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القرآن

الحديد

Al-Hadid

The Iron and the Balance

अध्याय 57 · 29 पद

57:1

ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है। जो कुछ आकाशों और धरती में है, उसने ईश्वर की महिमा गाई।

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ

57:1

और वह सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान है।

وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ

आकाशों और धरती का राजत्व उसी का है; वह जीवन देता है और मृत्यु देता है।

لَهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ يُحۡيِۦ وَيُمِيتُۖ

और वह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ

57:3

वह प्रथम और अंतिम है, सामने वाला और भीतर वाला।

هُوَ ٱلۡأَوَّلُ وَٱلۡأٓخِرُ وَٱلظَّٰهِرُ وَٱلۡبَاطِنُۖ

और वह हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।

وَهُوَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٌ

57:4

वही है जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में रचा, फिर भवन पर स्थित हुआ।

هُوَ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٖ ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰ عَلَى ٱلۡعَرۡشِۖ

वह जानता है जो धरती में प्रवेश करता है और जो उससे निकलता है, जो आकाश से उतरता है और जो उसमें चढ़ता है।

يَعۡلَمُ مَا يَلِجُ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَمَا يَخۡرُجُ مِنۡهَا وَمَا يَنزِلُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ وَمَا يَعۡرُجُ فِيهَاۖ

और वह तुम्हारे साथ है, तुम जहाँ कहीं भी हो।

وَهُوَ مَعَكُمۡ أَيۡنَ مَا كُنتُمۡۚ

और ईश्वर तुम जो करते हो उस पर दृष्टि रखता है।

وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٞ

आकाशों और धरती का राजत्व उसी का है।

لَّهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ

और ईश्वर की ओर ही सारे मामले लौटते हैं।

وَإِلَى ٱللَّهِ تُرۡجَعُ ٱلۡأُمُورُ

वह रात को दिन में प्रवेश कराता है, और दिन को रात में प्रवेश कराता है।

يُولِجُ ٱلَّيۡلَ فِي ٱلنَّهَارِ وَيُولِجُ ٱلنَّهَارَ فِي ٱلَّيۡلِۚ

और वह सीनों के भीतर जो है उसके विषय में सर्वज्ञ है।

وَهُوَ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ

ईश्वर और उसके संदेशवाहक पर विश्वास करो, और उसमें से ख़र्च करो जिसका उसने तुम्हें न्यासी बनाया है।

ءَامِنُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَأَنفِقُواْ مِمَّا جَعَلَكُم مُّسۡتَخۡلَفِينَ فِيهِۖ

तुममें से जिन्होंने विश्वास किया और ख़र्च किया, उनके लिए एक बड़ा पुरस्कार है।

فَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنكُمۡ وَأَنفَقُواْ لَهُمۡ أَجۡرٞ كَبِيرٞ

57:8

तुम्हें क्या हुआ है कि तुम ईश्वर पर विश्वास नहीं करते, जबकि संदेशवाहक तुम्हें अपने अभिभावक पर विश्वास करने के लिए बुला रहा है, और वह तुमसे गंभीर प्रतिज्ञा ले चुका है, यदि तुम विश्वास करने वाले हो?

وَمَا لَكُمۡ لَا تُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلرَّسُولُ يَدۡعُوكُمۡ لِتُؤۡمِنُواْ بِرَبِّكُمۡ وَقَدۡ أَخَذَ مِيثَٰقَكُمۡ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ

57:9

वही है जो अपने आज्ञाकारी पर स्पष्ट संकेत उतारता है, ताकि तुम्हें अँधेरों से प्रकाश की ओर निकाले।

هُوَ ٱلَّذِي يُنَزِّلُ عَلَىٰ عَبۡدِهِۦٓ ءَايَٰتِۭ بَيِّنَٰتٖ لِّيُخۡرِجَكُم مِّنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِۚ

57:9

और ईश्वर अवश्य तुम्हारे प्रति करुणामय, दयालु है।

وَإِنَّ ٱللَّهَ بِكُمۡ لَرَؤُفٞ رَّحِيمٞ

और तुम्हें क्या हुआ है कि तुम ईश्वर की राह में ख़र्च नहीं करते, जबकि आकाशों और धरती की विरासत ईश्वर को मिलती है?

وَمَا لَكُمۡ أَلَّا تُنفِقُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلِلَّهِ مِيرَٰثُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ

57:10

तुममें बराबर नहीं है वह जिसने उद्घाटन से पहले ख़र्च किया और लड़ाई की:

لَا يَسۡتَوِي مِنكُم مَّنۡ أَنفَقَ مِن قَبۡلِ ٱلۡفَتۡحِ وَقَٰتَلَۚ

उनकी श्रेणी उनसे अधिक विशाल है जिन्होंने बाद में ख़र्च किया और लड़ाई की।

أُوْلَٰٓئِكَ أَعۡظَمُ دَرَجَةٗ مِّنَ ٱلَّذِينَ أَنفَقُواْ مِنۢ بَعۡدُ وَقَٰتَلُواْۚ

और सभी से ईश्वर ने सबसे सुंदर का वादा किया है।

وَكُلّٗا وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلۡحُسۡنَىٰۚ

और ईश्वर तुम जो करते हो उसकी पूरी ख़बर रखता है।

وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ

57:11

कौन है जो ईश्वर को एक सुंदर उधार देगा, जिसे वह उसके लिए दुगना कर देगा, और उसके लिए एक उदार पुरस्कार होगा?

مَّن ذَا ٱلَّذِي يُقۡرِضُ ٱللَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗا فَيُضَٰعِفَهُۥ لَهُۥ وَلَهُۥٓ أَجۡرٞ كَرِيمٞ

57:12

जिस दिन तुम विश्वास करने वाले पुरुषों और विश्वास करने वाली स्त्रियों को देखोगे, उनका प्रकाश उनके आगे और उनके दाएँ दौड़ता हुआ।

يَوۡمَ تَرَى ٱلۡمُؤۡمِنِينَ وَٱلۡمُؤۡمِنَٰتِ يَسۡعَىٰ نُورُهُم بَيۡنَ أَيۡدِيهِمۡ وَبِأَيۡمَٰنِهِمۖ

आज तुम्हारे लिए शुभ समाचार: ऐसे उद्यान जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, जिनमें तुम सदा रहोगे।

بُشۡرَىٰكُمُ ٱلۡيَوۡمَ جَنَّٰتٞ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ

यही विशाल विजय है।

ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ

57:13

जिस दिन पाखंडी पुरुष और स्त्रियाँ उनसे जो विश्वास करते हैं कहेंगे: “हमारी प्रतीक्षा करो, कि हम तुम्हारे प्रकाश से कुछ ले लें” — कहा जाएगा: “पीछे लौट जाओ, और कोई प्रकाश खोजो”।

يَوۡمَ يَقُولُ ٱلۡمُنَٰفِقُونَ وَٱلۡمُنَٰفِقَٰتُ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱنظُرُونَا نَقۡتَبِسۡ مِن نُّورِكُمۡ قِيلَ ٱرۡجِعُواْ وَرَآءَكُمۡ فَٱلۡتَمِسُواْ نُورٗاۖ

57:13

तब उनके बीच एक दीवार खड़ी की जाएगी, जिसमें एक द्वार होगा: उसके भीतर दया है, और जो खुला है उस ओर, दंड।

فَضُرِبَ بَيۡنَهُم بِسُورٖ لَّهُۥ بَابُۢ بَاطِنُهُۥ فِيهِ ٱلرَّحۡمَةُ وَظَٰهِرُهُۥ مِن قِبَلِهِ ٱلۡعَذَابُ

वे उन्हें आवाज़ देंगे: “क्या हम तुम्हारे साथ नहीं थे?”

يُنَادُونَهُمۡ أَلَمۡ نَكُن مَّعَكُمۡۖ

वे कहेंगे: “क्यों नहीं, परंतु तुमने स्वयं को परीक्षा में डाला, तुम प्रतीक्षा में रहे, तुमने संदेह किया, और व्यर्थ मनोरथों ने तुम्हें छल लिया, जब तक कि ईश्वर का आदेश न आ गया; और बड़े छलिये ने ईश्वर के विषय में तुम्हें छल लिया।”

قَالُواْ بَلَىٰ وَلَٰكِنَّكُمۡ فَتَنتُمۡ أَنفُسَكُمۡ وَتَرَبَّصۡتُمۡ وَٱرۡتَبۡتُمۡ وَغَرَّتۡكُمُ ٱلۡأَمَانِيُّ حَتَّىٰ جَآءَ أَمۡرُ ٱللَّهِ وَغَرَّكُم بِٱللَّهِ ٱلۡغَرُورُ

57:15

तो आज न तुमसे कोई फिरौती ली जाएगी, और न नकारने वालों से। तुम्हारी शरण आग है, वही तुम्हारा हिमायती है।

فَٱلۡيَوۡمَ لَا يُؤۡخَذُ مِنكُمۡ فِدۡيَةٞ وَلَا مِنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْۚ مَأۡوَىٰكُمُ ٱلنَّارُۖ هِيَ مَوۡلَىٰكُمۡۖ

और कितना भयानक गंतव्य!

وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ

57:16

क्या विश्वास करने वालों के लिए अभी वह समय नहीं आया कि उनके मर्म ईश्वर के स्मरण और सत्य में से जो उतारा गया है उसके सामने विनीत हो जाएँ?

۞ أَلَمۡ يَأۡنِ لِلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَن تَخۡشَعَ قُلُوبُهُمۡ لِذِكۡرِ ٱللَّهِ وَمَا نَزَّلَ مِنَ ٱلۡحَقِّ

57:16

और वे उन जैसे न हों जिन्हें पहले ग्रंथ दिया गया: उनके लिए अंतराल लंबा हो गया, और उनके मर्म कठोर हो गए।

وَلَا يَكُونُواْ كَٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ مِن قَبۡلُ فَطَالَ عَلَيۡهِمُ ٱلۡأَمَدُ فَقَسَتۡ قُلُوبُهُمۡۖ

57:16

और उनमें से बहुत-से अतिक्रमणकारी हैं।

وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ فَٰسِقُونَ

जान लो कि ईश्वर धरती को उसकी मृत्यु के बाद पुनः जीवन देता है।

ٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ يُحۡيِ ٱلۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَاۚ

हमने तुम्हारे लिए संकेत पहले ही स्पष्ट कर दिए हैं, शायद तुम बुद्धि से काम लो।

قَدۡ بَيَّنَّا لَكُمُ ٱلۡأٓيَٰتِ لَعَلَّكُمۡ تَعۡقِلُونَ

57:18

निश्चय ही, दान करने वाले पुरुष और स्त्रियाँ, और जो ईश्वर को सुंदर उधार देते हैं, उनके लिए वह दुगना किया जाएगा, और उनके लिए एक उदार पुरस्कार होगा।

إِنَّ ٱلۡمُصَدِّقِينَ وَٱلۡمُصَدِّقَٰتِ وَأَقۡرَضُواْ ٱللَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗا يُضَٰعَفُ لَهُمۡ وَلَهُمۡ أَجۡرٞ كَرِيمٞ

और जो ईश्वर और उसके संदेशवाहकों पर विश्वास करते हैं, वही सच्चे हैं।

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦٓ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلصِّدِّيقُونَۖ

और साक्षी, अपने अभिभावक के पास।

وَٱلشُّهَدَآءُ عِندَ رَبِّهِمۡ

57:19

उनके लिए उनका पुरस्कार और उनका प्रकाश है।

لَهُمۡ أَجۡرُهُمۡ وَنُورُهُمۡۖ

57:19

और जिन्होंने नकारा और हमारे संकेतों को झुठलाया — वही भट्ठी वाले हैं।

وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَآ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَحِيمِ

57:20

जान लो कि इहलोक का जीवन केवल खेल, बहलाव, शृंगार, तुम्हारे बीच डींग, और संपत्ति और बच्चों में बढ़-चढ़कर जमा करने की होड़ है — एक त्राणदायी वर्षा की तरह, जिसकी वनस्पति बोने वालों को चकाचौंध कर देती है, फिर वह सूख जाती है, और तुम उसे पीली पड़ी देखते हो, फिर वह टुकड़े बन जाती है।

ٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّمَا ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا لَعِبٞ وَلَهۡوٞ وَزِينَةٞ وَتَفَاخُرُۢ بَيۡنَكُمۡ وَتَكَاثُرٞ فِي ٱلۡأَمۡوَٰلِ وَٱلۡأَوۡلَٰدِۖ كَمَثَلِ غَيۡثٍ أَعۡجَبَ ٱلۡكُفَّارَ نَبَاتُهُۥ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَرَىٰهُ مُصۡفَرّٗا ثُمَّ يَكُونُ حُطَٰمٗاۖ

57:20

और अंतिम जीवन में कठोर दंड है, और ईश्वर की ओर से क्षमा और प्रसन्नता।

وَفِي ٱلۡأٓخِرَةِ عَذَابٞ شَدِيدٞ وَمَغۡفِرَةٞ مِّنَ ٱللَّهِ وَرُضۡوَٰنٞۚ

और इहलोक का जीवन केवल एक छलने वाला उपभोग है।

وَمَا ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَآ إِلَّا مَتَٰعُ ٱلۡغُرُورِ

अपने अभिभावक की क्षमा की ओर एक-दूसरे से आगे निकलो, और एक ऐसे उद्यान की ओर जिसका विस्तार आकाश और धरती के विस्तार जैसा है, जो उनके लिए तैयार किया गया है जो ईश्वर और उसके संदेशवाहकों पर विश्वास करते हैं।

سَابِقُوٓاْ إِلَىٰ مَغۡفِرَةٖ مِّن رَّبِّكُمۡ وَجَنَّةٍ عَرۡضُهَا كَعَرۡضِ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ أُعِدَّتۡ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦۚ

यही ईश्वर का अनुग्रह है, जिसे वह उसे सौंपता है जिस पर उसकी मर्ज़ी हो।

ذَٰلِكَ فَضۡلُ ٱللَّهِ يُؤۡتِيهِ مَن يَشَآءُۚ

57:21

और ईश्वर विशाल अनुग्रह वाला है।

وَٱللَّهُ ذُو ٱلۡفَضۡلِ ٱلۡعَظِيمِ

57:22

धरती पर या स्वयं तुम पर कोई विपत्ति नहीं आती, जो हमारे उसे चुकाने से पहले ही एक बही में न हो।

مَآ أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا فِيٓ أَنفُسِكُمۡ إِلَّا فِي كِتَٰبٖ مِّن قَبۡلِ أَن نَّبۡرَأَهَآۚ

57:23

यह निश्चय ही ईश्वर के लिए सरल है — ताकि तुम उस पर शोक न करो जो तुम्हें छोड़ जाए, और न उस पर हर्षित हो जो तुम्हारे पास आए।

إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٞ لِّكَيۡلَا تَأۡسَوۡاْ عَلَىٰ مَا فَاتَكُمۡ وَلَا تَفۡرَحُواْ بِمَآ ءَاتَىٰكُمۡۗ

और ईश्वर किसी उद्धत डींग हाँकने वाले से प्रेम नहीं करता।

وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخۡتَالٖ فَخُورٍ

जो कंजूस हैं और लोगों को कंजूसी का आदेश देते हैं।

ٱلَّذِينَ يَبۡخَلُونَ وَيَأۡمُرُونَ ٱلنَّاسَ بِٱلۡبُخۡلِۗ

57:24

और जो कोई पीठ फेरे — ईश्वर निश्चय ही धनी, प्रशंसनीय है।

وَمَن يَتَوَلَّ فَإِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡغَنِيُّ ٱلۡحَمِيدُ

57:25

हमने निश्चय ही अपने संदेशवाहकों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा, और उनके साथ ग्रंथ और तराज़ू उतारा, ताकि लोग निष्पक्षता पर डटे रहें।

لَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا رُسُلَنَا بِٱلۡبَيِّنَٰتِ وَأَنزَلۡنَا مَعَهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡمِيزَانَ لِيَقُومَ ٱلنَّاسُ بِٱلۡقِسۡطِۖ

57:25

और हमने लोहा उतारा, जिसमें कठोर प्रचंडता है और लोगों के लिए उपयोगिताएँ हैं।

وَأَنزَلۡنَا ٱلۡحَدِيدَ فِيهِ بَأۡسٞ شَدِيدٞ وَمَنَٰفِعُ لِلنَّاسِ

57:25

और ताकि ईश्वर अलग पहचान ले कि कौन उसकी और उसके संदेशवाहकों की सहायता करता है, भले ही वह उसकी इंद्रियों से परे है,

وَلِيَعۡلَمَ ٱللَّهُ مَن يَنصُرُهُۥ وَرُسُلَهُۥ بِٱلۡغَيۡبِۚ

57:25

क्योंकि ईश्वर बलवान, सर्वशक्तिमान है।

إِنَّ ٱللَّهَ قَوِيٌّ عَزِيزٞ

57:26

और हमने निश्चय ही नूह और इब्राहीम को भेजा, और उनकी संतति में सूचना देने का दायित्व और ग्रंथ रखा।

وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا نُوحٗا وَإِبۡرَٰهِيمَ وَجَعَلۡنَا فِي ذُرِّيَّتِهِمَا ٱلنُّبُوَّةَ وَٱلۡكِتَٰبَۖ

उनमें से कुछ मार्गदर्शन पाते हैं,

فَمِنۡهُم مُّهۡتَدٖۖ

57:26

और उनमें से बहुत-से अतिक्रमणकारी हैं।

وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ فَٰسِقُونَ

57:27

फिर हमने उनके पदचिह्नों पर अपने संदेशवाहकों को उत्तरवर्ती बनाया, और मरयम के पुत्र ईसा को उत्तरवर्ती बनाया, और उसे इंजील दी।

ثُمَّ قَفَّيۡنَا عَلَىٰٓ ءَاثَٰرِهِم بِرُسُلِنَا وَقَفَّيۡنَا بِعِيسَى ٱبۡنِ مَرۡيَمَ وَءَاتَيۡنَٰهُ ٱلۡإِنجِيلَۖ

57:27

और हमने उसका अनुसरण करने वालों के मर्मों में करुणा और दया रखी; रही संसार-त्याग की बात, उसे उन्होंने ही गढ़ा — हमने उसे उनके लिए विहित नहीं किया था — सिवा ईश्वर की प्रसन्नता की खोज के।

وَجَعَلۡنَا فِي قُلُوبِ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُ رَأۡفَةٗ وَرَحۡمَةٗۚ وَرَهۡبَانِيَّةً ٱبۡتَدَعُوهَا مَا كَتَبۡنَٰهَا عَلَيۡهِمۡ إِلَّا ٱبۡتِغَآءَ رُضۡوَٰنِ ٱللَّهِ

परंतु उन्होंने उसका वैसा ध्यान नहीं रखा जैसा रखना चाहिए था।

فَمَا رَعَوۡهَا حَقَّ رِعَايَتِهَاۖ

उनमें से जो विश्वास करते थे, उन्हें हमने उनका पुरस्कार दिया।

فَـَٔاتَيۡنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنۡهُمۡ أَجۡرَهُمۡۖ

57:27

और उनमें से बहुत-से अतिक्रमणकारी हैं।

وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ فَٰسِقُونَ

57:28

हे विश्वास करने वालो! ईश्वर के प्रति सावधान रहो और उसके संदेशवाहक पर विश्वास करो: वह तुम्हें अपनी दया का दोहरा भाग देगा, वह तुम्हें एक प्रकाश सौंपेगा जिससे तुम चलोगे, और वह तुम्हें क्षमा करेगा।

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَءَامِنُواْ بِرَسُولِهِۦ يُؤۡتِكُمۡ كِفۡلَيۡنِ مِن رَّحۡمَتِهِۦ وَيَجۡعَل لَّكُمۡ نُورٗا تَمۡشُونَ بِهِۦ وَيَغۡفِرۡ لَكُمۡۚ

57:29

और ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, दयालु है — ताकि ग्रंथ वाले जान लें कि ईश्वर के अनुग्रह की किसी भी चीज़ पर उनका कोई नियंत्रण नहीं, और कि अनुग्रह ईश्वर के हाथ में है, जिसे वह उसे देता है जिस पर उसकी मर्ज़ी हो।

وَٱللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ لِّئَلَّا يَعۡلَمَ أَهۡلُ ٱلۡكِتَٰبِ أَلَّا يَقۡدِرُونَ عَلَىٰ شَيۡءٖ مِّن فَضۡلِ ٱللَّهِ وَأَنَّ ٱلۡفَضۡلَ بِيَدِ ٱللَّهِ يُؤۡتِيهِ مَن يَشَآءُۚ

और ईश्वर विशाल अनुग्रह वाला है।

وَٱللَّهُ ذُو ٱلۡفَضۡلِ ٱلۡعَظِيمِ

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