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القرآن

الرعد

Ar-Ra'd

What Is in Themselves

Sura13
الرالمر
पद43

Section IIIThe example · exposition

The signs of the Scripture and the accounts that confirm it

  1. 10
  2. 11
  3. 12
  4. 13
  5. 14
  6. 15
  7. 16
  8. 17
  9. 18

Read the section from its beginning: sura 10

13:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। अलिफ़. लाम. मीम. रा.

بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ أَلَٓمِّٓرَۖ

13:1

ये ग्रंथ के संकेत हैं।

تِلْكَ ءَايَٰتُ اُ۬لْكِتَٰبِۖ

और जो तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम पर उतारा गया है, वह सत्य है,

وَالذِے أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ اَ۬لْحَقُّۖ

परंतु अधिकतर लोग विश्वास नहीं करते।

وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ اَ۬لنَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَۖ

13:2

ईश्वर वही है जिसने आकाशों को बिना स्तंभों के ऊँचा किया

اَ۬للَّهُ اُ۬لذِے رَفَعَ اَ۬لسَّمَٰوَٰتِ بِغَيْرِ عَمَدٖۖ

13:2

जिन्हें तुम देख सको;

تَرَوْنَهَاۖ

13:2

फिर वह भवन पर स्थिर हुआ;

ثُمَّ اَ۪سْتَوَىٰ عَلَى اَ۬لْعَرْشِۖ

और उसने सूर्य और चंद्रमा को वश में किया,

وَسَخَّرَ اَ۬لشَّمْسَ وَالْقَمَرَۖ

प्रत्येक एक नामित अवधि की ओर दौड़ता हुआ।

كُلّٞ يَجْرِے لِأَجَلٖ مُّسَمّىٗۖ

वह आदेश का संचालन करता है,

يُدَبِّرُ اُ۬لْأَمْرَۖ

वह संकेतों का विस्तार से वर्णन करता है, शायद तुम्हें अपने अभिभावक से मिलने का यक़ीन हो।

يُفَصِّلُ اُ۬لْأٓيَٰتِ لَعَلَّكُم بِلِقَآءِ رَبِّكُمْ تُوقِنُونَۖ

13:3

और वही है जिसने धरती को फैलाया, और उसमें दृढ़ खूँटे और नदियाँ रखीं;

وَهْوَ اَ۬لذِے مَدَّ اَ۬لْأَرْضَ وَجَعَلَ فِيهَا رَوَٰسِيَ وَأَنْهَٰراٗۖ

13:3

और सभी फलों में से उसने उसमें एक जोड़े के दो तत्त्व रखे,

وَمِن كُلِّ اِ۬لثَّمَرَٰتِ جَعَلَ فِيهَا زَوْجَيْنِ اِ۪ثْنَيْنِۖ

13:3

वह दिन को रात से ढक देता है।

يُغْشِے اِ۬ليْلَ اَ۬لنَّهَارَۖ

अवश्य इसमें सोच-विचार करने वाली क़ौम के लिए संकेत हैं।

إِنَّ فِے ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوْمٖ يَتَفَكَّرُونَۖ

13:4

और धरती में पास-पास के भूखंड हैं, अंगूरों के उद्यान, खेतियाँ, एक जड़ वाले या अलग-अलग खजूर, एक ही पानी से सींचे हुए,

وَفِے اِ۬لْأَرْضِ قِطَعٞ مُّتَجَٰوِرَٰتٞ وَجَنَّٰتٞ مِّنْ أَعْنَٰبٖ وَزَرْعٖ وَنَخِيلٖ صِنْوَانٖ وَغَيْرِ صِنْوَانٖ تُسْقَىٰ بِمَآءٖ وَٰحِدٖۖ

13:4

और हम उनमें से कुछ को दूसरों पर भोजन में वरीयता देते हैं।

وَنُفَضِّلُ بَعْضَهَا عَلَىٰ بَعْضٖ فِے اِ۬لْأُكْلِۖ

13:4

अवश्य इसमें बुद्धि से काम लेने वाली क़ौम के लिए संकेत हैं।

إِنَّ فِے ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوْمٖ يَعْقِلُونَۖ

13:5

और यदि तुम चकित होते हो, तो उनका कथन चकित करने वाला है: “जब हम मिट्टी हो जाएँगे, तो क्या हम सचमुच एक नई रचना में होंगे?”

۞ وَإِن تَعْجَبْ فَعَجَبٞ قَوْلُهُمْ أَٰ۟ذَا كُنَّا تُرَٰباً إِنَّا لَفِے خَلْقٖ جَدِيدٍۖ

13:5

यही वे हैं जो अपने अभिभावक को नकारते हैं,

أُوْلَٰٓئِكَ اَ۬لذِينَ كَفَرُواْ بِرَبِّهِمْۖ

13:5

यही वे हैं जिनकी गर्दनों में तौक़ होंगे,

وَأُوْلَٰٓئِكَ اَ۬لْأَغْلَٰلُ فِے أَعْنَٰقِهِمْۖ

13:5

यही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।

وَأُوْلَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ اُ۬لنَّارِ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَۖ

13:6

और वे तुमसे भलाई से पहले बुराई को शीघ्र लाने को कहते हैं, जबकि उनसे पहले उदाहरणीय घटनाक्रम बीत चुके हैं।

وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالسَّيِّئَةِ قَبْلَ اَ۬لْحَسَنَةِ وَقَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِمُ اُ۬لْمَثُلَٰتُۖ

और तुम्हारा अभिभावक अवश्य लोगों के लिए, उनके अन्याय के बावजूद, क्षमा रखने वाला है;

وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغْفِرَةٖ لِّلنَّاسِ عَلَىٰ ظُلْمِهِمْۖ

और तुम्हारा अभिभावक अवश्य सज़ा देने में कठोर है।

وَإِنَّ رَبَّكَ لَشَدِيدُ اُ۬لْعِقَابِۖ

13:7

और जो नकारते हैं वे कहते हैं: “उस पर उसके अभिभावक की ओर से कोई संकेत क्यों नहीं उतारा गया!”

وَيَقُولُ اُ۬لذِينَ كَفَرُواْ لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ ءَايَةٞ مِّن رَّبِّهِۦۖ

13:7

तुम तो बस एक चेतावनी देने वाले हो,

إِنَّمَا أَنتَ مُنذِرٞۖ

13:7

और हर क़ौम के लिए एक मार्गदर्शक है।

وَلِكُلِّ قَوْمٍ هَادٍۖ

13:8

ईश्वर जानता है कि हर मादा क्या वहन करती है, और गर्भाशय क्या घटाते हैं और क्या बढ़ाते हैं;

اِ۬للَّهُ يَعْلَمُ مَا تَحْمِلُ كُلُّ أُنثَىٰ وَمَا تَغِيضُ اُ۬لْأَرْحَامُ وَمَا تَزْدَادُۖ

13:8

और हर चीज़ उसके यहाँ एक माप के अनुसार है।

وَكُلُّ شَےْءٍ عِندَهُۥ بِمِقْدَارٍۖ

13:9

वह, जो उसे जानता है जो इंद्रियों से परे है और जो साक्ष्य में है,

عَٰلِمُ اُ۬لْغَيْبِ وَالشَّهَٰدَةِۖ

13:9

महान, परम-उच्च।

اِ۬لْكَبِيرُ اُ۬لْمُتَعَالِۖ

13:10

तुममें बराबर है कि कोई अपना कथन छिपाए या उसे ऊँचे स्वर में कहे, और रात में छिपा हो या दिन में खुलकर चलता हो।

سَوَآءٞ مِّنكُم مَّنْ أَسَرَّ اَ۬لْقَوْلَ وَمَن جَهَرَ بِهِۦ وَمَنْ هُوَ مُسْتَخْفِۢ بِاليْلِ وَسَارِبُۢ بِالنَّهَارِۖ

13:11

प्रत्येक के आगे और पीछे बारी-बारी से आने वाले पहरेदार हैं, जो ईश्वर के आदेश से उसकी रक्षा करते हैं।

لَهُۥ مُعَقِّبَٰتٞ مِّنۢ بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِۦ يَحْفَظُونَهُۥ مِنْ أَمْرِ اِ۬للَّهِۖ

13:11

ईश्वर किसी क़ौम की दशा को निश्चय ही नहीं बदलता, जब तक वे स्वयं अपनी दशा न बदलें;

إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُواْ مَا بِأَنفُسِهِمْۖ

13:11

और जब ईश्वर किसी क़ौम के लिए बुराई चाहता है, तो उसे कोई रद्द करने वाला नहीं,

وَإِذَا أَرَادَ اَ۬للَّهُ بِقَوْمٖ سُوٓءاٗ فَلَا مَرَدَّ لَهُۥۖ

13:11

और उनके लिए उसके अतिरिक्त कोई आश्रयदाता नहीं।

وَمَا لَهُم مِّن دُونِهِۦ مِنْ وَّالٍۖ

13:12–13

वही तुम्हें बिजली दिखाता है, डर और आशा का कारण, और भारी बादलों को उत्पन्न करता है; और गर्जन उसकी प्रशंसा करते हुए उसकी महिमा गाता है, और अभिकर्ता भी, उसके डर से;

هُوَ اَ۬لذِے يُرِيكُمُ اُ۬لْبَرْقَ خَوْفاٗ وَطَمَعاٗ وَيُنشِۓُ اُ۬لسَّحَابَ اَ۬لثِّقَالَ وَيُسَبِّحُ اُ۬لرَّعْدُ بِحَمْدِهِۦ وَالْمَلَٰٓئِكَةُ مِنْ خِيفَتِهِۦۖ

13:12–13

और वह वज्र भेजता है, और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उस पर उसे गिराता है, जबकि वे ईश्वर के विषय में बहस करते हैं; और वह प्रचंड ज़ोर वाला है।

وَيُرْسِلُ اُ۬لصَّوَٰعِقَ فَيُصِيبُ بِهَا مَنْ يَّشَآءُ وَهُمْ يُجَٰدِلُونَ فِے اِ۬للَّهِ وَهْوَ شَدِيدُ اُ۬لْمِحَالِۖ

13:14

सत्य की पुकार उसी की है;

۞ لَهُۥ دَعْوَةُ اُ۬لْحَقِّۖ

13:14

और जिन्हें वे उसके अतिरिक्त पुकारते हैं, वे उन्हें किसी बात का उत्तर नहीं देते, सिवा उसके समान जो अपनी हथेलियाँ पानी की ओर फैलाता है कि वह उसके मुँह तक पहुँचे, जबकि वह कभी उस तक नहीं पहुँचता।

وَالذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَسْتَجِيبُونَ لَهُم بِشَےْءٍ إِلَّا كَبَٰسِطِ كَفَّيْهِ إِلَى اَ۬لْمَآءِ لِيَبْلُغَ فَاهُ وَمَا هُوَ بِبَٰلِغِهِۦۖ

13:14

नकारने वालों की पुकार भटकाव में ही है।

وَمَا دُعَآءُ اُ۬لْكَٰفِرِينَ إِلَّا فِے ضَلَٰلٖۖ

13:15

और ईश्वर के सामने ही माथा टेकता है वह जो आकाशों और धरती में है, स्वेच्छा से या विवश होकर, और उनकी परछाइयाँ भी, सुबह और शाम।

وَلِلهِ يَسْجُدُ مَن فِے اِ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالْأَرْضِ طَوْعاٗ وَكَرْهاٗ وَظِلَٰلُهُم بِالْغُدُوِّ وَالْأٓصَالِۖ۩

कहो: “आकाशों और धरती का अभिभावक कौन है?” कहो: “ईश्वर।”

قُلْ مَن رَّبُّ اُ۬لسَّمَٰوَٰتِ وَالْأَرْضِ قُلِ اِ۬للَّهُۖ

कहो: “क्या तुमने उसके अतिरिक्त ऐसे हिमायती बना लिए हैं जो अपने लिए न लाभ के मालिक हैं न हानि के?”

قُلْ أَفَاتَّخَذتُّم مِّن دُونِهِۦ أَوْلِيَآءَ لَا يَمْلِكُونَ لِأَنفُسِهِمْ نَفْعاٗ وَلَا ضَرّاٗۖ

कहो: “क्या अंधा और दृष्टिवान बराबर हैं?

قُلْ هَلْ يَسْتَوِے اِ۬لْأَعْمَىٰ وَالْبَصِيرُۖ

13:16

या क्या अँधेरे और प्रकाश बराबर हैं?”

أَمْ هَلْ تَسْتَوِے اِ۬لظُّلُمَٰتُ وَالنُّورُۖ

या उन्होंने ईश्वर के लिए ऐसे साझीदार ठहराए हैं जिन्होंने उसकी रचना की तरह रचा हो, यहाँ तक कि रचना उनकी दृष्टि में समरूपता वाली लगने लगे?

أَمْ جَعَلُواْ لِلهِ شُرَكَآءَ خَلَقُواْ كَخَلْقِهِۦ فَتَشَٰبَهَ اَ۬لْخَلْقُ عَلَيْهِمْۖ

कहो: “ईश्वर हर चीज़ का रचयिता है,

قُلِ اِ۬للَّهُ خَٰلِقُ كُلِّ شَےْءٖۖ

और वही एक, सर्वोपरि है।”

وَهْوَ اَ۬لْوَٰحِدُ اُ۬لْقَهَّٰرُۖ

13:17

उसने आकाश से पानी उतारा, और घाटियाँ अपनी माप के अनुसार बह निकलीं, और बहाव एक उफनता झाग बहा लाया;

أَنزَلَ مِنَ اَ۬لسَّمَآءِ مَآءٗ فَسَالَتْ أَوْدِيَةُۢ بِقَدَرِهَا فَاحْتَمَلَ اَ۬لسَّيْلُ زَبَداٗ رَّابِياٗۖ

13:17

और जिसे आभूषण या उपयोग की खोज में आग पर गरम किया जाता है, उसमें भी वैसा ही झाग है।

وَمِمَّا تُوقِدُونَ عَلَيْهِ فِے اِ۬لنَّارِ اِ۪بْتِغَآءَ حِلْيَةٍ أَوْ مَتَٰعٖ زَبَدٞ مِّثْلُهُۥۖ

13:17

इसी प्रकार ईश्वर सत्य और असत्य को कई गुना करता है:

كَذَٰلِكَ يَضْرِبُ اُ۬للَّهُ اُ۬لْحَقَّ وَالْبَٰطِلَۖ

झाग कचरा बनकर चला जाता है,

فَأَمَّا اَ۬لزَّبَدُ فَيَذْهَبُ جُفَآءٗۖ

जबकि जो लोगों के लिए लाभकारी है वह धरती पर बना रहता है।

وَأَمَّا مَا يَنفَعُ اُ۬لنَّاسَ فَيَمْكُثُ فِے اِ۬لْأَرْضِۖ

13:17

इसी प्रकार ईश्वर उदाहरणों को कई गुना करता है।

كَذَٰلِكَ يَضْرِبُ اُ۬للَّهُ اُ۬لْأَمْثَالَۖ

जो अपने अभिभावक को उत्तर देते हैं, उनके लिए सबसे सुंदर है;

لِلذِينَ اَ۪سْتَجَابُواْ لِرَبِّهِمُ اُ۬لْحُسْنَىٰۖ

और जो उसे उत्तर नहीं देते, यदि उनके पास वह सब होता जो धरती पर है, और उसके साथ उतना ही और, तो वे उसे फिरौती में दे देते।

وَالذِينَ لَمْ يَسْتَجِيبُواْ لَهُۥ لَوْ أَنَّ لَهُم مَّا فِے اِ۬لْأَرْضِ جَمِيعاٗ وَمِثْلَهُۥ مَعَهُۥ لَافْتَدَوْاْ بِهِۦۖ

यही वे हैं जिनके लिए बुरा हिसाब होगा,

أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمْ سُوٓءُ اُ۬لْحِسَابِۖ

और उनकी शरण जहन्नम होगी:

وَمَأْوَيٰهُمْ جَهَنَّمُۖ

कितना भयानक बिछौना!

وَبِئْسَ اَ۬لْمِهَادُۖ

13:19

क्या वह जो जानता है कि जो तुम्हारे अभिभावक की ओर से तुम पर उतारा गया है वह सत्य है, उस जैसा हो सकता है जो अंधा है?

۞ أَفَمَنْ يَّعْلَمُ أَنَّمَا أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ اَ۬لْحَقُّ كَمَنْ هُوَ أَعْمَىٰۖ

13:20–22

केवल मेधा रखने वाले स्मरण करते हैं, जो ईश्वर की संधि को निभाते हैं और गंभीर प्रतिज्ञा को नहीं तोड़ते, जो उसे जोड़ते हैं जिसे जोड़ने का ईश्वर ने आदेश दिया है, अपने अभिभावक का भय रखते हैं और बुरे हिसाब से डरते हैं, जिन्होंने अपने अभिभावक की दिशा की खोज में धैर्य रखा, संपर्क बनाए रखा, उसमें से ख़र्च किया जो हमने उन्हें जीविका में दिया, छिपकर और खुलकर, और बुराई को भलाई से टालते हैं।

إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُوْلُواْ اُ۬لْأَلْبَٰبِ اِ۬لذِينَ يُوفُونَ بِعَهْدِ اِ۬للَّهِ وَلَا يَنقُضُونَ اَ۬لْمِيثَٰقَ وَالذِينَ يَصِلُونَ مَا أَمَرَ اَ۬للَّهُ بِهِۦ أَنْ يُّوصَلَ وَيَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ وَيَخَافُونَ سُوٓءَ اَ۬لْحِسَابِ وَالذِينَ صَبَرُواْ اُ۪بْتِغَآءَ وَجْهِ رَبِّهِمْ وَأَقَامُواْ اُ۬لصَّلَوٰةَ وَأَنفَقُواْ مِمَّا رَزَقْنَٰهُمْ سِرّاٗ وَعَلَٰنِيَةٗ وَيَدْرَءُونَ بِالْحَسَنَةِ اِ۬لسَّيِّئَةَۖ

13:20–22

यही वे हैं जिनके लिए ठिकाने का परिणाम है:

أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمْ عُقْبَى اَ۬لدَّارِۖ

13:23

स्थायित्व के उद्यान, जिनमें वे प्रवेश करेंगे, और उनके पिताओं, उनके जोड़ीदारों और उनकी संततियों में से जो भले थे वे भी,

جَنَّٰتُ عَدْنٖ يَدْخُلُونَهَا وَمَن صَلَحَ مِنْ ءَابَآئِهِمْ وَأَزْوَٰجِهِمْ وَذُرِّيَّٰتِهِمْۖ

13:23

और अभिकर्ता हर द्वार से उनके यहाँ प्रवेश करेंगे:

وَالْمَلَٰٓئِكَةُ يَدْخُلُونَ عَلَيْهِم مِّن كُلِّ بَابٖۖ

13:24

“तुम पर शांति हो, इसलिए कि तुमने धैर्य रखा!”

سَلَٰمٌ عَلَيْكُم بِمَا صَبَرْتُمْۖ

13:24

कितना उत्तम है ठिकाने का परिणाम!

فَنِعْمَ عُقْبَى اَ۬لدَّارِۖ

13:25

और जो ईश्वर की संधि को, उसे बाँधने वाली गंभीर प्रतिज्ञा के बाद, तोड़ते हैं, जिसे जोड़ने का ईश्वर ने आदेश दिया है उसे काटते हैं, और धरती पर बिगाड़ फैलाते हैं — यही वे हैं जिनके लिए धिक्कार है, और जिनके लिए बुरा ठिकाना है।

وَالذِينَ يَنقُضُونَ عَهْدَ اَ۬للَّهِ مِنۢ بَعْدِ مِيثَٰقِهِۦ وَيَقْطَعُونَ مَا أَمَرَ اَ۬للَّهُ بِهِۦ أَنْ يُّوصَلَ وَيُفْسِدُونَ فِے اِ۬لْأَرْضِ أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمُ اُ۬للَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوٓءُ اُ۬لدَّارِۖ

ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए जीविका फैला देता है, और नपी-तुली भी कर देता है:

اِ۬للَّهُ يَبْسُطُ اُ۬لرِّزْقَ لِمَنْ يَّشَآءُ وَيَقْدِرُۖ

और वे निकट जीवन पर प्रसन्न होते हैं,

وَفَرِحُواْ بِالْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْيَاۖ

जबकि निकट जीवन, अंतिम जीवन की तुलना में, बस एक उपभोग है।

وَمَا اَ۬لْحَيَوٰةُ اُ۬لدُّنْيَا فِے اِ۬لْأٓخِرَةِ إِلَّا مَتَٰعٞۖ

13:27

और जो नकारते हैं वे कहते हैं: “उस पर उसके अभिभावक की ओर से कोई संकेत क्यों नहीं उतारा गया!”

وَيَقُولُ اُ۬لذِينَ كَفَرُواْ لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ ءَايَةٞ مِّن رَّبِّهِۦۖ

13:27

कहो: “ईश्वर निश्चय ही जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे भटकाता है, और अपनी ओर उसे मार्ग दिखाता है जो उसका आसरा लेता है,

قُلْ إِنَّ اَ۬للَّهَ يُضِلُّ مَنْ يَّشَآءُ وَيَهْدِے إِلَيْهِ مَنْ أَنَابَۖ

13:28

जो विश्वास करते हैं और जिनके मर्म ईश्वर के स्मरण से चैन पाते हैं।

اَ۬لذِينَ ءَامَنُواْ وَتَطْمَئِنُّ قُلُوبُهُم بِذِكْرِ اِ۬للَّهِۖ

13:28

क्या ईश्वर के स्मरण से ही मर्म चैन नहीं पाते?”

أَلَا بِذِكْرِ اِ۬للَّهِ تَطْمَئِنُّ اُ۬لْقُلُوبُۖ

जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए — उनके लिए कैसा सुख, और पुनरागमन का कैसा सुंदर स्थान!

اُ۬لذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ اُ۬لصَّٰلِحَٰتِ طُوبَىٰ لَهُمْ وَحُسْنُ مَـَٔابٖۖ

इसी प्रकार हमने तुम्हें एक ऐसे समुदाय में भेजा जिससे पहले और समुदाय बीत चुके हैं, ताकि तुम उन्हें वह सुनाओ जो हमने तुम पर प्रकट किया है, जबकि वे सर्वदयालु को नकारते हैं।

۞ كَذَٰلِكَ أَرْسَلْنَٰكَ فِے أُمَّةٖ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهَا أُمَمٞ لِّتَتْلُوَاْ عَلَيْهِمُ اُ۬لذِے أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ وَهُمْ يَكْفُرُونَ بِالرَّحْمَٰنِۖ

कहो: “वह मेरा अभिभावक है;

قُلْ هُوَ رَبِّےۖ

उसके सिवा कोई देवता नहीं;

لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ

मैं उसी को मुख़्तार बनाता हूँ, और उसी की ओर मेरा पश्चात्ताप है।”

عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُۖ وَإِلَيْهِ مَتَابِۖ

13:31

और यदि कोई ऐसा पाठ होता जिससे पहाड़ हिला दिए जाते, या धरती चीर दी जाती, या जिससे मृतकों से बात की जाती…

وَلَوْ أَنَّ قُرْءَاناٗ سُيِّرَتْ بِهِ اِ۬لْجِبَالُ أَوْ قُطِّعَتْ بِهِ اِ۬لْأَرْضُ أَوْ كُلِّمَ بِهِ اِ۬لْمَوْتَىٰۖ

13:31

परंतु आदेश तो पूरा ईश्वर का है:

بَل لِّلهِ اِ۬لْأَمْرُ جَمِيعاًۖ

13:31

तो क्या विश्वास करने वालों ने ध्यान नहीं दिया कि यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह सभी लोगों को मार्ग दिखा देता?

أَفَلَمْ يَاْيْـَٔسِ اِ۬لذِينَ ءَامَنُواْ أَن لَّوْ يَشَآءُ اُ۬للَّهُ لَهَدَى اَ۬لنَّاسَ جَمِيعاٗۖ

13:31

और जो नकारते हैं, उन पर उनके किए के कारण एक आकस्मिक कड़क आती ही रहेगी, या वह उनके ठिकाने के निकट गिरेगी, यहाँ तक कि ईश्वर का वादा आ जाए,

وَلَا يَزَالُ اُ۬لذِينَ كَفَرُواْ تُصِيبُهُم بِمَا صَنَعُواْ قَارِعَةٌ أَوْ تَحُلُّ قَرِيباٗ مِّن دَارِهِمْ حَتَّىٰ يَأْتِيَ وَعْدُ اُ۬للَّهِۖ

क्योंकि ईश्वर अपना वादा नहीं तोड़ता।

إِنَّ اَ۬للَّهَ لَا يُخْلِفُ اُ۬لْمِيعَادَۖ

13:32

और निश्चय ही तुमसे पहले संदेशवाहकों का मज़ाक़ उड़ाया गया है; तब मैंने नकारने वालों को ढील दी, फिर उन्हें पकड़ लिया:

وَلَقَدُ اُ۟سْتُهْزِۓَ بِرُسُلٖ مِّن قَبْلِكَ فَأَمْلَيْتُ لِلذِينَ كَفَرُواْ ثُمَّ أَخَذتُّهُمْۖ

और फिर मेरी सज़ा कैसी थी?

فَكَيْفَ كَانَ عِقَابِۖ

13:33

क्या वह जो हर स्व पर उसकी कमाई के अनुसार निगरानी रखता है?

أَفَمَنْ هُوَ قَآئِمٌ عَلَىٰ كُلِّ نَفْسِۢ بِمَا كَسَبَتْۖ

13:33

और उन्होंने ईश्वर के लिए साझीदार ठहराए। कहो: “उनके नाम बताओ!

وَجَعَلُواْ لِلهِ شُرَكَآءَ قُلْ سَمُّوهُمْۖ

13:33

या क्या तुम उसे उसकी सूचना देते हो जो वह धरती पर नहीं जानता, या उसकी जो कथन में खुला है?”

أَمْ تُنَبِّـُٔونَهُۥ بِمَا لَا يَعْلَمُ فِے اِ۬لْأَرْضِ أَم بِظَٰهِرٖ مِّنَ اَ۬لْقَوْلِۖ

13:33

ऐसा नहीं: नकारने वालों के लिए उनका षड्यंत्र सुंदर बना दिया गया, और उनके लिए राह रोक दी गई।

بَلْ زُيِّنَ لِلذِينَ كَفَرُواْ مَكْرُهُمْ وَصَدُّواْ عَنِ اِ۬لسَّبِيلِۖ

और जिसे ईश्वर भटकाता है, उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं।

وَمَنْ يُّضْلِلِ اِ۬للَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنْ هَادٖۖ

उनके लिए निकट जीवन में दंड है,

لَّهُمْ عَذَابٞ فِے اِ۬لْحَيَوٰةِ اِ۬لدُّنْيَاۖ

परंतु अंतिम जीवन का दंड और कठोर है,

وَلَعَذَابُ اُ۬لْأٓخِرَةِ أَشَقُّۖ

और ईश्वर के विरुद्ध उनके लिए बचाने वाला कोई नहीं।

وَمَا لَهُم مِّنَ اَ۬للَّهِ مِنْ وَّاقٖۖ

13:35

उस उद्यान का उदाहरण जिसका वादा सावधानी बरतने वालों से किया गया: उसके नीचे नदियाँ बहती हैं, उसका भोजन सदा रहने वाला है, और उसकी छाया भी —

۞ مَّثَلُ اُ۬لْجَنَّةِ اِ۬لتِے وُعِدَ اَ۬لْمُتَّقُونَ تَجْرِے مِن تَحْتِهَا اَ۬لْأَنْهَٰرُ أُكْلُهَا دَآئِمٞ وَظِلُّهَاۖ

यही सावधानी बरतने वालों का परिणाम है,

تِلْكَ عُقْبَى اَ۬لذِينَ اَ۪تَّقَواْۖ

13:35

जबकि नकारने वालों का परिणाम आग है।

وَّعُقْبَى اَ۬لْكَٰفِرِينَ اَ۬لنَّارُۖ

13:36

और जिन्हें हमने ग्रंथ दिया, वे उससे प्रसन्न होते हैं जो तुम पर उतारा गया है,

وَالذِينَ ءَاتَيْنَٰهُمُ اُ۬لْكِتَٰبَ يَفْرَحُونَ بِمَا أُنزِلَ إِلَيْكَۖ

13:36

परंतु दलों में ऐसे भी हैं जो उसके एक भाग को अमान्य ठहराते हैं।

وَمِنَ اَ۬لْأَحْزَابِ مَنْ يُّنكِرُ بَعْضَهُۥۖ

कहो: “मुझे केवल यह आदेश दिया गया है कि मैं ईश्वर की आज्ञा का पालन करूँ, और उसके साथ किसी को साझी न ठहराऊँ:

قُلْ إِنَّمَا أُمِرْتُ أَنْ أَعْبُدَ اَ۬للَّهَ وَلَا أُشْرِكَ بِهِۦۖ

मैं उसी की ओर बुलाता हूँ,

إِلَيْهِ أَدْعُواْۖ

और उसी की ओर मेरा पुनरागमन है।”

وَإِلَيْهِ مَـَٔابِۖ

13:37

और इसी प्रकार हमने इसे उतारा, एक त्रुटिहीन निर्णय के रूप में:

وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَٰهُ حُكْماً عَرَبِيّاٗۖ

13:37

और यदि तुम उनकी भावनाओं का अनुसरण करो, इसके बाद कि तुम्हारे पास ज्ञान आ चुका है, तो ईश्वर के विरुद्ध तुम्हारे लिए न कोई हिमायती होगा न कोई बचाने वाला।

وَلَئِنِ اِ۪تَّبَعْتَ أَهْوَآءَهُم بَعْدَ مَا جَآءَكَ مِنَ اَ۬لْعِلْمِ مَا لَكَ مِنَ اَ۬للَّهِ مِنْ وَّلِيّٖ وَلَا وَاقٖۖ

13:38

हमने निश्चय ही तुमसे पहले संदेशवाहक भेजे, और हमने उनके लिए जोड़ीदार और संतति बनाई;

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا رُسُلاٗ مِّن قَبْلِكَ وَجَعَلْنَا لَهُمْ أَزْوَٰجاٗ وَذُرِّيَّةٗۖ

13:38

और किसी संदेशवाहक के लिए उचित नहीं कि वह कोई संकेत लाए, सिवा ईश्वर की अनुमति के।

وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَنْ يَّأْتِيَ بِـَٔايَةٍ إِلَّا بِإِذْنِ اِ۬للَّهِۖ

13:38

हर अवधि के लिए एक बही है।

لِكُلِّ أَجَلٖ كِتَابٞۖ

13:39

ईश्वर जो उसकी मर्ज़ी हो, मिटा देता है, और दृढ़ करता है,

يَمْحُواْ اُ۬للَّهُ مَا يَشَآءُ وَيُثَبِّتُۖ

13:39

और उसके पास ग्रंथ की मूल-प्रति है।

وَعِندَهُۥ أُمُّ اُ۬لْكِتَٰبِۖ

13:40

और चाहे हम तुम्हें उसका कुछ भाग दिखा दें जिसका हम उनसे वादा करते हैं, या हम तुम्हें निष्ठा से सँभाल लें, तुम पर केवल संप्रेषण का दायित्व है, और हिसाब हमारे ज़िम्मे है।

وَإِن مَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ اَ۬لذِے نَعِدُهُمْ أَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِنَّمَا عَلَيْكَ اَ۬لْبَلَٰغُ وَعَلَيْنَا اَ۬لْحِسَابُۖ

13:41

क्या उन्होंने नहीं देखा कि हम धरती पर आते हैं, उसे उसके सिरों से घटाते हुए?

أَوَلَمْ يَرَوْاْ أَنَّا نَأْتِے اِ۬لْأَرْضَ نَنقُصُهَا مِنْ أَطْرَافِهَاۖ

13:41

ईश्वर निर्णय करता है, और कोई उसके निर्णय को पलट नहीं सकता:

وَاللَّهُ يَحْكُمُ لَا مُعَقِّبَ لِحُكْمِهِۦۖ

13:41

वह हिसाब में शीघ्र है।

وَهْوَ سَرِيعُ اُ۬لْحِسَابِۖ

और उनसे पहले वालों ने भी षड्यंत्र किया था, परंतु सारा षड्यंत्र ईश्वर का ही है:

وَقَدْ مَكَرَ اَ۬لذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَلِلهِ اِ۬لْمَكْرُ جَمِيعاٗۖ

13:42

वह जानता है जो कुछ हर स्व कमाता है,

يَعْلَمُ مَا تَكْسِبُ كُلُّ نَفْسٖۖ

13:42

और नकारने वाले शीघ्र ही जान लेंगे कि ठिकाने का परिणाम किसके लिए है।

وَسَيَعْلَمُ اُ۬لْكَٰفِرُ لِمَنْ عُقْبَى اَ۬لدَّارِۖ

13:43

और नकारने वाले कहते हैं: “तुम भेजे हुए नहीं हो।”

وَيَقُولُ اُ۬لذِينَ كَفَرُواْ لَسْتَ مُرْسَلاٗۖ

13:43

कहो: “मेरे और तुम्हारे बीच साक्षी के रूप में ईश्वर काफ़ी है, और वह भी जिसके पास ग्रंथ का ज्ञान है।”

قُلْ كَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيداَۢ بَيْنِے وَبَيْنَكُمْ وَمَنْ عِندَهُۥ عِلْمُ اُ۬لْكِتَٰبِۖ

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