيَ إِلَى ٱلۡأَذۡقَانِ فَهُمُۥ مُقۡمَحُونَ
और हमने उनके आगे एक अवरोध रखा और उनके पीछे एक अवरोध, फिर उन्हें ढक दिया: इसलिए वे साफ़ नहीं देखते।
وَجَعَلۡنَا مِنۢ بَيۡنِ أَيۡدِيهِمُۥ سُدّٗا وَمِنۡ خَلۡفِهِمُۥ سُدّٗا فَأَغۡشَيۡنَٰهُمُۥ فَهُمُۥ لَا يُبۡصِرُونَ
और उनके लिए समान है कि तुम उन्हें चेतावनी दो या चेतावनी न दो: वे विश्वास नहीं करते।
وَسَوَآءٌ عَلَيۡهِمُۥ ءَا۬نذَرۡتَهُمُۥ أَمۡ لَمۡ تُنذِرۡهُمُۥ لَا يُؤۡمِنُونَ
तुम केवल उसे चेतावनी देते हो जो स्मरण का अनुसरण करता है और सर्वदयालु से भय रखता है भले ही वह उसकी इंद्रियों से परे है: उसे क्षमा और एक उदार पुरस्कार का शुभ समाचार दो।
إِنَّمَا تُنذِرُ مَنِ ٱتَّبَعَ ٱلذِّكۡرَ وَخَشِيَ ٱلرَّحۡمَٰنَ بِٱلۡغَيۡبِۖ فَبَشِّرۡهُۥ بِمَغۡفِرَةٖ وَأَجۡرٖ كَرِيمٍ
हम ही हैं, केवल हम, जो मृतकों को पुनः जीवन देते हैं, और हम दर्ज करते हैं जो उन्होंने आगे बढ़ाया और उनकी छोड़ी हुई छापें।
إِنَّا نَحۡنُ نُحۡيِ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَنَكۡتُبُ مَا قَدَّمُواْ وَءَاثَٰرَهُمُۥۚ
और हर चीज़ को हमने एक स्पष्ट संदर्भ में गिन रखा है।
وَكُلَّ شَيۡءٍ أَحۡصَيۡنَٰهُۥ فِي إِمَامٖ مُّبِينٖ
और उनके लिए उदाहरण के रूप में बस्ती वालों को कई गुना करो, जब भेजे गए जन उसके पास आए: जब हमने उनके पास दो भेजे, तो उन्होंने उन्हें झुठलाया; तब हमने तीसरे के द्वारा उन्हें शक्तिशाली बना दिया, और उन्होंने कहा: “हम तुम्हारी ओर निश्चय ही भेजे गए हैं।”
وَٱضۡرِبۡ لَهُمُۥ مَثَلًا أَصۡحَٰبَ ٱلۡقَرۡيَةِ إِذۡ جَآءَهَا ٱلۡمُرۡسَلُونَ إِذۡ أَرۡسَلۡنَا إِلَيۡهِمُ ٱثۡنَيۡنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزۡنَا بِثَالِثٖ فَقَالُواْ إِنَّا إِلَيۡكُمُۥ مُرۡسَلُونَ
उन्होंने कहा: “तुम तो बस हमारे जैसे मानव हो; सर्वदयालु ने कुछ नहीं उतारा; तुम केवल झूठ बोलते हो।”
قَالُواْ مَا أَنتُمُۥ إِلَّا بَشَرٞ مِّثۡلُنَا وَمَا أَنزَلَ ٱلرَّحۡمَٰنُ مِن شَيۡءٍ إِنۡ أَنتُمُۥ إِلَّا تَكۡذِبُونَ
उन्होंने कहा: “हमारा अभिभावक जानता है कि हम तुम्हारी ओर अवश्य भेजे गए हैं; हम पर केवल स्पष्ट संप्रेषण का दायित्व है।”
قَالُواْ رَبُّنَا يَعۡلَمُ إِنَّا إِلَيۡكُمُۥ لَمُرۡسَلُونَ وَمَا عَلَيۡنَا إِلَّا ٱلۡبَلَٰغُ ٱلۡمُبِينُ
उन्होंने कहा: “हम तुममें अपशकुन देखते हैं। यदि तुम बाज़ न आए, तो हम तुम्हें अवश्य निष्कासित करेंगे, और हमारी ओर से एक पीड़ादायक दंड तुम्हें अवश्य छुएगा।”
قَالُواْ إِنَّا تَطَيَّرۡنَا بِكُمُۥۖ لَئِن لَّمۡ تَنتَهُواْ لَنَرۡجُمَنَّكُمُۥ وَلَيَمَسَّنَّكُمُۥ مِنَّا عَذَابٌ أَلِيمٞ
उन्होंने कहा: “तुम्हारा अपशकुन तुम्हारे ही साथ है। क्या इसलिए कि तुम्हें स्मरण कराया जाता है?
قَالُواْ طَٰٓئِرُكُمُۥ مَعَكُمُۥ أَى۪ن ذُكِّرۡتُمُۥۚ
तुम तो बल्कि एक अतिवादी क़ौम हो।”
بَلۡ أَنتُمُۥ قَوۡمٞ مُّسۡرِفُونَ
और एक पुरुष राजधानी के छोर से जल्दी-जल्दी आया।
وَجَآءَ مِنۡ أَقۡصَا ٱلۡمَدِينَةِ رَجُلٞ يَسۡعَىٰ
उसने कहा: “हे मेरी क़ौम, भेजे गए जनों का अनुसरण करो; उनका अनुसरण करो जो तुमसे कोई पुरस्कार नहीं माँगते, और जो मार्गदर्शन पा रहे हैं।
قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱتَّبِعُواْ ٱلۡمُرۡسَلِينَ ٱتَّبِعُواْ مَن لَّا يَسۡـَٔلُكُمُۥ أَجۡرٗا وَهُمُۥ مُهۡتَدُونَ
और मेरे लिए क्या है कि मैं उसकी आज्ञा का पालन न करूँ जिसने मुझे मूलतः रचा, और जिसकी ओर तुम लौटाए जाओगे?
وَمَا لِيَ لَا أَعۡبُدُ ٱلَّذِي فَطَرَنِي وَإِلَيۡهِۦ تُرۡجَعُونَ
क्या मैं उसके अतिरिक्त देवताओं को अपना लूँ? यदि सर्वदयालु मुझे हानि पहुँचाना चाहे, तो उनकी सिफ़ारिश मेरे किसी काम न आएगी, और वे मुझे उबार नहीं सकेंगे।
ءَا۬تَّخِذُ مِن دُونِهِۦ ءَالِهَةً إِن يُرِدۡنِ ٱلرَّحۡمَٰنُ بِضُرّٖ لَّا تُغۡنِ عَنِّي شَفَٰعَتُهُمُۥ شَيۡـٔٗا وَلَا يُنقِذُونِ
तब तो मैं अवश्य स्पष्ट भटकाव में होऊँगा।
إِنِّي إِذٗا لَّفِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٍ
मैंने तो तुम्हारे अभिभावक पर विश्वास किया है: इसलिए मेरी बात पर कान दो।”
إِنِّيَ ءَامَنتُ بِرَبِّكُمُۥ فَٱسۡمَعُونِ
कहा गया: “उद्यान में प्रवेश करो।”
قِيلَ ٱدۡخُلِ ٱلۡجَنَّةَۖ
उसने कहा: “काश मेरी क़ौम जान लेती कि मेरे अभिभावक ने किस कारण मुझे क्षमा किया, और मुझे सम्मानित जनों में गिना!”
قَالَ يَٰلَيۡتَ قَوۡمِي يَعۡلَمُونَ بِمَا غَفَرَ لِي رَبِّي وَجَعَلَنِي مِنَ ٱلۡمُكۡرَمِينَ
और हमने उसके बाद उसकी क़ौम पर आकाश से कोई सेना नहीं उतारी; हमें उतारनी ही नहीं थी।
۞ وَمَا أَنزَلۡنَا عَلَىٰ قَوۡمِهِۦ مِنۢ بَعۡدِهِۦ مِن جُندٖ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَمَا كُنَّا مُنزِلِينَ
वह केवल एक ही चीख़ थी, और देखो, वे बुझ गए।
إِن كَانَتۡ إِلَّا صَيۡحَةٗ وَٰحِدَةٗ فَإِذَا هُمُۥ خَٰمِدُونَ
आज्ञाकारियों पर कैसा संताप है!
يَٰحَسۡرَةً عَلَى ٱلۡعِبَادِۚ
उनके पास कोई संदेशवाहक नहीं आता था जिसका वे मज़ाक़ न उड़ाते हों।
مَا يَأۡتِيهِمُۥ مِن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ
क्या वे नहीं देखते कि हमने उनसे पहले कितनी ही पीढ़ियों को नष्ट कर दिया, और यह कि वे उनकी ओर नहीं लौटेंगी?
أَلَمۡ يَرَوۡاْ كَمۡ أَهۡلَكۡنَا قَبۡلَهُمُۥ مِنَ ٱلۡقُرُونِ أَنَّهُمُۥ إِلَيۡهِمُۥ لَا يَرۡجِعُونَ
और सभी, सब के सब, एक साथ हमारे सामने लाए जाएँगे।
وَإِن كُلّٞ لَّمَا جَمِيعٞ لَّدَيۡنَا مُحۡضَرُونَ
और उनके लिए एक संकेत: मृत धरती, जिसे हमने पुनः जीवन दिया, और जिससे हमने दाना निकाला, और उसी से वे खाते हैं।
وَءَايَةٞ لَّهُمُ ٱلۡأَرۡضُ ٱلۡمَيۡتَةُ أَحۡيَيۡنَٰهَا وَأَخۡرَجۡنَا مِنۡهَا حَبّٗا فَمِنۡهُۥ يَأۡكُلُونَ
और हमने उसमें खजूर के पेड़ों और अंगूरों के उद्यान रखे, और उसमें सोते फूट निकलवाए, ताकि वे उसके फल में से खाएँ — और उसे उनके हाथों ने नहीं उपजाया।
وَجَعَلۡنَا فِيهَا جَنَّٰتٖ مِّن نَّخِيلٖ وَأَعۡنَٰبٖ وَفَجَّرۡنَا فِيهَا مِنَ ٱلۡعِيُونِ لِيَأۡكُلُواْ مِن ثَمَرِهِۦ وَمَا عَمِلَتۡهُۥ أَيۡدِيهِمُۥۚ
तो क्या वे कृतज्ञ नहीं होंगे?
أَفَلَا يَشۡكُرُونَ
उसकी महिमा हो जिसने सभी जोड़े रचे, उसमें से जो धरती उगाती है, और स्वयं उनमें से, और उसमें से जो वे नहीं जानते।
سُبۡحَٰنَ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلۡأَزۡوَٰجَ كُلَّهَا مِمَّا تُنۢبِتُ ٱلۡأَرۡضُ وَمِنۡ أَنفُسِهِمُۥ وَمِمَّا لَا يَعۡلَمُونَ
और उनके लिए एक संकेत: रात, जिससे हम दिन को छीन लेते हैं, और देखो, वे अंधकार में डूबे हैं।
وَءَايَةٞ لَّهُمُ ٱلَّيۡلُ نَسۡلَخُ مِنۡهُ ٱلنَّهَارَ فَإِذَا هُمُۥ مُظۡلِمُونَ
और सूर्य अपने एक स्थिर स्थान की ओर दौड़ता है, जो उसका अपना है।
وَٱلشَّمۡسُ تَجۡرِي لِمُسۡتَقَرّٖ لَّهَاۚ
यह सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ द्वारा निर्धारित माप है।
ذَٰلِكَ تَقۡدِيرُ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡعَلِيمِ
और चंद्रमा के लिए हमने पड़ाव निर्धारित किए, यहाँ तक कि वह फिर खजूर की पुरानी मुड़ी हुई टहनी जैसा हो जाए।
وَٱلۡقَمَرُ قَدَّرۡنَٰهُۥ مَنَازِلَ حَتَّىٰ عَادَ كَٱلۡعُرۡجُونِ ٱلۡقَدِيمِ
सूर्य को शोभा नहीं देता कि वह चंद्रमा को जा पकड़े, और न रात को कि वह दिन से आगे निकल जाए।
لَا ٱلشَّمۡسُ يَنۢبَغِي لَهَا أَن تُدۡرِكَ ٱلۡقَمَرَ وَلَا ٱلَّيۡلُ سَابِقُ ٱلنَّهَارِۚ
और प्रत्येक एक कक्षा में तैरता है।
وَكُلّٞ فِي فَلَكٖ يَسۡبَحُونَ
और उनके लिए एक संकेत: हमने उनकी संततियों को भरे हुए जलयान में सवार किया, और उनके लिए उसी जैसा रचा जिस पर वे सवार होते हैं।
وَءَايَةٞ لَّهُمُۥ أَنَّا حَمَلۡنَا ذُرِّيَّتَهُمُۥ فِي ٱلۡفُلۡكِ ٱلۡمَشۡحُونِ وَخَلَقۡنَا لَهُمُۥ مِن مِّثۡلِهِۦ مَا يَرۡكَبُونَ
और यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो उन्हें डुबो देते; उनकी चीख़ का उत्तर देने वाला कोई न होता, और वे उबारे भी न जाते, सिवा हमारी ओर से किसी दया के, और एक समय तक के लिए उपभोग के।
وَإِن نَّشَأۡ نُغۡرِقۡهُمُۥ فَلَا صَرِيخَ لَهُمُۥ وَلَا هُمُۥ يُنقَذُونَ إِلَّا رَحۡمَةٗ مِّنَّا وَمَتَٰعًا إِلَىٰ حِينٖ
और जब उनसे कहा जाता है: “जो तुम्हारे सामने है और जो तुम्हारे पीछे है, उसके प्रति सावधान रहो, शायद तुम पर दया की जाए”,
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱتَّقُواْ مَا بَيۡنَ أَيۡدِيكُمُۥ وَمَا خَلۡفَكُمُۥ لَعَلَّكُمُۥ تُرۡحَمُونَ
उनके अभिभावक के संकेतों में से कोई संकेत उनके पास नहीं आता जिससे वे कतराते न हों।
وَمَا تَأۡتِيهِمُۥ مِنۡ ءَايَةٖ مِّنۡ ءَايَٰتِ رَبِّهِمُۥ إِلَّا كَانُواْ عَنۡهَا مُعۡرِضِينَ
और जब उनसे कहा जाता है: “ईश्वर ने जो जीविका तुम्हें दी है उसमें से ख़र्च करो”, तो नकारने वाले उनसे जिन्होंने विश्वास किया कहते हैं: “क्या हम उसे खिलाएँगे जिसे ईश्वर, यदि उसकी मर्ज़ी होती, स्वयं खिला देता? तुम तो बस स्पष्ट भटकाव में ही हो।”
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُۥ أَنفِقُواْ مِمَّا رَزَقَكُمُ ٱللَّهُ قَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ أَنُطۡعِمُ مَن لَّوۡ يَشَآءُ ٱللَّهُ أَطۡعَمَهُۥ إِنۡ أَنتُمُۥ إِلَّا فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٖ
और वे कहते हैं: “यह वादा कब है, यदि तुम सच्चे हो?”
وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا ٱلۡوَعۡدُ إِن كُنتُمُۥ صَٰدِقِينَ
वे बस एक ही चीख़ की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो उन्हें आ पकड़ेगी जब वे झगड़े के बीच होंगे।
مَا يَنظُرُونَ إِلَّا صَيۡحَةٗ وَٰحِدَةٗ تَأۡخُذُهُمُۥ وَهُمُۥ يَخَصِّمُونَ
तब वे न वसीयत कर पाएँगे, न अपने परिवार की ओर लौट पाएँगे।
فَلَا يَسۡتَطِيعُونَ تَوۡصِيَةٗ وَلَا إِلَىٰ أَهۡلِهِمُۥ يَرۡجِعُونَ
और नरसिंगे में फूँका जाएगा, और देखो, वे अपनी क़ब्रों से अपने अभिभावक की ओर उमड़ पड़ते हैं।
وَنُفِخَ فِي ٱلصُّورِ فَإِذَا هُمُۥ مِنَ ٱلۡأَجۡدَاثِ إِلَىٰ رَبِّهِمُۥ يَنسِلُونَ
वे कहेंगे: “हाय हम पर! किसने हमें हमारी उस जगह से उठाया जहाँ हम सो रहे थे?
قَالُواْ يَٰوَيۡلَنَا مَنۢ بَعَثَنَا مِن مَّرۡقَدِنَاۗ
यही है जिसका वादा सर्वदयालु ने किया था, और भेजे गए जनों ने सच कहा था।”
هَٰذَا مَا وَعَدَ ٱلرَّحۡمَٰنُ وَصَدَقَ ٱلۡمُرۡسَلُونَ
वह केवल एक ही चीख़ होगी, और देखो, वे सब एक साथ हमारे सामने लाए गए हैं।
إِن كَانَتۡ إِلَّا صَيۡحَةٗ وَٰحِدَةٗ فَإِذَا هُمُۥ جَمِيعٞ لَّدَيۡنَا مُحۡضَرُونَ
आज किसी भी स्व पर ज़रा भी अन्याय नहीं किया जाएगा, और तुम्हें केवल उसी के अनुसार प्रतिफल दिया जाएगा जो तुम करते थे।
فَٱلۡيَوۡمَ لَا تُظۡلَمُ نَفۡسٞ شَيۡـٔٗا وَلَا تُجۡزَوۡنَ إِلَّا مَا كُنتُمُۥ تَعۡمَلُونَ
आज उद्यान वाले आनंद में व्यस्त होंगे, वे और उनके जोड़ीदार, छायाओं में, सजे हुए पलंगों पर टेक लगाए हुए।
إِنَّ أَصۡحَٰبَ ٱلۡجَنَّةِ ٱلۡيَوۡمَ فِي شُغۡلٖ فَٰكِهُونَ هُمُۥ وَأَزۡوَٰجُهُمُۥ فِي ظِلَٰلٍ عَلَى ٱلۡأَرَآئِكِ مُتَّكِـُٔونَ
वहाँ उनके लिए स्वाद होंगे।
لَهُمُۥ فِيهَا فَٰكِهَةٞ
और उन्हें वह सब मिलेगा जो वे माँगेंगे। शांति!
وَلَهُمُۥ مَا يَدَّعُونَ سَلَٰمٞ
एक दयालु अभिभावक की ओर से कथन।
قَوۡلٗا مِّن رَّبّٖ رَّحِيمٖ
“और आज अलग रहो, हे बहिष्कृतो!
وَٱمۡتَٰزُواْ ٱلۡيَوۡمَ أَيُّهَا ٱلۡمُجۡرِمُونَ
क्या मैंने तुम्हें संधि से नहीं बाँधा था, हे आदम की संतान: कि बहकाने वाले की आज्ञा का पालन न करना — क्योंकि वह तुम्हारा स्पष्ट शत्रु है — और मेरी आज्ञा का पालन करना?
۞ أَلَمۡ أَعۡهَدۡ إِلَيۡكُمُۥ يَٰبَنِي ءَادَمَ أَن لَّا تَعۡبُدُواْ ٱلشَّيۡطَٰنَۖ إِنَّهُۥ لَكُمُۥ عَدُوّٞ مُّبِينٞ وَأَنُ ٱعۡبُدُونِيۚ
यह एक सीधा पथ है।
هَٰذَا صِۜرَٰطٞ مُّسۡتَقِيمٞ
उसने तो तुम में से एक बहुसंख्यक समूह को भटका दिया।
وَلَقَدۡ أَضَلَّ مِنكُمُۥ جُبُلٗا كَثِيرًاۖ
तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते थे?
أَفَلَمۡ تَكُونُواْ تَعۡقِلُونَ
यह जहन्नम है, जिसका तुमसे वादा किया जाता था। आज इसमें जलो, नकारने के कारण।”
هَٰذِهِۦ جَهَنَّمُ ٱلَّتِي كُنتُمُۥ تُوعَدُونَ ٱصۡلَوۡهَا ٱلۡيَوۡمَ بِمَا كُنتُمُۥ تَكۡفُرُونَ
आज हम उनके मुँहों पर मुहर लगाते हैं; उनके हाथ हमसे बोलेंगे, और उनके पैर साक्ष्य देंगे उसका जो वे कमाते थे।
ٱلۡيَوۡمَ نَخۡتِمُ عَلَىٰ أَفۡوَٰهِهِمُۥ وَتُكَلِّمُنَا أَيۡدِيهِمُۥ وَتَشۡهَدُ أَرۡجُلُهُمُۥ بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ
और यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो उनकी आँखें मिटा देते; तब वे पथ की ओर एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ करते, परंतु वे स्पष्ट कैसे देख पाते?
وَلَوۡ نَشَآءُ لَطَمَسۡنَا عَلَىٰ أَعۡيُنِهِمُۥ فَٱسۡتَبَقُواْ ٱلصِّۜرَٰطَ فَأَنَّىٰ يُبۡصِرُونَ
और यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो उन्हें उनकी जगह पर जमा देते, और वे न जा सकते, न लौट सकते।
وَلَوۡ نَشَآءُ لَمَسَخۡنَٰهُمُۥ عَلَىٰ مَكَانَتِهِمُۥ فَمَا ٱسۡتَطَٰعُواْ مُضِيّٗا وَلَا يَرۡجِعُونَ
और जिसे हम आयु में बढ़ाते हैं, उसे हम रचना में उलटी दिशा में फेर देते हैं।
وَمَن نُّعَمِّرۡهُۥ نَنكُسۡهُۥ فِي ٱلۡخَلۡقِۚ
तो क्या वे बुद्धि से काम नहीं लेंगे?
أَفَلَا يَعۡقِلُونَ
हमने उसे लुभाने की कला नहीं सिखाई; और यह उसे शोभा नहीं देता।
وَمَا عَلَّمۡنَٰهُ ٱلشِّعۡرَ وَمَا يَنۢبَغِي لَهُۥۚ
यह केवल एक स्मरण और एक स्पष्ट पाठ है, ताकि तुम उसे चेतावनी दो जो जीवित है, और ताकि कथन नकारने वालों पर सिद्ध हो जाए।
إِنۡ هُوَ إِلَّا ذِكۡرٞ وَقُرَانٞ مُّبِينٞ لِّيُنذِرَ مَن كَانَ حَيّٗا وَيَحِقَّ ٱلۡقَوۡلُ عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ
क्या वे नहीं देखते कि हमने उनके लिए, उसमें से जो हमारे हाथों ने बनाया, पशुधन रचा, जिसके वे मालिक हैं?
أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا خَلَقۡنَا لَهُمُۥ مِمَّا عَمِلَتۡ أَيۡدِينَا أَنۡعَٰمٗا فَهُمُۥ لَهَا مَٰلِكُونَ
और हमने उन्हें उनके लिए अनुकूल बना दिया: कुछ उनकी सवारी के काम आते हैं, और कुछ को वे खाते हैं।
وَذَلَّلۡنَٰهَا لَهُمُۥ فَمِنۡهَا رَكُوبُهُمُۥ وَمِنۡهَا يَأۡكُلُونَ
और वे उनसे उपयोगिताएँ और पेय पाते हैं।
وَلَهُمُۥ فِيهَا مَنَٰفِعُ وَمَشَارِبُۚ
तो क्या वे कृतज्ञ नहीं होंगे?
أَفَلَا يَشۡكُرُونَ
और उन्होंने ईश्वर के अतिरिक्त देवता बना लिए, इस आशा में कि उनकी सहायता की जाएगी। वे उनकी सहायता नहीं कर सकते, और वे उनके लिए एक लाई हुई सेना होंगे।
وَٱتَّخَذُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ ءَالِهَةٗ لَّعَلَّهُمُۥ يُنصَرُونَ لَا يَسۡتَطِيعُونَ نَصۡرَهُمُۥ وَهُمُۥ لَهُمُۥ جُندٞ مُّحۡضَرُونَ
अतः उनका कथन तुम्हें दुखी न करे।
فَلَا يَحۡزُنكَ قَوۡلُهُمُۥۘ
हम निश्चय ही जानते हैं जो वे गुप्त रखते हैं और जो वे उजागर करते हैं।
إِنَّا نَعۡلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعۡلِنُونَ
क्या मनुष्य नहीं देखता कि हमने उसे एक बूँद से रचा, और देखो, वह खुला झगड़ालू है?
أَوَلَمۡ يَرَ ٱلۡإِنسَٰنُ أَنَّا خَلَقۡنَٰهُۥ مِن نُّطۡفَةٖ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٞ مُّبِينٞ
और वह हमारे लिए एक उदाहरण कई गुना करता है, अपनी ही रचना को भूलकर।
وَضَرَبَ لَنَا مَثَلٗا وَنَسِيَ خَلۡقَهُۥۖ
वह कहता है: “जब वे धूल होंगी, तब हड्डियों को कौन पुनः जीवन देगा?”
قَالَ مَن يُحۡيِ ٱلۡعِظَٰمَ وَهِيَ رَمِيمٞ
कहो: “जिसने उन्हें पहली बार उत्पन्न किया, वही उन्हें पुनः जीवन देगा; वह हर रचना के विषय में सर्वज्ञ है।”
قُلۡ يُحۡيِيهَا ٱلَّذِي أَنشَأَهَا أَوَّلَ مَرَّةٖۖ وَهُوَ بِكُلِّ خَلۡقٍ عَلِيمٌ
जिसने तुम्हारे लिए हरे पेड़ से आग बनाई, और देखो, तुम उसी से जलाते हो।
ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُۥ مِنَ ٱلشَّجَرِ ٱلۡأَخۡضَرِ نَارٗا فَإِذَا أَنتُمُۥ مِنۡهُۥ تُوقِدُونَ
क्या जिसने आकाशों और धरती को रचा, वह उनके जैसा रचने का सामर्थ्य नहीं रखता?
أَوَلَيۡسَ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِقَٰدِرٍ عَلَىٰ أَن يَخۡلُقَ مِثۡلَهُمُۥۚ
क्यों नहीं! और वही रचयिता, सर्वज्ञ है।
بَلَىٰ وَهُوَ ٱلۡخَلَّٰقُ ٱلۡعَلِيمُ
उसका आदेश, जब वह कोई चीज़ चाहता है, केवल यह है कि वह उससे कहे: “हो जा”,
إِنَّمَا أَمۡرُهُۥ إِذَا أَرَادَ شَيۡـًٔا أَن يَقُولَ لَهُۥ كُن
और वह हो जाती है।
فَيَكُونُ
अतः उसकी महिमा हो जिसके हाथ में हर चीज़ का सर्वोच्च राजत्व है, और उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।
فَسُبۡحَٰنَ ٱلَّذِي بِيَدِهِۦ مَلَكُوتُ كُلِّ شَيۡءٖ وَإِلَيۡهِۦ تُرۡجَعُونَ