الجن
Al-Jinn
The Occulted
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
कहो: “मुझ पर प्रकट किया गया है कि प्रच्छन्नों के एक समूह ने सुना, और उन्होंने कहा: हमने एक अद्भुत पाठ सुना, जो सुबुद्धि की ओर मार्ग दिखाता है; इसलिए हमने उस पर विश्वास किया, और हम अब कभी अपने अभिभावक के साथ किसी को साझी नहीं ठहराएँगे।
قُلْ أُوحِىَ إِلَىَّ أَنَّهُ ٱسْتَمَعَ نَفَرٌۭ مِّنَ ٱلْجِنِّ فَقَالُوٓا۟ إِنَّا سَمِعْنَا قُرْءَانًا عَجَبًۭا يَهْدِىٓ إِلَى ٱلرُّشْدِ فَـَٔامَنَّا بِهِۦ وَلَن نُّشْرِكَ بِرَبِّنَآ أَحَدًۭا
और हमारे अभिभावक की भव्यता ऊँची है: उसने न कोई संगिनी अपनाई और न कोई संतान।
وَأَنَّهُۥ تَعَٰلَىٰ جَدُّ رَبِّنَا مَا ٱتَّخَذَ صَٰحِبَةًۭ وَلَا وَلَدًۭا
और हममें का नासमझ ईश्वर के विरुद्ध अतिशय कथन कहता था।
وَأَنَّهُۥ كَانَ يَقُولُ سَفِيهُنَا عَلَى ٱللَّهِ شَطَطًۭا
और हम अनुमान लगाते थे कि न मनुष्य और न प्रच्छन्न कभी ईश्वर के विरुद्ध झूठ बोलेंगे।
وَأَنَّا ظَنَنَّآ أَن لَّن تَقُولَ ٱلْإِنسُ وَٱلْجِنُّ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًۭا
और मनुष्यों में कुछ पुरुष थे जो प्रच्छन्नों में से कुछ पुरुषों की छत्रछाया चाहते थे, और इससे उनकी कुचलन ही बढ़ी।
وَأَنَّهُۥ كَانَ رِجَالٌۭ مِّنَ ٱلْإِنسِ يَعُوذُونَ بِرِجَالٍۢ مِّنَ ٱلْجِنِّ فَزَادُوهُمْ رَهَقًۭا
और उन्होंने भी अनुमान लगाया था, जैसे तुमने अनुमान लगाया था, कि ईश्वर कभी किसी को नहीं उठाएगा।
وَأَنَّهُمْ ظَنُّوا۟ كَمَا ظَنَنتُمْ أَن لَّن يَبْعَثَ ٱللَّهُ أَحَدًۭا
और हमने आकाश को छुआ, और उसे कड़े पहरे और ज्वलंत प्रक्षेप्यों से भरा पाया।
وَأَنَّا لَمَسْنَا ٱلسَّمَآءَ فَوَجَدْنَٰهَا مُلِئَتْ حَرَسًۭا شَدِيدًۭا وَشُهُبًۭا
और हम वहाँ सुनने के लिए चौकियों पर बैठते थे; परंतु अब जो कोई सुनने का प्रयास करता है वह अपने विरुद्ध घात में लगा एक ज्वलंत प्रक्षेप्य पाता है।
وَأَنَّا كُنَّا نَقْعُدُ مِنْهَا مَقَٰعِدَ لِلسَّمْعِ فَمَن يَسْتَمِعِ ٱلْءَانَ يَجِدْ لَهُۥ شِهَابًۭا رَّصَدًۭا
और हमें अंदाज़ा नहीं कि जो धरती पर हैं उनके लिए बुराई चाही गई है, या उनका अभिभावक उनके लिए सुबुद्धि चाहता है।
وَأَنَّا لَا نَدْرِىٓ أَشَرٌّ أُرِيدَ بِمَن فِى ٱلْأَرْضِ أَمْ أَرَادَ بِهِمْ رَبُّهُمْ رَشَدًۭا
और हममें भले हैं, और हममें वे हैं जो उतने भले नहीं:
وَأَنَّا مِنَّا ٱلصَّٰلِحُونَ وَمِنَّا دُونَ ذَٰلِكَ
हम बिखरी हुई आचरण-रेखाओं में बँटे हुए थे।
كُنَّا طَرَآئِقَ قِدَدًۭا
और हमने अनुमान लगाया था कि हम धरती पर ईश्वर को कभी असमर्थ नहीं कर सकेंगे, और न भागकर उसे असमर्थ कर सकेंगे।
وَأَنَّا ظَنَنَّآ أَن لَّن نُّعْجِزَ ٱللَّهَ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَن نُّعْجِزَهُۥ هَرَبًۭا
और जब हमने मार्गदर्शन सुना, तो हमने उस पर विश्वास किया;
وَأَنَّا لَمَّا سَمِعْنَا ٱلْهُدَىٰٓ ءَامَنَّا بِهِۦ
जो कोई अपने अभिभावक पर विश्वास करता है उसे फिर न हानि पहुँचाए जाने का डर है और न कुचले जाने का।
فَمَن يُؤْمِنۢ بِرَبِّهِۦ فَلَا يَخَافُ بَخْسًۭا وَلَا رَهَقًۭا
और हममें ईश्वर के प्रति खरे हैं, और हममें भ्रष्ट हैं:
وَأَنَّا مِنَّا ٱلْمُسْلِمُونَ وَمِنَّا ٱلْقَٰسِطُونَ
जो कोई ईश्वर के प्रति खरा हुआ, वही हैं जिन्होंने सुबुद्धि खोजी,
فَمَنْ أَسْلَمَ فَأُو۟لَٰٓئِكَ تَحَرَّوْا۟ رَشَدًۭا
और रही बात भ्रष्टों की, तो वे जहन्नम की लकड़ी बन गए।
وَأَمَّا ٱلْقَٰسِطُونَ فَكَانُوا۟ لِجَهَنَّمَ حَطَبًۭا
और यह कि यदि वे आचरण-रेखा पर सीधे खड़े रहते, तो हम उन्हें भरपूर पानी पिलाते, ताकि उसके द्वारा उन्हें परीक्षा में डालें।
وَأَلَّوِ ٱسْتَقَٰمُوا۟ عَلَى ٱلطَّرِيقَةِ لَأَسْقَيْنَٰهُم مَّآءً غَدَقًۭا لِّنَفْتِنَهُمْ فِيهِ
और जो कोई अपने अभिभावक के स्मरण से कतराता है, हम उसे ऐसे दंड में डालते हैं जो चढ़ता ही जाता है।
وَمَن يُعْرِضْ عَن ذِكْرِ رَبِّهِۦ يَسْلُكْهُ عَذَابًۭا صَعَدًۭا
और यह कि माथा टेकने के स्थान ईश्वर के हैं: तो ईश्वर के साथ किसी को मत पुकारो।
وَأَنَّ ٱلْمَسَٰجِدَ لِلَّهِ فَلَا تَدْعُوا۟ مَعَ ٱللَّهِ أَحَدًۭا
और यह कि जब ईश्वर का आज्ञाकारी उसे पुकारने के लिए खड़ा हुआ, तो वे उस पर घनी भीड़ बनकर लगभग टूट पड़े।”
وَأَنَّهُۥ لَمَّا قَامَ عَبْدُ ٱللَّهِ يَدْعُوهُ كَادُوا۟ يَكُونُونَ عَلَيْهِ لِبَدًۭا
कहो: “मैं केवल अपने अभिभावक को पुकारता हूँ, और उसके साथ किसी को साझी नहीं ठहराता।”
قُلْ إِنَّمَآ أَدْعُوا۟ رَبِّى وَلَآ أُشْرِكُ بِهِۦٓ أَحَدًۭا
कहो: “मैं तुम्हारे लिए न हानि का मालिक हूँ और न सुबुद्धि का।”
قُلْ إِنِّى لَآ أَمْلِكُ لَكُمْ ضَرًّۭا وَلَا رَشَدًۭا
कहो: “ईश्वर से कोई मुझे शरण नहीं दे सकता, और उसके अतिरिक्त मुझे कोई ठौर नहीं मिलेगा — सिवा ईश्वर की ओर से संप्रेषण के और उसके संदेशों के।
قُلْ إِنِّى لَن يُجِيرَنِى مِنَ ٱللَّهِ أَحَدٌۭ وَلَنْ أَجِدَ مِن دُونِهِۦ مُلْتَحَدًا إِلَّا بَلَٰغًۭا مِّنَ ٱللَّهِ وَرِسَٰلَٰتِهِۦ
और जो कोई ईश्वर और उसके संदेशवाहक की अवज्ञा करता है, उसके लिए निश्चय ही जहन्नम की आग है, जिसमें वह सदा, चिरकाल तक रहेगा।”
وَمَن يَعْصِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ فَإِنَّ لَهُۥ نَارَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًا
यहाँ तक कि जब वे उसे देखेंगे जिसका उनसे वादा किया गया है, तो वे जान लेंगे कि सहायता में सबसे कमज़ोर और संख्या में सबसे कम कौन है।
حَتَّىٰٓ إِذَا رَأَوْا۟ مَا يُوعَدُونَ فَسَيَعْلَمُونَ مَنْ أَضْعَفُ نَاصِرًۭا وَأَقَلُّ عَدَدًۭا
कहो: “मुझे अंदाज़ा नहीं कि जिसका तुमसे वादा किया गया है वह निकट है, या मेरा अभिभावक उसके लिए कोई अंतराल तय करेगा।”
قُلْ إِنْ أَدْرِىٓ أَقَرِيبٌۭ مَّا تُوعَدُونَ أَمْ يَجْعَلُ لَهُۥ رَبِّىٓ أَمَدًا
वह जो उसे जानता है जो इंद्रियों से परे है, और वह उसमें से कुछ भी किसी के लिए खुला नहीं रखता, सिवा उस संदेशवाहक के जिसे उसने पसंद किया; फिर वह उसके आगे और पीछे पहरेदार लगा देता है, ताकि जान ले कि उन्होंने अपने अभिभावक के संदेश ठीक से पहुँचा दिए हैं; वह उनके पास जो कुछ है उसे घेरे रखता है और हर चीज़ को ठीक-ठीक गिनता है।
عَٰلِمُ ٱلْغَيْبِ فَلَا يُظْهِرُ عَلَىٰ غَيْبِهِۦٓ أَحَدًا إِلَّا مَنِ ٱرْتَضَىٰ مِن رَّسُولٍۢ فَإِنَّهُۥ يَسْلُكُ مِنۢ بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِۦ رَصَدًۭا لِّيَعْلَمَ أَن قَدْ أَبْلَغُوا۟ رِسَٰلَٰتِ رَبِّهِمْ وَأَحَاطَ بِمَا لَدَيْهِمْ وَأَحْصَىٰ كُلَّ شَىْءٍ عَدَدًۢا