الفجر
Al-Fajr
The Dawn
بسم الله الرحمن الرحيم
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
भोर की शपथ! दस रातों की! मध्यस्थता की, और वंचना की! रात की जब वह बीतती है! क्या इसमें उसके लिए शपथ नहीं जिसके पास अंकुश है?
والفجر وليال عشر والشفع والوتر واليل اذا يسر هل في ذلك قسم لذي حجر
क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे अभिभावक ने आद के साथ कैसा व्यवहार किया, स्तंभों वाले इरम के साथ, जिसके जैसा देशों में कभी रचा नहीं गया था? और समूद के साथ जो घाटी में चट्टान तराशते थे? और फ़िरऔन के साथ, खूँटों वाले मनुष्य के साथ? वे जो देशों में हर मर्यादा से आगे निकल गए थे, और जिन्होंने उनमें बिगाड़ बहुत फैलाया था। तो तुम्हारे अभिभावक ने उन पर दंड का कोड़ा उँडेल दिया।
الم تر كيف فعل ربك بعاد ارم ذات العماد التي لم يخلق مثلها في البلد وثمود الذين جابوا الصخر بالواد وفرعون ذي الاوتاد الذين طغوا في البلد فاكثروا فيها الفساد فصب عليهم ربك سوط عذاب
तुम्हारा अभिभावक अवश्य सदा घात में रहता है।
ان ربك لبالمرصاد
रहा मनुष्य, जब उसका अभिभावक उसे सम्मान देकर और उपकारों से भरकर परखता है, तो वह कहता है: “मेरे अभिभावक ने मुझे सम्मानित किया।”
فاما الانسن اذا ما ابتليه ربه فاكرمه ونعمه فيقول ربي اكرمن
परंतु जब वह उसकी जीविका नापकर उसे परखता है, तो वह कहता है: “मेरे अभिभावक ने मुझे अपमानित किया।” कदापि नहीं!
واما اذا ما ابتليه فقدر عليه رزقه فيقول ربي اهنن كلا
बल्कि तुम अनाथ का सम्मान नहीं करते, और दरिद्र को खिलाने के लिए प्रेरित नहीं करते, और तुम विरासत को क्रूर लालसा से खा जाते हो, और संपत्ति से अतिशय प्रेम करते हो। कदापि नहीं!
بل لا تكرمون اليتيم ولا تحضون علي طعام المسكين وتاكلون التراث اكلا لما وتحبون المال حبا جما كلا
जब धरती कूट-कूटकर समतल कर दी जाएगी, और तुम्हारा अभिभावक आएगा, और अभिकर्ता भी, पंक्ति-पंक्ति, और उस दिन जहन्नम लाई जाएगी... उस दिन मनुष्य स्मरण करेगा। परंतु उस स्मरण से उसे क्या लाभ?
اذا دكت الارض دكا دكا وجا ربك والملك صفا صفا وجاي يوميذ بجهنم يوميذ يتذكر الانسن واني له الذكري
वह कहेगा: “अफ़सोस! काश मैंने अपने जीवन के लिए आगे बढ़ाया होता!”
يقول يليتني قدمت لحياتي
उस दिन कोई उसके दंड जैसा दंडित नहीं किया जाएगा, और कोई उसके बंधन जैसा बाँधा नहीं जाएगा।
فيوميذ لا يعذب عذابه احد ولا يوثق وثاقه احد
हे निश्चिंतता में रहने वाले स्व! अपने अभिभावक की ओर लौटो, संतुष्ट और स्वीकृत होकर। तो मेरे आज्ञाकारियों में प्रवेश करो, और मेरे उद्यान में प्रवेश करो!
يايتها النفس المطمينه ارجعي الي ربك راضيه مرضيه فادخلي في عبدي وادخلي جنتي