الكهف
Al-Kahf
Unless God Wills
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। प्रशंसा ईश्वर के लिए है, जिसने अपने आज्ञाकारी पर ग्रंथ उतारा और उसमें कोई टेढ़ापन नहीं रखा,
بِسۡمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحۡمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ اِ۬لۡحَمۡدُ لِلَّهِ اِ۬لَّذِيٓ أَنزَلَ عَلَىٰ عَبۡدِهِ اِ۬لۡكِتَٰبَ وَلَمۡ يَجۡعَل لَّهُۥ عِوَجٗا
ऋजु — उसकी ओर से आने वाली कठोर प्रचंडता की चेतावनी देने के लिए, विश्वास करने वालों को, जो भले कर्म करते हैं, शुभ समाचार देने के लिए कि उनके लिए सुंदर पुरस्कार होगा, जिसमें वे सदा रहेंगे, और उन्हें चेतावनी देने के लिए जिन्होंने कहा: “ईश्वर ने अपने लिए संतान बना ली है।”
قَيِّمٗا لِّيُنذِرَ بَأۡسٗا شَدِيدٗا مِّن لَّدُنۡهُ وَيُبَشِّرَ اَ۬لۡمُؤۡمِنِينَ اَ۬لَّذِينَ يَعۡمَلُونَ اَ۬لصَّٰلِحَٰتِ أَنَّ لَهُمۡ أَجۡرًا حَسَنٗا مَّٰكِثِينَ فِيهِ أَبَدٗا وَيُنذِرَ اَ۬لَّذِينَ قَالُواْ اُ۪تَّخَذَ اَ۬للَّهُ وَلَدٗا
उन्हें इसका कोई ज्ञान नहीं, और न उनके पूर्वजों को।
مَّا لَهُم بِهِۦ مِنۡ عِلۡمٖ وَلَا لِأٓبَآئِهِمۡۚ
कितना भारी बोल है जो उनके मुँह से निकलता है!
كَبُرَتۡ كَلِمَةٗ تَخۡرُجُ مِنۡ أَفۡوَٰهِهِمۡۚ
वे झूठ के सिवा कुछ नहीं कहते।
إِن يَقُولُونَ إِلَّا كَذِبٗا
शायद तुम उनके पदचिह्नों पर कड़वाहट में अपने आप को घुलाकर नष्ट कर लो, यदि वे इस वार्ता पर विश्वास न करें।
فَلَعَلَّكَ بَٰخِعٞ نَّفۡسَكَ عَلَىٰٓ ءَاثٰ۪رِهِمۡ إِن لَّمۡ يُؤۡمِنُواْ بِهَٰذَا اَ۬لۡحَدِيثِ أَسَفًا
हमने धरती पर जो कुछ है उसे उसका शृंगार बनाया, ताकि उन्हें परखें: उनमें कौन कर्म में सबसे अच्छा है।
إِنَّا جَعَلۡنَا مَا عَلَى اَ۬لۡأَرۡضِ زِينَةٗ لَّهَا لِنَبۡلُوَهُمۡ أَيُّهُمۡ أَحۡسَنُ عَمَلٗا
और हम उस पर जो कुछ है उसे अवश्य एक बंजर उभार बना देंगे।
وَإِنَّا لَجَٰعِلُونَ مَا عَلَيۡهَا صَعِيدٗا جُرُزًا
या क्या तुमने समझा कि गुफा और अर-रक़ीम वाले हमारे संकेतों में से एक अचरज की बात थे?
أَمۡ حَسِبۡتَ أَنَّ أَصۡحَٰبَ اَ۬لۡكَهۡفِ وَاَلرَّقِيمِ كَانُواْ مِنۡ ءَايَٰتِنَا عَجَبًا
जब युवकों ने गुफा में शरण ली और कहा: “हमारे अभिभावक, हमें अपनी ओर से दया दीजिए, और हमारे मामले में हमारे लिए सुबुद्धि की राह सँवार दीजिए।”
إِذۡ أَوَى اَ۬لۡفِتۡيَةُ إِلَى اَ۬لۡكَهۡفِ فَقَالُواْ رَبَّنَآ ءَاتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحۡمَةٗ وَهَيِّئۡ لَنَا مِنۡ أَمۡرِنَا رَشَدٗا
तब हमने गुफा में उनके कान गिने हुए वर्षों तक बंद कर दिए; फिर हमने उन्हें उठाया, यह भेद करने के लिए कि दोनों दलों में कौन उस अंतराल को गिनने में सबसे ठीक था जो उन्होंने बिताया।
فَضَرَبۡنَا عَلَىٰٓ ءَاذَانِهِمۡ فِي اِ۬لۡكَهۡفِ سِنِينَ عَدَدٗا ثُمَّ بَعَثۡنَٰهُمۡ لِنَعۡلَمَ أَيُّ اُ۬لۡحِزۡبَيۡنِ أَحۡصَىٰ لِمَا لَبِثُوٓاْ أَمَدٗا
हम तुम्हारे सामने उनकी सूचना का पूर्ण सत्य के साथ वर्णन करते हैं:
نَّحۡنُ نَقُصُّ عَلَيۡكَ نَبَأَهُم بِالۡحَقِّۚ
वे युवक थे जिन्होंने अपने अभिभावक पर विश्वास किया, और हमने उन्हें मार्गदर्शन में बढ़ाया।
إِنَّهُمۡ فِتۡيَةٌ ءَامَنُواْ بِرَبِّهِمۡ وَزِدۡنَٰهُمۡ هُدٗى
और हमने उनके मर्मों को बाँध दिया, जब वे खड़े हुए और उन्होंने कहा: “हमारा अभिभावक आकाशों और धरती का अभिभावक है; हम उसके अतिरिक्त किसी देवता को कभी नहीं पुकारेंगे — तब हमने निश्चय ही भारी अतिरेक की बात कही होती।
وَرَبَطۡنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ إِذۡ قَامُواْ فَقَالُواْ رَبُّنَا رَبُّ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِ لَن نَّدۡعُوَاْ مِن دُونِهِۦٓ إِلَٰهٗاۖ لَّقَدۡ قُلۡنَآ إِذٗا شَطَطًا
यह हमारी क़ौम है जिसने उसके अतिरिक्त देवता बना लिए हैं: वे उनके विषय में कोई स्पष्ट अधिकार क्यों नहीं ले आते?
هَٰٓؤُلَآءِ قَوۡمُنَا اَ۪تَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةٗۖ لَّوۡلَا يَأۡتُونَ عَلَيۡهِم بِسُلۡطَٰنِۢ بَيِّنٖۖ
तो उससे बढ़कर अन्यायी कौन है जो ईश्वर पर झूठ गढ़ता है?
فَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّنِ اِ۪فۡتَر۪يٰ عَلَى اَ۬للَّهِ كَذِبٗا
और जब तुम उनसे और उससे अलग हो गए जिसकी वे आज्ञा का पालन करते हैं, सिवा ईश्वर के, तो गुफा में शरण लो: तुम्हारा अभिभावक तुम पर अपनी दया में से फैलाएगा और तुम्हारे मामले में तुम्हारे लिए एक आधार सँवारेगा।”
وَإِذِ اِ۪عۡتَزَلۡتُمُوهُمۡ وَمَا يَعۡبُدُونَ إِلَّا اَ۬للَّهَ فَأۡوُۥٓاْ إِلَى اَ۬لۡكَهۡفِ يَنشُر لَّكُمۡ رَبُّكُم مِّن رَّحۡمَتِهِۦ وَيُهَيِّئۡ لَكُم مِّنۡ أَمۡرِكُم مِّرۡفَقٗا
और तुम देखते कि सूर्य, उदय होते समय, उनकी गुफा से दाईं ओर हट जाता, और अस्त होते समय, बाईं ओर से उसे छूता हुआ निकल जाता, जबकि वे उससे अलग एक गहरे खोखले भाग में थे।
۞ وَتَرَى اَ۬لشَّمۡسَ إِذَا طَلَعَت تَّزَّٰوَرُ عَن كَهۡفِهِمۡ ذَاتَ اَ۬لۡيَمِينِ وَإِذَا غَرَبَت تَّقۡرِضُهُمۡ ذَاتَ اَ۬لشِّمَالِ وَهُمۡ فِي فَجۡوَةٖ مِّنۡهُۚ
यह ईश्वर के संकेतों में से है।
ذَٰلِكَ مِنۡ ءَايَٰتِ اِ۬للَّهِۗ
ईश्वर जिसे मार्ग दिखाता है, वही मार्गदर्शन पाने वाला है,
مَن يَهۡدِ اِ۬للَّهُ فَهۡوَ اَ۬لۡمُهۡتَدِۦۖ
और जिसे वह भटकाता है, तुम उसके लिए कभी कोई हिमायती नहीं पाओगे जो उसे सुबुद्धि दे।
وَمَن يُضۡلِلۡ فَلَن تَجِدَ لَهُۥ وَلِيّٗا مُّرۡشِدٗا
और तुम उन्हें जागे हुए समझते, जबकि वे सो रहे थे।
وَتَحۡسِبُهُمۡ أَيۡقَاظٗا وَهُمۡ رُقُودٞۚ
और हम उन्हें दाईं ओर और बाईं ओर पलटते थे, जबकि उनका कुत्ता देहरी पर अपनी अगली टाँगें फैलाए बैठा था।
وَنُقَلِّبُهُمۡ ذَاتَ اَ۬لۡيَمِينِ وَذَاتَ اَ۬لشِّمَالِۖ وَكَلۡبُهُم بَٰسِطٞ ذِرَاعَيۡهِ بِالۡوَصِيدِۚ
यदि तुम उन्हें झाँक लेते, तो तुम अवश्य उनसे पीठ फेरकर भाग जाते, और तुममें उनसे आतंक भर जाता।
لَوِ اِ۪طَّلَعۡتَ عَلَيۡهِمۡ لَوَلَّيۡتَ مِنۡهُمۡ فِرَارٗا وَلَمُلِئۡتَ مِنۡهُمۡ رُعۡبٗا
और इसी प्रकार हमने उन्हें उठाया, ताकि वे आपस में पूछें।
وَكَذَٰلِكَ بَعَثۡنَٰهُمۡ لِيَتَسَآءَلُواْ بَيۡنَهُمۡۚ
उनमें से एक ने कहा: “तुमने कितना समय बिताया?”
قَالَ قَآئِلٞ مِّنۡهُمۡ كَمۡ لَبِثتُّمۡۖ
उन्होंने कहा: “हमने एक दिन बिताया, या एक दिन का कुछ भाग।”
قَالُواْ لَبِثۡنَا يَوۡمًا أَوۡ بَعۡضَ يَوۡمٖۚ
उन्होंने कहा: “तुम्हारा अभिभावक सबसे अच्छा जानता है कि तुमने कितना समय बिताया; तो अपने में से किसी एक को अपने इस सिक्के के साथ राजधानी की ओर उठाओ, और वह नज़र डाले कि उसका कौन-सा भोजन सबसे शुद्ध है, और उसमें से तुम्हारे लिए जीविका लाए, और वह गोपनीयता से काम ले,
قَالُواْ رَبُّكُمۡ أَعۡلَمُ بِمَا لَبِثتُّمۡ فَاَبۡعَثُوٓاْ أَحَدَكُم بِوَرۡقِكُمۡ هَٰذِهِۦٓ إِلَى اَ۬لۡمَدِينَةِ فَلۡيَنظُرۡ أَيُّهَآ أَزۡكَىٰ طَعَامٗا فَلۡيَأۡتِكُم بِرِزۡقٖ مِّنۡهُ وَلۡيَتَلَطَّفۡ
और वह किसी को तुम्हारी उपस्थिति का आभास न होने दे,
وَلَا يُشۡعِرَنَّ بِكُمۡ أَحَدًا
क्योंकि यदि वे तुम्हें पा लें, तो तुम्हें निष्कासित कर देंगे, या तुम्हें अपने मत में वापस ले आएँगे, और तब तुम कभी सफल नहीं होगे।”
إِنَّهُمۡ إِن يَظۡهَرُواْ عَلَيۡكُمۡ يَرۡجُمُوكُمۡ أَوۡ يُعِيدُوكُمۡ فِي مِلَّتِهِمۡ وَلَن تُفۡلِحُوٓاْ إِذًا أَبَدٗا
और इसी प्रकार हमने जनसाधारण को उन तक पहुँचा दिया, ताकि वे जानें कि ईश्वर का वादा सत्य है और यह कि उस घड़ी में कोई संदेह नहीं,
وَكَذَٰلِكَ أَعۡثَرۡنَا عَلَيۡهِمۡ لِيَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ وَعۡدَ اَ۬للَّهِ حَقّٞ وَأَنَّ اَ۬لسَّاعَةَ لَا رَيۡبَ فِيهَآ
जब वे आपस में अपने मामले पर खींचतान कर रहे थे और उन्होंने कहा: “उन पर एक निर्माण खड़ा कर दो” —
إِذۡ يَتَنَٰزَعُونَ بَيۡنَهُمۡ أَمۡرَهُمۡۖ فَقَالُواْ اُ۪بۡنُواْ عَلَيۡهِم بُنۡيَٰنٗاۖ
उनका अभिभावक उन्हें सबसे अच्छा जानता है।
رَّبُّهُمۡ أَعۡلَمُ بِهِمۡۚ
जो उनके मामले में प्रबल रहे, उन्होंने कहा: “हम अवश्य उन पर एक माथा टेकने का स्थान बना लेंगे।”
قَالَ اَ۬لَّذِينَ غَلَبُواْ عَلَىٰٓ أَمۡرِهِمۡ لَنَتَّخِذَنَّ عَلَيۡهِم مَّسۡجِدٗا
वे कहेंगे: “तीन, उनका चौथा उनका कुत्ता”,
سَيَقُولُونَ ثَلَٰثَةٞ رَّابِعُهُمۡ كَلۡبُهُمۡ
और वे कहेंगे: “पाँच, उनका छठा उनका कुत्ता”, जो इंद्रियों से परे है उसे उछालते हुए,
وَيَقُولُونَ خَمۡسَةٞ سَادِسُهُمۡ كَلۡبُهُمۡ رَجۡمَۢا بِالۡغَيۡبِۖ
और वे कहेंगे: “सात”,
وَيَقُولُونَ سَبۡعَةٞ
उनका आठवाँ उनका कुत्ता।
وَثَامِنُهُمۡ كَلۡبُهُمۡۚ
कहो: “मेरा अभिभावक उनकी संख्या को सबसे अच्छा जानता है”;
قُل رَّبِّيَ أَعۡلَمُ بِعِدَّتِهِم
उन्हें कोई नहीं जानता, सिवा थोड़े के।
مَّا يَعۡلَمُهُمۡ إِلَّا قَلِيلٞۗ
इसलिए उनके विषय में केवल खुले वाद-प्रतिवाद से ही वाद-प्रतिवाद करो, और उनके विषय में उनमें से किसी से परामर्श मत लो।
۞ فَلَا تُمَارِ فِيهِمۡ إِلَّا مِرَآءٗ ظَٰهِرٗا وَلَا تَسۡتَفۡتِ فِيهِم مِّنۡهُمۡ أَحَدٗا
और किसी चीज़ के विषय में कभी मत कहो: “मैं यह कल करूँगा”, जब तक कि ईश्वर की मर्ज़ी न हो।
وَلَا تَقُولَنَّ لِشَاْيۡءٍ إِنِّي فَاعِلٞ ذَٰلِكَ غَدًا إِلَّآ أَن يَشَآءَ اَ۬للَّهُۚ
और जब तुम भूल जाओ, तो अपने अभिभावक का स्मरण करो,
وَاَذۡكُر رَّبَّكَ إِذَا نَسِيتَ
और कहो: “संभव है मेरा अभिभावक मुझे इससे अधिक निकट सुबुद्धि की ओर मार्ग दिखाए।”
وَقُلۡ عَسَىٰٓ أَن يَهۡدِيَنِۦ رَبِّي لِأَقۡرَبَ مِنۡ هَٰذَا رَشَدٗا
और उन्होंने अपनी गुफा में तीन सौ वर्ष बिताए, और नौ और बढ़ाए।
وَلَبِثُواْ فِي كَهۡفِهِمۡ ثَلَٰثَ مِاْئَةٖ سِنِينَ وَاَزۡدَادُواْ تِسۡعٗا
कहो: “ईश्वर सबसे अच्छा जानता है कि उन्होंने कितना समय बिताया:
قُلِ اِ۬للَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا لَبِثُواْۖ
आकाशों और धरती में जो इंद्रियों से परे है, वह उसी का है।
لَهُۥ غَيۡبُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۖ
वह कितना दृष्टिवान और कितना सुनने वाला है!
أَبۡصِرۡ بِهِۦ وَأَسۡمِعۡۚ
उनका उसके अतिरिक्त कोई हिमायती नहीं,
مَا لَهُم مِّن دُونِهِۦ مِن وَلِيّٖ
और वह अपने निर्णय में किसी को साझीदार नहीं बनाता।”
وَلَا يُشۡرِكُ فِي حُكۡمِهِۦٓ أَحَدٗا
और जो तुम पर तुम्हारे अभिभावक के ग्रंथ में से प्रकट किया गया है उसे सुनाओ: उसके बोलों को कोई बदलने वाला नहीं,
وَاَتۡلُ مَآ أُوحِيَ إِلَيۡكَ مِن كِتَابِ رَبِّكَۖ لَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَٰتِهِۦ
और तुम उसके अतिरिक्त कोई शरण नहीं पाओगे।
وَلَن تَجِدَ مِن دُونِهِۦ مُلۡتَحَدٗا
और उनके साथ दृढ़ता से डटे रहो जो सुबह और शाम अपने अभिभावक को पुकारते हैं और उसकी दिशा चाहते हैं,
وَاَصۡبِرۡ نَفۡسَكَ مَعَ اَ۬لَّذِينَ يَدۡعُونَ رَبَّهُم بِالۡغَدَوٰةِ وَاَلۡعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجۡهَهُۥۖ
और तुम्हारी आँखें उनसे आगे न बढ़ें, कि तुम निकट जीवन की शोभा चाहने लगो;
وَلَا تَعۡدُ عَيۡنَاكَ عَنۡهُمۡ تُرِيدُ زِينَةَ اَ۬لۡحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنۡيۭاۖ
और उसकी बात न मानो जिसके मर्म को हमने अपने स्मरण से लापरवाह कर दिया, जिसने अपनी भावना का अनुसरण किया, और जिसका मामला अति है।
وَلَا تُطِعۡ مَنۡ أَغۡفَلۡنَا قَلۡبَهُۥ عَن ذِكۡرِنَا وَاَتَّبَعَ هَوَىٰهُ وَكَانَ أَمۡرُهُۥ فُرُطٗا
और कहो: “सत्य तुम्हारे अभिभावक की ओर से है: जो चाहे विश्वास करे, और जो चाहे नकारे।”
وَقُلِ اِ۬لۡحَقُّ مِن رَّبِّكُمۡۖ فَمَن شَآءَ فَلۡيُؤۡمِن وَمَن شَآءَ فَلۡيَكۡفُرۡۚ
क्योंकि हमने अन्यायियों के लिए एक ऐसी आग जुटा रखी है जिसकी चारदीवारी उन्हें घेरे हुए है।
إِنَّآ أَعۡتَدۡنَا لِلظَّٰلِمِينَ نَارًا أَحَاطَ بِهِمۡ سُرَادِقُهَاۚ
और यदि वे सहायता के लिए पुकारें, तो पिघली हुई धातु जैसे पानी से उनकी सहायता की जाएगी, जो चेहरों को झुलसा देता है।
وَإِن يَسۡتَغِيثُواْ يُغَاثُواْ بِمَآءٖ كَاَلۡمُهۡلِ يَشۡوِي اِ۬لۡوُجُوهَۚ
कितना निकृष्ट पेय है!
بِئۡسَ اَ۬لشَّرَابُ
और विश्राम का कितना बुरा स्थान है!
وَسَآءَتۡ مُرۡتَفَقًا
जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए — हम भलाई करने वाले के पुरस्कार को नष्ट नहीं होने देते।
إِنَّ اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ إِنَّا لَا نُضِيعُ أَجۡرَ مَنۡ أَحۡسَنَ عَمَلًا
यही हैं वे जिनके लिए स्थायित्व के उद्यान हैं; उनके नीचे नदियाँ बहती हैं; वहाँ उन्हें सोने के कंगन पहनाए जाएँगे और वे महीन रेशम और ज़री के हरे वस्त्र पहनेंगे, सजे हुए आसनों पर टेक लगाए हुए।
أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمۡ جَنَّٰتُ عَدۡنٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهِمِ اِ۬لۡأَنۡهَٰرُ يُحَلَّوۡنَ فِيهَا مِنۡ أَسَاوِرَ مِن ذَهَبٖ وَيَلۡبَسُونَ ثِيَابًا خُضۡرٗا مِّن سُندُسٖ وَإِسۡتَبۡرَقٖ مُّتَّكِـِٔينَ فِيهَا عَلَى اَ۬لۡأَرَآئِكِۚ
कितना उत्तम प्रतिदान है!
نِعۡمَ اَ۬لثَّوَابُ
और विश्राम का कितना सुंदर स्थान है!
وَحَسُنَتۡ مُرۡتَفَقٗا
और उनके लिए एक उदाहरण जोड़ो: दो पुरुष; उनमें से एक के लिए हमने अंगूरों के दो उद्यान बनाए, उन्हें खजूरों से घेरा, और उनके बीच खेती रखी।
۞ وَاَضۡرِبۡ لَهُم مَّثَلٗا رَّجُلَيۡنِ جَعَلۡنَا لِأَحَدِهِمَا جَنَّتَيۡنِ مِنۡ أَعۡنَٰبٖ وَحَفَفۡنَٰهُمَا بِنَخۡلٖ وَجَعَلۡنَا بَيۡنَهُمَا زَرۡعٗاۖ
दोनों उद्यानों ने अपना भोजन दिया, बिना किसी बात में अन्याय किए,
كِلۡتَا اَ۬لۡجَنَّتَيۡنِ ءَاتَتۡ أُكۡلَهَا وَلَمۡ تَظۡلِم مِّنۡهُ شَيۡـٔٗاۚ
और हमने उन दोनों के बीच एक नदी बहा दी; और उसके पास फलती-फूलती संपत्ति थी।
وَفَجَّرۡنَا خِلَٰلَهُمَا نَهَرٗا وَكَانَ لَهُۥ ثُمۡرٞ
उसने अपने साथी से, उससे बातचीत करते हुए, कहा: “मेरे पास तुमसे अधिक संपत्ति है, और जन-बल में मैं अधिक शक्तिशाली हूँ।”
فَقَالَ لِصَٰحِبِهِۦ وَهۡوَ يُحَاوِرُهُۥٓ أَنَا۠ أَكۡثَرُ مِنكَ مَالٗا وَأَعَزُّ نَفَرٗا
और वह अपने उद्यान में गया, स्वयं पर अन्याय करता हुआ,
وَدَخَلَ جَنَّتَهُۥ وَهۡوَ ظَالِمٞ لِّنَفۡسِهِۦ
और कहा: “मैं अनुमान नहीं लगाता कि यह कभी नष्ट होगा, और मैं अनुमान नहीं लगाता कि वह घड़ी आएगी; और यदि मैं अपने अभिभावक की ओर वापस लाया भी गया, तो पलटाव के स्थान के रूप में मैं इस उद्यान से अवश्य बेहतर पाऊँगा।”
قَالَ مَآ أَظُنُّ أَن تَبِيدَ هَٰذِهِۦٓ أَبَدٗا وَمَآ أَظُنُّ اُ۬لسَّاعَةَ قَآئِمَةٗ وَلَئِن رُّدِدتُّ إِلَىٰ رَبِّي لَأَجِدَنَّ خَيۡرٗا مِّنۡهَا مُنقَلَبٗا
उसके साथी ने, उससे बातचीत करते हुए, उससे कहा: “क्या तुम उसे नकारते हो जिसने तुम्हें मिट्टी से, फिर एक बूँद से रचा, फिर तुम्हें पूर्ण मनुष्य का रूप दिया?
قَالَ لَهُۥ صَاحِبُهُۥ وَهۡوَ يُحَاوِرُهُۥٓ أَكَفَرۡتَ بِالَّذِي خَلَقَكَ مِن تُرَابٖ ثُمَّ مِن نُّطۡفَةٖ ثُمَّ سَوَّىٰكَ رَجُلٗا
रही मेरी बात, वह ईश्वर है, मेरा अभिभावक, और मैं अपने अभिभावक के साथ किसी को साझी नहीं ठहराता।
لَّٰكِنَّا۠ هُوَ اَ۬للَّهُ رَبِّي وَلَآ أُشۡرِكُ بِرَبِّيَ أَحَدٗا
और जब तुम अपने उद्यान में प्रवेश कर रहे थे, तब तुमने यह क्यों न कहा: ‘यह वही है जो ईश्वर की मर्ज़ी हुई! ईश्वर के बिना कोई बल नहीं!’ —
وَلَوۡلَآ إِذ دَّخَلۡتَ جَنَّتَكَ قُلۡتَ مَا شَآءَ اَ۬للَّهُ لَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِۚ
यदि तुम मुझे अपने से कम संपत्ति और संतान वाला देखते हो, तो संभव है कि मेरा अभिभावक मुझे तुम्हारे उद्यान से बेहतर दे, और उस पर आकाश से एक गिना हुआ संकट भेज दे, जिससे वह एक फिसलन भरा उभार बन जाए, या उसका पानी धँस जाए और तुम उसे कभी न पा सको।”
إِن تَرَنِۦٓ أَنَا۠ أَقَلَّ مِنكَ مَالٗا وَوَلَدٗا فَعَسَىٰ رَبِّيَ أَن يُؤۡتِيَنِۦ خَيۡرٗا مِّن جَنَّتِكَ وَيُرۡسِلَ عَلَيۡهَا حُسۡبَانٗا مِّنَ اَ۬لسَّمَآءِ فَتُصۡبِحَ صَعِيدٗا زَلَقًا أَوۡ يُصۡبِحَ مَآؤُهَا غَوۡرٗا فَلَن تَسۡتَطِيعَ لَهُۥ طَلَبٗا
और उसकी फलती-फूलती संपत्ति घेर ली गई, तो वह उस पर, जो उसने उसमें ख़र्च किया था, अपनी हथेलियाँ उलटने-पलटने लगा, जबकि उद्यान अपनी इमारतों के होते हुए भी उजड़ा पड़ा था, और वह कह रहा था: “काश मैंने अपने अभिभावक के साथ किसी को साझी न ठहराया होता!”
وَأُحِيطَ بِثُمۡرِهِۦ فَأَصۡبَحَ يُقَلِّبُ كَفَّيۡهِ عَلَىٰ مَآ أَنفَقَ فِيهَا وَهۡيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَيَقُولُ يَٰلَيۡتَنِي لَمۡ أُشۡرِكۡ بِرَبِّيَ أَحَدٗا
और उसके पास कोई दल न था जो ईश्वर के अतिरिक्त उसकी सहायता करता,
وَلَمۡ تَكُن لَّهُۥ فِئَةٞ يَنصُرُونَهُۥ مِن دُونِ اِ۬للَّهِ
और वह स्वयं अपनी सहायता भी न कर सका।
وَمَا كَانَ مُنتَصِرًا
वहाँ हिमायत ईश्वर का है, जो सत्य है।
هُنَالِكَ اَ۬لۡوَلَٰيَةُ لِلَّهِ اِ۬لۡحَقُّۚ
वह प्रतिदान में सबसे बेहतर है और परिणाम में सबसे बेहतर है।
هُوَ خَيۡرٞ ثَوَابٗا وَخَيۡرٌ عُقُبٗا
और उनके लिए निकट जीवन का उदाहरण जोड़ो: वह उस पानी के समान है जिसे हम आकाश से उतारते हैं; धरती की वनस्पति उसमें घुल-मिल जाती है, फिर वह भूसा बन जाती है जिसे हवाएँ बिखेर देती हैं —
۞ وَاَضۡرِبۡ لَهُم مَّثَلَ اَ۬لۡحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنۡيۭا كَمَآءٍ أَنزَلۡنَٰهُ مِنَ اَ۬لسَّمَآءِ فَاَخۡتَلَطَ بِهِۦ نَبَاتُ اُ۬لۡأَرۡضِ فَأَصۡبَحَ هَشِيمٗا تَذۡرُوهُ اُ۬لرِّيَٰحُۗ
ईश्वर हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
وَكَانَ اَ۬للَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ مُّقۡتَدِرًا
संपत्ति और पुत्र निकट जीवन की शोभा हैं;
اِ۬لۡمَالُ وَاَلۡبَنُونَ زِينَةُ اُ۬لۡحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنۡيۭاۖ
और स्थायी और भले कर्म तुम्हारे अभिभावक के पास प्रतिदान में बेहतर और आशा में बेहतर हैं।
وَاَلۡبَٰقِيَٰتُ اُ۬لصَّٰلِحَٰتُ خَيۡرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابٗا وَخَيۡرٌ أَمَلٗا
और उस दिन जब हम पहाड़ों को गतिमान करेंगे, और तुम धरती को खुली हुई देखोगे, और हम उन सबको इकट्ठा करेंगे, बिना किसी एक को छोड़े।
وَيَوۡمَ تُسَيَّرُ اُ۬لۡجِبَالُ وَتَرَى اَ۬لۡأَرۡضَ بَارِزَةٗ وَحَشَرۡنَٰهُمۡ فَلَمۡ نُغَادِرۡ مِنۡهُمۡ أَحَدٗا
और वे तुम्हारे अभिभावक के सामने पंक्तिबद्ध प्रस्तुत किए जाएँगे:
وَعُرِضُواْ عَلَىٰ رَبِّكَ صَفّٗا
“तुम निश्चय ही हमारे पास वैसे ही आ गए हो जैसे हमने तुम्हें पहली बार रचा था;
لَّقَد جِّئۡتُمُونَا كَمَا خَلَقۡنَٰكُمۡ أَوَّلَ مَرَّةِۢۚ
परंतु तुम दावा करते थे कि हम तुम्हारे लिए कभी कोई वादे का समय निर्धारित नहीं करेंगे।”
بَلۡ زَعَمۡتُمۡ أَلَّن نَّجۡعَلَ لَكُم مَّوۡعِدٗا
और बही रखी जाएगी, और तुम बहिष्कृतों को देखोगे कि वे उसमें जो है उससे आशंकित हैं,
وَوُضِعَ اَ۬لۡكِتَٰبُ فَتَرَى اَ۬لۡمُجۡرِمِينَ مُشۡفِقِينَ مِمَّا فِيهِ
और वे कहेंगे: “हाय हम पर! इस बही को क्या हुआ कि यह न कोई छोटी बात छोड़ती है न बड़ी, बिना उसे गिने!”
وَيَقُولُونَ يَٰوَيۡلَتَنَا مَالِ هَٰذَا اَ۬لۡكِتَٰبِ لَا يُغَادِرُ صَغِيرَةٗ وَلَا كَبِيرَةً إِلَّآ أَحۡصَىٰهَاۚ
और जो उन्होंने किया था, उसे वे उपस्थित पाएँगे,
وَوَجَدُواْ مَا عَمِلُواْ حَاضِرٗاۗ
और तुम्हारा अभिभावक किसी पर अन्याय नहीं करता।
وَلَا يَظۡلِمُ رَبُّكَ أَحَدٗا
और जब हमने अभिकर्ताओं से कहा: “आदम के सामने माथा टेको”, तो उन्होंने माथा टेका,
وَإِذۡ قُلۡنَا لِلۡمَلَٰٓئِكَةِ اِ۟سۡجُدُواْ لِأٓدَمَ فَسَجَدُوٓاْ
सिवा इब्लीस के: वह प्रच्छन्नों में से था, और उसने अपने अभिभावक के आदेश का अतिक्रमण किया।
إِلَّآ إِبۡلِيسَ كَانَ مِنَ اَ۬لۡجِنِّ فَفَسَقَ عَنۡ أَمۡرِ رَبِّهِۦٓۗ
तो क्या तुम उसे और उसकी संतति को मेरे अतिरिक्त हिमायती बनाओगे, जबकि वे तुम्हारे शत्रु हैं?
أَفَتَتَّخِذُونَهُۥ وَذُرِّيَّتَهُۥٓ أَوۡلِيَآءَ مِن دُونِي وَهُمۡ لَكُمۡ عَدُوُّۢۚ
अन्यायियों के लिए कितना निकृष्ट विनिमय है!
بِئۡسَ لِلظَّٰلِمِينَ بَدَلٗا
मैंने उन्हें न आकाशों और धरती की रचना का साक्षी बनाया, न उनकी अपनी रचना का, और मैंने भटकाने वालों को कभी भुजा नहीं बनाया।
۞ مَّآ أَشۡهَدتُّهُمۡ خَلۡقَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِ وَلَا خَلۡقَ أَنفُسِهِمۡ وَمَا كُنتُ مُتَّخِذَ اَ۬لۡمُضِلِّينَ عَضُدٗا
और उस दिन जब वह कहेगा: “मेरे उन साझीदारों को पुकारो जिनका तुम दावा करते थे”, तो वे उन्हें पुकारेंगे, परंतु वे उन्हें उत्तर नहीं देंगे; और हम उनके बीच विनाश का एक स्थान रख देंगे।
وَيَوۡمَ يَقُولُ نَادُواْ شُرَكَآءِيَ اَ۬لَّذِينَ زَعَمۡتُمۡ فَدَعَوۡهُمۡ فَلَمۡ يَسۡتَجِيبُواْ لَهُمۡ وَجَعَلۡنَا بَيۡنَهُم مَّوۡبِقٗا
और बहिष्कृत आग को देखेंगे और अनुमान लगाएँगे कि वे उसमें गिरने वाले हैं, और उससे हटने का कोई उपाय नहीं पाएँगे।
وَرَءَا اَ۬لۡمُجۡرِمُونَ اَ۬لنَّارَ فَظَنُّوٓاْ أَنَّهُم مُّوَاقِعُوهَا وَلَمۡ يَجِدُواْ عَنۡهَا مَصۡرِفٗا
हमने निश्चय ही इस पाठ में लोगों के लिए हर प्रकार के उदाहरणों को विविध किया है;
وَلَقَد صَّرَّفۡنَا فِي هَٰذَا اَ۬لۡقُرۡءَانِ لِلنّ۪اسِ مِن كُلِّ مَثَلٖۚ
परंतु मनुष्य हर चीज़ से अधिक बहस की ओर झुका हुआ है।
وَكَانَ اَ۬لۡإِنسَٰنُ أَكۡثَرَ شَيۡءٖ جَدَلٗا
और लोगों को विश्वास करने से और अपने अभिभावक से क्षमा माँगने से, जब मार्गदर्शन उनके पास आ चुका, कोई चीज़ नहीं रोकती, सिवा इसके कि उन पर पहले वालों की रीति आ पड़े, या उन पर दंड आमने-सामने आ पड़े।
وَمَا مَنَعَ اَ۬لنَّاسَ أَن يُؤۡمِنُوٓاْ إِذ جَّآءَهُمُ اُ۬لۡهُدَىٰ وَيَسۡتَغۡفِرُواْ رَبَّهُمۡ إِلَّآ أَن تَأۡتِيَهُمۡ سُنَّةُ اُ۬لۡأَوَّلِينَ أَوۡ يَأۡتِيَهُمُ اُ۬لۡعَذَابُ قِبَلٗا
हम भेजे गए जनों को केवल शुभ समाचार देने वालों और चेतावनी देने वालों के रूप में भेजते हैं;
وَمَا نُرۡسِلُ اُ۬لۡمُرۡسَلِينَ إِلَّا مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَۚ
और जो नकारते हैं वे असत्य के सहारे बहस करते हैं, ताकि उससे सत्य को खंडित करें,
وَيُجَٰدِلُ اُ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ بِالۡبَٰطِلِ لِيُدۡحِضُواْ بِهِ اِ۬لۡحَقَّۖ
और उन्होंने मेरे संकेतों को, और जिसकी उन्हें चेतावनी दी गई थी, उसे मज़ाक़ का विषय बना लिया।
وَاَتَّخَذُوٓاْ ءَايَٰتِي وَمَآ أُنذِرُواْ هُزُؤٗا
और उससे बढ़कर अन्यायी कौन है जिसे उसके अभिभावक के संकेतों का स्मरण कराया जाए और वह उनसे कतरा जाए, यह भूलकर कि उसके हाथों ने क्या आगे बढ़ाया?
وَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِۦ فَأَعۡرَضَ عَنۡهَا وَنَسِيَ مَا قَدَّمَتۡ يَدَاهُۚ
हमने उनके मर्मों पर आवरण डाल दिए हैं, कि वे उसे न समझें, और उनके कानों में बहरापन;
إِنَّا جَعَلۡنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ أَكِنَّةً أَن يَفۡقَهُوهُ وَفِيٓ ءَاذَانِهِمۡ وَقۡرٗاۖ
और यदि तुम उन्हें मार्गदर्शन की ओर बुलाओ, तो वे कभी मार्गदर्शन नहीं पाएँगे।
وَإِن تَدۡعُهُمۡ إِلَى اَ۬لۡهُدَىٰ فَلَن يَهۡتَدُوٓاْ إِذًا أَبَدٗا
तुम्हारा अभिभावक अत्यंत क्षमाशील है, दया वाला है;
وَرَبُّكَ اَ۬لۡغَفُورُ ذُو اُ۬لرَّحۡمَةِۖ
यदि वह उन्हें उसके कारण पकड़ता जो उन्होंने कमाया, तो वह उनके लिए दंड शीघ्र कर देता;
لَوۡ يُؤَاخِذُهُم بِمَا كَسَبُواْ لَعَجَّلَ لَهُمُ اُ۬لۡعَذَابَۚ
परंतु उनके लिए एक वादे का समय है जिससे बचकर निकलने का कोई स्थान वे उसके अतिरिक्त नहीं पाएँगे।
بَل لَّهُم مَّوۡعِدٞ لَّن يَجِدُواْ مِن دُونِهِۦ مَوۡئِلٗا
और उन बस्तियों को हमने नष्ट कर दिया जब उन्होंने अन्याय किया, और हमने उनके विनाश के लिए एक वादे का समय निर्धारित किया।
وَتِلۡكَ اَ۬لۡقُر۪يٰٓ أَهۡلَكۡنَٰهُمۡ لَمَّا ظَلَمُواْ وَجَعَلۡنَا لِمُهۡلَكِهِم مَّوۡعِدٗا
और जब मूसा ने अपने युवा साथी से कहा: “मैं तब तक चलता रहूँगा जब तक दो समुद्रों के संगम तक न पहुँच जाऊँ, चाहे मुझे लंबी अवधि तक चलना पड़े।”
۞ وَإِذۡ قَالَ مُوسۭيٰ لِفَتَىٰهُ لَآ أَبۡرَحُ حَتَّىٰٓ أَبۡلُغَ مَجۡمَعَ اَ۬لۡبَحۡرَيۡنِ أَوۡ أَمۡضِيَ حُقُبٗا
जब वे दो समुद्रों के संगम तक पहुँचे, तो वे अपनी मछली भूल गए, और उसने समुद्र में अपना मार्ग बना लिया, मानो मरीचिका जो लुप्त हो जाती है।
فَلَمَّا بَلَغَا مَجۡمَعَ بَيۡنِهِمَا نَسِيَا حُوتَهُمَا فَاَتَّخَذَ سَبِيلَهُۥ فِي اِ۬لۡبَحۡرِ سَرَبٗا
जब वे उसे पार कर चुके, तो उसने अपने युवा साथी से कहा: “हमारा भोजन लाओ; हमने निश्चय ही इस यात्रा में बहुत थकान पाई है।”
فَلَمَّا جَاوَزَا قَالَ لِفَتَىٰهُ ءَاتِنَا غَدَآءَنَا لَقَدۡ لَقِينَا مِن سَفَرِنَا هَٰذَا نَصَبٗا
उसने कहा: “क्या तुमने देखा? जब हमने चट्टान के पास शरण ली थी, तो मैं मछली को निश्चय ही भूल गया —
قَالَ أَرَءَيۡتَ إِذۡ أَوَيۡنَآ إِلَى اَ۬لصَّخۡرَةِ فَإِنِّي نَسِيتُ اُ۬لۡحُوتَ
और मुझे उसे भुलाने वाला केवल बहकाने वाला ही था, कि मैंने उसका उल्लेख करने का ध्यान न किया —
وَمَآ أَنسَىٰنِيهِ إِلَّا اَ۬لشَّيۡطَٰنُ أَنۡ أَذۡكُرَهُۥۚ
और उसने समुद्र में अपना मार्ग बना लिया,
وَاَتَّخَذَ سَبِيلَهُۥ فِي اِ۬لۡبَحۡرِ
आश्चर्यजनक ढंग से!”
عَجَبٗا
उसने कहा: “यही तो हम खोज रहे थे।”
قَالَ ذَٰلِكَ مَا كُنَّا نَبۡغِۦۚ
तब वे अपने पदचिह्नों पर, उनका अनुसरण करते हुए, वापस चल पड़े, और उन्होंने हमारे आज्ञाकारियों में से एक आज्ञाकारी को पाया, जिसे हमने अपनी ओर से दया दी थी और जिसे हमने अपनी ओर से ज्ञान सिखाया था।
فَاَرۡتَدَّا عَلَىٰٓ ءَاث۪ارِهِمَا قَصَصٗا فَوَجَدَا عَبۡدٗا مِّنۡ عِبَادِنَآ ءَاتَيۡنَٰهُ رَحۡمَةٗ مِّنۡ عِندِنَا وَعَلَّمۡنَٰهُ مِن لَّدُنَّا عِلۡمٗا
मूसा ने उससे कहा: “क्या मैं तुम्हारे पीछे चल सकता हूँ, इस शर्त पर कि तुम मुझे उसमें से जो तुम्हें सिखाया गया है, सुबुद्धि सिखाओ?”
قَالَ لَهُۥ مُوسۭيٰ هَلۡ أَتَّبِعُكَ عَلَىٰٓ أَن تُعَلِّمَنِۦ مِمَّا عُلِّمۡتَ رَشَدٗا
उसने कहा: “तुम मेरे साथ कभी धैर्य नहीं रख पाओगे।
قَالَ إِنَّكَ لَن تَسۡتَطِيعَ مَعِي صَبۡرٗا
और जिसे तुम अनुभव से घेर नहीं पाते, उस पर तुम धैर्य कैसे रखोगे?”
وَكَيۡفَ تَصۡبِرُ عَلَىٰ مَا لَمۡ تُحِطۡ بِهِۦ خُبۡرٗا
उसने कहा: “यदि ईश्वर की मर्ज़ी हुई तो तुम मुझे धैर्यवान पाओगे,
قَالَ سَتَجِدُنِيٓ إِن شَآءَ اَ۬للَّهُ صَابِرٗا
और मैं किसी बात में तुम्हारी अवज्ञा नहीं करूँगा।”
وَلَآ أَعۡصِي لَكَ أَمۡرٗا
उसने कहा: “यदि तुम मेरे पीछे चलो, तो मुझसे किसी बात के बारे में न पूछना, जब तक मैं स्वयं तुमसे उसका उल्लेख न कर दूँ।”
قَالَ فَإِنِ اِ۪تَّبَعۡتَنِي فَلَا تَسۡـَٔلۡنِي عَن شَيۡءٍ حَتَّىٰٓ أُحۡدِثَ لَكَ مِنۡهُ ذِكۡرٗا
तो वे चल पड़े, यहाँ तक कि जब वे नाव में सवार हुए, तो उसने उसमें छेद कर दिया।
فَاَنطَلَقَا حَتَّىٰٓ إِذَا رَكِبَا فِي اِ۬لسَّفِينَةِ خَرَقَهَاۖ
उसने कहा: “क्या तुमने इसमें छेद इसलिए किया कि इसके सवारों को डुबो दो? तुम निश्चय ही एक बहुत गंभीर बात कर बैठे!”
قَالَ أَخَرَقۡتَهَا لِتُغۡرِقَ أَهۡلَهَا لَقَد جِّئۡتَ شَيۡـًٔا إِمۡرٗا
उसने कहा: “क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम मेरे साथ कभी धैर्य नहीं रख पाओगे?”
قَالَ أَلَمۡ أَقُلۡ إِنَّكَ لَن تَسۡتَطِيعَ مَعِي صَبۡرٗا
उसने कहा: “मैं जो भूल गया उस पर मुझे न पकड़ो, और मेरे मामले में मुझ पर कठिनाई का बोझ न डालो।”
قَالَ لَا تُؤَاخِذۡنِي بِمَا نَسِيتُ وَلَا تُرۡهِقۡنِي مِنۡ أَمۡرِي عُسۡرٗا
तो वे चल पड़े, यहाँ तक कि जब वे एक युवा बालक से मिले, तो उसने उसे मार डाला। उसने कहा: “क्या तुमने एक शुद्ध स्व को मार डाला, बिना इसके कि वह किसी दूसरे स्व के बदले में हो? तुम निश्चय ही एक अनसुनी बात कर बैठे!”
فَاَنطَلَقَا حَتَّىٰٓ إِذَا لَقِيَا غُلَٰمٗا فَقَتَلَهُۥ قَالَ أَقَتَلۡتَ نَفۡسٗا زَٰكِيَةَۢ بِغَيۡرِ نَفۡسٖ لَّقَد جِّئۡتَ شَيۡـٔٗا نُّكۡرٗا
उसने कहा: “क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम मेरे साथ कभी धैर्य नहीं रख पाओगे?”
۞ قَالَ أَلَمۡ أَقُل لَّكَ إِنَّكَ لَن تَسۡتَطِيعَ مَعِي صَبۡرٗا
उसने कहा: “यदि इसके बाद मैं तुमसे किसी बात के बारे में फिर पूछूँ, तो मेरे साथ न रहना; तब तुम्हारे पास मेरी ओर से एक उचित कारण होगा।”
قَالَ إِن سَأَلۡتُكَ عَن شَيۡءِۢ بَعۡدَهَا فَلَا تُصَٰحِبۡنِيۖ قَدۡ بَلَغۡتَ مِن لَّدُنِّي عُذۡرٗا
तो वे चल पड़े, यहाँ तक कि जब वे एक बस्ती वालों के पास पहुँचे, तो उन्होंने उनसे भोजन माँगा; परंतु उन्होंने उन्हें अतिथि बनाने से इनकार कर दिया। वहाँ उन्हें एक दीवार मिली जो गिरना चाहती थी, और उसने उसे सीधा कर दिया।
فَاَنطَلَقَا حَتَّىٰٓ إِذَآ أَتَيَآ أَهۡلَ قَرۡيَةٍ اِ۪سۡتَطۡعَمَآ أَهۡلَهَا فَأَبَوۡاْ أَن يُضَيِّفُوهُمَا فَوَجَدَا فِيهَا جِدَارٗا يُرِيدُ أَن يَنقَضَّ فَأَقَامَهُۥۖ
उसने कहा: “यदि तुम चाहते, तो इसके लिए कोई पुरस्कार ले सकते थे।”
قَالَ لَوۡ شِئۡتَ لَتَخِذتَّ عَلَيۡهِ أَجۡرٗا
उसने कहा: “यह तुम्हारे और मेरे बीच का बिछोह है;
قَالَ هَٰذَا فِرَاقُ بَيۡنِي وَبَيۡنِكَۚ
मैं तुम्हें उसके पूर्वकथन से सूचित करूँगा जिस पर तुम धैर्य के साथ टिके रहने का सामर्थ्य नहीं रख सके।
سَأُنَبِّئُكَ بِتَأۡوِيلِ مَا لَمۡ تَسۡتَطِع عَّلَيۡهِ صَبۡرًا
रही नाव, वह दरिद्रों की थी जो समुद्र में काम करते थे; मैंने उसे दोषपूर्ण करना चाहा, क्योंकि उनके आगे एक राजा था जो हर नाव को बलपूर्वक ले लेता था।
أَمَّا اَ۬لسَّفِينَةُ فَكَانَتۡ لِمَسَٰكِينَ يَعۡمَلُونَ فِي اِ۬لۡبَحۡرِ فَأَرَدتُّ أَنۡ أَعِيبَهَا وَكَانَ وَرَآءَهُم مَّلِكٞ يَأۡخُذُ كُلَّ سَفِينَةٍ غَصۡبٗا
रहा बालक, उसके माता-पिता विश्वास करने वाले थे, और हमें भय हुआ कि वह उन्हें मर्यादाहीनता और नकार से दबोच लेगा,
وَأَمَّا اَ۬لۡغُلَٰمُ فَكَانَ أَبَوَاهُ مُؤۡمِنَيۡنِ فَخَشِينَآ أَن يُرۡهِقَهُمَا طُغۡيَٰنٗا وَكُفۡرٗا
और हमने चाहा कि उनका अभिभावक उन्हें उसके बदले में एक ऐसा दे जो शुद्धता में उससे बेहतर हो और दया में अधिक निकट हो।
فَأَرَدۡنَآ أَن يُبَدِّلَهُمَا رَبُّهُمَا خَيۡرٗا مِّنۡهُ زَكَوٰةٗ وَأَقۡرَبَ رُحۡمٗا
रही दीवार, वह राजधानी के दो अनाथ बालकों की थी, और उसके नीचे उनका एक ख़ज़ाना था;
وَأَمَّا اَ۬لۡجِدَارُ فَكَانَ لِغُلَٰمَيۡنِ يَتِيمَيۡنِ فِي اِ۬لۡمَدِينَةِ وَكَانَ تَحۡتَهُۥ كَنزٞ لَّهُمَا
उनका पिता भला था, और तुम्हारे अभिभावक ने चाहा कि वे अपनी पूर्ण परिपक्वता तक पहुँचें और अपना ख़ज़ाना स्वयं निकालें, तुम्हारे अभिभावक की दया से;
وَكَانَ أَبُوهُمَا صَٰلِحٗا فَأَرَادَ رَبُّكَ أَن يَبۡلُغَآ أَشُدَّهُمَا وَيَسۡتَخۡرِجَا كَنزَهُمَا رَحۡمَةٗ مِّن رَّبِّكَۚ
और मैंने यह अपनी ओर से नहीं किया।
وَمَا فَعَلۡتُهُۥ عَنۡ أَمۡرِيۚ
यही उसका पूर्वकथन है जिस पर तुम धैर्य के साथ टिके न रह सके।”
ذَٰلِكَ تَأۡوِيلُ مَا لَمۡ تَسۡطِع عَّلَيۡهِ صَبۡرٗا
और वे तुमसे दो सहचरों वाले के विषय में पूछते हैं।
وَيَسۡـَٔلُونَكَ عَن ذِي اِ۬لۡقَرۡنَيۡنِۖ
कहो: “मैं तुम्हें उसके विषय में एक स्मरण सुनाऊँगा।”
قُلۡ سَأَتۡلُواْ عَلَيۡكُم مِّنۡهُ ذِكۡرًا
हमने उसे धरती पर स्थापित किया, और हमने उसे हर चीज़ में से एक कड़ी दी; तब उसने एक कड़ी का अनुसरण किया, यहाँ तक कि जब वह सूर्य के अस्त होने के स्थान पर पहुँचा, तो उसने उसे एक कीचड़ भरे सोते में अस्त होते पाया, और उसके पास एक क़ौम को पाया।
إِنَّا مَكَّنَّا لَهُۥ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ وَءَاتَيۡنَٰهُ مِن كُلِّ شَيۡءٖ سَبَبٗاۖ فَاَتَّبَعَ سَبَبًاۖ حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغَ مَغۡرِبَ اَ۬لشَّمۡسِ وَجَدَهَا تَغۡرُبُ فِي عَيۡنٍ حَمِئَةٖ وَوَجَدَ عِندَهَا قَوۡمٗا
हमने कहा: “हे दो सहचरों वाले, या तो तुम उन्हें दंड दो, या उनके साथ सुंदर व्यवहार अपनाओ।”
قُلۡنَا يَٰذَا اَ۬لۡقَرۡنَيۡنِ إِمَّآ أَن تُعَذِّبَ وَإِمَّآ أَن تَتَّخِذَ فِيهِمۡ حُسۡنٗا
उसने कहा: “रहा वह जिसने अन्याय किया, हम उसे दंड देंगे; फिर वह अपने अभिभावक की ओर वापस लाया जाएगा, जो उसे अनसुने दंड से दंडित करेगा।
قَالَ أَمَّا مَن ظَلَمَ فَسَوۡفَ نُعَذِّبُهُۥ ثُمَّ يُرَدُّ إِلَىٰ رَبِّهِۦ فَيُعَذِّبُهُۥ عَذَابٗا نُّكۡرٗا
रहा वह जो विश्वास करता है और भला कर्म करता है, उसके लिए प्रतिफल के रूप में सबसे सुंदर होगा,
۞ وَأَمَّا مَنۡ ءَامَنَ وَعَمِلَ صَٰلِحٗا فَلَهُۥ جَزَآءُ اُ۬لۡحُسۡنۭيٰۖ
और हम उससे अपने मामले में एक सहज कथन कहेंगे।”
وَسَنَقُولُ لَهُۥ مِنۡ أَمۡرِنَا يُسۡرٗا
फिर उसने एक कड़ी का अनुसरण किया, यहाँ तक कि जब वह सूर्य के उदय होने के स्थान पर पहुँचा, तो उसने उसे एक ऐसी क़ौम पर उगते पाया जिसके लिए हमने उसके इस ओर कोई आड़ नहीं बनाई थी। ऐसा ही हुआ।
ثُمَّ اَ۪تَّبَعَ سَبَبًاۖ حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغَ مَطۡلِعَ اَ۬لشَّمۡسِ وَجَدَهَا تَطۡلُعُ عَلَىٰ قَوۡمٖ لَّمۡ نَجۡعَل لَّهُم مِّن دُونِهَا سِتۡرٗا كَذَٰلِكَۖ
और जो कुछ उससे संबंधित था, उसे हम ज्ञान से घेरे हुए थे।
وَقَدۡ أَحَطۡنَا بِمَا لَدَيۡهِ خُبۡرٗا
फिर उसने एक कड़ी का अनुसरण किया, यहाँ तक कि जब वह दो अवरोधों के बीच के स्थान पर पहुँचा, तो उसने उनके इस ओर एक ऐसी क़ौम पाई जो लगभग कोई कथन नहीं समझती थी।
ثُمَّ اَ۪تَّبَعَ سَبَبًاۖ حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغَ بَيۡنَ اَ۬لسَّدَّيۡنِ وَجَدَ مِن دُونِهِمَا قَوۡمٗا لَّا يَكَادُونَ يَفۡقَهُونَ قَوۡلٗا
उन्होंने कहा: “हे दो सहचरों वाले, याजूज और माजूज धरती में बिगाड़ फैलाते हैं; क्या हम तुम्हें शुल्क दें, इस शर्त पर कि तुम हमारे और उनके बीच एक अवरोध खड़ा करो?”
قَالُواْ يَٰذَا اَ۬لۡقَرۡنَيۡنِ إِنَّ يَاجُوجَ وَمَاجُوجَ مُفۡسِدُونَ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ فَهَلۡ نَجۡعَلُ لَكَ خَرۡجًا عَلَىٰٓ أَن تَجۡعَلَ بَيۡنَنَا وَبَيۡنَهُمۡ سَدّٗا
उसने कहा: “जिसमें मेरे अभिभावक ने मुझे स्थापित किया है, वही बेहतर है;
قَالَ مَا مَكَّنِّي فِيهِ رَبِّي خَيۡرٞ
इसलिए बल से मेरी सहायता करो, और मैं तुम्हारे और उनके बीच एक प्राचीर खड़ी कर दूँगा।
فَأَعِينُونِي بِقُوَّةٍ أَجۡعَلۡ بَيۡنَكُمۡ وَبَيۡنَهُمۡ رَدۡمًا
मेरे पास लोहे के खंड लाओ।”
ءَاتُونِي زُبَرَ اَ۬لۡحَدِيدِۖ
फिर जब उसने दोनों पहाड़ी ढलानों के बीच समतल बराबर कर दिया, तो कहा: “फूँको!”
حَتَّىٰٓ إِذَا سَاوَىٰ بَيۡنَ اَ۬لصُّدُفَيۡنِ قَالَ اَ۟نفُخُواْۖ
फिर जब उसने उसे आग बना दिया, तो कहा: “मेरे पास नेफ़्था लाओ, कि मैं उस पर उँडेलूँ।”
حَتَّىٰٓ إِذَا جَعَلَهُۥ نَارٗا قَالَ ءَاتُونِيٓ أُفۡرِغۡ عَلَيۡهِ قِطۡرٗا
वे उसे पलट न सके, और उनमें उसमें सेंध लगाने का सामर्थ्य न था।
فَمَا اَ۪سۡطَٰعُوٓاْ أَن يَظۡهَرُوهُ وَمَا اَ۪سۡتَطَٰعُواْ لَهُۥ نَقۡبٗا
उसने कहा: “यह मेरे अभिभावक की दया है;
قَالَ هَٰذَا رَحۡمَةٞ مِّن رَّبِّيۖ
परंतु जब मेरे अभिभावक का वादा आएगा, तो वह उसे समतल कर देगा — और मेरे अभिभावक का वादा सत्य है।”
فَإِذَا جَآءَ وَعۡدُ رَبِّي جَعَلَهُۥ دَكّٗاۖ وَكَانَ وَعۡدُ رَبِّي حَقّٗا
और हम उस दिन उन्हें एक-दूसरे पर उमड़ने के लिए छोड़ देंगे,
وَتَرَكۡنَا بَعۡضَهُمۡ يَوۡمَئِذٖ يَمُوجُ فِي بَعۡضٖۖ
और नरसिंगा फूँका जाएगा, और हम उन्हें एक ही एकत्रीकरण में एकत्र करेंगे।
وَنُفِخَ فِي اِ۬لصُّورِ فَجَمَعۡنَٰهُمۡ جَمۡعٗا
और हम उस दिन जहन्नम को नकारने वालों के सामने पूरी स्पष्टता से प्रस्तुत करेंगे — उनके सामने जिनकी आँखें मेरे स्मरण से परे परदे में थीं, और जो कुछ सुन नहीं सकते थे।
وَعَرَضۡنَا جَهَنَّمَ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡكٰ۪فِرِينَ عَرۡضًا اِ۬لَّذِينَ كَانَتۡ أَعۡيُنُهُمۡ فِي غِطَآءٍ عَن ذِكۡرِي وَكَانُواْ لَا يَسۡتَطِيعُونَ سَمۡعًا
तो क्या नकारने वालों ने समझा कि वे मेरे आज्ञाकारियों को मेरे अतिरिक्त हिमायती बना लेंगे?
۞ أَفَحَسِبَ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَن يَتَّخِذُواْ عِبَادِي مِن دُونِيَ أَوۡلِيَآءَۚ
हमने निश्चय ही नकारने वालों के आतिथ्य के लिए जहन्नम जुटा रखा है।
ا۪نَّآ أَعۡتَدۡنَا جَهَنَّمَ لِلۡكٰ۪فِرِينَ نُزُلٗا
कहो: “क्या मैं तुम्हें उनके विषय में सूचित करूँ जो कर्मों में सबसे बढ़कर घाटा उठाने वाले हैं — वे जिनका प्रयास निकट जीवन में भटक गया, जबकि वे समझते हैं कि वे भलाई कर रहे हैं?”
قُلۡ هَلۡ نُنَبِّئُكُم بِالۡأَخۡسَرِينَ أَعۡمَٰلًا اِ۬لَّذِينَ ضَلَّ سَعۡيُهُمۡ فِي اِ۬لۡحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنۡيۭا وَهُمۡ يَحۡسِبُونَ أَنَّهُمۡ يُحۡسِنُونَ صُنۡعًا
यही हैं वे जिन्होंने अपने अभिभावक के संकेतों और उससे मिलने को नकारा: उनके कर्म ढह गए, और हम पेशी के दिन उनके लिए कोई तौल नहीं रखेंगे।
أُوْلَٰٓئِكَ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِمۡ وَلِقَآئِهِۦ فَحَبِطَتۡ أَعۡمَٰلُهُمۡ فَلَا نُقِيمُ لَهُمۡ يَوۡمَ اَ۬لۡقِيَٰمَةِ وَزۡنٗا
यही: उनका प्रतिफल जहन्नम होगा, इसलिए कि उन्होंने नकारा और मेरे संकेतों और मेरे संदेशवाहकों को मज़ाक़ का विषय बनाया।
ذَٰلِكَ جَزَآؤُهُمۡ جَهَنَّمُ بِمَا كَفَرُواْ وَاَتَّخَذُوٓاْ ءَايَٰتِي وَرُسُلِي هُزُؤًا
जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, उनके आतिथ्य के लिए निश्चय ही फ़िरदौस के उद्यान होंगे, जहाँ वे सदा रहेंगे, वहाँ से हटाए जाने की खोज किए बिना।
إِنَّ اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ كَانَتۡ لَهُمۡ جَنَّٰتُ اُ۬لۡفِرۡدَوۡسِ نُزُلًا خَٰلِدِينَ فِيهَا لَا يَبۡغُونَ عَنۡهَا حِوَلٗا
कहो: “यदि समुद्र मेरे अभिभावक के बोलों के लिए स्याही होता, तो मेरे अभिभावक के बोलों के समाप्त होने से पहले समुद्र समाप्त हो जाता, चाहे हम सहायता के लिए उतना ही और ले आते।”
قُل لَّوۡ كَانَ اَ۬لۡبَحۡرُ مِدَادٗا لِّكَلِمَٰتِ رَبِّي لَنَفِدَ اَ۬لۡبَحۡرُ قَبۡلَ أَن تَنفَدَ كَلِمَٰتُ رَبِّي وَلَوۡ جِئۡنَا بِمِثۡلِهِۦ مَدَدٗا
कहो: “मैं तुम्हारे जैसा केवल एक मानव हूँ; मुझ पर प्रकट किया जाता है कि तुम्हारा देवता एक ही देवता है।
قُلۡ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٞ مِّثۡلُكُمۡ يُوحَىٰٓ إِلَيَّ أَنَّمَآ إِلَٰهُكُمۡ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۖ
इसलिए जो अपने अभिभावक से मिलने की आशा रखता है, वह भला कर्म करे और अपने अभिभावक की आज्ञा के पालन में किसी को साझी न ठहराए।”
فَمَن كَانَ يَرۡجُواْ لِقَآءَ رَبِّهِۦ فَلۡيَعۡمَلۡ عَمَلٗا صَٰلِحٗا وَلَا يُشۡرِكۡ بِعِبَادَةِ رَبِّهِۦٓ أَحَدَۢا