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Sura89

Al-Fajr الفجر

The Dawn والفجر

عم

30 पदSection XIIThe application · continuation

The section and its links

The immense Information, the Day, then the “Say” suras (78, then 79-114)

Read the section from its beginning: sura 78

What was shown before: The immense Information is set out in 78. 78

89:1–5

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। भोर की शपथ! दस रातों की! मध्यस्थता की, और वंचना की! रात की जब वह बीतती है! क्या इसमें उसके लिए शपथ नहीं जिसके पास अंकुश है?

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلۡفَجۡرِ وَلَيَالٍ عَشۡرٖ وَٱلشَّفۡعِ وَٱلۡوَتۡرِ وَٱلَّيۡلِ إِذَا يَسۡرِۦ هَلۡ فِي ذَٰلِكَ قَسَمٞ لِّذِي حِجۡرٍ

89:6–13

क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे अभिभावक ने आद के साथ कैसा व्यवहार किया, स्तंभों वाले इरम के साथ, जिसके जैसा देशों में कभी रचा नहीं गया था? और समूद के साथ जो घाटी में चट्टान तराशते थे? और फ़िरऔन के साथ, खूँटों वाले मनुष्य के साथ? वे जो देशों में हर मर्यादा से आगे निकल गए थे, और जिन्होंने उनमें बिगाड़ बहुत फैलाया था। तो तुम्हारे अभिभावक ने उन पर दंड का कोड़ा उँडेल दिया।

أَلَمۡ تَرَ كَيۡفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ إِرَمَ ذَاتِ ٱلۡعِمَادِ ٱلَّتِي لَمۡ يُخۡلَقۡ مِثۡلُهَا فِي ٱلۡبِلَٰدِ وَثَمُودَ ٱلَّذِينَ جَابُواْ ٱلصَّخۡرَ بِٱلۡوَادِۦ وَفِرۡعَوۡنَ ذِي ٱلۡأَوۡتَادِ ٱلَّذِينَ طَغَوۡاْ فِي ٱلۡبِلَٰدِ فَأَكۡثَرُواْ فِيهَا ٱلۡفَسَادَ فَصَبَّ عَلَيۡهِمُۥ رَبُّكَ سَوۡطَ عَذَابٍ

तुम्हारा अभिभावक अवश्य सदा घात में रहता है।

إِنَّ رَبَّكَ لَبِٱلۡمِرۡصَادِ

89:15

रहा मनुष्य, जब उसका अभिभावक उसे सम्मान देकर और उपकारों से भरकर परखता है, तो वह कहता है: “मेरे अभिभावक ने मुझे सम्मानित किया।”

فَأَمَّا ٱلۡإِنسَٰنُ إِذَا مَا ٱبۡتَلَىٰهُۥ رَبُّهُۥ فَأَكۡرَمَهُۥ وَنَعَّمَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّيَ أَكۡرَمَنِ

89:16–17

परंतु जब वह उसकी जीविका नापकर उसे परखता है, तो वह कहता है: “मेरे अभिभावक ने मुझे अपमानित किया।” कदापि नहीं!

وَأَمَّا إِذَا مَا ٱبۡتَلَىٰهُۥ فَقَدَرَ عَلَيۡهِۦ رِزۡقَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّيَ أَهَٰنَنِ كَلَّاۖ

89:18–21

बल्कि तुम अनाथ का सम्मान नहीं करते, और दरिद्र को खिलाने के लिए प्रेरित नहीं करते, और तुम विरासत को क्रूर लालसा से खा जाते हो, और संपत्ति से अतिशय प्रेम करते हो। कदापि नहीं!

بَل لَّا تُكۡرِمُونَ ٱلۡيَتِيمَ وَلَا تَحُضُّونَ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلۡمِسۡكِينِ وَتَأۡكُلُونَ ٱلتُّرَاثَ أَكۡلٗا لَّمّٗا وَتُحِبُّونَ ٱلۡمَالَ حُبّٗا جَمّٗا كَلَّاۖ

89:22–23

जब धरती कूट-कूटकर समतल कर दी जाएगी, और तुम्हारा अभिभावक आएगा, और अभिकर्ता भी, पंक्ति-पंक्ति, और उस दिन जहन्नम लाई जाएगी... उस दिन मनुष्य स्मरण करेगा। परंतु उस स्मरण से उसे क्या लाभ?

إِذَا دُكَّتِ ٱلۡأَرۡضُ دَكّٗا دَكّٗا وَجَآءَ رَبُّكَ وَٱلۡمَلَكُ صَفّٗا صَفّٗا وَجِاْيٓءَ يَوۡمَئِذِۭ بِجَهَنَّمَ يَوۡمَئِذٖ يَتَذَكَّرُ ٱلۡإِنسَٰنُ وَأَنَّىٰ لَهُ ٱلذِّكۡرَىٰ

वह कहेगा: “अफ़सोस! काश मैंने अपने जीवन के लिए आगे बढ़ाया होता!”

يَقُولُ يَٰلَيۡتَنِي قَدَّمۡتُ لِحَيَاتِي

89:25–26

उस दिन कोई उसके दंड जैसा दंडित नहीं किया जाएगा, और कोई उसके बंधन जैसा बाँधा नहीं जाएगा।

فَيَوۡمَئِذٖ لَّا يُعَذِّبُ عَذَابَهُۥ أَحَدٞ وَلَا يُوثِقُ وَثَاقَهُۥ أَحَدٞ

89:27–30

हे निश्चिंतता में रहने वाले स्व! अपने अभिभावक की ओर लौटो, संतुष्ट और स्वीकृत होकर। तो मेरे आज्ञाकारियों में प्रवेश करो, और मेरे उद्यान में प्रवेश करो!

يَٰأَيَّتُهَا ٱلنَّفۡسُ ٱلۡمُطۡمَئِنَّةُ ٱرۡجِعِي إِلَىٰ رَبِّكِ رَاضِيَةٗ مَّرۡضِيَّةٗ فَٱدۡخُلِي فِي عِبَٰدِي وَٱدۡخُلِي جَنَّتِي

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