النازعات
An-Nazi'at
Those Who Tear Away
بسم ٱلله ٱلرحمن ٱلرحيم
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
उनकी शपथ जो डूबकर खींच लेती हैं, उनकी जो कोमलता से खोल देती हैं, उनकी जो तैरते हुए तैरती हैं, उनकी जो आगे बढ़ते हुए आगे निकलती हैं, उनकी जो मामले संचालित करती हैं — उस दिन जब पहला कंपन कँपाएगा, और उसके पीछे दूसरा आएगा,
وٱلنزعت غرقا وٱلنشطت نشطا وٱلسبحت سبحا فٱلسبقت سبقا فٱلمدبرت أمرا يوم ترجف ٱلراجفة تتبعها ٱلرادفة
उस दिन कुछ मर्म काँपते होंगे, और उनकी दृष्टियाँ विनीत होंगी।
قلوب يومئذ واجفة أبصرها خشعة
वे कहेंगे: “क्या हम सचमुच अपनी पहली अवस्था में वापस लाए जाएँगे, जब हम गली हुई हड्डियाँ हो चुके होंगे?”
يقولون أءنا لمردودون في ٱلحافرة أءذا كنا عظما نخرة
वे कहेंगे: “तब तो यह घाटे का पलटवार होगा!” जबकि वह केवल एक ही गर्जन होगा, और देखो, वे खड़े हैं, संसार की सतह पर।
قالوا تلك إذا كرة خاسرة فإنما هي زجرة وحدة فإذا هم بٱلساهرة
क्या तुम तक मूसा की वार्ता पहुँची है? जब उसके अभिभावक ने उसे तुवा की पवित्र की हुई घाटी में पुकारा,
هل أتىك حديث موسى إذ نادىه ربه بٱلواد ٱلمقدس طوى
“फ़िरऔन के पास जाओ, वह हर मर्यादा से आगे निकल गया है; उससे कहो: ‘क्या तुम चाहोगे कि तुम शुद्ध हो जाओ, और मैं तुम्हें तुम्हारे अभिभावक की ओर मार्ग दिखाऊँ, ताकि तुम उससे भय रखो?’”
ٱذهب إلى فرعون إنه طغى فقل هل لك إلى أن تزكى وأهديك إلى ربك فتخشى
तब उसने उसे सबसे बड़ा संकेत दिखाया; परंतु उसने झुठलाया और अवज्ञा की, फिर वह पीठ फेरकर प्रयास करता हुआ चला गया, उसने इकट्ठा किया, पुकारा और कहा: “मैं तुम्हारा स्वामी हूँ, सबसे ऊँचा।” तब ईश्वर ने उसे अंतिम जीवन और पहले जीवन के निवारक उदाहरण से पकड़ लिया।
فأرىه ٱلءاية ٱلكبرى فكذب وعصى ثم أدبر يسعى فحشر فنادى فقال أنا ربكم ٱلأعلى فأخذه ٱلله نكال ٱلءاخرة وٱلأولى
इसमें अवश्य उसके लिए एक सीख है जो भय रखता है।
إن في ذلك لعبرة لمن يخشى
क्या तुम्हें रचना अधिक कठिन है, या आकाश?
ءأنتم أشد خلقا أم ٱلسمآء
उसने उसे बनाया, उसकी छत ऊँची की, फिर उसे सँवारा; उसकी रात अँधेरी की और उससे पूर्वाह्न की उजास निकाली।
بنىها رفع سمكها فسوىها وأغطش ليلها وأخرج ضحىها
और धरती को, इसके बाद, उसने प्रस्फुटित किया: उससे उसका पानी और उसका चरागाह निकाला, और पहाड़ों को उसने जमा दिया — तुम्हारे लिए और तुम्हारे पशुधन के लिए उपभोग।
وٱلأرض بعد ذلك دحىهآ أخرج منها مآءها ومرعىها وٱلجبال أرسىها متعا لكم ولأنعمكم
फिर जब वह बड़ा विप्लव आएगा, उस दिन जब मनुष्य स्मरण करेगा कि उसने किसके लिए प्रयास किया था, और भट्ठी उसे दिखाई जाएगी जो देखता है,
فإذا جآءت ٱلطآمة ٱلكبرى يوم يتذكر ٱلإنسن ما سعى وبرزت ٱلجحيم لمن يرى
तो जिसने हर मर्यादा से आगे निकलकर इहलोक के जीवन को चुना, भट्ठी निश्चय ही उसकी शरण होगी;
فأما من طغى وءاثر ٱلحيوة ٱلدنيا فإن ٱلجحيم هي ٱلمأوى
और जो अपने अभिभावक के सामने खड़े होने से डरा, और जिसने स्व को भावना से रोका, उद्यान निश्चय ही उसकी शरण होगा।
وأما من خاف مقام ربه ونهى ٱلنفس عن ٱلهوى فإن ٱلجنة هي ٱلمأوى
वे तुमसे उस घड़ी के विषय में पूछते हैं: वह कब लंगर डालेगी?
يسلونك عن ٱلساعة أيان مرسىها
उसके स्मरण से तुम्हारा क्या लेना-देना?
فيم أنت من ذكرىهآ
तुम्हारे अभिभावक ही की ओर उसकी अंतिम सीमा है।
إلى ربك منتهىهآ
तुम तो केवल उसे चेतावनी देने वाला हो जो उससे भय रखता है।
إنمآ أنت منذر من يخشىها
जिस दिन वे उसे देखेंगे, उन्हें ऐसा लगेगा कि उन्होंने केवल एक संध्या या एक प्रभात बिताया था।
كأنهم يوم يرونها لم يلبثوا إلا عشية أو ضحىها