الانفطار
Al-Infitar
What Deceived You?
بسم ٱلله ٱلرحمن ٱلرحيم
ईश्वर के नाम से, जो सर्वदयालु, दयालु है।
जब आकाश फट जाएगा, और जब तारे बिखर जाएँगे, और जब समुद्र फूट पड़ेंगे, और जब क़ब्रें उलट-पुलट कर दी जाएँगी, तब एक स्व जान लेगा कि उसने क्या आगे बढ़ाया और क्या पीछे डाला।
إذا ٱلسمآء ٱنفطرت وإذا ٱلكواكب ٱنتثرت وإذا ٱلبحار فجرت وإذا ٱلقبور بعثرت علمت نفس ما قدمت وأخرت
हे मनुष्य! तुम्हें तुम्हारे उदार अभिभावक के विषय में किस बात ने छल लिया, जिसने तुम्हें रचा, फिर सँवारा, फिर संतुलित किया? जिस रूप में उसकी मर्ज़ी हुई, उसने तुम्हें जोड़ा।
يأيها ٱلإنسن ما غرك بربك ٱلكريم ٱلذي خلقك فسوىك فعدلك في أى صورة ما شآء ركبك
कदापि नहीं! तुम तो चुकौती को झुठलाते हो, जबकि तुम पर अवश्य रक्षक हैं, सम्मानित लेखक, जो जानते हैं कि तुम क्या करते हो।
كلا بل تكذبون بٱلدين وإن عليكم لحفظين كراما كتبين يعلمون ما تفعلون
अवश्य, सद्गुणी उपकार में होंगे।
إن ٱلأبرار لفي نعيم
और अवश्य, दुराचारी एक भट्ठी में होंगे; वे चुकौती के दिन उसमें जलेंगे, और वे उससे अनुपस्थित न हो सकेंगे।
وإن ٱلفجار لفي جحيم يصلونها يوم ٱلدين وما هم عنها بغآئبين
और तुम्हें क्या अंदाज़ा दिलाए कि चुकौती का दिन क्या है? फिर, तुम्हें क्या अंदाज़ा दिलाए कि चुकौती का दिन क्या है?
ومآ أدرىك ما يوم ٱلدين ثم مآ أدرىك ما يوم ٱلدين
जिस दिन कोई स्व किसी दूसरे स्व के लिए कुछ भी अधिकार में न रखेगा।
يوم لا تملك نفس لنفس شيا
और उस दिन आदेश ईश्वर का है।
وٱلأمر يومئذ لله