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القرآن

الحاقة

Al-Haqqa

That Which Proves the Real

Sura69
ن
पद52

Section XIThe application · continuation

“Leave Me”: the messenger's endurance in the face of denial

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Read the section from its beginning: sura 68

69:1–2

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। यथार्थ को सत्यापित करने वाली! यथार्थ को सत्यापित करने वाली क्या है?

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ ٱلۡحَآقَّةُ مَا ٱلۡحَآقَّةُ

69:3

और तुम्हें क्या अंदाज़ा दिलाए कि यथार्थ को सत्यापित करने वाली क्या है?

وَمَا أَدۡرَىٰكَ مَا ٱلۡحَآقَّةُ

समूद और आद ने धड़ाके को झुठलाया।

كَذَّبَتۡ ثَمُودُ وَعَادُۢ بِٱلۡقَارِعَةِ

69:5

रही बात समूद की, तो वे मर्यादा से आगे निकलने वाली से नष्ट कर दिए गए।

فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهۡلِكُواْ بِٱلطَّاغِيَةِ

और रही बात आद की, तो वे एक हिमशीतल, उद्दंड हवा से नष्ट कर दिए गए, जिसे उसने उन पर सात रातों और आठ दिनों तक लगातार वश में किया,

وَأَمَّا عَادٞ فَأُهۡلِكُواْ بِرِيحٖ صَرۡصَرٍ عَاتِيَةٖ سَخَّرَهَا عَلَيۡهِمُۥ سَبۡعَ لَيَالٖ وَثَمَٰنِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومٗاۖ

जिससे तुम इस क़ौम को धरती पर पड़ी देखते, मानो खोखले खजूर के तने हों।

فَتَرَى ٱلۡقَوۡمَ فِيهَا صَرۡعَىٰ كَأَنَّهُمُۥ أَعۡجَازُ نَخۡلٍ خَاوِيَةٖ

क्या तुम उनका ज़रा-सा भी शेष देखते हो?

فَهَلۡ تَرَىٰ لَهُمُۥ مِنۢ بَاقِيَةٖ

69:9–10

और फ़िरऔन, और जो उसके पक्ष में खड़े थे, और उलट दी गई बस्तियाँ भूल लेकर आए; उन्होंने अपने अभिभावक के संदेशवाहक की अवज्ञा की, तो उसने उन्हें ऐसी पकड़ से पकड़ा जो बढ़ती ही गई।

وَجَآءَ فِرۡعَوۡنُ وَمَن قَبۡلَهُۥ وَٱلۡمُؤۡتَفِكَٰتُ بِٱلۡخَاطِئَةِ فَعَصَوۡاْ رَسُولَ رَبِّهِمُۥ فَأَخَذَهُمُۥ أَخۡذَةٗ رَّابِيَةً

69:11–12

जब पानी उफन पड़ा, तो हमने तुम्हें नौका पर सवार किया, ताकि उसे तुम्हारे लिए एक स्मरण बना दें, और ताकि ध्यान देने वाला कान उसे सँजो रखे।

إِنَّا لَمَّا طَغَا ٱلۡمَآءُ حَمَلۡنَٰكُمُۥ فِي ٱلۡجَارِيَةِ لِنَجۡعَلَهَا لَكُمُۥ تَذۡكِرَةٗ وَتَعِيَهَا أُذُنٞ وَٰعِيَةٞ

69:13–17

जब नरसिंगा में एक ही फूँक फूँकी जाएगी, और धरती तथा पहाड़ वहन किए जाएँगे और एक ही बार में समतल कर दिए जाएँगे, तो उस दिन वह घटना घट जाएगी, और आकाश फट जाएगा और उस दिन भुरभुरा होगा, और अभिकर्ता उसके किनारों पर खड़ा होगा,

فَإِذَا نُفِخَ فِي ٱلصُّورِ نَفۡخَةٞ وَٰحِدَةٞ وَحُمِلَتِ ٱلۡأَرۡضُ وَٱلۡجِبَالُ فَدُكَّتَا دَكَّةٗ وَٰحِدَةٗ فَيَوۡمَئِذٖ وَقَعَتِ ٱلۡوَاقِعَةُ وَٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَهِيَ يَوۡمَئِذٖ وَاهِيَةٞ وَٱلۡمَلَكُ عَلَىٰ أَرۡجَآئِهَاۚ

69:18

और उस दिन आठ अपने ऊपर तुम्हारे अभिभावक का भवन वहन करेंगे। उस दिन तुम सामने रखे जाओगे, और तुममें से कुछ भी छिपा नहीं रहेगा।

وَيَحۡمِلُ عَرۡشَ رَبِّكَ فَوۡقَهُمُۥ يَوۡمَئِذٖ ثَمَٰنِيَةٞ يَوۡمَئِذٖ تُعۡرَضُونَ لَا تَخۡفَىٰ مِنكُمُۥ خَافِيَةٞ

69:19

रही बात उसकी जिसे उसकी बही उसके दाएँ हाथ में दी जाएगी, तो वह कहेगा: “लो, मेरी बही पढ़ो!

فَأَمَّا مَنۡ أُوتِيَ كِتَٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ فَيَقُولُ هَآؤُمُ ٱقۡرَءُواْ كِتَٰبِيَهۡ

क्योंकि मैंने अनुमान लगाया था कि मैं अपने हिसाब से मिलूँगा।”

إِنِّي ظَنَنتُ أَنِّي مُلَٰقٍ حِسَابِيَهۡ

वह संतोषजनक जीवन में होगा, एक ऊँचे उद्यान में, जिसके गुच्छे हाथ की पहुँच में होंगे।

فَهُوَ فِي عِيشَةٖ رَّاضِيَةٖ فِي جَنَّةٍ عَالِيَةٖ قُطُوفُهَا دَانِيَةٞ

“खाओ और पियो

كُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ

सुखपूर्वक, उसके बदले जो तुमने बीते हुए दिनों में पहले किया।”

هَنِيٓـَٔۢا بِمَا أَسۡلَفۡتُمُۥ فِي ٱلۡأَيَّامِ ٱلۡخَالِيَةِ

69:25

और रही बात उसकी जिसे उसकी बही उसके बाएँ हाथ में दी जाएगी, तो वह कहेगा: “अफ़सोस, काश मुझे मेरी बही न दी गई होती,

وَأَمَّا مَنۡ أُوتِيَ كِتَٰبَهُۥ بِشِمَالِهِۦ فَيَقُولُ يَٰلَيۡتَنِي لَمۡ أُوتَ كِتَٰبِيَهۡ

और काश मुझे अंदाज़ा ही न होता कि मेरा हिसाब क्या था!

وَلَمۡ أَدۡرِ مَا حِسَابِيَهۡ

काश वह निर्णायक अंत होती! मेरी संपत्ति मेरे किसी काम न आई,

يَٰلَيۡتَهَا كَانَتِ ٱلۡقَاضِيَةَ مَا أَغۡنَىٰ عَنِّي مَالِيَهۡۜ

मेरा अधिकार मुझसे दूर नष्ट हो गया।”

هَلَكَ عَنِّي سُلۡطَٰنِيَهۡ

69:30–32

“उसे पकड़ो, फिर उसे जकड़ दो, फिर उसे भट्ठी के सामने रखो, फिर उसे एक ऐसी ज़ंजीर में डालो जिसकी लंबाई सत्तर हाथ है।

خُذُوهُۥ فَغُلُّوهُۥ ثُمَّ ٱلۡجَحِيمَ صَلُّوهُۥ ثُمَّ فِي سِلۡسِلَةٖ ذَرۡعُهَا سَبۡعُونَ ذِرَاعٗا فَٱسۡلُكُوهُۥ

69:33–34

वह विशाल ईश्वर पर विश्वास नहीं करता था, और दरिद्र को भोजन कराने के लिए प्रेरित नहीं करता था।

إِنَّهُۥ كَانَ لَا يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ ٱلۡعَظِيمِ وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلۡمِسۡكِينِ

तो आज यहाँ उसका कोई गर्मजोशी वाला मित्र नहीं, और न ही एक घिनौने तरल के अतिरिक्त कोई भोजन, जिसे केवल भूल करने वाले खाते हैं।”

فَلَيۡسَ لَهُ ٱلۡيَوۡمَ هَٰهُنَا حَمِيمٞ وَلَا طَعَامٌ إِلَّا مِنۡ غِسۡلِينٖ لَّا يَأۡكُلُهُۥ إِلَّا ٱلۡخَٰطِـُٔونَ

69:38–42

नहीं! मैं उसकी शपथ लेता हूँ जो तुम स्पष्ट देखते हो और उसकी जो तुम स्पष्ट नहीं देखते: यह अवश्य एक सम्मानित संदेशवाहक का कथन है, और यह किसी लुभावने वक्ता का कथन नहीं — तुम बहुत कम विश्वास करते हो — और न किसी भविष्य बताने वाले का कथन।

فَلَا أُقۡسِمُ بِمَا تُبۡصِرُونَ وَمَا لَا تُبۡصِرُونَ إِنَّهُۥ لَقَوۡلُ رَسُولٖ كَرِيمٖ وَمَا هُوَ بِقَوۡلِ شَاعِرٖۚ قَلِيلٗا مَّا يُؤۡمِنُونَ وَلَا بِقَوۡلِ كَاهِنٖۚ

69:38–42

तुम कितना कम स्मरण करते हो!

قَلِيلٗا مَّا يَذَّكَّرُونَ

69:43

सभी प्राणियों के अभिभावक की ओर से एक अवतरण।

تَنزِيلٞ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

69:44–47

और यदि वह हम पर कोई कथन गढ़ लेता, तो हम उसे दाएँ से पकड़ लेते, फिर हम उसकी महाधमनी काट देते, और तुममें से कोई भी उसकी आड़ न बन पाता।

وَلَوۡ تَقَوَّلَ عَلَيۡنَا بَعۡضَ ٱلۡأَقَاوِيلِ لَأَخَذۡنَا مِنۡهُۥ بِٱلۡيَمِينِ ثُمَّ لَقَطَعۡنَا مِنۡهُ ٱلۡوَتِينَ فَمَا مِنكُمُۥ مِنۡ أَحَدٍ عَنۡهُۥ حَٰجِزِينَ

69:48

और यह अवश्य सावधानी बरतने वालों के लिए एक स्मरण है।

وَإِنَّهُۥ لَتَذۡكِرَةٞ لِّلۡمُتَّقِينَ

और हम अवश्य जानते हैं कि तुम्हारे बीच कुछ झुठलाने वाले हैं।

وَإِنَّا لَنَعۡلَمُ أَنَّ مِنكُمُۥ مُكَذِّبِينَ

69:50

और यह अवश्य नकारने वालों के लिए एक संताप है।

وَإِنَّهُۥ لَحَسۡرَةٌ عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ

और यह अवश्य निश्चितता का सत्य है।

وَإِنَّهُۥ لَحَقُّ ٱلۡيَقِينِ

तो अपने अभिभावक, उस विशाल के नाम से महिमा गाओ।

فَسَبِّحۡ بِٱسۡمِ رَبِّكَ ٱلۡعَظِيمِ

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