सामग्री पर जाएँ
القرآنal-quran.fr
मेनू
100%
القرآن
Sura30

Ar-Rum الروم

The Romans ومن آياته

الم

60 पदSection VIThe example · exposition

  1. 29
  2. 30
  3. 31
  4. 32
  5. 33
  6. 34
  7. 35
“Do men think that they will be left”
The section and its links

The trial announced, then lived (29-32, then 33-35)

Read the section from its beginning: sura 29

Read with: the suras of the same shelf mark

  • 2 Guidance for Those Who Guard Themselvesthe threshold: the Scripture, those who receive it, the law
  • 3 The Rope of Godthe twin of 2: the dispute and the combat lived through
  • 29 Without being put to the trialthe trial of those who say “We believe”
  • 31 Gave Luqman wisdomwisdom passed on from a father to his son
  • 32 Fall down in prostrationthe descent, and those who fall down in prostration

What was shown before: The example from which this sura draws the application: Moussa facing Fir'awn, in 26 to 28. 26

30:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। الٓمٓ (Alif Lam Mim)।

بِسۡمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحۡمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ الٓمٓۚ

30:2–4

रोमन विजयी हुए हैं, निकटतम धरती में; परंतु अपनी विजय के बाद वे पराजित होंगे, कुछ ही वर्षों में।

غُلِبَتِ اِ۬لرُّومُ فِيٓ أَدۡنَى اَ۬لۡأَرۡضِ وَهُم مِّنۢ بَعۡدِ غَلَبِهِمۡ سَيَغۡلِبُونَ فِي بِضۡعِ سِنِينَۗ

30:2–4

आदेश ईश्वर का है, पहले भी और बाद में भी।

لِلَّهِ اِ۬لۡأَمۡرُ مِن قَبۡلُ وَمِنۢ بَعۡدُۚ

30:5

और उस दिन विश्वास करने वाले ईश्वर की सहायता से हर्षित होंगे —

وَيَوۡمَئِذٖ يَفۡرَحُ اُ۬لۡمُؤۡمِنُونَ بِنَصۡرِ اِ۬للَّهِۚ

वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसकी सहायता करता है;

يَنصُرُ مَن يَشَآءُۖ

और वह सर्वशक्तिमान, दयालु है।

وَهۡوَ اَ۬لۡعَزِيزُ اُ۬لرَّحِيمُ

ईश्वर का वादा: ईश्वर अपना वादा नहीं तोड़ता,

وَعۡدَ اَ۬للَّهِۖ لَا يُخۡلِفُ اُ۬للَّهُ وَعۡدَهُۥ

परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते।

وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ اَ۬لنّ۪اسِ لَا يَعۡلَمُونَ

30:7

वे निकट जीवन का केवल वही जानते हैं जो खुला है, जबकि अंतिम जीवन से वे लापरवाह हैं।

يَعۡلَمُونَ ظَٰهِرٗا مِّنَ اَ۬لۡحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنۡيۭا وَهُمۡ عَنِ اِ۬لۡأٓخِرَةِ هُمۡ غَٰفِلُونَ

30:8

क्या उन्होंने अपने भीतर सोच-विचार नहीं किया?

أَوَلَمۡ يَتَفَكَّرُواْ فِيٓ أَنفُسِهِمۗ

30:8

ईश्वर ने आकाशों और धरती को, और जो उनके बीच है, केवल सत्य के साथ और नामित अवधि के लिए रचा है;

مَّا خَلَقَ اَ۬للَّهُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَآ إِلَّا بِالۡحَقِّ وَأَجَلٖ مُّسَمّٗىۗ

30:8

और बहुत से लोग अपने अभिभावक से मिलन को अवश्य नकारते हैं।

وَإِنَّ كَثِيرٗا مِّنَ اَ۬لنّ۪اسِ بِلِقَآيِٕ رَبِّهِمۡ لَكَٰفِرُونَ

30:9

क्या उन्होंने धरती में घूमकर नज़र नहीं डाली कि उनसे पहले वालों का परिणाम कैसा रहा? वे बल में उनसे बढ़कर थे, उन्होंने धरती को उभारा था

۞ أَوَلَمۡ يَسِيرُواْ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ فَيَنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ اُ۬لَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۚ كَانُوٓاْ أَشَدَّ مِنۡهُمۡ قُوَّةٗ وَأَثَارُواْ اُ۬لۡأَرۡضَ

30:9

और उसे उनसे अधिक आबाद किया था जितना उन्होंने उसे आबाद किया है; और उनके संदेशवाहक उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए,

وَعَمَرُوهَآ أَكۡثَرَ مِمَّا عَمَرُوهَا وَجَآءَتۡهُمۡ رُسۡلُهُم بِالۡبَيِّنَٰتِۖ

30:9

और ईश्वर उन पर अन्याय करने वाला न था,

فَمَا كَانَ اَ۬للَّهُ لِيَظۡلِمَهُمۡ

30:9

बल्कि वे स्वयं अपने ऊपर अन्याय करते थे।

وَلَٰكِن كَانُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ يَظۡلِمُونَ

30:10

फिर बुरा करने वालों का परिणाम सबसे बुरा हुआ, इसलिए कि उन्होंने ईश्वर के संकेतों को झुठलाया और उनका मज़ाक़ उड़ाया।

ثُمَّ كَانَ عَٰقِبَةُ اُ۬لَّذِينَ أَسَٰٓـُٔواْ اُ۬لسُّوٓأۭيٰٓ أَن كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِ اِ۬للَّهِ وَكَانُواْ بِهَا يَسۡتَهۡزِءُونَ

30:11

ईश्वर रचना का आरंभ करता है, फिर उसे दोहराता है, फिर वे उसी की ओर लौटाए जाएँगे।

اَ۬للَّهُ يَبۡدَؤُاْ اُ۬لۡخَلۡقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥ ثُمَّ إِلَيۡهِ يُرۡجَعُونَ

30:12–13

और जिस दिन वह घड़ी आ खड़ी होगी, बहिष्कृत निराशा में डूब जाएँगे, और उनके साझीदारों में से उनका कोई मध्यस्थ न होगा; और अपने ही साझीदारों को वे नकार देंगे।

وَيَوۡمَ تَقُومُ اُ۬لسَّاعَةُ يُبۡلِسُ اُ۬لۡمُجۡرِمُونَ وَلَمۡ يَكُن لَّهُم مِّن شُرَكَآئِهِمۡ شُفَعَٰٓؤُاْ وَكَانُواْ بِشُرَكَآئِهِمۡ كٰ۪فِرِينَ

30:14

और जिस दिन वह घड़ी आ खड़ी होगी, उस दिन वे अलग हो जाएँगे:

وَيَوۡمَ تَقُومُ اُ۬لسَّاعَةُ يَوۡمَئِذٖ يَتَفَرَّقُونَ

जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, वे एक फूलों भरे उद्यान में हर्ष से भर दिए जाएँगे;

فَأَمَّا اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ فَهُمۡ فِي رَوۡضَةٖ يُحۡبَرُونَ

और जिन्होंने नकारा और हमारे संकेतों और अंतिम जीवन के मिलन को झुठलाया, वे दंड में लाए जाएँगे।

وَأَمَّا اَ۬لَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَلِقَآيِٕ اِ۬لۡأٓخِرَةِ فَأُوْلَٰٓئِكَ فِي اِ۬لۡعَذَابِ مُحۡضَرُونَ

30:17

अतः ईश्वर की महिमा हो जब तुम शाम में प्रवेश करते हो और जब तुम सुबह में प्रवेश करते हो!

فَسُبۡحَٰنَ اَ۬للَّهِ حِينَ تُمۡسُونَ وَحِينَ تُصۡبِحُونَ

30:18

और आकाशों और धरती में प्रशंसा उसी की है, और दिन ढलते समय, और जब तुम दोपहर में प्रवेश करते हो।

وَلَهُ اُ۬لۡحَمۡدُ فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِ وَعَشِيّٗا وَحِينَ تُظۡهِرُونَ

30:19

वह जीवित को मृत से निकालता है, और मृत को जीवित से निकालता है, और धरती को उसकी मृत्यु के बाद पुनः जीवन देता है;

يُخۡرِجُ اُ۬لۡحَيَّ مِنَ اَ۬لۡمَيۡتِ وَيُخۡرِجُ اُ۬لۡمَيۡتَ مِنَ اَ۬لۡحَيِّ وَيُحۡيِ اِ۬لۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَاۚ

30:19

और इसी प्रकार तुम निकाले जाओगे।

وَكَذَٰلِكَ تُخۡرَجُونَ

30:20

और उसके संकेतों में से यह है कि उसने तुम्हें मिट्टी से रचा; फिर देखो, तुम फैलते हुए मानव हो।

وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦٓ أَنۡ خَلَقَكُم مِّن تُرَابٖ ثُمَّ إِذَآ أَنتُم بَشَرٞ تَنتَشِرُونَ

30:21

और उसके संकेतों में से यह है कि उसने तुम्हारे लिए तुम्हीं में से जोड़ीदार रचे, ताकि तुम उनमें चैन पाओ, और उसने तुम्हारे बीच स्नेह और दया रखी;

وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦٓ أَنۡ خَلَقَ لَكُم مِّنۡ أَنفُسِكُمۡ أَزۡوَٰجٗا لِّتَسۡكُنُوٓاْ إِلَيۡهَا وَجَعَلَ بَيۡنَكُم مَّوَدَّةٗ وَرَحۡمَةًۚ

इसमें अवश्य उस क़ौम के लिए संकेत हैं जो सोच-विचार करती है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَتَفَكَّرُونَ

30:22

और उसके संकेतों में से आकाशों और धरती की रचना है, और तुम्हारी भाषाओं और तुम्हारे रंगों की विविधता;

وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦ خَلۡقُ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِ وَاَخۡتِلَٰفُ أَلۡسِنَتِكُمۡ وَأَلۡوَٰنِكُمۡۚ

30:22

इसमें अवश्य जानने वालों के लिए संकेत हैं।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّلۡعَٰلَمِينَ

30:23

और उसके संकेतों में से रात और दिन में तुम्हारी नींद है, और उसके अनुग्रह की तुम्हारी खोज;

۞ وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦ مَنَامُكُم بِالَّيۡلِ وَاَلنَّه۪ارِ وَاَبۡتِغَآؤُكُم مِّن فَضۡلِهِۦٓۚ

इसमें अवश्य उस क़ौम के लिए संकेत हैं जो सुनती है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَسۡمَعُونَ

30:24

और उसके संकेतों में से यह है कि वह तुम्हें बिजली की कौंध दिखाता है, जिससे डरा जाता है और जिसकी आशा की जाती है, और आकाश से पानी उतारता है, जिससे वह धरती को उसकी मृत्यु के बाद पुनः जीवन देता है;

وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦ يُرِيكُمُ اُ۬لۡبَرۡقَ خَوۡفٗا وَطَمَعٗا وَيُنزِلُ مِنَ اَ۬لسَّمَآءِ مَآءٗ فَيُحۡيِۦ بِهِ اِ۬لۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَآۚ

इसमें अवश्य उस क़ौम के लिए संकेत हैं जो बुद्धि से काम लेती है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَعۡقِلُونَ

30:25

और उसके संकेतों में से यह है कि आकाश और धरती उसके आदेश से बने रहते हैं;

وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦٓ أَن تَقُومَ اَ۬لسَّمَآءُ وَاَلۡأَرۡضُ بِأَمۡرِهِۦۚ

फिर जब वह तुम्हें धरती से एक ही बुलावे से बुलाएगा, तब देखो, तुम निकल आओगे।

ثُمَّ إِذَا دَعَاكُمۡ دَعۡوَةٗ مِّنَ اَ۬لۡأَرۡضِ إِذَآ أَنتُمۡ تَخۡرُجُونَ

और जो कोई आकाशों और धरती में है, वह उसी का है;

وَلَهُۥ مَن فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۖ

सब उसके प्रति समर्पित हैं।

كُلّٞ لَّهُۥ قَٰنِتُونَ

30:27

और वही है जो रचना का आरंभ करता है, फिर उसे दोहराता है — यह उसके लिए और भी सरल चीज़ है;

وَهۡوَ اَ۬لَّذِي يَبۡدَؤُاْ اُ۬لۡخَلۡقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥ وَهۡوَ أَهۡوَنُ عَلَيۡهِۚ

और आकाशों और धरती में सबसे ऊँचा उदाहरण उसी का है;

وَلَهُ اُ۬لۡمَثَلُ اُ۬لۡأَعۡلَىٰ فِي اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَاَلۡأَرۡضِۚ

और वह सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।

وَهۡوَ اَ۬لۡعَزِيزُ اُ۬لۡحَكِيمُ

30:28

उसने तुम्हारे लिए तुम्हीं में से एक उदाहरण जोड़ा है: क्या तुम्हारे शपथ से बँधों में से कोई उसमें साझीदार हैं जिसकी जीविका हमने तुम्हें दी है, कि तुम उसमें बराबर हो जाओ, उनसे ऐसे डरते हुए जैसे तुम एक-दूसरे से डरते हो?

ضَرَبَ لَكُم مَّثَلٗا مِّنۡ أَنفُسِكُمۡۖ هَل لَّكُم مِّن مَّا مَلَكَتۡ أَيۡمَٰنُكُم مِّن شُرَكَآءَ فِي مَا رَزَقۡنَٰكُمۡ فَأَنتُمۡ فِيهِ سَوَآءٞ تَخَافُونَهُمۡ كَخِيفَتِكُمۡ أَنفُسَكُمۡۚ

इसी प्रकार हम उस क़ौम के लिए संकेतों का विस्तार से वर्णन करते हैं जो बुद्धि से काम लेती है।

كَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ اُ۬لۡأٓيَٰتِ لِقَوۡمٖ يَعۡقِلُونَ

जिन्होंने अन्याय किया, उन्होंने बल्कि बिना जाने अपनी भावनाओं का अनुसरण किया।

بَلِ اِ۪تَّبَعَ اَ۬لَّذِينَ ظَلَمُوٓاْ أَهۡوَآءَهُم بِغَيۡرِ عِلۡمٖۖ

अब उसे मार्ग कौन दिखाएगा जिसे ईश्वर ने भटकाया है?

فَمَن يَهۡدِي مَنۡ أَضَلَّ اَ۬للَّهُۖ

और उन्हें कोई सहायता न मिलेगी।

وَمَا لَهُم مِّن نَّٰصِرِينَ

30:30–32

इसलिए विधान की ओर अपनी दिशा बनाए रखो, पूरी तरह ईश्वर की ओर मुड़े हुए — वह मूल प्रकृति जो ईश्वर ने लोगों को दी है, वैसी ही जैसी उसने उन्हें मूलतः रचा। ईश्वर की रचना में कोई परिवर्तन नहीं: यही सीधा विधान है, परंतु अधिकतर लोग नहीं जानते — निरंतर उसका आसरा लेते हुए, उसके प्रति सावधान रहो, संपर्क बनाए रखो, और साझी ठहराने वालों में से मत होओ, उनमें से जिन्होंने अपना विधान बाँट दिया और जो गुट बन गए,

فَأَقِمۡ وَجۡهَكَ لِلدِّينِ حَنِيفٗاۚ فِطۡرَتَ اَ۬للَّهِ اِ۬لَّتِي فَطَرَ اَ۬لنَّاسَ عَلَيۡهَاۚ لَا تَبۡدِيلَ لِخَلۡقِ اِ۬للَّهِۚ ذَٰلِكَ اَ۬لدِّينُ اُ۬لۡقَيِّمُ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ اَ۬لنّ۪اسِ لَا يَعۡلَمُونَ ۞ مُنِيبِينَ إِلَيۡهِ وَاَتَّقُوهُ وَأَقِيمُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَلَا تَكُونُواْ مِنَ اَ۬لۡمُشۡرِكِينَ مِنَ اَ۬لَّذِينَ فَرَّقُواْ دِينَهُمۡ وَكَانُواْ شِيَعٗاۖ

30:30–32

हर दल उससे प्रसन्न होता हुआ जो उसके पास है।

كُلُّ حِزۡبِۢ بِمَا لَدَيۡهِمۡ فَرِحُونَ

और जब लोगों को कोई हानि पहुँचती है, तो वे अपने अभिभावक को पुकारते हैं, उसका आसरा लेते हुए;

وَإِذَا مَسَّ اَ۬لنَّاسَ ضُرّٞ دَعَوۡاْ رَبَّهُم مُّنِيبِينَ إِلَيۡهِ

फिर जब वह उन्हें अपनी ओर से दया का स्वाद चखाता है, तो देखो, उनमें से एक भाग अपने अभिभावक के साथ साझी ठहराता है,

ثُمَّ إِذَآ أَذَاقَهُم مِّنۡهُ رَحۡمَةً إِذَا فَرِيقٞ مِّنۡهُم بِرَبِّهِمۡ يُشۡرِكُونَ

30:34

ताकि जो हमने उन्हें दिया उसे नकारें।

لِيَكۡفُرُواْ بِمَآ ءَاتَيۡنَٰهُمۡۚ

तो उपभोग कर लो: शीघ्र ही तुम जान लोगे।

فَتَمَتَّعُواْ فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ

या क्या हमने उन पर कोई अधिकार उतारा है जो उसके पक्ष में बोले जिसे वे उसके साथ साझी ठहराते हैं?

أَمۡ أَنزَلۡنَا عَلَيۡهِمۡ سُلۡطَٰنٗا فَهۡوَ يَتَكَلَّمُ بِمَا كَانُواْ بِهِۦ يُشۡرِكُونَ

30:36

और जब हम लोगों को दया का स्वाद चखाते हैं, तो वे उससे हर्षित होते हैं;

وَإِذَآ أَذَقۡنَا اَ۬لنَّاسَ رَحۡمَةٗ فَرِحُواْ بِهَاۖ

30:36

और यदि उन पर कोई बुराई आ पड़े, उसके कारण जो उनके हाथों ने आगे बढ़ाया, तो देखो, वे हिम्मत हार जाते हैं।

وَإِن تُصِبۡهُمۡ سَيِّئَةُۢ بِمَا قَدَّمَتۡ أَيۡدِيهِمۡ إِذَا هُمۡ يَقۡنِطُونَ

क्या उन्होंने नहीं देखा कि ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए जीविका फैला देता है, और नापकर देता है?

أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّ اَ۬للَّهَ يَبۡسُطُ اُ۬لرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقۡدِرُۚ

इसमें अवश्य उस क़ौम के लिए संकेत हैं जो विश्वास करती है।

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ

30:38

अतः निकटवर्ती को उसका देय दो, और दरिद्र को और राह के मुसाफ़िर को भी;

فَـَٔاتِ ذَا اَ۬لۡقُرۡبۭيٰ حَقَّهُۥ وَاَلۡمِسۡكِينَ وَاَبۡنَ اَ۬لسَّبِيلِۚ

30:38

यह उनके लिए बेहतर है जो ईश्वर की दिशा चाहते हैं,

ذَٰلِكَ خَيۡرٞ لِّلَّذِينَ يُرِيدُونَ وَجۡهَ اَ۬للَّهِۖ

और वही सफल होने वाले हैं।

وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لۡمُفۡلِحُونَ

30:39

और जो तुम बढ़ाने वाले उधार के रूप में देते हो, ताकि वह लोगों की संपत्ति में बढ़े, वह ईश्वर के पास नहीं बढ़ता;

وَمَآ ءَاتَيۡتُم مِّن رِّبٗا لِّيَرۡبُوَاْ فِيٓ أَمۡوَٰلِ اِ۬لنّ۪اسِ فَلَا يَرۡبُواْ عِندَ اَ۬للَّهِۖ

30:39

परंतु जो तुम शुद्ध उदारता के रूप में देते हो, ईश्वर की दिशा चाहते हुए — वही दोगुना करने वाले हैं।

وَمَآ ءَاتَيۡتُم مِّن زَكَوٰةٖ تُرِيدُونَ وَجۡهَ اَ۬للَّهِ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لۡمُضۡعِفُونَ

ईश्वर वही है जिसने तुम्हें रचा, फिर तुम्हें जीविका दी, फिर तुम्हें मृत्यु देता है, फिर तुम्हें पुनः जीवन देता है।

اَ۬للَّهُ اُ۬لَّذِي خَلَقَكُمۡ ثُمَّ رَزَقَكُمۡ ثُمَّ يُمِيتُكُمۡ ثُمَّ يُحۡيِيكُمۡۖ

क्या तुम्हारे साझीदारों में कोई है जो इन सबमें से कुछ भी करे?

هَلۡ مِن شُرَكَآئِكُم مَّن يَفۡعَلُ مِن ذَٰلِكُم مِّن شَيۡءٖۚ

30:40

उसकी महिमा हो, और वह उससे बहुत ऊपर है जिसे तुम उसके साथ साझी ठहराते हो।

سُبۡحَٰنَهُۥ وَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشۡرِكُونَ

30:41

बिगाड़ थल और समुद्र में सामने आ गया है, उसके कारण जो लोगों के हाथों ने कमाया, ताकि वह उन्हें उसका एक भाग चखाए जो उन्होंने किया, शायद वे लौटें।

ظَهَرَ اَ۬لۡفَسَادُ فِي اِ۬لۡبَرِّ وَاَلۡبَحۡرِ بِمَا كَسَبَتۡ أَيۡدِي اِ۬لنّ۪اسِ لِيُذِيقَهُم بَعۡضَ اَ۬لَّذِي عَمِلُواْ لَعَلَّهُمۡ يَرۡجِعُونَ

कहो: “धरती में घूमो, और नज़र डालो कि पहले वालों का परिणाम कैसा रहा।”

قُلۡ سِيرُواْ فِي اِ۬لۡأَرۡضِ فَاَنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ اُ۬لَّذِينَ مِن قَبۡلُۚ

उनमें से अधिकतर साझी ठहराने वाले थे।

كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّشۡرِكِينَ

30:43

अतः सीधे विधान की ओर अपनी दिशा बनाए रखो, इससे पहले कि ईश्वर की ओर से एक ऐसा दिन आए जो रद्द नहीं किया जा सकता:

فَأَقِمۡ وَجۡهَكَ لِلدِّينِ اِ۬لۡقَيِّمِ مِن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَ يَوۡمٞ لَّا مَرَدَّ لَهُۥ مِنَ اَ۬للَّهِۖ

30:43

उस दिन वे दो फाड़ हो जाएँगे।

يَوۡمَئِذٖ يَصَّدَّعُونَ

जो नकारता है, उसका नकार उसी पर आ पड़ता है;

مَن كَفَرَ فَعَلَيۡهِ كُفۡرُهُۥۖ

और जो कोई भला कर्म करता है, वे अपने लिए बिछौना सँवार रहे हैं — ताकि वह अपने अनुग्रह से उन्हें प्रतिफल दे जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए,

وَمَنۡ عَمِلَ صَٰلِحٗا فَلِأَنفُسِهِمۡ يَمۡهَدُونَ لِيَجۡزِيَ اَ۬لَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ مِن فَضۡلِهِۦٓۚ

क्योंकि वह नकारने वालों से प्रेम नहीं करता।

إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ اُ۬لۡكٰ۪فِرِينَ

और उसके संकेतों में से यह है कि वह शुभ समाचार देने वाली हवाएँ भेजता है, ताकि तुम्हें अपनी दया का स्वाद चखाए, ताकि जलयान उसके आदेश से चलें, ताकि तुम उसका अनुग्रह खोजो, और शायद तुम कृतज्ञ हो जाओ।

۞ وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦٓ أَن يُرۡسِلَ اَ۬لرِّيَاحَ مُبَشِّرَٰتٖ وَلِيُذِيقَكُم مِّن رَّحۡمَتِهِۦ وَلِتَجۡرِيَ اَ۬لۡفُلۡكُ بِأَمۡرِهِۦ وَلِتَبۡتَغُواْ مِن فَضۡلِهِۦ وَلَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ

और हमने निश्चय ही तुमसे पहले संदेशवाहकों को उनकी क़ौम की ओर भेजा; वे उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए, और जो बहिष्कृत हुए उनसे हमने प्रतिशोध लिया;

وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا مِن قَبۡلِكَ رُسُلًا إِلَىٰ قَوۡمِهِمۡ فَجَآءُوهُم بِالۡبَيِّنَٰتِ فَاَنتَقَمۡنَا مِنَ اَ۬لَّذِينَ أَجۡرَمُواْۖ

30:47

और विश्वास करने वालों की सहायता करना हम पर एक कर्तव्य था।

وَكَانَ حَقًّا عَلَيۡنَا نَصۡرُ اُ۬لۡمُؤۡمِنِينَ

30:48

ईश्वर वही है जो हवाएँ भेजता है; वे बादलों को उभारती हैं, जिन्हें वह आकाश में जैसी उसकी मर्ज़ी हो, फैलाता है, और उन्हें टुकड़ों में कर देता है; तब तुम देखते हो कि फुहार उनके भीतर से निकल रही है।

اَ۬للَّهُ اُ۬لَّذِي يُرۡسِلُ اُ۬لرِّيَٰحَ فَتُثِيرُ سَحَابٗا فَيَبۡسُطُهُۥ فِي اِ۬لسَّمَآءِ كَيۡفَ يَشَآءُ وَيَجۡعَلُهُۥ كِسَفٗا فَتَرَى اَ۬لۡوَدۡقَ يَخۡرُجُ مِنۡ خِلَٰلِهِۦۖ

फिर जब वह उसे अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उस तक पहुँचा देता है, तो देखो, वे उल्लसित हो उठते हैं,

فَإِذَآ أَصَابَ بِهِۦ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦٓ إِذَا هُمۡ يَسۡتَبۡشِرُونَ

30:49

जबकि इससे पहले, उसके उन पर उतरने से पहले, वे अवश्य निराश थे।

وَإِن كَانُواْ مِن قَبۡلِ أَن يُنزَلَ عَلَيۡهِم مِّن قَبۡلِهِۦ لَمُبۡلِسِينَ

30:50

अतः ईश्वर की दया का अवशेष देखो: कैसे वह धरती को उसकी मृत्यु के बाद पुनः जीवन देता है;

فَاَنظُرۡ إِلَىٰٓ أَثَرِ رَحۡمَتِ اِ۬للَّهِ كَيۡفَ يُحۡيِ اِ۬لۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَآۚ

वही अवश्य मृतकों को पुनः जीवन देने वाला है,

إِنَّ ذَٰلِكَ لَمُحۡيِ اِ۬لۡمَوۡتۭيٰۖ

और वह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

وَهۡوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

और यदि हम कोई हवा भेजते, और वे उसे पीला पड़ता देखते, तो उसके बाद भी वे नकारने में लगे रहते।

وَلَئِنۡ أَرۡسَلۡنَا رِيحٗا فَرَأَوۡهُ مُصۡفَرّٗا لَّظَلُّواْ مِنۢ بَعۡدِهِۦ يَكۡفُرُونَ

30:52

तो तुम मृतकों को नहीं सुनवाते, और बहरों को बुलावा नहीं सुनवाते, जब वे पीठ फेरकर चले जाते हैं।

فَإِنَّكَ لَا تُسۡمِعُ اُ۬لۡمَوۡتۭيٰ وَلَا تُسۡمِعُ اُ۬لصُّمَّ اَ۬لدُّعَآءَ ا۪ذَا وَلَّوۡاْ مُدۡبِرِينَ

और तुम अंधों को उनके भटकाव से निकालकर मार्ग दिखाने वाले नहीं हो;

وَمَآ أَنتَ بِهَٰدِ اِ۬لۡعُمۡيِ عَن ضَلَٰلَتِهِمۡۖ

तुम केवल उसे सुनवाते हो जो हमारे संकेतों पर विश्वास करता है, और वही ईश्वर के प्रति खरे हैं।

إِن تُسۡمِعُ إِلَّا مَن يُؤۡمِنُ بِـَٔايَٰتِنَا فَهُم مُّسۡلِمُونَ

30:54

ईश्वर वही है जिसने तुम्हें एक कमज़ोरी से रचा, फिर कमज़ोरी के बाद बल रखा, फिर बल के बाद कमज़ोरी और सफ़ेद बाल रखे;

۞ اَ۬للَّهُ اُ۬لَّذِي خَلَقَكُم مِّن ضُعۡفٖ ثُمَّ جَعَلَ مِنۢ بَعۡدِ ضُعۡفٖ قُوَّةٗ ثُمَّ جَعَلَ مِنۢ بَعۡدِ قُوَّةٖ ضُعۡفٗا وَشَيۡبَةٗۚ

वह रचता है जो उसकी मर्ज़ी हो,

يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۖ

और वह सर्वज्ञ, सामर्थ्यवान है।

وَهۡوَ اَ۬لۡعَلِيمُ اُ۬لۡقَدِيرُ

30:55

और जिस दिन वह घड़ी आ खड़ी होगी, बहिष्कृत शपथ खाएँगे कि उन्होंने एक घड़ी भर ही बिताई;

وَيَوۡمَ تَقُومُ اُ۬لسَّاعَةُ يُقۡسِمُ اُ۬لۡمُجۡرِمُونَ مَا لَبِثُواْ غَيۡرَ سَاعَةٖۚ

इसी प्रकार वे उलटे फेरे जाते थे।

كَذَٰلِكَ كَانُواْ يُؤۡفَكُونَ

30:56

और जिन्हें ज्ञान और विश्वास दिया गया, वे कहेंगे: “निश्चय ही तुमने ईश्वर की संहिता में उठाए जाने के दिन तक अपना समय बिताया;

وَقَالَ اَ۬لَّذِينَ أُوتُواْ اُ۬لۡعِلۡمَ وَاَلۡإِيمَٰنَ لَقَدۡ لَبِثتُّمۡ فِي كِتَٰبِ اِ۬للَّهِ إِلَىٰ يَوۡمِ اِ۬لۡبَعۡثِۖ

30:56

तो यह रहा उठाए जाने का दिन — परंतु तुम नहीं जानते थे।”

فَهَٰذَا يَوۡمُ اُ۬لۡبَعۡثِ وَلَٰكِنَّكُمۡ كُنتُمۡ لَا تَعۡلَمُونَ

30:57

उस दिन अन्यायियों की सफ़ाई उन्हें कोई लाभ न देगी, और उनसे अब खेद प्रकट करने को नहीं कहा जाएगा।

فَيَوۡمَئِذٖ لَّا تَنفَعُ اُ۬لَّذِينَ ظَلَمُواْ مَعۡذِرَتُهُمۡ وَلَا هُمۡ يُسۡتَعۡتَبُونَ

30:58

और हमने निश्चय ही इस पाठ में लोगों के लिए हर प्रकार के उदाहरण कई गुना किए हैं;

وَلَقَد ضَّرَبۡنَا لِلنّ۪اسِ فِي هَٰذَا اَ۬لۡقُرۡءَانِ مِن كُلِّ مَثَلٖۚ

और यदि तुम उनके पास कोई संकेत लाओ, तो नकारने वाले अवश्य कहेंगे: “तुम तो केवल मिथ्या गढ़ने वाले हो।”

وَلَئِن جِئۡتَهُم بِـَٔايَةٖ لَّيَقُولَنَّ اَ۬لَّذِينَ كَفَرُوٓاْ إِنۡ أَنتُمۡ إِلَّا مُبۡطِلُونَ

इसी प्रकार ईश्वर उनके मर्मों पर मुहर लगाता है जो नहीं जानते।

كَذَٰلِكَ يَطۡبَعُ اُ۬للَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ اِ۬لَّذِينَ لَا يَعۡلَمُونَ

30:60

अतः धैर्य रखो,

فَاَصۡبِرۡ

30:60

क्योंकि ईश्वर का वादा सत्य है;

إِنَّ وَعۡدَ اَ۬للَّهِ حَقّٞۖ

30:60

और जिन्हें यक़ीन नहीं, वे तुम्हें हल्का न बना दें।

وَلَا يَسۡتَخِفَّنَّكَ اَ۬لَّذِينَ لَا يُوقِنُونَ

← अध्यायों की अनुक्रमणिका