Al-Insan الانسان
The Human Being الإنسان
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“Leave Me” and “be patient”: the messenger facing denial (68, then 69-77)
Read the section from its beginning: sura 68
What was shown before: “Leave Me” and “be patient” come from 68. 68
بسم الله الرحمن الرحيم
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
क्या मनुष्य पर समय का ऐसा कोई दौर बीता है जब वह उल्लेख करने योग्य कुछ भी नहीं था?
هل اتى على الانسن حين من الدهر لم يكن شيا مذكورا
हमने मनुष्य को एक संयुक्त बूँद से रचा, उसे परखने के लिए; इसलिए हमने उसे सुनने वाला और दृष्टिवान बनाया।
انا خلقنا الانسن من نطفة امشاج نبتليه فجعلنه سميعا بصيرا
हमने उसे राह पर मार्ग दिखाया, चाहे वह कृतज्ञ हो या नकारने वाला।
انا هدينه السبيل اما شاكرا واما كفورا
हमने निश्चय ही नकारने वालों के लिए ज़ंजीरें, तौक़ और दहकते अंगार जुटा रखे हैं।
انا اعتدنا للكفرين سلسلا واغللا وسعيرا
सद्गुणी निश्चय ही ऐसे प्याले से पिएँगे जिसका मिश्रण कपूर का है, एक सोता जिससे ईश्वर के आज्ञाकारी पीते हैं, और जिसे वे ज़ोर से बहा निकालते हैं।
ان الابرار يشربون من كاس كان مزاجها كافورا عينا يشرب بها عباد الله يفجرونها تفجيرا
वे अपनी मन्नतों के प्रति निष्ठावान हैं और उस दिन से डरते हैं जिसकी बुराई व्यापक रूप से फैलती है।
يوفون بالنذر ويخافون يوما كان شره مستطيرا
और वे भोजन देते हैं, उसके प्रति अपने प्रेम के होते हुए भी, दरिद्र, अनाथ और क़ैदी को: “हम तुम्हें केवल ईश्वर की दिशा के लिए भोजन कराते हैं,
ويطعمون الطعام على حبه مسكينا ويتيما واسيرا انما نطعمكم لوجه الله
हम तुमसे न प्रतिफल चाहते हैं और न कृतज्ञता।
لا نريد منكم جزاء ولا شكورا
हम अपने अभिभावक से निश्चय ही एक तीखे और अत्यंत कठोर दिन से डरते हैं।”
انا نخاف من ربنا يوما عبوسا قمطريرا
तो ईश्वर ने उन्हें उस दिन की बुराई से बचाया, और उन्हें दमक और उल्लास से मिलवाया।
فوقىهم الله شر ذلك اليوم ولقىهم نضرة وسرورا
और उसने उन्हें उनके धैर्य के बदले एक उद्यान और रेशम का प्रतिफल दिया, वे सजे हुए आसनों पर टेक लगाए हुए, उसमें न धूप देखते न कड़ाके की ठंड; उसकी छायाएँ उन पर निकट हैं, और उसके गुच्छे नम्र किए हुए, भली-भाँति हाथ की पहुँच में।
وجزىهم بما صبروا جنة وحريرا متكين فيها على الارايك لا يرون فيها شمسا ولا زمهريرا ودانية عليهم ظللها وذللت قطوفها تذليلا
और उनके बीच चाँदी के पात्र और स्फटिक जैसे गिलास घुमाए जाएँगे,
ويطاف عليهم بانية من فضة واكواب كانت قواريرا
चाँदी का स्फटिक, जिसकी समाई उन्होंने ठीक-ठीक नापी है।
قواريرا من فضة قدروها تقديرا
और वहाँ उन्हें ऐसे प्याले से पिलाया जाएगा जिसका मिश्रण अदरक का है, एक सोता, वहाँ जिसका नाम सलसबील है।
ويسقون فيها كاسا كان مزاجها زنجبيلا عينا فيها تسمى سلسبيلا
और उनके बीच सदा रहने वाले बनाए गए बच्चे घूमेंगे; उन्हें देखकर तुम उन्हें बिखरे मोती समझोगे।
ويطوف عليهم ولدن مخلدون اذا رايتهم حسبتهم لولوا منثورا
और जब तुम वहाँ देखोगे, तो तुम एक उपकार और एक बड़ा राजत्व देखोगे: उन पर महीन रेशम और ज़री के हरे कपड़े।
واذا رايت ثم رايت نعيما وملكا كبيرا عليهم ثياب سندس خضر واستبرق
और उन्हें चाँदी के कंगन पहनाए गए हैं।
وحلوا اساور من فضة
और उनके अभिभावक ने उन्हें पूर्णतः स्वच्छ करने वाला पेय पिलाया है।
وسقىهم ربهم شرابا طهورا
यह तुम्हारे लिए प्रतिफल रहा है, और तुम्हारे प्रयास को कृतज्ञता के साथ स्वीकार किया गया है।
ان هذا كان لكم جزاء وكان سعيكم مشكورا
हमने ही तुम पर पाठ उतारा है, क्रमिक अवतरण के रूप में।
انا نحن نزلنا عليك القرءان تنزيلا
तो अपने अभिभावक के निर्णय के सामने धैर्य रखो, और उनमें से न अपराधी की बात मानो और न बड़े नकारने वाले की।
فاصبر لحكم ربك ولا تطع منهم ءاثما او كفورا
और भोर और घर लौटते समय अपने अभिभावक के नाम का स्मरण करो।
واذكر اسم ربك بكرة واصيلا
और रात के एक भाग में उसके सामने माथा टेको, और एक लंबी रात उसकी महिमा गाओ।
ومن اليل فاسجد له وسبحه ليلا طويلا
वे तात्कालिक जीवन से प्रेम करते हैं, और अपने से परे एक भारी दिन त्याग देते हैं।
ان هولاء يحبون العاجلة ويذرون وراءهم يوما ثقيلا
हमने ही उन्हें रचा और उनकी बनावट को मज़बूत किया; और जब हमारी मर्ज़ी होगी, तो हम उन्हें पूरी तरह उन्हीं जैसों से बदल देंगे।
نحن خلقنهم وشددنا اسرهم واذا شينا بدلنا امثلهم تبديلا
यह एक स्मरण है।
ان هذه تذكرة
तो जो चाहे वह अपने अभिभावक की ओर एक राह ले ले।
فمن شاء اتخذ الى ربه سبيلا
और तुम तभी चाहोगे जब ईश्वर की मर्ज़ी हो,
وما تشاءون الا ان يشاء الله
क्योंकि ईश्वर सर्वज्ञ, प्रज्ञावान है।
ان الله كان عليما حكيما
वह जिस पर उसकी मर्ज़ी हो उसे अपनी दया में प्रवेश कराता है।
يدخل من يشاء في رحمته
और अन्यायियों के लिए उसने पीड़ादायक दंड तैयार किया है।
والظلمين اعد لهم عذابا اليما