As-Sajda السجدة
Fall down in prostration خروا سجدا
The section and its links
The trial announced, then lived (29-32, then 33-35)
Read the section from its beginning: sura 29
Read with: the suras of the same shelf mark
- 2 Guidance for Those Who Guard Themselvesthe threshold: the Scripture, those who receive it, the law
- 3 The Rope of Godthe twin of 2: the dispute and the combat lived through
- 29 Without being put to the trialthe trial of those who say “We believe”
- 30 The Romansthe signs, and the Law that does not change
- 31 Gave Luqman wisdomwisdom passed on from a father to his son
What was shown before: The example from which this sura draws the application: Moussa facing Fir'awn, in 26 to 28. 26
بسم الله الرحمن الرحيم
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
الٓمٓ (Alif Lam Mim)।
الم
ग्रंथ का अवतरण — कोई संदेह नहीं — सभी प्राणियों के अभिभावक की ओर से है।
تنزيل الكتب لا ريب فيه من رب العلمين
या वे कहेंगे: “उसने इसे गढ़ लिया है”?
ام يقولون افترىه
बल्कि यह तुम्हारे अभिभावक की ओर से सत्य है, ताकि तुम उस क़ौम को चेतावनी दो जिसके पास तुमसे पहले कोई चेतावनी देने वाला नहीं आया था, इस आशा में कि वे मार्गदर्शन पाएँगे।
بل هو الحق من ربك لتنذر قوما ما اتىهم من نذير من قبلك لعلهم يهتدون
ईश्वर वही है जिसने आकाशों और धरती को, और जो उनके बीच है, छह दिनों में रचा, फिर भवन पर स्थित हुआ;
الله الذي خلق السموت والارض وما بينهما في ستة ايام ثم استوى على العرش
उसके अतिरिक्त तुम्हारा न कोई हिमायती है, न कोई मध्यस्थ।
ما لكم من دونه من ولي ولا شفيع
तो क्या तुम स्मरण नहीं करते?
افلا تتذكرون
वह आदेश को आकाश से धरती तक संचालित करता है, फिर वह उसकी ओर ऊपर चढ़ता है एक ऐसे दिन में जिसकी माप तुम्हारी गिनती के हज़ार वर्षों जितनी है।
يدبر الامر من السماء الى الارض ثم يعرج اليه في يوم كان مقداره الف سنة مما تعدون
यही है वह जो उसे जानता है जो इंद्रियों से परे है और जो साक्ष्य में है, सर्वशक्तिमान, दयालु,
ذلك علم الغيب والشهدة العزيز الرحيم
जिसने हर चीज़ की रचना को सुंदर बनाया, और मनुष्य की रचना का आरंभ चिकनी मिट्टी से किया,
الذي احسن كل شىء خلقه وبدا خلق الانسن من طين
फिर उसकी संतति को एक तुच्छ पानी के सार से बनाया,
ثم جعل نسله من سللة من ماء مهين
फिर उसे सँवारा, और उसमें अपने प्रवाह में से कुछ फूँक दिया,
ثم سوىه ونفخ فيه من روحه
और उसने तुम्हारे लिए श्रवण, दृष्टियाँ और चेतनाएँ रखीं —
وجعل لكم السمع والابصر والافدة
तुम कितना कम कृतज्ञ होते हो!
قليلا ما تشكرون
और उन्होंने कहा: “जब हम धरती में भटक जाएँगे, तो क्या हम सचमुच एक नई रचना में होंगे?”
وقالوا اءذا ضللنا في الارض اءنا لفي خلق جديد
बल्कि वे अपने अभिभावक से मिलन को नकारते हैं।
بل هم بلقاء ربهم كفرون
कहो: “मृत्यु का अभिकर्ता, जिसे तुम्हारे लिए मुख़्तार बनाया गया है, तुम्हें निष्ठापूर्वक सँभाल लेगा; फिर तुम अपने अभिभावक की ओर लौटाए जाओगे।”
قل يتوفىكم ملك الموت الذي وكل بكم ثم الى ربكم ترجعون
और यदि तुम देखते, जब बहिष्कृत अपने अभिभावक के सामने सिर झुकाए होंगे: “हमारे अभिभावक, हमने देख लिया और सुन लिया; तो हमें लौटा दीजिए, हम भले कर्म करेंगे, क्योंकि अब हमें यक़ीन है।”
ولو ترى اذ المجرمون ناكسوا رءوسهم عند ربهم ربنا ابصرنا وسمعنا فارجعنا نعمل صلحا انا موقنون
और यदि हमारी मर्ज़ी होती, तो हम हर स्व को उसका मार्गदर्शन दे देते;
ولو شينا لءاتينا كل نفس هدىها
परंतु मेरा कथन सिद्ध हो चुका: “मैं जहन्नम को प्रच्छन्नों और मनुष्यों से, सबको एक साथ मिलाकर, अवश्य भर दूँगा।”
ولكن حق القول مني لاملان جهنم من الجنة والناس اجمعين
तो स्वाद चखो, इसलिए कि तुमने अपने इस दिन के मिलन को भुला दिया — क्योंकि हमने तुम्हें भुला दिया —
فذوقوا بما نسيتم لقاء يومكم هذا انا نسينكم
और जो तुम करते थे उसके बदले शाश्वत दंड का स्वाद चखो।
وذوقوا عذاب الخلد بما كنتم تعملون
हमारे संकेतों पर केवल वही विश्वास करते हैं जो, जब उन्हें उनका स्मरण कराया जाता है, माथा टेके हुए गिर पड़ते हैं और अपने अभिभावक की प्रशंसा के साथ महिमा गाते हैं, घमंड से फूले बिना।
انما يومن بايتنا الذين اذا ذكروا بها خروا سجدا وسبحوا بحمد ربهم وهم لا يستكبرون
उनके पहलू उनके बिछौनों से छूट जाते हैं, वे अपने अभिभावक को डर और आशा से पुकारते हैं, और जो हमने उन्हें जीविका दी है उसमें से ख़र्च करते हैं।
تتجافى جنوبهم عن المضاجع يدعون ربهم خوفا وطمعا ومما رزقنهم ينفقون
और कोई स्व नहीं जानता कि उनके लिए आँखों के ठहराव के रूप में क्या छिपा रखा गया है, उसके प्रतिफल में जो वे करते थे।
فلا تعلم نفس ما اخفي لهم من قرة اعين جزاء بما كانوا يعملون
तो क्या जो विश्वास करने वाला है, उसके समान है जो अतिक्रमणकारी है?
افمن كان مومنا كمن كان فاسقا
वे बराबर नहीं हैं।
لا يستون
और जिन्होंने विश्वास किया और भले कर्म किए, उनके लिए शरण के उद्यान हैं, आतिथ्य के रूप में, उसके बदले जो वे करते थे;
اما الذين ءامنوا وعملوا الصلحت فلهم جنت الماوى نزلا بما كانوا يعملون
और जिन्होंने सीमाओं का अतिक्रमण किया, उनकी शरण आग है:
واما الذين فسقوا فماوىهم النار
जब भी वे उससे निकलना चाहेंगे, वे उसमें वापस डाल दिए जाएँगे, और उनसे कहा जाएगा: “उस आग के दंड का स्वाद चखो जिसे तुम झुठलाते थे।”
كلما ارادوا ان يخرجوا منها اعيدوا فيها وقيل لهم ذوقوا عذاب النار الذي كنتم به تكذبون
और हम उन्हें सबसे बड़े दंड से पहले निकटतम दंड में से अवश्य चखाएँगे, शायद वे लौटें।
ولنذيقنهم من العذاب الادنى دون العذاب الاكبر لعلهم يرجعون
और उससे बढ़कर अन्यायी कौन है जिसे उसके अभिभावक के संकेतों का स्मरण कराया जाए, और फिर वह उनसे कतरा जाए?
ومن اظلم ممن ذكر بايت ربه ثم اعرض عنها
हम बहिष्कृतों से निश्चय ही प्रतिशोध लेंगे।
انا من المجرمين منتقمون
और हमने निश्चय ही मूसा को ग्रंथ दिया —
ولقد ءاتينا موسى الكتب
अतः उसके मिलन के विषय में वाद-प्रतिवाद में मत रहो —
فلا تكن في مرية من لقايه
और हमने उसे इसराईल की संतान के लिए मार्गदर्शन बनाया।
وجعلنه هدى لبني اسرءيل
और हमने उनके बीच ऐसे मार्गदर्शक रखे जो हमारे आदेश से नेतृत्व करते थे, इसलिए कि उन्होंने धैर्य रखा था,
وجعلنا منهم ايمة يهدون بامرنا لما صبروا
और वे हमारे संकेतों के विषय में यक़ीन रखते थे।
وكانوا بايتنا يوقنون
तुम्हारा अभिभावक वही है जो पेशी के दिन उनके बीच उस विषय में अलगाव करेगा जिसमें वे भिन्न मत रखते थे।
ان ربك هو يفصل بينهم يوم القيمة فيما كانوا فيه يختلفون
क्या उन्हें इससे मार्ग नहीं दिखाया जाता कि हमने उनसे पहले कितनी पीढ़ियाँ नष्ट कर दीं, जिनके आवासों में वे चलते हैं?
اولم يهد لهم كم اهلكنا من قبلهم من القرون يمشون في مسكنهم
इसमें अवश्य संकेत हैं।
ان في ذلك لءايت
तो क्या वे सुनते नहीं?
افلا يسمعون
क्या उन्होंने नहीं देखा कि हम पानी को सूखी धरती की ओर ले जाते हैं, और इस प्रकार वह फ़सल निकालते हैं जिसमें से उनका पशुधन और वे स्वयं खाते हैं?
اولم يروا انا نسوق الماء الى الارض الجرز فنخرج به زرعا تاكل منه انعمهم وانفسهم
तो क्या वे स्पष्ट नहीं देखते?
افلا يبصرون
और वे कहते हैं: “यह उद्घाटन कब होगा, यदि तुम सच्चे हो?”
ويقولون متى هذا الفتح ان كنتم صدقين
कहो: “उद्घाटन के दिन, जिन्होंने नकारा उन्हें विश्वास लाभ न देगा, और उन्हें कोई मोहलत न मिलेगी।”
قل يوم الفتح لا ينفع الذين كفروا ايمنهم ولا هم ينظرون
अतः उनसे कतराओ, और प्रतीक्षा करो,
فاعرض عنهم وانتظر
क्योंकि वे प्रतीक्षा में हैं।
انهم منتظرون