Al-Mujadala المجادلة
The one who argues with you التي تجادلك
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The return judged far-fetched, the sworn Day, then the community (50, then 51-67)
Read the section from its beginning: sura 50
What was shown before: The return judged far-fetched is set out in 50. 50
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। ईश्वर ने उसका कथन ज़रूर सुन लिया है जो अपने जोड़ीदार के विषय में तुमसे बहस करती है और ईश्वर से शिकायत करती है; और ईश्वर तुम दोनों का संवाद सुनता है,
بِسۡمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحۡمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ قَد سَّمِعَ اَ۬للَّهُ قَوۡلَ اَ۬لَّتِي تُجَٰدِلُكَ فِي زَوۡجِهَا وَتَشۡتَكِي إِلَى اَ۬للَّهِ وَاَللَّهُ يَسۡمَعُ تَحَاوُرَكُمَاۚ
क्योंकि ईश्वर सुनने वाला, दृष्टिवान है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ سَمِيعُۢ بَصِيرٌ
तुममें से जो अपनी स्त्रियों से पीठ करते हैं — वे उनकी माताएँ नहीं हैं।
اِ۬لَّذِينَ يَظَّهَّرُونَ مِنكُم مِّن نِّسَآئِهِم مَّا هُنَّ أُمَّهَٰتِهِمۡۖ
उनकी माताएँ तो केवल वही हैं जिन्होंने उन्हें जन्म दिया।
إِنۡ أُمَّهَٰتُهُمۡ إِلَّا اَ۬لَّٰٓيۡ وَلَدۡنَهُمۡۚ
और वे अवश्य एक अमान्य कथन और एक जालसाज़ी कहते हैं।
وَإِنَّهُمۡ لَيَقُولُونَ مُنكَرٗا مِّنَ اَ۬لۡقَوۡلِ وَزُورٗاۚ
परंतु ईश्वर अवश्य दरगुज़र करने वाला, अत्यंत क्षमाशील है।
وَإِنَّ اَ۬للَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٞ
और जो अपनी स्त्रियों से पीठ करते हैं, फिर जो उन्होंने कहा उसकी पुनरावृत्ति करते हैं, उन्हें एक-दूसरे को छूने से पहले ऋण में बँधे एक व्यक्ति को स्वतंत्र करना होगा।
وَاَلَّذِينَ يَظَّهَّرُونَ مِن نِّسَآئِهِمۡ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا قَالُواْ فَتَحۡرِير رَّقَبَةٖ مِّن قَبۡلِ أَن يَتَمَآسَّاۚ
यही है जिसका तुम्हें उपदेश दिया जाता है।
ذَٰلِكُمۡ تُوعَظُونَ بِهِۦۚ
और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।
وَاَللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ
जिसे इसके साधन न मिलें, वह एक-दूसरे को छूने से पहले लगातार दो महीने परहेज़ रखेगा।
فَمَن لَّمۡ يَجِدۡ فَصِيَامُ شَهۡرَيۡنِ مُتَتَابِعَيۡنِ مِن قَبۡلِ أَن يَتَمَآسَّاۖ
जो ऐसा न कर सके, वह साठ दरिद्रों को भोजन कराएगा।
فَمَن لَّمۡ يَسۡتَطِعۡ فَإِطۡعَامُ سِتِّينَ مِسۡكِينٗاۚ
यह इसलिए कि तुम ईश्वर और उसके संदेशवाहक पर विश्वास करो।
ذَٰلِكَ لِتُومِنُواْ بِاللَّهِ وَرَسُولِهِۦۚ
और यही ईश्वर की सीमाएँ हैं।
وَتِلۡكَ حُدُودُ اُ۬للَّهِۗ
और नकारने वालों के लिए पीड़ादायक दंड है।
وَلِلۡكٰ۪فِرِينَ عَذَابٌ أَلِيمٌ
जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक से शत्रुता के साथ विरोध करते हैं, वे निश्चय ही पछाड़े जाएँगे, जैसे उनसे पहले वाले पछाड़े गए थे।
إِنَّ اَ۬لَّذِينَ يُحَآدُّونَ اَ۬للَّهَ وَرَسُولَهُۥ كُبِتُواْ كَمَا كُبِتَ اَ۬لَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۚ
जबकि हमने स्पष्ट संकेत उतार दिए हैं।
وَقَدۡ أَنزَلۡنَا ءَايَٰتِۢ بَيِّنَٰتٖۚ
और नकारने वालों के लिए अपमानजनक दंड है।
وَلِلۡكٰ۪فِرِينَ عَذَابٞ مُّهِينٞ
जिस दिन ईश्वर उन सबको उठाएगा और उन्हें सूचित करेगा कि उन्होंने क्या किया।
يَوۡمَ يَبۡعَثُهُمُ اُ۬للَّهُ جَمِيعٗا فَيُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُواْۚ
ईश्वर ने उसे गिन रखा है, जबकि वे उसे भूल गए।
أَحۡصَىٰهُ اُ۬للَّهُ وَنَسُوهُۚ
और ईश्वर हर चीज़ का साक्षी है।
وَاَللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ شَهِيدٌ
क्या तुमने नहीं देखा कि ईश्वर जानता है जो आकाशों में है और जो धरती पर है?
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ اَ۬للَّهَ يَعۡلَم مَّا فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي اِ۬لۡأَرۡضِۖ
तीन की ऐसी कोई गुप्त मंत्रणा नहीं जिसमें वह उनका चौथा न हो, और न पाँच की जिसमें वह उनका छठा न हो, और न इससे कम और न अधिक की जिसमें वह उनके साथ न हो, वे जहाँ कहीं भी हों।
مَا يَكُونُ مِن نَّجۡوۭيٰ ثَلَٰثَةٍ إِلَّا هُوَ رَابِعُهُمۡ وَلَا خَمۡسَةٍ إِلَّا هُوَ سَادِسُهُمۡ وَلَا أَدۡنَىٰ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكۡثَرَ إِلَّا هُوَ مَعَهُمۡ أَيۡنَ مَا كَانُواْۖ
फिर वह उन्हें पेशी के दिन सूचित करेगा कि उन्होंने क्या किया,
ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُواْ يَوۡمَ اَ۬لۡقِيَٰمَةِۚ
क्योंकि ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٌ
क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जिन्हें गुप्त मंत्रणा से मना किया गया, फिर वे उसकी पुनरावृत्ति करते हैं जिससे उन्हें मना किया गया था और अपराध, शत्रुता और संदेशवाहक की अवज्ञा के लिए गुप्त मंत्रणा करते हैं?
۞ أَلَمۡ تَرَ إِلَى اَ۬لَّذِين نُّهُواْ عَنِ اِ۬لنَّجۡوۭيٰ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا نُهُواْ عَنۡهُ وَيَتَنَٰجَوۡنَ بِالۡإِثۡمِ وَاَلۡعُدۡوَٰنِ وَمَعۡصِيَتِ اِ۬لرَّسُولِۖ
और जब वे तुम्हारे पास आते हैं, तो तुम्हें ऐसे अभिवादन से अभिवादन करते हैं जिससे ईश्वर ने तुम्हें अभिवादन नहीं किया, और अपने मन में कहते हैं: “हम जो कहते हैं उसके लिए ईश्वर हमें दंड क्यों नहीं देता?”
وَإِذَا جَآءُوكَ حَيَّوۡكَ بِمَا لَمۡ يُحَيِّكَ بِهِ اِ۬للَّهُ وَيَقُولُونَ فِي أَنفُسِهِمۡ لَوۡلَا يُعَذِّبُنَا اَ۬للَّهُ بِمَا نَقُولُۚ
जहन्नम उनके लिए पर्याप्त है।
حَسۡبُهُمۡ جَهَنَّمُ
वे उसमें जलेंगे।
يَصۡلَوۡنَهَاۖ
कितना भयानक गंतव्य!
فَبِيسَ اَ۬لۡمَصِيرُ
हे विश्वास करने वालो! जब तुम गुप्त मंत्रणा करो, तो अपराध, शत्रुता और संदेशवाहक की अवज्ञा के लिए मंत्रणा न करो।
يَٰأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ إِذَا تَنَٰجَيۡتُمۡ فَلَا تَتَنَٰجَوۡاْ بِالۡإِثۡمِ وَاَلۡعُدۡوَٰنِ وَمَعۡصِيَتِ اِ۬لرَّسُولِ
परंतु सद्गुण और सावधानी के लिए गुप्त मंत्रणा करो।
وَتَنَٰجَوۡاْ بِالۡبِرِّ وَاَلتَّقۡوۭيٰۖ
और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, जिसकी ओर तुम इकट्ठा किए जाओगे।
وَاَتَّقُواْ اُ۬للَّهَ اَ۬لَّذِي إِلَيۡهِ تُحۡشَرُونَ
गुप्त मंत्रणा तो केवल बहकाने वाले की ओर से होती है, ताकि वह विश्वास करने वालों को दुखी करे; परंतु ईश्वर की अनुमति के सिवा वह उन्हें किसी भी प्रकार हानि नहीं पहुँचा सकता।
إِنَّمَا اَ۬لنَّجۡوۭيٰ مِنَ اَ۬لشَّيۡطَٰنِ لِيَحۡزُنَ اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ وَلَيۡسَ بِضَآرِّهِمۡ شَيۡـًٔا إِلَّا بِإِذۡنِ اِ۬للَّهِۚ
और विश्वास करने वालों को ईश्वर ही को मुख़्तार बनाना चाहिए।
وَعَلَى اَ۬للَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ اِ۬لۡمُومِنُونَ
हे विश्वास करने वालो! जब तुमसे सभाओं में स्थान बनाने को कहा जाए, तो स्थान बना दो; ईश्वर तुम्हारे लिए स्थान बना देगा।
يَٰأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ إِذَا قِيل لَّكُمۡ تَفَسَّحُواْ فِي اِ۬لۡمَجۡلِسِ فَاَفۡسَحُواْ يَفۡسَحِ اِ۬للَّهُ لَكُمۡۖ
और जब तुमसे खड़े हो जाने को कहा जाए, तो खड़े हो जाओ; ईश्वर तुममें से विश्वास करने वालों को और उन्हें जिन्हें ज्ञान दिया गया है, श्रेणियों में ऊँचा करेगा।
وَإِذَا قِيلَ اَ۪نشِزُواْ فَاَنشِزُواْ يَرۡفَعِ اِ۬للَّهُ اُ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنكُمۡ وَاَلَّذِينَ أُوتُواْ اُ۬لۡعِلۡمَ دَرَجَٰتٖۚ
और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।
وَاَللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ
हे विश्वास करने वालो! जब तुम संदेशवाहक से गुप्त मंत्रणा करो, तो अपनी मंत्रणा से पहले एक दान आगे बढ़ाओ।
يَٰأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ إِذَا نَٰجَيۡتُمُ اُ۬لرَّسُولَ فَقَدِّمُواْ بَيۡنَ يَدَيۡ نَجۡوۭىٰكُمۡ صَدَقَةٗۚ
यह तुम्हारे लिए बेहतर है, और अधिक स्वच्छ।
ذَٰلِكَ خَيۡرٞ لَّكُمۡ وَأَطۡهَرُۚ
परंतु यदि तुम्हें इसके साधन न मिलें, तो ईश्वर निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
فَإِن لَّمۡ تَجِدُواْ فَإِنَّ اَ۬للَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٌ
क्या तुम अपनी मंत्रणाओं से पहले दान आगे बढ़ाने से आशंकित हुए?
ءَٰا۬شۡفَقۡتُمۡ أَن تُقَدِّمُواْ بَيۡنَ يَدَيۡ نَجۡوۭىٰكُمۡ صَدَقَٰتٖۚ
जब तुमने ऐसा नहीं किया और ईश्वर अनुकंपा के साथ तुम्हारी ओर पलटा, तो संपर्क बनाए रखो और शुद्ध उदारता दो।
فَإِذۡ لَمۡ تَفۡعَلُواْ وَتَابَ اَ۬للَّهُ عَلَيۡكُمۡ فَأَقِيمُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ اُ۬لزَّكَوٰةَ
और ईश्वर की और उसके संदेशवाहक की बात मानो।
وَأَطِيعُواْ اُ۬للَّهَ وَرَسُولَهُۥۚ
और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।
وَاَللَّهُ خَبِيرُۢ بِمَا تَعۡمَلُونَ
क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जो ऐसी क़ौम को हिमायती बनाते हैं जिस पर ईश्वर क्रोधित हुआ? वे न तुम में से हैं और न उनमें से, और वे जानते हुए झूठ पर शपथ खाते हैं।
۞ أَلَمۡ تَرَ إِلَى اَ۬لَّذِينَ تَوَلَّوۡاْ قَوۡمًا غَضِبَ اَ۬للَّهُ عَلَيۡهِم مَّا هُم مِّنكُمۡ وَلَا مِنۡهُمۡ وَيَحۡلِفُونَ عَلَى اَ۬لۡكَذِبِ وَهُمۡ يَعۡلَمُونَ
ईश्वर ने उनके लिए कठोर दंड तैयार किया है,
أَعَدَّ اَ۬للَّهُ لَهُمۡ عَذَابٗا شَدِيدًاۖ
क्योंकि कितना बुरा है वह जो वे करते थे!
إِنَّهُمۡ سَآءَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ
उन्होंने अपनी शपथों को ढाल बना लिया, और ईश्वर की राह रोकी; अतः उनके लिए अपमानजनक दंड है।
اَ۪تَّخَذُواْ أَيۡمَٰنَهُمۡ جُنَّةٗ فَصَدُّواْ عَن سَبِيلِ اِ۬للَّهِ فَلَهُمۡ عَذَابٞ مُّهِينٞ
न उनकी संपत्ति और न उनके बच्चे ईश्वर के सामने उनके किसी काम आएँगे।
لَّن تُغۡنِيَ عَنۡهُمۡ أَمۡوَٰلُهُمۡ وَلَا أَوۡلَٰدُهُم مِّنَ اَ۬للَّهِ شَيۡـًٔاۚ
यही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।
أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ اُ۬لنّ۪ارِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ
जिस दिन ईश्वर उन सबको उठाएगा, वे उसके सामने शपथ खाएँगे जैसे तुम्हारे सामने शपथ खाते हैं, यह समझते हुए कि वे किसी आधार पर हैं।
يَوۡمَ يَبۡعَثُهُمُ اُ۬للَّهُ جَمِيعٗا فَيَحۡلِفُونَ لَهُۥ كَمَا يَحۡلِفُونَ لَكُمۡ وَيَحۡسِبُونَ أَنَّهُمۡ عَلَىٰ شَيۡءٍۚ
क्या ऐसा नहीं है: निश्चय ही वही झूठे हैं।
أَلَا إِنَّهُمۡ هُمُ اُ۬لۡكَٰذِبُونَ
बहकाने वाला उन पर हावी हो गया और उसने उन्हें ईश्वर का स्मरण भुला दिया।
اَ۪سۡتَحۡوَذَ عَلَيۡهِمِ اِ۬لشَّيۡطَٰنُ فَأَنسَىٰهُمۡ ذِكۡرَ اَ۬للَّهِۚ
ये बहकाने वाले का दल हैं।
أُوْلَٰٓئِكَ حِزۡبُ اُ۬لشَّيۡطَٰنِۚ
क्या ऐसा नहीं है: बहकाने वाले का दल, निश्चय ही वही घाटा उठाने वाले हैं।
أَلَا إِنَّ حِزۡبَ اَ۬لشَّيۡطَٰنِ هُمُ اُ۬لۡخَٰسِرُونَ
जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक से शत्रुता के साथ विरोध करते हैं, वे सबसे अधिक अपमानित जनों में से हैं।
إِنَّ اَ۬لَّذِينَ يُحَآدُّونَ اَ۬للَّهَ وَرَسُولَهُۥ أُوْلَٰٓئِكَ فِي اِ۬لۡأَذَلِّينَ
ईश्वर ने लिख दिया है: “मैं अवश्य विजयी रहूँगा, मैं और मेरे संदेशवाहक।”
كَتَبَ اَ۬للَّهُ لَأَغۡلِبَنَّ أَنَا۠ وَرُسُلِيۚ
क्योंकि ईश्वर बलवान, सर्वशक्तिमान है।
إِنَّ اَ۬للَّهَ قَوِيٌّ عَزِيزٞ
तुम ऐसी कोई क़ौम न पाओगे जो ईश्वर और अंतिम दिन पर विश्वास करती हो और साथ ही उनसे स्नेह रखती हो जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक से शत्रुता के साथ विरोध करते हैं, चाहे वे उनके पिता हों, उनके बेटे हों, उनके भाई हों या उनके निकट जन।
لَّا تَجِدُ قَوۡمٗا يُومِنُونَ بِاللَّهِ وَاَلۡيَوۡمِ اِ۬لۡأٓخِرِ يُوَآدُّونَ مَنۡ حَآدَّ اَ۬للَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَلَوۡ كَانُواْ ءَابَآءَهُمۡ أَوۡ أَبۡنَآءَهُمۡ أَوۡ إِخۡوَٰنَهُمۡ أَوۡ عَشِيرَتَهُمۡۚ
यही वे हैं जिनके मर्मों में उसने विश्वास लिख दिया है, जिन्हें उसने अपनी ओर से आए एक प्रवाह से सशक्त किया है, और जिन्हें वह ऐसे उद्यानों में प्रवेश कराएगा जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा रहेंगे।
أُوْلَٰٓئِك كَّتَبَ فِي قُلُوبِهِمِ اِ۬لۡإِيمَٰنَ وَأَيَّدَهُم بِرُوحٖ مِّنۡهُۖ وَيُدۡخِلُهُمۡ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا اَ۬لۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ
ईश्वर उनसे संतुष्ट है, और वे उससे संतुष्ट हैं।
رَضِيَ اَ۬للَّهُ عَنۡهُمۡ وَرَضُواْ عَنۡهُۚ
ये ईश्वर का दल हैं।
أُوْلَٰٓئِكَ حِزۡبُ اُ۬للَّهِۚ
क्या ऐसा नहीं है: ईश्वर का दल, निश्चय ही वही सफल होने वाले हैं।
أَلَا إِنَّ حِزۡبَ اَ۬للَّه هُّمُ اُ۬لۡمُفۡلِحُونَ