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القرآن

النازعات

An-Nazi'at

Those Who Tear Away

Sura79
عم
पद46

Section XIIThe application · continuation

The immense Information: the Day, the address to the messenger, the “Say” suras

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Read the section from its beginning: sura 78

79:1–7

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। उनकी शपथ जो डूबकर खींच लेती हैं, उनकी जो कोमलता से खोल देती हैं, उनकी जो तैरते हुए तैरती हैं, उनकी जो आगे बढ़ते हुए आगे निकलती हैं, उनकी जो मामले संचालित करती हैं — उस दिन जब पहला कंपन कँपाएगा, और उसके पीछे दूसरा आएगा,

بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ وَالنَّٰزِعَٰتِ غَرْقاٗ وَالنَّٰشِطَٰتِ نَشْطاٗ وَالسَّٰبِحَٰتِ سَبْحاٗ فَالسَّٰبِقَٰتِ سَبْقاٗ فَالْمُدَبِّرَٰتِ أَمْراٗ يَوْمَ تَرْجُفُ اُ۬لرَّاجِفَةُ تَتْبَعُهَا اَ۬لرَّادِفَةُۖ

79:8–9

उस दिन कुछ मर्म काँपते होंगे, और उनकी दृष्टियाँ विनीत होंगी।

قُلُوبٞ يَوْمَئِذٖ وَاجِفَةٌ أَبْصَٰرُهَا خَٰشِعَةٞۖ

79:10–11

वे कहेंगे: “क्या हम सचमुच अपनी पहली अवस्था में वापस लाए जाएँगे, जब हम गली हुई हड्डियाँ हो चुके होंगे?”

يَقُولُونَ أَٰ۟نَّا لَمَرْدُودُونَ فِے اِ۬لْحَافِرَةِ إِذَا كُنَّا عِظَٰماٗ نَّخِرَةٗۖ

वे कहेंगे: “तब तो यह घाटे का पलटवार होगा!” जबकि वह केवल एक ही गर्जन होगा, और देखो, वे खड़े हैं, संसार की सतह पर।

قَالُواْ تِلْكَ إِذاٗ كَرَّةٌ خَاسِرَةٞ فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٞ وَٰحِدَةٞ فَإِذَا هُم بِالسَّاهِرَةِۖ

79:15–16

क्या तुम तक मूसा की वार्ता पहुँची है? जब उसके अभिभावक ने उसे तुवा की पवित्र की हुई घाटी में पुकारा,

هَلْ أَتَيٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰ إِذْ نَادَيٰهُ رَبُّهُۥ بِالْوَادِ اِ۬لْمُقَدَّسِ طُوَىۖ

79:17–19

“फ़िरऔन के पास जाओ, वह हर मर्यादा से आगे निकल गया है; उससे कहो: ‘क्या तुम चाहोगे कि तुम शुद्ध हो जाओ, और मैं तुम्हें तुम्हारे अभिभावक की ओर मार्ग दिखाऊँ, ताकि तुम उससे भय रखो?’”

اَ۪ذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ فَقُلْ هَل لَّكَ إِلَىٰ أَن تَزَّكَّىٰ وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰۖ

79:20–25

तब उसने उसे सबसे बड़ा संकेत दिखाया; परंतु उसने झुठलाया और अवज्ञा की, फिर वह पीठ फेरकर प्रयास करता हुआ चला गया, उसने इकट्ठा किया, पुकारा और कहा: “मैं तुम्हारा स्वामी हूँ, सबसे ऊँचा।” तब ईश्वर ने उसे अंतिम जीवन और पहले जीवन के निवारक उदाहरण से पकड़ लिया।

فَأَرَيٰهُ اُ۬لْأٓيَةَ اَ۬لْكُبْرَىٰ فَكَذَّبَ وَعَصَىٰ ثُمَّ أَدْبَرَ يَسْعَىٰ فَحَشَرَ فَنَادَىٰ فَقَالَ أَنَا رَبُّكُمُ اُ۬لْأَعْلَىٰ فَأَخَذَهُ اُ۬للَّهُ نَكَالَ اَ۬لْأٓخِرَةِ وَالْأُولَىٰۖ

इसमें अवश्य उसके लिए एक सीख है जो भय रखता है।

إِنَّ فِے ذَٰلِكَ لَعِبْرَةٗ لِّمَنْ يَّخْشَىٰۖ

क्या तुम्हें रचना अधिक कठिन है, या आकाश?

ءَٰا۬نتُمْ أَشَدُّ خَلْقاً أَمِ اِ۬لسَّمَآءُۖ

79:28–29

उसने उसे बनाया, उसकी छत ऊँची की, फिर उसे सँवारा; उसकी रात अँधेरी की और उससे पूर्वाह्न की उजास निकाली।

بَنَيٰهَا رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّيٰهَا وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَيٰهَاۖ

और धरती को, इसके बाद, उसने प्रस्फुटित किया: उससे उसका पानी और उसका चरागाह निकाला, और पहाड़ों को उसने जमा दिया — तुम्हारे लिए और तुम्हारे पशुधन के लिए उपभोग।

وَالْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَيٰهَا أَخْرَجَ مِنْهَا مَآءَهَا وَمَرْعَيٰهَا وَالْجِبَالَ أَرْسَيٰهَا مَتَٰعاٗ لَّكُمْ وَلِأَنْعَٰمِكُمْۖ

79:34–36

फिर जब वह बड़ा विप्लव आएगा, उस दिन जब मनुष्य स्मरण करेगा कि उसने किसके लिए प्रयास किया था, और भट्ठी उसे दिखाई जाएगी जो देखता है,

فَإِذَا جَآءَتِ اِ۬لطَّآمَّةُ اُ۬لْكُبْرَىٰ يَوْمَ يَتَذَكَّرُ اُ۬لْإِنسَٰنُ مَا سَعَىٰ وَبُرِّزَتِ اِ۬لْجَحِيمُ لِمَنْ يَّرَىٰۖ

79:37–39

तो जिसने हर मर्यादा से आगे निकलकर निकट जीवन को चुना, भट्ठी निश्चय ही उसकी शरण होगी;

فَأَمَّا مَن طَغَىٰ وَءَاثَرَ اَ۬لْحَيَوٰةَ اَ۬لدُّنْيَا فَإِنَّ اَ۬لْجَحِيمَ هِيَ اَ۬لْمَأْوَىٰۖ

79:40–41

और जो अपने अभिभावक के सामने खड़े होने से डरा, और जिसने स्व को भावना से रोका, उद्यान निश्चय ही उसकी शरण होगा।

وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ وَنَهَى اَ۬لنَّفْسَ عَنِ اِ۬لْهَوَىٰ فَإِنَّ اَ۬لْجَنَّةَ هِيَ اَ۬لْمَأْوَىٰۖ

79:42

वे तुमसे उस घड़ी के विषय में पूछते हैं: वह कब लंगर डालेगी?

۞ يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ اِ۬لسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَيٰهَاۖ

79:43

उसके स्मरण से तुम्हारा क्या लेना-देना?

فِيمَ أَنتَ مِن ذِكْرَيٰهَاۖ

79:44

तुम्हारे अभिभावक ही की ओर उसकी अंतिम सीमा है।

إِلَىٰ رَبِّكَ مُنتَهَيٰهَاۖ

79:45

तुम तो केवल उसे चेतावनी देने वाला हो जो उससे भय रखता है।

إِنَّمَا أَنتَ مُنذِرُ مَنْ يَّخْشَيٰهَاۖ

जिस दिन वे उसे देखेंगे, उन्हें ऐसा लगेगा कि उन्होंने केवल एक संध्या या एक प्रभात बिताया था।

كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَهَا لَمْ يَلْبَثُواْ إِلَّا عَشِيَّةً أَوْ ضُحَيٰهَاۖ

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