Ash-Shura الشورى
Uphold the Law أقيموا الدين
The section and its links
Facing those who contest it, then the messenger's community (40-46, then 47-49)
Read the section from its beginning: sura 40
Read with: the suras of the same shelf mark
- 39 Devoting the Law exclusively to Himthe threshold: the Law devoted to God alone
- 40 My Guardian Is Godthose who argue; the believing man of Fir'awn's clan
- 41 Their Skins Will Testifythose who turn away; the Aad and the Thamud
- 43 In their footstepsthe footsteps of the fathers, and appearances
- 44 In a blessed nightthe blessed night, and the trial
- 45 A legislated waythe signs, and the legislated way
- 46 Not a novelty among the messengersal-Ahqaf: the Aad, the Occulted who listen
بسم الله الرحمن الرحيم
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
حمٓ عٓسٓقٓ (Ḥa Mim ʿAyn Sin Qaf)।
حم عسق
इसी प्रकार ईश्वर, सर्वशक्तिमान, प्रज्ञावान, तुम पर प्रकट करता है — जैसे उन पर जो तुमसे पहले हुए।
كذلك يوحي اليك والي الذين من قبلك الله العزيز الحكيم
आकाशों में जो है और धरती पर जो है, वह उसी का है,
له ما في السموت وما في الارض
और वह परम-उच्च, विशाल है।
وهو العلي العظيم
निकट है कि आकाश ऊपर से फट पड़ें,
تكاد السموت يتفطرن من فوقهن
जबकि अभिकर्ता अपने अभिभावक की प्रशंसा करते हुए महिमा गाते हैं और धरती पर जो है उसके लिए क्षमा माँगते हैं।
والمليكه يسبحون بحمد ربهم ويستغفرون لمن في الارض
क्या ऐसा नहीं है: ईश्वर, वही निश्चय ही अत्यंत क्षमाशील, दयालु है।
الا ان الله هو الغفور الرحيم
और जो उसके अतिरिक्त हिमायती बनाते हैं, उन पर ईश्वर रक्षक है;
والذين اتخذوا من دونه اوليا الله حفيظ عليهم
और तुम उनके लिए मुख़्तार नहीं हो।
وما انت عليهم بوكيل
इसी प्रकार हमने तुम पर एक त्रुटिहीन पाठ प्रकट किया, ताकि तुम बस्तियों के महानगर को और जो उसके आसपास हैं उन्हें चेतावनी दो, और एकत्र होने के दिन की चेतावनी दो, जिसमें कोई संदेह नहीं:
وكذلك اوحينا اليك قرانا عربيا لتنذر ام القري ومن حولها وتنذر يوم الجمع لا ريب فيه
एक भाग उद्यान में,
فريق في الجنه
और एक भाग दहकते अंगार में।
وفريق في السعير
और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह उन्हें एक ही समुदाय बना देता,
ولو شا الله لجعلهم امه وحده
परंतु वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे अपनी दया में प्रवेश देता है;
ولكن يدخل من يشا في رحمته
और अन्यायियों के लिए न कोई हिमायती है और न कोई सहायता।
والظلمون ما لهم من ولي ولا نصير
या फिर क्या उन्होंने उसके अतिरिक्त हिमायती बना लिए हैं?
ام اتخذوا من دونه اوليا
हिमायती तो ईश्वर ही है,
فالله هو الولي
और वही मृतकों को पुनः जीवन देता है;
وهو يحي الموتي
और वह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।
وهو علي كل شي قدير
और जिस भी चीज़ में तुम मतभेद रखते हो, उसका निर्णय ईश्वर के पास जाता है।
وما اختلفتم فيه من شي فحكمه الي الله
यही ईश्वर है, मेरा अभिभावक;
ذلكم الله ربي
उसी को मैं मुख़्तार बनाता हूँ,
عليه توكلت
और उसी का आसरा लेता हूँ।
واليه انيب
आकाशों और धरती का उद्गम, उसने तुम्हारे लिए तुम्हीं में से जोड़े बनाए, और पशुधन में से भी जोड़े; इसी के द्वारा वह तुम्हें बिखेरता है।
فاطر السموت والارض جعل لكم من انفسكم ازوجا ومن الانعم ازوجا يذروكم فيه
उसके जैसा कुछ भी नहीं,
ليس كمثله شي
और वह सुनने वाला, दृष्टिवान है।
وهو السميع البصير
आकाशों और धरती की ज़िम्मेदारियाँ उसी की हैं;
له مقاليد السموت والارض
वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसके लिए जीविका फैलाता है, और उसे मापता है,
يبسط الرزق لمن يشا ويقدر
क्योंकि वह हर चीज़ के विषय में सर्वज्ञ है।
انه بكل شي عليم
उसने तुम्हारे लिए विधान में वही स्थापित किया जिसकी अनुशंसा उसने नूह को की थी, और जो हमने तुम्हारी ओर प्रकट किया, और जिसकी अनुशंसा हमने इब्राहीम, मूसा और ईसा को की: “विधान को बनाए रखो, और उसके भीतर फूट में मत पड़ो।”
شرع لكم من الدين ما وصي به نوحا والذي اوحينا اليك وما وصينا به ابرهيم وموسي وعيسي ان اقيموا الدين ولا تتفرقوا فيه
जिसकी ओर तुम उन्हें बुलाते हो, वह साझी ठहराने वालों पर भारी पड़ता है।
كبر علي المشركين ما تدعوهم اليه
ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे अपने लिए चुन लेता है, और जो उसका आसरा लेता है उसे अपनी ओर मार्ग दिखाता है।
الله يجتبي اليه من يشا ويهدي اليه من ينيب
और वे ज्ञान आ जाने के बाद ही आपस में फूट में पड़े,
وما تفرقوا الا من بعد ما جاهم العلم
आपस की ज़्यादती के कारण।
بغيا بينهم
और यदि नामित अवधि तक के लिए तुम्हारे अभिभावक का पहले का बोल न होता, तो उनके बीच फ़ैसला कर दिया गया होता।
ولولا كلمه سبقت من ربك الي اجل مسمي لقضي بينهم
और जिन्हें उनके बाद ग्रंथ विरासत में मिला, वे उसके विषय में अवश्य व्याकुल करने वाली दुविधा में हैं।
وان الذين اورثوا الكتب من بعدهم لفي شك منه مريب
इसलिए बुलाओ और जैसा तुम्हें आदेश दिया गया है वैसे सीधे डटे रहो, और उनकी भावनाओं का अनुसरण मत करो।
فلذلك فادع واستقم كما امرت ولا تتبع اهواهم
और कहो: “मैं हर उस ग्रंथ पर विश्वास करता हूँ जिसे ईश्वर ने उतारा है, और मुझे तुम्हारे बीच न्यायी होने का आदेश दिया गया है।
وقل امنت بما انزل الله من كتب وامرت لاعدل بينكم
ईश्वर हमारा अभिभावक है और तुम्हारा अभिभावक है;
الله ربنا وربكم
हमारे लिए हमारे कर्म, तुम्हारे लिए तुम्हारे;
لنا اعملنا ولكم اعملكم
हमारे और तुम्हारे बीच कोई तर्क नहीं;
لا حجه بيننا وبينكم
ईश्वर हमें एकत्र करेगा,
الله يجمع بيننا
और उसी की ओर गंतव्य है।”
واليه المصير
और जो ईश्वर के विषय में विवाद करते हैं, उसे उत्तर दिए जाने के बाद, उनका तर्क उनके अभिभावक के पास व्यर्थ है, और उन पर क्रोध है,
والذين يحاجون في الله من بعد ما استجيب له حجتهم داحضه عند ربهم وعليهم غضب
और उनके लिए कठोर दंड है।
ولهم عذاب شديد
ईश्वर ही है जिसने सत्य को वहन करने वाला ग्रंथ उतारा, और तराज़ू भी।
الله الذي انزل الكتب بالحق والميزان
और तुम्हें इसका क्या अंदाज़ा दिलाए?
وما يدريك
हो सकता है कि वह घड़ी निकट हो।
لعل الساعه قريب
जो इसमें विश्वास नहीं करते वे इसे जल्दी माँगते हैं,
يستعجل بها الذين لا يومنون بها
जबकि जिन्होंने विश्वास किया वे उससे आशंका से भरे हैं और जानते हैं कि वह सत्य है।
والذين امنوا مشفقون منها ويعلمون انها الحق
क्या ऐसा नहीं है: जो घड़ी के विषय में वाद-प्रतिवाद करते हैं वे अवश्य दूर के भटकाव में हैं।
الا ان الذين يمارون في الساعه لفي ضلل بعيد
ईश्वर अपने आज्ञाकारियों के प्रति सूक्ष्म है;
الله لطيف بعباده
वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे जीविका देता है,
يرزق من يشا
और वही बलवान, सर्वशक्तिमान है।
وهو القوي العزيز
जो अंतिम जीवन की खेती चाहता है, हम उसकी खेती बढ़ा देते हैं;
من كان يريد حرث الاخره نزد له في حرثه
और जो निकट जीवन की खेती चाहता है, हम उसे उसमें से एक हिस्सा देते हैं,
ومن كان يريد حرث الدنيا نوته منها
परंतु अंतिम जीवन में उसका कोई अंश नहीं होगा।
وما له في الاخره من نصيب
या फिर क्या उनके ऐसे साझीदार हैं जिन्होंने उनके लिए विधान में वह स्थापित किया जिसकी ईश्वर ने अनुमति नहीं दी?
ام لهم شركوا شرعوا لهم من الدين ما لم ياذن به الله
और पृथक्करण का बोल न होता, तो उनके बीच फ़ैसला कर दिया गया होता;
ولولا كلمه الفصل لقضي بينهم
और अन्यायियों के लिए निश्चय ही पीड़ादायक दंड होगा।
وان الظلمين لهم عذاب اليم
तुम अन्यायियों को उससे आशंकित देखोगे जो उन्होंने कमाया है, जबकि वह उन पर आने वाला है;
تري الظلمين مشفقين مما كسبوا وهو واقع بهم
जबकि जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, वे उद्यानों की पुष्पित वाटिकाओं में होंगे,
والذين امنوا وعملوا الصلحت في روضات الجنات
उनके अभिभावक के पास उनके लिए वह होगा जो उनकी मर्ज़ी हो:
لهم ما يشاون عند ربهم
यही बड़ा अनुग्रह है।
ذلك هو الفضل الكبير
यही है जिसका शुभ समाचार ईश्वर अपने उन आज्ञाकारियों को देता है जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए।
ذلك الذي يبشر الله عباده الذين امنوا وعملوا الصلحت
कहो: “मैं इसके बदले तुमसे कोई पुरस्कार नहीं माँगता, सिवा निकटता में स्नेह के।”
قل لا اسلكم عليه اجرا الا الموده في القربي
और जो कोई भलाई कमाता है, हम उसके लिए उसका सौंदर्य बढ़ा देते हैं;
ومن يقترف حسنه نزد له فيها حسنا
क्योंकि ईश्वर अत्यंत क्षमाशील, अत्यंत कृतज्ञ है।
ان الله غفور شكور
या फिर क्या वे कहेंगे कि उसने ईश्वर पर झूठ गढ़ा है?
ام يقولون افتري علي الله كذبا
और यदि ईश्वर की मर्ज़ी होती, तो वह तुम्हारे मर्म पर मुहर लगा देता;
فان يشا الله يختم علي قلبك
परंतु ईश्वर असत्य को मिटाता है और अपने बोलों से सत्य को सिद्ध करता है,
ويمح الله البطل ويحق الحق بكلمته
क्योंकि वह सीनों के भीतर जो है उसके विषय में सर्वज्ञ है।
انه عليم بذات الصدور
वही है जो अपने आज्ञाकारियों का पश्चात्ताप स्वीकार करता है, बुरे कर्मों से दरगुज़र करता है, और जानता है कि वे क्या करते हैं।
وهو الذي يقبل التوبه عن عباده ويعفوا عن السيات ويعلم ما تفعلون
और वह उन्हें उत्तर देता है जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, और उन्हें अपने अनुग्रह से और अधिक देता है;
ويستجيب الذين امنوا وعملوا الصلحت ويزيدهم من فضله
और जो नकारते हैं उनके लिए कठोर दंड होगा।
والكفرون لهم عذاب شديد
और यदि ईश्वर अपने आज्ञाकारियों के लिए जीविका फैला देता, तो वे धरती पर ज़्यादती करने लगते;
ولو بسط الله الرزق لعباده لبغوا في الارض
परंतु वह जो उसकी मर्ज़ी हो, माप के साथ उतारता है,
ولكن ينزل بقدر ما يشا
क्योंकि वह अपने आज्ञाकारियों के प्रति पूरी ख़बर रखने वाला और दृष्टिवान है।
انه بعباده خبير بصير
वही है जो उनके हिम्मत हार जाने के बाद जीवनदायी वर्षा उतारता है, और अपनी दया फैलाता है;
وهو الذي ينزل الغيث من بعد ما قنطوا وينشر رحمته
और वही हिमायती, प्रशंसनीय है।
وهو الولي الحميد
और उसके संकेतों में से: आकाशों और धरती की रचना, और वे सब चलने-फिरने वाले जिन्हें उसने उनमें छितराया है;
ومن ايته خلق السموت والارض وما بث فيهما من دابه
और जब उसकी मर्ज़ी हो, वह उन्हें एकत्र करने का सामर्थ्य रखता है।
وهو علي جمعهم اذا يشا قدير
और तुम पर जो भी विपत्ति आती है, वह उसी के कारण है जो तुम्हारे हाथों ने कमाया है — और वह बहुत-सी चीज़ों से दरगुज़र करता है।
وما اصبكم من مصيبه فبما كسبت ايديكم ويعفوا عن كثير
तुम धरती पर उसे असमर्थ नहीं कर सकते,
وما انتم بمعجزين في الارض
और ईश्वर के अतिरिक्त तुम्हारे लिए न कोई हिमायती है और न कोई सहायता।
وما لكم من دون الله من ولي ولا نصير
और उसके संकेतों में से: समुद्र में चलने वाली, खड़े किए गए दिशासूचकों जैसी।
ومن ايته الجوار في البحر كالاعلم
यदि उसकी मर्ज़ी हो, तो वह हवा को थाम देता है, और वे उसकी सतह पर निश्चल पड़े रह जाते हैं — इसमें अवश्य हर अत्यंत धैर्यवान, अत्यंत कृतज्ञ के लिए संकेत हैं — या फिर वह उन्हें उनके कमाए के कारण विनाश के हवाले कर देता है, जबकि बहुत-सी चीज़ों से दरगुज़र भी करता है,
ان يشا يسكن الريح فيظللن رواكد علي ظهره ان في ذلك لايت لكل صبار شكور او يوبقهن بما كسبوا ويعف عن كثير
— और ताकि जो हमारे संकेतों के विषय में बहस करते हैं वे जान लें कि उनके लिए कोई पलायन नहीं।
ويعلم الذين يجدلون في ايتنا ما لهم من محيص
जो कुछ तुम्हें दिया गया है वह केवल निकट जीवन का उपभोग है;
فما اوتيتم من شي فمتع الحيوه الدنيا
परंतु जो ईश्वर के पास है वह बेहतर और अधिक टिकाऊ है, उनके लिए जिन्होंने विश्वास किया और जो अपने अभिभावक को मुख़्तार बनाते हैं;
وما عند الله خير وابقي للذين امنوا وعلي ربهم يتوكلون
और उनके लिए जो बड़े अपराधों और निर्लज्जताओं से दूर रहते हैं, और जब वे क्रोधित होते हैं तो क्षमा करते हैं;
والذين يجتنبون كبير الاثم والفوحش واذا ما غضبوا هم يغفرون
और उनके लिए जो अपने अभिभावक को उत्तर देते हैं, संपर्क बनाए रखते हैं, अपने मामलों में आपस में परामर्श करते हैं, और जो हमने उन्हें जीविका दी उसमें से ख़र्च करते हैं;
والذين استجابوا لربهم واقاموا الصلوه وامرهم شوري بينهم ومما رزقنهم ينفقون
और उनके लिए जो, जब उन पर ज़्यादती होती है, अपनी सहायता स्वयं करते हैं।
والذين اذا اصابهم البغي هم ينتصرون
और बुराई का प्रतिफल उसके समकक्ष बुराई है;
وجزوا سييه سييه مثلها
परंतु जो कोई दरगुज़र करे और मेल कर ले, उसका पुरस्कार ईश्वर के ज़िम्मे है,
فمن عفا واصلح فاجره علي الله
क्योंकि वह अन्यायियों से प्रेम नहीं करता।
انه لا يحب الظلمين
और जो कोई अन्याय सहने के बाद अपनी सहायता स्वयं करे, ऐसों के विरुद्ध कोई राह नहीं।
ولمن انتصر بعد ظلمه فاوليك ما عليهم من سبيل
राह केवल उनके विरुद्ध खुली है जो लोगों पर अन्याय करते हैं और बिना हक़ के धरती पर ज़्यादती करते हैं।
انما السبيل علي الذين يظلمون الناس ويبغون في الارض بغير الحق
यही हैं जिनके लिए पीड़ादायक दंड होगा।
اوليك لهم عذاب اليم
और जो कोई धैर्य रखे और क्षमा करे, तो यह अवश्य उन मामलों में से है जिनमें संकल्प चाहिए।
ولمن صبر وغفر ان ذلك لمن عزم الامور
और जिसे ईश्वर भटका दे, उसके लिए उसके बाद कोई हिमायती नहीं रहता।
ومن يضلل الله فما له من ولي من بعده
और तुम अन्यायियों को देखोगे, जब वे दंड देखेंगे, कहते हुए: “क्या वापस लाए जाने का कोई उपाय है?”
وتري الظلمين لما راوا العذاب يقولون هل الي مرد من سبيل
और तुम उन्हें उसके सामने प्रस्तुत किए जाते देखोगे, विनीत,
وتريهم يعرضون عليها خشعين
छिपी हुई पलक के नीचे से नज़र डालते हुए, अपमान के प्रभाव से।
من الذل ينظرون من طرف خفي
और जिन्होंने विश्वास किया वे कहेंगे: “घाटा उठाने वाले निश्चय ही वे हैं जिन्होंने पेशी के दिन अपने स्व और अपने परिवार को घाटे में डाल दिया।”
وقال الذين امنوا ان الخسرين الذين خسروا انفسهم واهليهم يوم القيمه
क्या ऐसा नहीं है: अन्यायी ऐसे दंड में हैं जो बना रहता है।
الا ان الظلمين في عذاب مقيم
ईश्वर के अतिरिक्त उनका कोई हिमायती न होगा जो उनकी सहायता करे।
وما كان لهم من اوليا ينصرونهم من دون الله
और जिसे ईश्वर भटका दे, उसके लिए कोई राह नहीं रहती।
ومن يضلل الله فما له من سبيل
अपने अभिभावक को उत्तर दो, इससे पहले कि ईश्वर की ओर से वह दिन आए जिसे रद्द नहीं किया जा सकता;
استجيبوا لربكم من قبل ان ياتي يوم لا مرد له من الله
उस दिन तुम्हारे लिए पीछे हटने की कोई जगह न होगी,
ما لكم من ملجا يوميذ
और तुम्हारे पास अमान्य ठहराने का कोई उपाय न होगा।
وما لكم من نكير
यदि वे कतरा जाएँ, तो हमने तुम्हें उन पर रक्षक बनाकर नहीं भेजा;
فان اعرضوا فما ارسلنك عليهم حفيظا
तुम पर केवल संप्रेषण का दायित्व है।
ان عليك الا البلغ
और जब हम मनुष्य को अपनी ओर से दया का स्वाद चखाते हैं, तो वह उस पर प्रसन्न होता है;
وانا اذا اذقنا الانسن منا رحمه فرح بها
और यदि उन पर उसके कारण कोई बुराई आ पड़े जो उनके हाथों ने आगे बढ़ाया, तो मनुष्य निश्चय ही अत्यंत नकारने वाला है।
وان تصبهم سييه بما قدمت ايديهم فان الانسن كفور
आकाशों और धरती का राजत्व ईश्वर का ही है;
لله ملك السموت والارض
वह जो उसकी मर्ज़ी हो, रचता है;
يخلق ما يشا
वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे बेटियाँ प्रदान करता है, और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे लड़के प्रदान करता है, या फिर वह उन्हें जोड़ा बना देता है, लड़के और बेटियाँ, और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो, उसे बाँझ कर देता है,
يهب لمن يشا انثا ويهب لمن يشا الذكور او يزوجهم ذكرانا وانثا ويجعل من يشا عقيما
क्योंकि वह सर्वज्ञ, सामर्थ्यवान है।
انه عليم قدير
किसी मानव के लिए उचित नहीं कि ईश्वर उससे बोले, सिवा प्रकटीकरण के, या परदे के पीछे से, या ऐसा संदेशवाहक भेजकर जो उसकी अनुमति से, जो उसकी मर्ज़ी हो, प्रकट करे;
وما كان لبشر ان يكلمه الله الا وحيا او من وراي حجاب او يرسل رسولا فيوحي باذنه ما يشا
वह निश्चय ही परम-उच्च, प्रज्ञावान है।
انه علي حكيم
इसी प्रकार हमने तुम्हारी ओर अपने आदेश से निकला एक प्रवाह प्रकट किया;
وكذلك اوحينا اليك روحا من امرنا
तुम्हें इसका अंदाज़ा न था कि ग्रंथ क्या है, और न ही यह कि विश्वास क्या है, परंतु हमने उसे एक प्रकाश बनाया जिससे हम अपने आज्ञाकारियों में से जिस पर हमारी मर्ज़ी हो, उसे मार्ग दिखाते हैं;
ما كنت تدري ما الكتب ولا الايمن ولكن جعلنه نورا نهدي به من نشا من عبادنا
और तुम अवश्य सीधे पथ की ओर मार्ग दिखाते हो — ईश्वर के पथ की ओर, जिसका वह सब है जो आकाशों में है और जो धरती पर है।
وانك لتهدي الي صرط مستقيم صرط الله الذي له ما في السموت وما في الارض
क्या ऐसा नहीं है: ईश्वर की ओर ही सारे मामले पहुँचते हैं।
الا الي الله تصير الامور