عبس
Abasa
He Frowned
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। उसने त्योरी चढ़ाई और पीठ फेर ली, इसलिए कि उसके पास अंधा आया।
بِسْمِ اِ۬للَّهِ اِ۬لرَّحْمَٰنِ اِ۬لرَّحِيمِ عَبَسَ وَتَوَلَّىٰ أَن جَآءَهُ اُ۬لْأَعْمَىٰۖ
और तुम्हें इसका क्या अंदाज़ा दिलाए?
وَمَا يُدْرِيكَۖ
शायद वह शुद्ध हो जाए, या स्मरण करे, और स्मरण उसके काम आए।
لَعَلَّهُۥ يَزَّكَّىٰ أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعُهُ اُ۬لذِّكْرَىٰۖ
रहा वह जो अपने को धनी समझता है, तुम उसकी ओर बढ़ते हो, जबकि यदि वह शुद्ध न हो तो यह तुम्हारे ज़िम्मे नहीं।
أَمَّا مَنِ اِ۪سْتَغْنَىٰ فَأَنتَ لَهُۥ تَصَّدَّىٰ وَمَا عَلَيْكَ أَلَّا يَزَّكَّىٰۖ
परंतु जो तुम्हारे पास तेज़ क़दमों से आता है, और जो भय रखता है, उससे तुम ध्यान हटा लेते हो। कदापि नहीं!
وَأَمَّا مَن جَآءَكَ يَسْعَىٰ وَهْوَ يَخْشَىٰ فَأَنتَ عَنْهُ تَلَهَّىٰ كَلَّاۖ
यह एक स्मरण है,
إِنَّهَا تَذْكِرَةٞۖ
— जो चाहे वह इसका स्मरण कर ले —, सम्मानित, ऊँचे और शुद्ध किए हुए अभिलेखों में, दूतों के हाथों में, जो सम्मानित और सद्गुणी हैं।
فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ فِے صُحُفٖ مُّكَرَّمَةٖ مَّرْفُوعَةٖ مُّطَهَّرَةِۢ بِأَيْدِے سَفَرَةٖ كِرَامِۢ بَرَرَةٖۖ
मनुष्य नष्ट हो, कितना नकारता है!
قُتِلَ اَ۬لْإِنسَٰنُ مَا أَكْفَرَهُۥۖ
उसने उसे किस चीज़ से रचा?
مِنْ أَيِّ شَےْءٍ خَلَقَهُۥۖ
एक बूँद से उसने उसे रचा, फिर उसे नाप दिया, फिर उसके लिए राह आसान की, फिर उसे मृत्यु दी और क़ब्र में रखा।
مِن نُّطْفَةٍ خَلَقَهُۥ فَقَدَّرَهُۥ ثُمَّ اَ۬لسَّبِيلَ يَسَّرَهُۥ ثُمَّ أَمَاتَهُۥ فَأَقْبَرَهُۥۖ
फिर जब उसकी मर्ज़ी होगी, वह उसे फैला देगा।
ثُمَّ إِذَا شَا أَنشَرَهُۥۖ
कदापि नहीं! उसने उसे जो आदेश दिया था उसे उसने अभी पूरा नहीं किया।
كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَا أَمَرَهُۥۖ
तो मनुष्य अपने आहार पर नज़र डाले:
فَلْيَنظُرِ اِ۬لْإِنسَٰنُ إِلَىٰ طَعَامِهِۦۖ
हमने ही पानी को प्रचुर मात्रा में उँडेला, फिर हमने धरती को दरारों में चीरा, फिर हमने उसमें अनाज उगाया, और अंगूर, और चारा, और ज़ैतून, और खजूर, और घने घिरे हुए उद्यान, और स्वाद, और चरागाह, तुम्हारे और तुम्हारे पशुधन के उपभोग के रूप में।
إِنَّا صَبَبْنَا اَ۬لْمَآءَ صَبّاٗ ثُمَّ شَقَقْنَا اَ۬لْأَرْضَ شَقّاٗ فَأَنۢبَتْنَا فِيهَا حَبّاٗ وَعِنَباٗ وَقَضْباٗ وَزَيْتُوناٗ وَنَخْلاٗ وَحَدَآئِقَ غُلْباٗ وَفَٰكِهَةٗ وَأَبّاٗ مَّتَٰعاٗ لَّكُمْ وَلِأَنْعَٰمِكُمْۖ
फिर जब वह कान फोड़ देने वाली आएगी, उस दिन जब मनुष्य अपने भाई से भागेगा, और अपनी माता और अपने पिता से, और अपनी संगिनी और अपने बेटों से,
فَإِذَا جَآءَتِ اِ۬لصَّآخَّةُ يَوْمَ يَفِرُّ اُ۬لْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ وَأُمِّهِۦ وَأَبِيهِ وَصَٰحِبَتِهِۦ وَبَنِيهِۖ
उनमें से हर व्यक्ति के लिए, उस दिन, एक ऐसा काम होगा जो उसे घेर लेगा।
لِكُلِّ اِ۪مْرِےٕٖ مِّنْهُمْ يَوْمَئِذٖ شَأْنٞ يُغْنِيهِۖ
उस दिन कुछ चेहरे दमकते, हँसते, उल्लसित होंगे।
وُجُوهٞ يَوْمَئِذٖ مُّسْفِرَةٞ ضَاحِكَةٞ مُّسْتَبْشِرَةٞۖ
और उस दिन कुछ चेहरों पर धूल होगी, काली धूल से ढके हुए।
وَوُجُوهٞ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٞ تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌۖ
यही वे हैं जो नकारते हैं, दुराचारी।
أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ اُ۬لْكَفَرَةُ اُ۬لْفَجَرَةُۖ