सामग्री पर जाएँ
القرآنal-quran.fr
मेनू
100%
القرآن
Sura57

Al-Hadid الحديد

We sent down iron وأنزلنا الحديد

ق

29 पदSection XThe application · continuation

  1. 50
  2. 51
  3. 52
  4. 53
  5. 54
  6. 55
  7. 56
  8. 57
  9. 58
  10. 59
  11. 60
  12. 61
  13. 62
  14. 63
  15. 64
  16. 65
  17. 66
  18. 67
“By the glorious Recitation”
The section and its links

The return judged far-fetched, the sworn Day, then the community (50, then 51-67)

Read the section from its beginning: sura 50

What was shown before: The return judged far-fetched is set out in 50. 50

57:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। जो कुछ आकाशों और धरती में है, उसने ईश्वर की महिमा गाई।

بِسۡمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحۡمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۖ

57:1

और वह सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।

وَهۡوَ اَ۬لۡعَزِيزُ اُ۬لۡحَكِيمُ

आकाशों और धरती का राजत्व उसी का है; वह जीवन देता है और मृत्यु देता है।

لَهُۥ مُلۡكُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۖ يُحۡيِۦ وَيُمِيتُۖ

और वह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

وَهۡوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ

57:3

वह प्रथम और अंतिम है, सामने वाला और भीतर वाला।

هُوَ اَ۬لۡأَوَّلُ وَاَلۡأٓخِرُ وَاَلظَّٰهِرُ وَاَلۡبَاطِنُۖ

और वह हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।

وَهۡوَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٌ

57:4

वही है जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में रचा, फिर भवन पर स्थित हुआ।

هُوَ اَ۬لَّذِي خَلَقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٖ ثُمَّ اَ۪سۡتَوَىٰ عَلَى اَ۬لۡعَرۡشِۖ

वह जानता है जो धरती में प्रवेश करता है और जो उससे निकलता है, जो आकाश से उतरता है और जो उसमें चढ़ता है।

يَعۡلَم مَّا يَلِجُ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ وَمَا يَخۡرُجُ مِنۡهَا وَمَا يَنزِلُ مِنَ اَ۬لسَّمَآءِ وَمَا يَعۡرُجُ فِيهَاۖ

और वह तुम्हारे साथ है, तुम जहाँ कहीं भी हो।

وَهۡوَ مَعَكُمۡ أَيۡنَ مَا كُنتُمۡۚ

और ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।

وَاَللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٞ

आकाशों और धरती का राजत्व उसी का है।

لَّهُۥ مُلۡكُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۚ

और ईश्वर की ओर ही सारे मामले लौटते हैं।

وَإِلَى اَ۬للَّهِ تُرۡجَعُ اُ۬لۡأُمُورُ

वह रात को दिन में प्रवेश कराता है, और दिन को रात में प्रवेश कराता है।

يُولِجُ اُ۬لَّيۡلَ فِي اِ۬لنَّه۪ارِ وَيُولِجُ اُ۬لنَّهَارَ فِي اِ۬لَّيۡلِۚ

और वह सीनों के भीतर जो है उसके विषय में सर्वज्ञ है।

وَهۡوَ عَلِيمُۢ بِذَاتِ اِ۬لصُّدُورِ

ईश्वर और उसके संदेशवाहक पर विश्वास करो, और उसमें से ख़र्च करो जिसका उसने तुम्हें न्यासी बनाया है।

ءَامِنُواْ بِاللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَأَنفِقُواْ مِمَّا جَعَلَكُم مُّسۡتَخۡلَفِينَ فِيهِۖ

तुममें से जिन्होंने विश्वास किया और ख़र्च किया, उनके लिए एक बड़ा पुरस्कार है।

فَاَلَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنكُمۡ وَأَنفَقُواْ لَهُمۡ أَجۡرٞ كَبِيرٞ

57:8

तुम्हें क्या हुआ है कि तुम ईश्वर पर विश्वास नहीं करते, जबकि संदेशवाहक तुम्हें अपने अभिभावक पर विश्वास करने के लिए बुला रहा है, और वह तुमसे गंभीर प्रतिज्ञा ले चुका है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो?

۞ وَمَا لَكُمۡ لَا تُومِنُونَ بِاللَّهِ وَاَلرَّسُولُ يَدۡعُوكُمۡ لِتُومِنُواْ بِرَبِّكُمۡ وَقَدۡ أُخِذَ مِيثَٰقُكُمۡ إِن كُنتُم مُّومِنِينَ

57:9

वही है जो अपने आज्ञाकारी पर स्पष्ट संकेत उतारता है, ताकि तुम्हें अँधेरों से प्रकाश की ओर निकाले।

هُوَ اَ۬لَّذِي يُنزِلُ عَلَىٰ عَبۡدِهِۦ ءَايَٰتِۢ بَيِّنَٰتٖ لِّيُخۡرِجَكُم مِّنَ اَ۬لظُّلُمَٰتِ إِلَى اَ۬لنُّورِۚ

57:9

और ईश्वर अवश्य तुम्हारे प्रति करुणामय, दयालु है।

وَإِنَّ اَ۬للَّهَ بِكُمۡ لَرَؤُفٞ رَّحِيمٞ

और तुम्हें क्या हुआ है कि तुम ईश्वर की राह में ख़र्च नहीं करते, जबकि आकाशों और धरती की विरासत ईश्वर को मिलती है?

وَمَا لَكُمۡ أَلَّا تُنفِقُواْ فِي سَبِيلِ اِ۬للَّهِ وَلِلَّهِ مِيرَٰثُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۚ

57:10

तुममें बराबर नहीं है वह जिसने उद्घाटन से पहले ख़र्च किया और लड़ाई की:

لَا يَسۡتَوِي مِنكُم مَّنۡ أَنفَقَ مِن قَبۡلِ اِ۬لۡفَتۡحِ وَقَٰتَلَۚ

उनकी श्रेणी उनसे अधिक विशाल है जिन्होंने बाद में ख़र्च किया और लड़ाई की।

أُوْلَٰٓئِكَ أَعۡظَمُ دَرَجَةٗ مِّنَ اَ۬لَّذِينَ أَنفَقُواْ مِنۢ بَعۡدُ وَقَٰتَلُواْۚ

और सभी से ईश्वर ने सबसे सुंदर का वादा किया है।

وَكُلّٗا وَعَدَ اَ۬للَّهُ اُ۬لۡحُسۡنۭيٰۚ

और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।

وَاَللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ

57:11

कौन है जो ईश्वर को एक सुंदर उधार देगा, जिसे वह उसके लिए दुगना कर देगा, और उसके लिए एक उदार पुरस्कार होगा?

مَّن ذَا اَ۬لَّذِي يُقۡرِضُ اُ۬للَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗا فَيُضَٰعِفُهُۥ لَهُۥ وَلَهُۥ أَجۡرٞ كَرِيمٞ

57:12

जिस दिन तुम विश्वास करने वाले पुरुषों और विश्वास करने वाली स्त्रियों को देखोगे, उनका प्रकाश उनके आगे और उनके दाएँ दौड़ता हुआ।

يَوۡمَ تَر۪ي اَ۬لۡمُومِنِينَ وَاَلۡمُومِنَٰتِ يَسۡعَىٰ نُورُهُم بَيۡنَ أَيۡدِيهِمۡ وَبِأَيۡمَٰنِهِمۖ

आज तुम्हारे लिए शुभ समाचार: ऐसे उद्यान जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जिनमें तुम सदा रहोगे।

بُشۡر۪ىٰكُمُ اُ۬لۡيَوۡمَ جَنَّٰتٞ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا اَ۬لۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ

यही विशाल विजय है।

ذَٰلِكَ هُوَ اَ۬لۡفَوۡزُ اُ۬لۡعَظِيمُ

57:13

जिस दिन पाखंडी पुरुष और स्त्रियाँ उनसे जो विश्वास करते हैं कहेंगे: “हमारी प्रतीक्षा करो, कि हम तुम्हारे प्रकाश से कुछ ले लें” — कहा जाएगा: “पीछे लौट जाओ, और कोई प्रकाश खोजो”।

يَوۡمَ يَقُولُ اُ۬لۡمُنَٰفِقُونَ وَاَلۡمُنَٰفِقَٰتُ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ اُ۟نظُرُونَا نَقۡتَبِسۡ مِن نُّورِكُمۡ قِيلَ اَ۪رۡجِعُواْ وَرَآءَكُمۡ فَاَلۡتَمِسُواْ نُورٗاۖ

57:13

तब उनके बीच एक दीवार खड़ी की जाएगी, जिसमें एक द्वार होगा: उसके भीतर दया है, और जो खुला है उस ओर, दंड।

فَضُرِب بَّيۡنَهُم بِسُورٖ لَّهُۥ بَابُۢ بَاطِنُهُۥ فِيهِ اِ۬لرَّحۡمَةُ وَظَٰهِرُهُۥ مِن قِبَلِهِ اِ۬لۡعَذَابُۚ

वे उन्हें आवाज़ देंगे: “क्या हम तुम्हारे साथ नहीं थे?”

يُنَادُونَهُمۡ أَلَمۡ نَكُن مَّعَكُمۡۖ

वे कहेंगे: “क्यों नहीं, परंतु तुमने स्वयं को परीक्षा में डाला, तुम प्रतीक्षा में रहे, तुमने संदेह किया, और व्यर्थ मनोरथों ने तुम्हें छल लिया, जब तक कि ईश्वर का आदेश न आ गया; और बड़े छलिये ने ईश्वर के विषय में तुम्हें छल लिया।”

قَالُواْ بَلَىٰ وَلَٰكِنَّكُمۡ فَتَنتُمۡ أَنفُسَكُمۡ وَتَرَبَّصۡتُمۡ وَاَرۡتَبۡتُمۡ وَغَرَّتۡكُمُ اُ۬لۡأَمَانِيُّ حَتَّىٰ جَا أَمۡرُ اُ۬للَّهِ وَغَرَّكُم بِاللَّهِ اِ۬لۡغَرُورُ

57:15

तो आज न तुमसे कोई फिरौती ली जाएगी, और न नकारने वालों से। तुम्हारी शरण आग है, वही तुम्हारा हिमायती है।

فَاَلۡيَوۡمَ لَا يُوخَذُ مِنكُمۡ فِدۡيَةٞ وَلَا مِنَ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْۚ مَاوَىٰكُمُ اُ۬لنَّارُۖ هِيَ مَوۡلَىٰكُمۡۖ

और कितना भयानक गंतव्य!

وَبِيسَ اَ۬لۡمَصِيرُ

57:16

क्या विश्वास करने वालों के लिए अभी वह समय नहीं आया कि उनके मर्म ईश्वर के स्मरण और सत्य में से जो उतारा गया है उसके सामने विनीत हो जाएँ?

۞ أَلَمۡ يَانِ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ أَن تَخۡشَعَ قُلُوبُهُمۡ لِذِكۡرِ اِ۬للَّهِ وَمَا نَزَّلَ مِنَ اَ۬لۡحَقِّ

57:16

और वे उन जैसे न हों जिन्हें पहले ग्रंथ दिया गया: उनके लिए अंतराल लंबा हो गया, और उनके मर्म कठोर हो गए।

وَلَا يَكُونُواْ كَاَلَّذِينَ أُوتُواْ اُ۬لۡكِتَٰبَ مِن قَبۡلُ فَطَالَ عَلَيۡهِمِ اِ۬لۡأَمَدُ فَقَسَتۡ قُلُوبُهُمۡۖ

57:16

और उनमें से बहुत-से अतिक्रमणकारी हैं।

وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ فَٰسِقُونَ

जान लो कि ईश्वर धरती को उसकी मृत्यु के बाद पुनः जीवन देता है।

اَ۪عۡلَمُواْ أَنَّ اَ۬للَّهَ يُحۡيِ اِ۬لۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَاۚ

हमने तुम्हारे लिए संकेत पहले ही स्पष्ट कर दिए हैं, शायद तुम बुद्धि से काम लो।

قَدۡ بَيَّنَّا لَكُمُ اُ۬لۡأٓيَٰتِ لَعَلَّكُمۡ تَعۡقِلُونَ

57:18

निश्चय ही, दान करने वाले पुरुष और स्त्रियाँ, और जो ईश्वर को सुंदर उधार देते हैं, उनके लिए वह दुगना किया जाएगा, और उनके लिए एक उदार पुरस्कार होगा।

إِنَّ اَ۬لۡمُصَّدِّقِينَ وَاَلۡمُصَّدِّقَٰتِ وَأَقۡرَضُواْ اُ۬للَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗا يُضَٰعَفُ لَهُمۡ وَلَهُمۡ أَجۡرٞ كَرِيمٞ

और जो ईश्वर और उसके संदेशवाहकों पर विश्वास करते हैं, वही सच्चे हैं।

وَاَلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِاللَّهِ وَرُسُلِهِۦ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لصِّدِّيقُونَۖ

और साक्षी, अपने अभिभावक के पास।

وَاَلشُّهَدَآءُ عِندَ رَبِّهِمۡ

57:19

उनके लिए उनका पुरस्कार और उनका प्रकाश है।

لَهُمۡ أَجۡرُهُمۡ وَنُورُهُمۡۖ

57:19

और जिन्होंने नकारा और हमारे संकेतों को झुठलाया — वही भट्ठी वाले हैं।

وَاَلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ اُ۬لۡجَحِيمِ

57:20

जान लो कि निकट जीवन केवल खेल, बहलाव, शृंगार, तुम्हारे बीच डींग, और संपत्ति और बच्चों में बढ़-चढ़कर जमा करने की होड़ है — एक त्राणदायी वर्षा की तरह, जिसकी वनस्पति बोने वालों को चकाचौंध कर देती है, फिर वह सूख जाती है, और तुम उसे पीली पड़ी देखते हो, फिर वह टुकड़े बन जाती है।

اِ۪عۡلَمُواْ أَنَّمَا اَ۬لۡحَيَوٰةُ اُ۬لدُّنۡيۭا لَعِبٞ وَلَهۡوٞ وَزِينَةٞ وَتَفَاخُرُۢ بَيۡنَكُمۡ وَتَكَاثُرٞ فِي اِ۬لۡأَمۡوَٰلِ وَاَلۡأَوۡلَٰدِۖ كَمَثَلِ غَيۡثٍ أَعۡجَبَ اَ۬لۡكُفَّارَ نَبَاتُهُۥ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَر۪ىٰهُ مُصۡفَرّٗا ثُمَّ يَكُونُ حُطَٰمٗاۖ

57:20

और अंतिम जीवन में कठोर दंड है, और ईश्वर की ओर से क्षमा और प्रसन्नता।

وَفِي اِ۬لۡأٓخِرَةِ عَذَابٞ شَدِيدٞ وَمَغۡفِرَةٞ مِّنَ اَ۬للَّهِ وَرِضۡوَٰنٞۚ

और निकट जीवन केवल एक छलने वाला उपभोग है।

وَمَا اَ۬لۡحَيَوٰةُ اُ۬لدُّنۡيۭا إِلَّا مَتَٰعُ اُ۬لۡغُرُورِ

अपने अभिभावक की क्षमा की ओर एक-दूसरे से आगे निकलो, और एक ऐसे उद्यान की ओर जिसका विस्तार आकाश और धरती के विस्तार जैसा है, जो उनके लिए तैयार किया गया है जो ईश्वर और उसके संदेशवाहकों पर विश्वास करते हैं।

سَابِقُواْ إِلَىٰ مَغۡفِرَةٖ مِّن رَّبِّكُمۡ وَجَنَّةٍ عَرۡضُهَا كَعَرۡضِ اِ۬لسَّمَآءِ وَاَلۡأَرۡضِ أُعِدَّتۡ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِاللَّهِ وَرُسُلِهِۦۚ

यही ईश्वर का अनुग्रह है, जिसे वह उसे सौंपता है जिस पर उसकी मर्ज़ी हो।

ذَٰلِكَ فَضۡلُ اُ۬للَّهِ يُوتِيهِ مَن يَشَآءُۚ

57:21

और ईश्वर विशाल अनुग्रह वाला है।

وَاَللَّهُ ذُو اُ۬لۡفَضۡلِ اِ۬لۡعَظِيم

57:22

धरती पर या स्वयं तुम पर कोई विपत्ति नहीं आती, जो हमारे उसे चुकाने से पहले ही एक बही में न हो।

۞ مَّا أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٖ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ وَلَا فِي أَنفُسِكُمۡ إِلَّا فِي كِتَٰبٖ مِّن قَبۡلِ أَن نَّبۡرَأَهَاۚ

57:23

यह निश्चय ही ईश्वर के लिए सरल है — ताकि तुम उस पर शोक न करो जो तुम्हें छोड़ जाए, और न उस पर हर्षित हो जो तुम्हारे पास आए।

إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اَ۬للَّهِ يَسِيرٞ لِّكَيۡلَا تَاسَوۡاْ عَلَىٰ مَا فَاتَكُمۡ وَلَا تَفۡرَحُواْ بِمَا أَتَىٰكُمۡۗ

और ईश्वर किसी उद्धत डींग हाँकने वाले से प्रेम नहीं करता।

وَاَللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخۡتَالٖ فَخُورٍ

जो कंजूस हैं और लोगों को कंजूसी का आदेश देते हैं।

اِ۬لَّذِينَ يَبۡخَلُونَ وَيَامُرُونَ اَ۬لنَّاسَ بِالۡبُخۡلِۗ

57:24

और जो कोई पीठ फेरे — ईश्वर निश्चय ही धनी, प्रशंसनीय है।

وَمَن يَتَوَلَّ فَإِنَّ اَ۬للَّه هُّوَ اَ۬لۡغَنِيُّ اُ۬لۡحَمِيدُ

57:25

हमने निश्चय ही अपने संदेशवाहकों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा, और उनके साथ ग्रंथ और तराज़ू उतारा, ताकि लोग निष्पक्षता पर डटे रहें।

لَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا رُسۡلَنَا بِالۡبَيِّنَٰتِ وَأَنزَلۡنَا مَعَهُمُ اُ۬لۡكِتَٰبَ وَاَلۡمِيزَانَ لِيَقُومَ اَ۬لنَّاسُ بِالۡقِسۡطِۖ

57:25

और हमने लोहा उतारा, जिसमें कठोर प्रचंडता है और लोगों के लिए उपयोगिताएँ हैं।

وَأَنزَلۡنَا اَ۬لۡحَدِيدَ فِيهِ بَاسٞ شَدِيدٞ وَمَنَٰفِعُ لِلنَّاسِ

57:25

और ताकि ईश्वर अलग पहचान ले कि कौन उसकी और उसके संदेशवाहकों की सहायता करता है, भले ही वह उसकी इंद्रियों से परे है,

وَلِيَعۡلَمَ اَ۬للَّهُ مَن يَنصُرُهُۥ وَرُسُلَهُۥ بِالۡغَيۡبِۚ

57:25

क्योंकि ईश्वर बलवान, सर्वशक्तिमान है।

إِنَّ اَ۬للَّهَ قَوِيٌّ عَزِيزٞ

57:26

और हमने निश्चय ही नूह और इब्राहीम को भेजा, और उनकी संतति में सूचना देने का दायित्व और ग्रंथ रखा।

وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا نُوحٗا وَإِبۡرَٰهِيمَ وَجَعَلۡنَا فِي ذُرِّيَّتِهِمَا اَ۬لنُّبُوَّةَ وَاَلۡكِتَٰبَۖ

उनमें से कुछ मार्गदर्शन पाते हैं,

فَمِنۡهُم مُّهۡتَدٖۖ

57:26

और उनमें से बहुत-से अतिक्रमणकारी हैं।

وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ فَٰسِقُونَ

57:27

फिर हमने उनके पदचिह्नों पर अपने संदेशवाहकों को उत्तरवर्ती बनाया, और मरयम के पुत्र ईसा को उत्तरवर्ती बनाया, और उसे इंजील दी।

ثُمَّ قَفَّيۡنَا عَلَىٰ ءَاثٰ۪رِهِم بِرُسۡلِنَا وَقَفَّيۡنَا بِعِيسَى اَ۪بۡنِ مَرۡيَمَ وَءَاتَيۡنَٰهُ اُ۬لۡإِنجِيلَۖ

57:27

और हमने उसका अनुसरण करने वालों के मर्मों में करुणा और दया रखी; रही स्थापित आदर की बात, उसे उन्होंने ही गढ़ा — हमने उसे उनके लिए विहित नहीं किया था — सिवा ईश्वर की प्रसन्नता की खोज के।

وَجَعَلۡنَا فِي قُلُوبِ اِ۬لَّذِينَ اَ۪تَّبَعُوهُ رَافَةٗ وَرَحۡمَةٗۚ وَرَهۡبَانِيَّةً اِ۪بۡتَدَعُوهَا مَا كَتَبۡنَٰهَا عَلَيۡهِمۡ إِلَّا اَ۪بۡتِغَآءَ رِضۡوَٰنِ اِ۬للَّهِ

परंतु उन्होंने उसका वैसा ध्यान नहीं रखा जैसा रखना चाहिए था।

فَمَا رَعَوۡهَا حَقَّ رِعَايَتِهَاۖ

उनमें से जो विश्वास करते थे, उन्हें हमने उनका पुरस्कार दिया।

فَـَٔاتَيۡنَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنۡهُمۡ أَجۡرَهُمۡۖ

57:27

और उनमें से बहुत-से अतिक्रमणकारी हैं।

وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ فَٰسِقُونَ

57:28

हे विश्वास करने वालो! ईश्वर के प्रति सावधान रहो और उसके संदेशवाहक पर विश्वास करो: वह तुम्हें अपनी दया का दोहरा भाग देगा, वह तुम्हें एक प्रकाश सौंपेगा जिससे तुम चलोगे, और वह तुम्हें क्षमा करेगा।

يَٰأَيُّهَا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ اُ۪تَّقُواْ اُ۬للَّهَ وَءَامِنُواْ بِرَسُولِهِۦ يُوتِكُمۡ كِفۡلَيۡنِ مِن رَّحۡمَتِهِۦ وَيَجۡعَل لَّكُمۡ نُورٗا تَمۡشُونَ بِهِۦ وَيَغۡفِر لَّكُمۡۚ

57:29

और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है — ताकि ग्रंथ वाले जान लें कि ईश्वर के अनुग्रह की किसी भी चीज़ पर उनका कोई नियंत्रण नहीं, और कि अनुग्रह ईश्वर के हाथ में है, जिसे वह उसे देता है जिस पर उसकी मर्ज़ी हो।

وَاَللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ لِّئَلَّا يَعۡلَمَ أَهۡلُ اُ۬لۡكِتَٰبِ أَلَّا يَقۡدِرُونَ عَلَىٰ شَيۡءٖ مِّن فَضۡلِ اِ۬للَّهِ وَأَنَّ اَ۬لۡفَضۡلَ بِيَدِ اِ۬للَّهِ يُوتِيهِ مَن يَشَآءُۚ

और ईश्वर विशाल अनुग्रह वाला है।

وَاَللَّهُ ذُو اُ۬لۡفَضۡلِ اِ۬لۡعَظِيمِ

← अध्यायों की अनुक्रमणिका