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Sura58

Al-Mujadala المجادلة

The one who argues with you التي تجادلك

ق

22 पदSection XThe application · continuation

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“By the glorious Recitation”
The section and its links

The return judged far-fetched, the sworn Day, then the community (50, then 51-67)

Read the section from its beginning: sura 50

What was shown before: The return judged far-fetched is set out in 50. 50

58:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। ईश्वर ने उसका कथन ज़रूर सुन लिया है जो अपने जोड़ीदार के विषय में तुमसे बहस करती है और ईश्वर से शिकायत करती है; और ईश्वर तुम दोनों का संवाद सुनता है,

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ قَدۡ سَمِعَ ٱللَّهُ قَوۡلَ ٱلَّتِي تُجَٰدِلُكَ فِي زَوۡجِهَا وَتَشۡتَكِي إِلَى ٱللَّهِ وَٱللَّهُ يَسۡمَعُ تَحَاوُرَكُمَاۚ

क्योंकि ईश्वर सुनने वाला, दृष्टिवान है।

إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعُۢ بَصِيرٌ

58:2

तुममें से जो अपनी स्त्रियों से पीठ करते हैं — वे उनकी माताएँ नहीं हैं।

ٱلَّذِينَ يَظَّهَّرُونَ مِنكُمُۥ مِن نِّسَآئِهِمُۥ مَا هُنَّ أُمَّهَٰتِهِمُۥۖ

58:2

उनकी माताएँ तो केवल वही हैं जिन्होंने उन्हें जन्म दिया।

إِنۡ أُمَّهَٰتُهُمُۥ إِلَّا ٱلَّٰٓيِٕ وَلَدۡنَهُمُۥۚ

58:2

और वे अवश्य एक अमान्य कथन और एक जालसाज़ी कहते हैं।

وَإِنَّهُمُۥ لَيَقُولُونَ مُنكَرٗا مِّنَ ٱلۡقَوۡلِ وَزُورٗاۚ

परंतु ईश्वर अवश्य दरगुज़र करने वाला, अत्यंत क्षमाशील है।

وَإِنَّ ٱللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٞ

58:3

और जो अपनी स्त्रियों से पीठ करते हैं, फिर जो उन्होंने कहा उसकी पुनरावृत्ति करते हैं, उन्हें एक-दूसरे को छूने से पहले ऋण में बँधे एक व्यक्ति को स्वतंत्र करना होगा।

وَٱلَّذِينَ يَظَّهَّرُونَ مِن نِّسَآئِهِمُۥ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا قَالُواْ فَتَحۡرِيرُ رَقَبَةٖ مِّن قَبۡلِ أَن يَتَمَآسَّاۚ

यही है जिसका तुम्हें उपदेश दिया जाता है।

ذَٰلِكُمُۥ تُوعَظُونَ بِهِۦۚ

और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।

وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ

58:4

जिसे इसके साधन न मिलें, वह एक-दूसरे को छूने से पहले लगातार दो महीने परहेज़ रखेगा।

فَمَن لَّمۡ يَجِدۡ فَصِيَامُ شَهۡرَيۡنِ مُتَتَابِعَيۡنِ مِن قَبۡلِ أَن يَتَمَآسَّاۖ

58:4

जो ऐसा न कर सके, वह साठ दरिद्रों को भोजन कराएगा।

فَمَن لَّمۡ يَسۡتَطِعۡ فَإِطۡعَامُ سِتِّينَ مِسۡكِينٗاۚ

यह इसलिए कि तुम ईश्वर और उसके संदेशवाहक पर विश्वास करो।

ذَٰلِكَ لِتُؤۡمِنُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦۚ

और यही ईश्वर की सीमाएँ हैं।

وَتِلۡكَ حُدُودُ ٱللَّهِۗ

58:4

और नकारने वालों के लिए पीड़ादायक दंड है।

وَلِلۡكَٰفِرِينَ عَذَابٌ أَلِيمٌ

58:5

जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक से शत्रुता के साथ विरोध करते हैं, वे निश्चय ही पछाड़े जाएँगे, जैसे उनसे पहले वाले पछाड़े गए थे।

إِنَّ ٱلَّذِينَ يُحَآدُّونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ كُبِتُواْ كَمَا كُبِتَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمُۥۚ

जबकि हमने स्पष्ट संकेत उतार दिए हैं।

وَقَدۡ أَنزَلۡنَا ءَايَٰتِۭ بَيِّنَٰتٖۚ

58:5

और नकारने वालों के लिए अपमानजनक दंड है।

وَلِلۡكَٰفِرِينَ عَذَابٞ مُّهِينٞ

जिस दिन ईश्वर उन सबको उठाएगा और उन्हें सूचित करेगा कि उन्होंने क्या किया।

يَوۡمَ يَبۡعَثُهُمُ ٱللَّهُ جَمِيعٗا فَيُنَبِّئُهُمُۥ بِمَا عَمِلُواْۚ

58:6

ईश्वर ने उसे गिन रखा है, जबकि वे उसे भूल गए।

أَحۡصَىٰهُ ٱللَّهُ وَنَسُوهُۥۚ

और ईश्वर हर चीज़ का साक्षी है।

وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ شَهِيدٌ

क्या तुमने नहीं देखा कि ईश्वर जानता है जो आकाशों में है और जो धरती पर है?

أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۖ

58:7

तीन की ऐसी कोई गुप्त मंत्रणा नहीं जिसमें वह उनका चौथा न हो, और न पाँच की जिसमें वह उनका छठा न हो, और न इससे कम और न अधिक की जिसमें वह उनके साथ न हो, वे जहाँ कहीं भी हों।

مَا يَكُونُ مِن نَّجۡوَىٰ ثَلَٰثَةٍ إِلَّا هُوَ رَابِعُهُمُۥ وَلَا خَمۡسَةٍ إِلَّا هُوَ سَادِسُهُمُۥ وَلَا أَدۡنَىٰ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكۡثَرَ إِلَّا هُوَ مَعَهُمُۥ أَيۡنَ مَا كَانُواْۖ

58:7

फिर वह उन्हें पेशी के दिन सूचित करेगा कि उन्होंने क्या किया,

ثُمَّ يُنَبِّئُهُمُۥ بِمَا عَمِلُواْ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۚ

क्योंकि ईश्वर हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।

إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٌ

58:8

क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जिन्हें गुप्त मंत्रणा से मना किया गया, फिर वे उसकी पुनरावृत्ति करते हैं जिससे उन्हें मना किया गया था और अपराध, शत्रुता और संदेशवाहक की अवज्ञा के लिए गुप्त मंत्रणा करते हैं?

أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ نُهُواْ عَنِ ٱلنَّجۡوَىٰ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا نُهُواْ عَنۡهُۥ وَيَتَنَٰجَوۡنَ بِٱلۡإِثۡمِ وَٱلۡعُدۡوَٰنِ وَمَعۡصِيَتِ ٱلرَّسُولِۖ

और जब वे तुम्हारे पास आते हैं, तो तुम्हें ऐसे अभिवादन से अभिवादन करते हैं जिससे ईश्वर ने तुम्हें अभिवादन नहीं किया, और अपने मन में कहते हैं: “हम जो कहते हैं उसके लिए ईश्वर हमें दंड क्यों नहीं देता?”

وَإِذَا جَآءُوكَ حَيَّوۡكَ بِمَا لَمۡ يُحَيِّكَ بِهِ ٱللَّهُ وَيَقُولُونَ فِي أَنفُسِهِمُۥ لَوۡلَا يُعَذِّبُنَا ٱللَّهُ بِمَا نَقُولُۚ

जहन्नम उनके लिए पर्याप्त है।

حَسۡبُهُمُۥ جَهَنَّمُ

वे उसमें जलेंगे।

يَصۡلَوۡنَهَاۖ

कितना भयानक गंतव्य!

فَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ

58:9

हे विश्वास करने वालो! जब तुम गुप्त मंत्रणा करो, तो अपराध, शत्रुता और संदेशवाहक की अवज्ञा के लिए मंत्रणा न करो।

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ إِذَا تَنَٰجَيۡتُمُۥ فَلَا تَتَنَٰجَوۡاْ بِٱلۡإِثۡمِ وَٱلۡعُدۡوَٰنِ وَمَعۡصِيَتِ ٱلرَّسُولِ

58:9

परंतु सद्गुण और सावधानी के लिए गुप्त मंत्रणा करो।

وَتَنَٰجَوۡاْ بِٱلۡبِرِّ وَٱلتَّقۡوَىٰۖ

58:9

और ईश्वर के प्रति सावधान रहो, जिसकी ओर तुम इकट्ठा किए जाओगे।

وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ ٱلَّذِي إِلَيۡهِۦ تُحۡشَرُونَ

58:10

गुप्त मंत्रणा तो केवल बहकाने वाले की ओर से होती है, ताकि वह विश्वास करने वालों को दुखी करे; परंतु ईश्वर की अनुमति के सिवा वह उन्हें किसी भी प्रकार हानि नहीं पहुँचा सकता।

إِنَّمَا ٱلنَّجۡوَىٰ مِنَ ٱلشَّيۡطَٰنِ لِيَحۡزُنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَلَيۡسَ بِضَآرِّهِمُۥ شَيۡـًٔا إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۚ

और विश्वास करने वालों को ईश्वर ही को मुख़्तार बनाना चाहिए।

وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ

58:11

हे विश्वास करने वालो! जब तुमसे सभाओं में स्थान बनाने को कहा जाए, तो स्थान बना दो; ईश्वर तुम्हारे लिए स्थान बना देगा।

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ إِذَا قِيلَ لَكُمُۥ تَفَسَّحُواْ فِي ٱلۡمَجۡلِسِ فَٱفۡسَحُواْ يَفۡسَحِ ٱللَّهُ لَكُمُۥۖ

58:11

और जब तुमसे खड़े हो जाने को कहा जाए, तो खड़े हो जाओ; ईश्वर तुममें से विश्वास करने वालों को और उन्हें जिन्हें ज्ञान दिया गया है, श्रेणियों में ऊँचा करेगा।

وَإِذَا قِيلَ ٱنشِزُواْ فَٱنشِزُواْ يَرۡفَعِ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنكُمُۥ وَٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَ دَرَجَٰتٖۚ

और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।

وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ

58:12

हे विश्वास करने वालो! जब तुम संदेशवाहक से गुप्त मंत्रणा करो, तो अपनी मंत्रणा से पहले एक दान आगे बढ़ाओ।

يَٰأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ إِذَا نَٰجَيۡتُمُ ٱلرَّسُولَ فَقَدِّمُواْ بَيۡنَ يَدَيۡ نَجۡوَىٰكُمُۥ صَدَقَةٗۚ

यह तुम्हारे लिए बेहतर है, और अधिक स्वच्छ।

ذَٰلِكَ خَيۡرٞ لَّكُمُۥ وَأَطۡهَرُۚ

परंतु यदि तुम्हें इसके साधन न मिलें, तो ईश्वर निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।

فَإِن لَّمۡ تَجِدُواْ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٌ

क्या तुम अपनी मंत्रणाओं से पहले दान आगे बढ़ाने से आशंकित हुए?

ءَا۬شۡفَقۡتُمُۥ أَن تُقَدِّمُواْ بَيۡنَ يَدَيۡ نَجۡوَىٰكُمُۥ صَدَقَٰتٖۚ

58:13

जब तुमने ऐसा नहीं किया और ईश्वर अनुकंपा के साथ तुम्हारी ओर पलटा, तो संपर्क बनाए रखो और शुद्ध उदारता दो।

فَإِذۡ لَمۡ تَفۡعَلُواْ وَتَابَ ٱللَّهُ عَلَيۡكُمُۥ فَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَ

और ईश्वर की और उसके संदेशवाहक की बात मानो।

وَأَطِيعُواْ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥۚ

और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।

وَٱللَّهُ خَبِيرُۢ بِمَا تَعۡمَلُونَ

क्या तुमने उन्हें नहीं देखा जो ऐसी क़ौम को हिमायती बनाते हैं जिस पर ईश्वर क्रोधित हुआ? वे न तुम में से हैं और न उनमें से, और वे जानते हुए झूठ पर शपथ खाते हैं।

۞ أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ تَوَلَّوۡاْ قَوۡمًا غَضِبَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِمُۥ مَا هُمُۥ مِنكُمُۥ وَلَا مِنۡهُمُۥ وَيَحۡلِفُونَ عَلَى ٱلۡكَذِبِ وَهُمُۥ يَعۡلَمُونَ

ईश्वर ने उनके लिए कठोर दंड तैयार किया है,

أَعَدَّ ٱللَّهُ لَهُمُۥ عَذَابٗا شَدِيدًاۖ

क्योंकि कितना बुरा है वह जो वे करते थे!

إِنَّهُمُۥ سَآءَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

उन्होंने अपनी शपथों को ढाल बना लिया, और ईश्वर की राह रोकी; अतः उनके लिए अपमानजनक दंड है।

ٱتَّخَذُواْ أَيۡمَٰنَهُمُۥ جُنَّةٗ فَصَدُّواْ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ فَلَهُمُۥ عَذَابٞ مُّهِينٞ

न उनकी संपत्ति और न उनके बच्चे ईश्वर के सामने उनके किसी काम आएँगे।

لَّن تُغۡنِيَ عَنۡهُمُۥ أَمۡوَٰلُهُمُۥ وَلَا أَوۡلَٰدُهُمُۥ مِنَ ٱللَّهِ شَيۡـًٔاۚ

यही आग वाले हैं, वे उसमें सदा रहते हैं।

أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمُۥ فِيهَا خَٰلِدُونَ

58:18

जिस दिन ईश्वर उन सबको उठाएगा, वे उसके सामने शपथ खाएँगे जैसे तुम्हारे सामने शपथ खाते हैं, यह समझते हुए कि वे किसी आधार पर हैं।

يَوۡمَ يَبۡعَثُهُمُ ٱللَّهُ جَمِيعٗا فَيَحۡلِفُونَ لَهُۥ كَمَا يَحۡلِفُونَ لَكُمُۥ وَيَحۡسِبُونَ أَنَّهُمُۥ عَلَىٰ شَيۡءٍۚ

क्या ऐसा नहीं है: निश्चय ही वही झूठे हैं।

أَلَا إِنَّهُمُۥ هُمُ ٱلۡكَٰذِبُونَ

58:19

बहकाने वाला उन पर हावी हो गया और उसने उन्हें ईश्वर का स्मरण भुला दिया।

ٱسۡتَحۡوَذَ عَلَيۡهِمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ فَأَنسَىٰهُمُۥ ذِكۡرَ ٱللَّهِۚ

58:19

ये बहकाने वाले का दल हैं।

أُوْلَٰٓئِكَ حِزۡبُ ٱلشَّيۡطَٰنِۚ

58:19

क्या ऐसा नहीं है: बहकाने वाले का दल, निश्चय ही वही घाटा उठाने वाले हैं।

أَلَا إِنَّ حِزۡبَ ٱلشَّيۡطَٰنِ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ

58:20

जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक से शत्रुता के साथ विरोध करते हैं, वे सबसे अधिक अपमानित जनों में से हैं।

إِنَّ ٱلَّذِينَ يُحَآدُّونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ أُوْلَٰٓئِكَ فِي ٱلۡأَذَلِّينَ

ईश्वर ने लिख दिया है: “मैं अवश्य विजयी रहूँगा, मैं और मेरे संदेशवाहक।”

كَتَبَ ٱللَّهُ لَأَغۡلِبَنَّ أَنَا۠ وَرُسُلِيۚ

58:21

क्योंकि ईश्वर बलवान, सर्वशक्तिमान है।

إِنَّ ٱللَّهَ قَوِيٌّ عَزِيزٞ

58:22

तुम ऐसी कोई क़ौम न पाओगे जो ईश्वर और अंतिम दिन पर विश्वास करती हो और साथ ही उनसे स्नेह रखती हो जो ईश्वर और उसके संदेशवाहक से शत्रुता के साथ विरोध करते हैं, चाहे वे उनके पिता हों, उनके बेटे हों, उनके भाई हों या उनके निकट जन।

لَّا تَجِدُ قَوۡمٗا يُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ يُوَآدُّونَ مَنۡ حَآدَّ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَلَوۡ كَانُواْ ءَابَآءَهُمُۥ أَوۡ أَبۡنَآءَهُمُۥ أَوۡ إِخۡوَٰنَهُمُۥ أَوۡ عَشِيرَتَهُمُۥۚ

58:22

यही वे हैं जिनके मर्मों में उसने विश्वास लिख दिया है, जिन्हें उसने अपनी ओर से आए एक प्रवाह से सशक्त किया है, और जिन्हें वह ऐसे उद्यानों में प्रवेश कराएगा जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जहाँ वे सदा रहेंगे।

أُوْلَٰٓئِكَ كَتَبَ فِي قُلُوبِهِمُ ٱلۡإِيمَٰنَ وَأَيَّدَهُمُۥ بِرُوحٖ مِّنۡهُۥۖ وَيُدۡخِلُهُمُۥ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ

ईश्वर उनसे संतुष्ट है, और वे उससे संतुष्ट हैं।

رَضِيَ ٱللَّهُ عَنۡهُمُۥ وَرَضُواْ عَنۡهُۥۚ

58:22

ये ईश्वर का दल हैं।

أُوْلَٰٓئِكَ حِزۡبُ ٱللَّهِۚ

58:22

क्या ऐसा नहीं है: ईश्वर का दल, निश्चय ही वही सफल होने वाले हैं।

أَلَا إِنَّ حِزۡبَ ٱللَّهِ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ

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