الملك
Al-Mulk
The Dominion
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। आशीषमय है वह जिसके हाथों में राजत्व है, और वह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है,
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ تَبَٰرَكَ ٱلَّذِي بِيَدِهِ ٱلۡمُلۡكُ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ
जिसने मृत्यु और जीवन को रचा ताकि तुम्हें परखे: तुममें कौन सबसे अच्छा कर्म करता है।
ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلۡمَوۡتَ وَٱلۡحَيَوٰةَ لِيَبۡلُوَكُمُۥ أَيُّكُمُۥ أَحۡسَنُ عَمَلٗاۚ
और वही सर्वशक्तिमान, अत्यंत क्षमाशील है।
وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡغَفُورُ
वही जिसने सात आकाश तह-दर-तह रचे।
ٱلَّذِي خَلَقَ سَبۡعَ سَمَٰوَٰتٖ طِبَاقٗاۖ
तुम सर्वदयालु की रचना में कोई असंगति नहीं देखते।
مَّا تَرَىٰ فِي خَلۡقِ ٱلرَّحۡمَٰنِ مِن تَفَٰوُتٖۖ
दृष्टि लौटाओ: क्या तुम्हें कोई दरार दिखती है?
فَٱرۡجِعِ ٱلۡبَصَرَ هَلۡ تَرَىٰ مِن فُطُورٖ
फिर दो बार दृष्टि लौटाओ: दृष्टि तुम्हारे पास ठुकराई हुई और हाँफती हुई पलटेगी।
ثُمَّ ٱرۡجِعِ ٱلۡبَصَرَ كَرَّتَيۡنِ يَنقَلِبۡ إِلَيۡكَ ٱلۡبَصَرُ خَاسِئٗا وَهُوَ حَسِيرٞ
हमने निश्चय ही सबसे निकट के आकाश को दीपों से सजाया, और हमने उन्हें बहकाने वालों पर प्रहार बनाया, और उनके लिए दहकते अंगार का दंड जुटा रखा है।
وَلَقَدۡ زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنۡيَا بِمَصَٰبِيحَ وَجَعَلۡنَٰهَا رُجُومٗا لِّلشَّيَٰطِينِۖ وَأَعۡتَدۡنَا لَهُمُۥ عَذَابَ ٱلسَّعِيرِ
और जिन्होंने अपने अभिभावक को नकारा, उनके लिए जहन्नम का दंड है,
وَلِلَّذِينَ كَفَرُواْ بِرَبِّهِمُۥ عَذَابُ جَهَنَّمَۖ
और कितना भयानक गंतव्य!
وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ
जब वे उसमें फेंके जाएँगे, तो वे उसकी दहाड़ सुनेंगे, जबकि वह उबल रही होगी, क्रोध से फट पड़ने को तैयार।
إِذَا أُلۡقُواْ فِيهَا سَمِعُواْ لَهَا شَهِيقٗا وَهِيَ تَفُورُ تَكَادُ تَّمَيَّزُ مِنَ ٱلۡغَيۡظِۖ
हर बार जब कोई भीड़ उसमें फेंकी जाएगी, तो उसके प्रहरी उनसे पूछेंगे: “क्या तुम्हारे पास कोई चेतावनी देने वाला नहीं आया?”
كُلَّمَا أُلۡقِيَ فِيهَا فَوۡجٞ سَأَلَهُمُۥ خَزَنَتُهَا أَلَمۡ يَأۡتِكُمُۥ نَذِيرٞ
वे कहेंगे: “क्यों नहीं, हमारे पास एक चेतावनी देने वाला आया, परंतु हमने झुठलाया और कहा: ‘ईश्वर ने कुछ नहीं उतारा, तुम तो केवल एक बड़े भटकाव में हो।’”
قَالُواْ بَلَىٰ قَدۡ جَآءَنَا نَذِيرٞ فَكَذَّبۡنَا وَقُلۡنَا مَا نَزَّلَ ٱللَّهُ مِن شَيۡءٍ إِنۡ أَنتُمُۥ إِلَّا فِي ضَلَٰلٖ كَبِيرٖ
और वे कहेंगे: “यदि हमने सुना होता या बुद्धि से काम लिया होता, तो हम दहकते अंगार वालों में न होते।”
وَقَالُواْ لَوۡ كُنَّا نَسۡمَعُ أَوۡ نَعۡقِلُ مَا كُنَّا فِي أَصۡحَٰبِ ٱلسَّعِيرِ
तब वे अपने दोष को स्वीकार करेंगे:
فَٱعۡتَرَفُواْ بِذَنۢبِهِمُۥ
दूर हों दहकते अंगार वाले!
فَسُحۡقٗا لِّأَصۡحَٰبِ ٱلسَّعِيرِ
जो अपने अभिभावक का भय मानते हैं, भले ही वह उनकी इंद्रियों से परे है, उनके लिए निश्चय ही क्षमा और बड़ा पुरस्कार है।
إِنَّ ٱلَّذِينَ يَخۡشَوۡنَ رَبَّهُمُۥ بِٱلۡغَيۡبِ لَهُمُۥ مَغۡفِرَةٞ وَأَجۡرٞ كَبِيرٞ
और तुम अपना कथन गुप्त रखो या उसे ऊँचे स्वर में कहो,
وَأَسِرُّواْ قَوۡلَكُمُۥ أَوِ ٱجۡهَرُواْ بِهِۦۖ
क्योंकि वह सीनों के भीतर जो है उसके विषय में सर्वज्ञ है।
إِنَّهُۥ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
जिसने रचा, क्या वह नहीं जानेगा, जबकि वह सूक्ष्म, पूरी ख़बर रखने वाला है?
أَلَا يَعۡلَمُ مَنۡ خَلَقَ وَهُوَ ٱللَّطِيفُ ٱلۡخَبِيرُ
वही है जिसने तुम्हारे लिए धरती को अनुकूल बना दिया; अतः उसके विस्तारों में चलो और उसकी जीविका में से खाओ।
هُوَ ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلۡأَرۡضَ ذَلُولٗا فَٱمۡشُواْ فِي مَنَاكِبِهَا وَكُلُواْ مِن رِّزۡقِهِۦۖ
और उसी की ओर फैलाव है।
وَإِلَيۡهِ ٱلنُّشُورُ
क्या तुम उससे निर्भय हो जो आकाश में है, कि वह धरती को तुम्हें निगलवा दे, और तब वह थरथराने लगे?
ءَا۬مِنتُمُۥ مَن فِي ٱلسَّمَآءِ اَ۬ن يَخۡسِفَ بِكُمُ ٱلۡأَرۡضَ فَإِذَا هِيَ تَمُورُ
या क्या तुम उससे निर्भय हो जो आकाश में है, कि वह तुम पर कंकड़ों की बौछार भेज दे?
أَمۡ أَمِنتُمُۥ مَن فِي ٱلسَّمَآءِ اَ۬ن يُرۡسِلَ عَلَيۡكُمُۥ حَاصِبٗاۖ
तब तुम जान लोगे कि मेरी चेतावनी का क्या हाल है।
فَسَتَعۡلَمُونَ كَيۡفَ نَذِيرِ
उनसे पहले वालों ने निश्चय ही झुठलाया,
وَلَقَدۡ كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمُۥ
और कैसा रहा मेरा अमान्य ठहराना!
فَكَيۡفَ كَانَ نَكِيرِ
क्या उन्होंने अपने ऊपर पक्षियों को नहीं देखा, जो अपने पंख पंक्तिबद्ध करते और समेटते हैं?
أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ إِلَى ٱلطَّيۡرِ فَوۡقَهُمُۥ صَٰٓفَّٰتٖ وَيَقۡبِضۡنَۚ
उन्हें सर्वदयालु के सिवा कोई नहीं थामता,
مَا يُمۡسِكُهُنَّ إِلَّا ٱلرَّحۡمَٰنُۚ
क्योंकि वह हर चीज़ पर दृष्टि रखता है।
إِنَّهُۥ بِكُلِّ شَيۡءِۭ بَصِيرٌ
या वह कौन है जो तुम्हारे लिए सेना बने और सर्वदयालु के अतिरिक्त तुम्हारी सहायता करे?
أَمَّنۡ هَٰذَا ٱلَّذِي هُوَ جُندٞ لَّكُمُۥ يَنصُرُكُمُۥ مِن دُونِ ٱلرَّحۡمَٰنِۚ
नकारने वाले केवल भुलावे में हैं।
إِنِ ٱلۡكَٰفِرُونَ إِلَّا فِي غُرُورٍ
या वह कौन है जो तुम्हें जीविका दे, यदि वह अपनी जीविका रोक ले?
أَمَّنۡ هَٰذَا ٱلَّذِي يَرۡزُقُكُمُۥ إِنۡ أَمۡسَكَ رِزۡقَهُۥۚ
परंतु वे उद्दंडता और विकर्षण में धँसे हैं।
بَل لَّجُّواْ فِي عُتُوّٖ وَنُفُورٍ
क्या वह जो अपने चेहरे के बल औंधा चलता है अधिक मार्गदर्शन पाया हुआ है, या वह जो सीधे पथ पर चलता है?
أَفَمَن يَمۡشِي مُكِبًّا عَلَىٰ وَجۡهِهِۦ أَهۡدَىٰ أَمَّن يَمۡشِي سَوِيًّا عَلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ
कहो: “वही है जिसने तुम्हें उत्पन्न किया और तुम्हारे लिए श्रवण, दृष्टियाँ और चेतनाएँ रखीं।
قُلۡ هُوَ ٱلَّذِي أَنشَأَكُمُۥ وَجَعَلَ لَكُمُ ٱلسَّمۡعَ وَٱلۡأَبۡصَٰرَ وَٱلۡأَفۡـِٔدَةَۚ
तुम कितने कम कृतज्ञ हो!”
قَلِيلٗا مَّا تَشۡكُرُونَ
कहो: “वही है जिसने तुम्हें धरती में बिखेर दिया, और उसी की ओर तुम इकट्ठा किए जाओगे।”
قُلۡ هُوَ ٱلَّذِي ذَرَأَكُمُۥ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَإِلَيۡهِۦ تُحۡشَرُونَ
और वे कहते हैं: “यह वादा कब है, यदि तुम सच्चे हो?”
وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا ٱلۡوَعۡدُ إِن كُنتُمُۥ صَٰدِقِينَ
कहो: “ज्ञान केवल ईश्वर का है; मैं तो बस एक स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ।”
قُلۡ إِنَّمَا ٱلۡعِلۡمُ عِندَ ٱللَّهِ وَإِنَّمَا أَنَا۠ نَذِيرٞ مُّبِينٞ
फिर जब वे उसे निकट देखेंगे, तो जिन्होंने नकारा उनके चेहरों पर अप्रसन्नता छप जाएगी, और कहा जाएगा: “यह वही है जो तुम माँगते थे।”
فَلَمَّا رَأَوۡهُۥ زُلۡفَةٗ سِيٓـَٔتۡ وُجُوهُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَقِيلَ هَٰذَا ٱلَّذِي كُنتُمُۥ بِهِۦ تَدَّعُونَ
कहो: “क्या तुम देखते हो? ईश्वर मुझे और मेरे साथ वालों को नष्ट करे, या हम पर दया करे, तो नकारने वालों को पीड़ादायक दंड से कौन शरण देगा?”
قُلۡ أَرَءَيۡتُمُۥ إِنۡ أَهۡلَكَنِيَ ٱللَّهُ وَمَن مَّعِيَ أَوۡ رَحِمَنَا فَمَن يُجِيرُ ٱلۡكَٰفِرِينَ مِنۡ عَذَابٍ أَلِيمٖ
कहो: “वही सर्वदयालु है; हम उस पर विश्वास करते हैं और उसी को हम मुख़्तार बनाते हैं।
قُلۡ هُوَ ٱلرَّحۡمَٰنُ ءَامَنَّا بِهِۦ وَعَلَيۡهِۦ تَوَكَّلۡنَاۖ
तुम शीघ्र ही जान लोगे कि स्पष्ट भटकाव में कौन है।”
فَسَتَعۡلَمُونَ مَنۡ هُوَ فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٖ
कहो: “क्या तुम देखते हो? यदि तुम्हारा पानी धरती में धँस जाए, तो तुम्हारे पास सोते का पानी कौन ले आएगा?”
قُلۡ أَرَءَيۡتُمُۥ إِنۡ أَصۡبَحَ مَآؤُكُمُۥ غَوۡرٗا فَمَن يَأۡتِيكُمُۥ بِمَآءٖ مَّعِينِۭ