Al-Muddaththir المدثر
Arise and warn قم فأنذر
Summary and links in the frieze
In the frieze He receives the command to arise and warn, and sees what awaits the favored man who denies.
Read just before, 75 leads here: This man did not make the Contact; in the next sura, the severed confess: "We were not of those who made the Contact". 75
It leads to 73: "Arise and warn"; the next sura gives the command to arise again, this time to the one wrapped up, for the night. 73
Closes on “By the pen”
بسم الله الرحمن الرحيم
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
हे लबादा पहने हुए! खड़े हो जाओ और चेतावनी दो,
يايها المدثر قم فانذر
और अपने अभिभावक की बड़ाई घोषित करो,
وربك فكبر
और अपने कपड़ों को स्वच्छ करो,
وثيابك فطهر
और मलिनता से दूर रहो,
والرجز فاهجر
और जो तुम देते हो उसे बहुत समझते हुए जताओ मत,
ولا تمنن تستكثر
और अपने अभिभावक के लिए धैर्य रखो।
ولربك فاصبر
फिर जब बिगुल बजाया जाएगा, तो वह दिन एक कठिन दिन होगा, नकारने वालों के लिए बिल्कुल आसान नहीं।
فاذا نقر في الناقور فذلك يوميذ يوم عسير على الكفرين غير يسير
मुझे अकेला उसके साथ छोड़ दो जिसे मैंने रचा, जिसके लिए मैंने फैली हुई संपत्ति बनाई, और साक्षी पुत्र, और जिसके लिए मैंने सब कुछ भरपूर समतल किया — और वह अब भी लालसा रखता है कि मैं और अधिक दूँ! कदापि नहीं!
ذرني ومن خلقت وحيدا وجعلت له مالا ممدودا وبنين شهودا ومهدت له تمهيدا ثم يطمع ان ازيد كلا
वह हमारे संकेतों के प्रति हठी रहा है।
انه كان لءايتنا عنيدا
मैं उसे एक कठोर चढ़ाई से कुचल दूँगा।
سارهقه صعودا
उसने सोच-विचार किया और निर्धारित किया — नष्ट हो उसके निर्धारित करने का ढंग! फिर एक बार, नष्ट हो उसके निर्धारित करने का ढंग! फिर उसने नज़र डाली, फिर उसने त्योरी चढ़ाई और अपना चेहरा कठोर कर लिया, फिर उसने पीठ फेरी और वह घमंड से फूल गया, और उसने कहा: “यह तो बस एक सौंपा हुआ भ्रम है, यह तो बस एक मानव का कथन है।”
انه فكر وقدر فقتل كيف قدر ثم قتل كيف قدر ثم نظر ثم عبس وبسر ثم ادبر واستكبر فقال ان هذا الا سحر يوثر ان هذا الا قول البشر
मैं उसे सक़र में जला दूँगा।
ساصليه سقر
और तुम्हें क्या अंदाज़ा दिलाए कि सक़र क्या है?
وما ادرىك ما سقر
वह न कुछ बाक़ी रहने देती है और न कुछ त्यागती है,
لا تبقي ولا تذر
वह मानवों को आँखों के सामने बदल देती है।
لواحة للبشر
उस पर उन्नीस हैं।
عليها تسعة عشر
हमने आग वालों को केवल अभिकर्ता ही बनाया है,
وما جعلنا اصحب النار الا مليكة
और हमने उनकी संख्या केवल नकारने वालों के लिए एक परीक्षा के रूप में ठहराई है, ताकि जिन्हें ग्रंथ दिया गया वे निश्चितता पाएँ, जो विश्वास करते हैं वे विश्वास में बढ़ जाएँ, जिन्हें ग्रंथ दिया गया और विश्वास करने वाले संदेह न करें, और ताकि जिनके मर्म में रोग है, और नकारने वाले, कहें: “इस उदाहरण से ईश्वर ने क्या चाहा है?”
وما جعلنا عدتهم الا فتنة للذين كفروا ليستيقن الذين اوتوا الكتب ويزداد الذين ءامنوا ايمنا ولا يرتاب الذين اوتوا الكتب والمومنون وليقول الذين في قلوبهم مرض والكفرون ماذا اراد الله بهذا مثلا
इसी प्रकार ईश्वर जिस पर उसकी मर्ज़ी हो उसे भटकाता है और जिस पर उसकी मर्ज़ी हो उसे मार्ग दिखाता है।
كذلك يضل الله من يشاء ويهدي من يشاء
और तुम्हारे अभिभावक की सेनाओं को उसके सिवा कोई नहीं जानता।
وما يعلم جنود ربك الا هو
और यह तो मानवों के लिए केवल एक स्मरण है।
وما هي الا ذكرى للبشر
कदापि नहीं! चंद्रमा की शपथ! रात की शपथ जब वह ढलती है! सुबह की शपथ जब वह उजली होती है! यह अवश्य सबसे बड़ी चीज़ों में से एक है, मानवों के लिए एक चेतावनी, तुममें से उसके लिए जिसकी मर्ज़ी आगे बढ़ने या पीछे हटने की हो।
كلا والقمر واليل اذ ادبر والصبح اذا اسفر انها لاحدى الكبر نذيرا للبشر لمن شاء منكم ان يتقدم او يتاخر
हर स्व अपनी कमाई के बदले गिरवी रखा गया है, सिवा दाएँ वालों के,
كل نفس بما كسبت رهينة الا اصحب اليمين
उद्यानों में, बहिष्कृतों के विषय में एक-दूसरे से पूछते हुए: “तुम्हें सक़र में क्या ले गया?”
في جنت يتساءلون عن المجرمين ما سلككم في سقر
वे कहेंगे: “हम संपर्क जोड़ने वालों में से नहीं थे, और हम दरिद्र को भोजन नहीं कराते थे, और हम डूबने वालों के साथ डूबे रहते थे, और हम चुकौती के दिन को झुठलाते थे, यहाँ तक कि हमारे पास निश्चितता आ गई।”
قالوا لم نك من المصلين ولم نك نطعم المسكين وكنا نخوض مع الخايضين وكنا نكذب بيوم الدين حتى اتىنا اليقين
तब मध्यस्थों की मध्यस्थता उन्हें लाभ नहीं देगी।
فما تنفعهم شفعة الشفعين
उन्हें क्या हुआ है कि वे स्मरण से कतराते हैं, भड़के हुए जंगली गधों की तरह, जो सिंह के सामने से भाग रहे हों?
فما لهم عن التذكرة معرضين كانهم حمر مستنفرة فرت من قسورة
उनमें से हर व्यक्ति चाहता है कि उसे फैलाए गए अभिलेख दिए जाएँ।
بل يريد كل امري منهم ان يوتى صحفا منشرة
कदापि नहीं! बल्कि वे अंतिम जीवन से डरते नहीं।
كلا بل لا يخافون الءاخرة
कदापि नहीं! यह एक स्मरण है।
كلا انه تذكرة
जो चाहे वह इसे याद रखे।
فمن شاء ذكره
और वे इसे तभी याद रखेंगे जब ईश्वर की मर्ज़ी हो।
وما يذكرون الا ان يشاء الله
वही इस योग्य है कि उसके प्रति सावधान रहा जाए, और क्षमा करने योग्य है।
هو اهل التقوى واهل المغفرة